CUET 2026 May 21 Shift 1 Hindi Question Paper is available for download here. NTA conducted the CUET 2026 exam from 11th May to 31st May.
- CUET 2026 Hindi exam consists of 50 questions for 250 marks to be attempted in 60 minutes.
- As per the marking scheme, 5 marks are awarded for each correct answer, and 1 mark is deducted for incorrect answer.
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CUET 2026 Hindi May 21 Shift 1 Question Paper with Solution PDF
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गद्यांश:
“आज का युवा वर्ग तकनीक के अत्यधिक प्रयोग में व्यस्त हो गया है। मोबाइल और इंटरनेट ने जीवन को सरल अवश्य बनाया है, परन्तु इसके दुष्प्रभाव भी सामने आ रहे हैं। विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता में कमी, सामाजिक संबंधों में दूरी तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। आवश्यकता इस बात की है कि तकनीक का उपयोग संतुलित रूप से किया जाए।”
Question 1:
गद्यांश में विद्यार्थियों पर तकनीक का क्या प्रभाव बताया गया है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रस्तुत प्रश्न अपठित गद्यांश पर आधारित है।
इस प्रश्न में पूछा गया है कि गद्यांश के अनुसार आधुनिक तकनीक (जैसे मोबाइल और इंटरनेट) का विद्यार्थियों के जीवन और उनके अध्ययन पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की तीसरी पंक्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है: विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता में कमी, सामाजिक संबंधों में दूरी तथा स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं।
आधुनिक तकनीक और मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग के कारण विद्यार्थियों का ध्यान पढ़ाई से भटक रहा है, जिससे उनकी एकाग्रता कम हो रही है और वे लंबे समय तक पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं।
गद्यांश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया गया है कि तकनीक से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है या खेलकूद में रुचि बढ़ी है।
इसके विपरीत, गद्यांश में स्वास्थ्य में सुधार के बजाय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बढ़ने की बात कही गई है।
अतः गद्यांश के प्रत्यक्ष और स्पष्ट साक्ष्य के आधार पर विकल्प (B) 'अध्ययन क्षमता में कमी आई है' पूरी तरह से सही और तार्किक उत्तर है।
Step 4: Final Answer:
गद्यांश के अनुसार विद्यार्थियों पर तकनीक का सबसे नकारात्मक प्रभाव उनकी अध्ययन क्षमता में कमी के रूप में सामने आया है।
Quick Tip: अपठित गद्यांश के प्रश्नों को हल करते समय अपनी ओर से कोई काल्पनिक धारणा न बनाएं।
हमेशा गद्यांश की पंक्तियों में सीधे तौर पर दिए गए वास्तविक तथ्यों को ही सही उत्तर के रूप में चुनें।
गद्यांश के अनुसार तकनीक के अत्यधिक प्रयोग से क्या बढ़ रहा है?
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में गद्यांश के आधार पर तकनीक के अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग के नकारात्मक परिणामों के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की पंक्तियों का सूक्ष्म विश्लेषण करने पर हमें ज्ञात होता है कि तकनीक के अत्यधिक प्रयोग के कई गंभीर दुष्प्रभाव समाज और व्यक्ति पर पड़ रहे हैं।
गद्यांश में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि तकनीक के प्रयोग से ``स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं''।
आधुनिक युग में लगातार स्क्रीन देखने, देर रात तक मोबाइल चलाने और शारीरिक गतिविधियों में कमी आने के कारण युवाओं में आँखों की कमजोरी, अनिद्रा, मोटापा और मानसिक तनाव जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ अत्यधिक बढ़ रही हैं।
अन्य विकल्पों की बात करें तो, तकनीक के अत्यधिक प्रयोग से सामाजिक मेल-जोल बढ़ नहीं रहा बल्कि ``सामाजिक संबंधों में दूरी'' आ रही है।
आर्थिक विकास और रोजगार के अवसरों का गद्यांश में कोई उल्लेख नहीं किया गया है, इसलिए वे इस संदर्भ में अप्रासंगिक हैं।
इसलिए, दिए गए विकल्पों में से विकल्प (C) ही गद्यांश के अनुसार पूर्णतः उपयुक्त और सटीक उत्तर है।
Step 4: Final Answer:
गद्यांश के अनुसार तकनीक के अत्यधिक प्रयोग से मुख्य रूप से स्वास्थ्य संबंधी बीमारियाँ और समस्याएँ बढ़ रही हैं।
Quick Tip: नकारात्मक प्रभावों वाले प्रश्नों को हल करते समय गद्यांश में प्रयुक्त विशिष्ट नकारात्मक शब्दों (जैसे 'दूरी', 'कमी', 'समस्याएँ') पर विशेष ध्यान केंद्रित करें।
विकल्पों को ध्यान से पढ़कर सीधे गद्यांश की मूल भावना से उनका मिलान करें।
लेखक के अनुसार तकनीक का उपयोग किस प्रकार करना चाहिए?
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में लेखक के उस महत्वपूर्ण सुझाव या समाधान को रेखांकित किया गया है जो उन्होंने तकनीक के दुष्प्रभावों से बचने के लिए गद्यांश के अंत में दिया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की अंतिम पंक्ति में लेखक ने बहुत ही महत्वपूर्ण निष्कर्ष प्रस्तुत किया है: ``आवश्यकता इस बात की है कि तकनीक का उपयोग संतुलित रूप से किया जाए।''
लेखक का मानना है कि तकनीक और इंटरनेट पूरी तरह से बुरे नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने ``जीवन को सरल अवश्य बनाया है।''
इसलिए तकनीक का पूर्णतः बहिष्कार करना (जैसा कि विकल्प A में है) या केवल एक वर्ग विशेष द्वारा इसका उपयोग करना तार्किक रूप से उचित नहीं है।
अति किसी भी चीज की बुरी होती है, अतः तकनीक का विवेकपूर्ण, सीमित और समय-सीमा के भीतर (संतुलित) उपयोग करना ही एकमात्र सही मार्ग है।
विकल्प (C) लेखक के इस सकारात्मक और व्यावहारिक विचार को पूरी तरह से अभिव्यक्त करता है, जबकि अन्य विकल्प एकांगी और गद्यांश के प्रतिकूल हैं।
Step 4: Final Answer:
लेखक के अनुसार तकनीक के सकारात्मक लाभ उठाने और दुष्प्रभावों से बचने के लिए इसका उपयोग संतुलित और नियंत्रित रूप से करना चाहिए।
Quick Tip: गद्यांश के अंतिम वाक्य अक्सर लेखक के मुख्य संदेश, नैतिक सीख या निष्कर्ष को दर्शाते हैं।
ऐसे प्रश्नों का उत्तर खोजने के लिए गद्यांश की अंतिम पंक्तियों को हमेशा विशेष रूप से ध्यान से पढ़ना चाहिए।
गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में दिए गए पूरे गद्यांश के केंद्रीय भाव या मूल विषय को समझकर उसके लिए सबसे उपयुक्त और सार्थक शीर्षक का चयन करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
किसी भी गद्यांश का शीर्षक वह होना चाहिए जो गद्यांश के मुख्य विचार और उसमें चर्चा किए गए प्रमुख विषयों को समग्र रूप से समेटता हो।
प्रस्तुत गद्यांश की पहली ही पंक्ति कहती है: ``आज का युवा वर्ग तकनीक के अत्यधिक प्रयोग में व्यस्त हो गया है।''
पूरे गद्यांश में तकनीक (मोबाइल, इंटरनेट) का आज की युवा पीढ़ी और विद्यार्थियों के जीवन, उनकी पढ़ाई, आपसी संबंधों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की ही चर्चा की गई है।
विकल्प (A) 'इंटरनेट का इतिहास' अनुपयुक्त है क्योंकि गद्यांश में इंटरनेट के इतिहास या विकास की कोई चर्चा नहीं है।
विकल्प (C) 'स्वास्थ्य ही धन है' केवल एक आंशिक पहलू को दर्शाता है और विकल्प (D) 'शिक्षा का महत्व' भी गद्यांश का मुख्य विषय नहीं है।
अतः 'तकनीक और युवा' ही इस गद्यांश का सबसे सटीक, संक्षिप्त और संपूर्ण अर्थ को समेटने वाला शीर्षक है।
Step 4: Final Answer:
गद्यांश का केंद्रीय विषय युवा वर्ग पर तकनीक के प्रभाव के इर्द-गिर्द घूमता है, इसलिए इसका सबसे उपयुक्त शीर्षक 'तकनीक और युवा' होगा।
Quick Tip: एक अच्छे और सटीक शीर्षक में संपूर्ण गद्यांश का सार छिपा होना चाहिए।
शीर्षक हमेशा संक्षिप्त, आकर्षक और गद्यांश के मुख्य पात्र या मुख्य विचार से सीधा जुड़ा होना चाहिए।
‘दुष्प्रभाव’ शब्द का अर्थ है—
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न हिंदी व्याकरण और शब्दार्थ पर आधारित है, जिसमें गद्यांश में प्रयुक्त 'दुष्प्रभाव' शब्द का सही अर्थ पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
'दुष्प्रभाव' शब्द दो भागों से मिलकर बना है: 'दुस्' (या दुः) उपसर्ग और 'प्रभाव' मूल शब्द।
हिंदी व्याकरण में 'दुस्' उपसर्ग का प्रयोग 'बुरा', 'कठिन' या 'गलत' के अर्थ में किया जाता है।
इस प्रकार 'दुष्प्रभाव' का अर्थ होता है - 'बुरा प्रभाव', 'हानिकारक असर' या 'गलत परिणाम'।
गद्यांश के संदर्भ में भी देखें तो मोबाइल और इंटरनेट के कारण विद्यार्थियों की अध्ययन क्षमता में कमी आना और स्वास्थ्य समस्याओं का बढ़ना 'गलत परिणाम' या 'हानिकारक प्रभाव' को ही दर्शाता है।
विकल्प (A) 'अच्छा प्रभाव' इसका विपरीतार्थक (सुप्रभाव) है, और विकल्प (C) व (D) का इस शब्द के अर्थ से कोई सीधा संबंध नहीं है।
अतः विकल्प (B) 'गलत परिणाम' ही इस शब्द का सबसे सही और तार्किक अर्थ है।
Step 4: Final Answer:
'दुष्प्रभाव' शब्द का वास्तविक और व्याकरण सम्मत अर्थ किसी क्रिया या वस्तु का बुरा असर अथवा गलत परिणाम होना होता है।
Quick Tip: कठिन शब्दों का अर्थ समझने के लिए उनके उपसर्गों और प्रत्ययों को अलग करके विश्लेषण करें।
'दुस्', 'दुर्', 'कु' और 'अप' जैसे उपसर्ग हमेशा नकारात्मक या बुरे अर्थ को प्रकट करते हैं।
निम्नलिखित कवियों को उनके जन्म-वर्ष के अनुसार सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए :
1. महादेवी वर्मा
2. जयशंकर प्रसाद
3. सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
4. सुमित्रानंदन पंत
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न हिंदी साहित्य के छायावाद युग के चार प्रमुख स्तंभों (कवियों) के जन्म-वर्ष के कालानुक्रमिक क्रम पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
हिंदी साहित्य के छायावादी कवियों के जन्म वर्ष का विवरण निम्नलिखित है:
जयशंकर प्रसाद (क्रम 2): इनका जन्म 30 जनवरी 1889 को वाराणसी में हुआ था। ये छायावाद के प्रवर्तक और सबसे ज्येष्ठ कवि माने जाते हैं।
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (क्रम 3): इनका जन्म 21 फरवरी 1899 को मेदिनीपुर (बंगाल) में हुआ था। वे अपनी क्रांतिकारी और ओजस्वी कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
सुमित्रानंदन पंत (क्रम 4): इनका जन्म 20 मई 1900 को कौसानी (उत्तराखंड) में हुआ था। उन्हें प्रकृति का सुकुमार कवि भी कहा जाता है।
महादेवी वर्मा (क्रम 1): इनका जन्म 26 मार्च 1907 को फर्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। इन्हें आधुनिक मीरा के नाम से भी जाना जाता है और ये चारों में सबसे कनिष्ठ हैं।
यदि हम इन चारों महान कवियों को उनके जन्म-वर्ष के बढ़ते क्रम (कालानुक्रम) में व्यवस्थित करें, तो सही क्रम इस प्रकार होगा:
जयशंकर प्रसाद (1889) \(\rightarrow\) सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1899) \(\rightarrow\) सुमित्रानंदन पंत (1900) \(\rightarrow\) महादेवी वर्मा (1907)
अर्थात कोड के अनुसार सही क्रम होगा: 2, 3, 4, 1।
यह संयोजन विकल्प (A) में दिया गया है।
Step 4: Final Answer:
दिए गए छायावादी कवियों का जन्म-वर्ष के अनुसार सही आरोही क्रम 2, 3, 4, 1 है, जो विकल्प (A) को सही सिद्ध करता है।
Quick Tip: छायावाद के चार स्तंभों (प्रसाद, निराला, पंत, महादेवी) के जन्म वर्ष को याद रखने की एक आसान ट्रिक है:
प्रसाद (1889) \(\rightarrow\) निराला (1899, 10 वर्ष बाद) \(\rightarrow\) पंत (1900, 1 वर्ष बाद) \(\rightarrow\) महादेवी (1907, 7 वर्ष बाद)।
निम्नलिखित कृतियों को उनके प्रकाशन-वर्ष के अनुसार सही क्रम में लगाइए :
1. गोदान
2. कामायनी
3. तमस
4. मैला आँचल
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न हिंदी साहित्य की अत्यंत प्रसिद्ध रचनाओं और उनके प्रथम प्रकाशन-वर्ष के कालानुक्रम पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
दी गई साहित्यिक कृतियों के प्रकाशन वर्ष और उनके रचनाकारों का विवरण इस प्रकार है:
कामायनी (क्रम 2): यह जयशंकर प्रसाद जी द्वारा रचित सुप्रसिद्ध महाकाव्य है, जिसका प्रकाशन वर्ष 1935 है।
गोदान (क्रम 1): यह कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद जी का अंतिम और सबसे लोकप्रिय उपन्यास है, जो ग्रामीण जीवन और कृषक संस्कृति का महाकाव्य माना जाता है। इसका प्रकाशन 1936 में हुआ था।
मैला आँचल (क्रम 4): यह फणीश्वरनाथ 'रेणु' जी द्वारा लिखित हिंदी का पहला महत्वपूर्ण आंचलिक उपन्यास है। इसका प्रकाशन वर्ष 1954 है।
तमस (क्रम 3): यह भीष्म साहनी जी द्वारा रचित भारत-विभाजन की त्रासदी पर आधारित एक बेहद शक्तिशाली उपन्यास है, जिसका प्रकाशन वर्ष 1973 है। इस उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार भी मिला था।
यदि इन कृतियों को उनके प्रकाशन-वर्ष के अनुसार आरोही (बढ़ते) क्रम में व्यवस्थित करें:
कामायनी (1935) \(\rightarrow\) गोदान (1936) \(\rightarrow\) मैला आँचल (1954) \(\rightarrow\) तमस (1973)
अतः सही संख्यात्मक क्रम होगा: 2, 1, 4, 3।
यह विकल्प (A) के साथ पूरी तरह मेल खाता है।
Step 4: Final Answer:
इन प्रमुख साहित्यिक कृतियों का प्रकाशन-वर्ष के अनुसार सही और प्रामाणिक क्रम 2, 1, 4, 3 है, जो कि विकल्प (A) है।
Quick Tip: प्रसिद्ध ऐतिहासिक उपन्यासों और महाकाव्यों (जैसे गोदान, कामायनी, मैला आँचल) के प्रकाशन वर्षों को सीधे याद रखना परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्रेमचंद का 'गोदान' (1936) और प्रसाद की 'कामायनी' (1935) लगभग समकालीन रचनाएँ हैं, इस तथ्य से क्रम निर्धारित करना आसान हो जाता है।
‘अंधे के हाथ बटेर लगना’ मुहावरे का सही अर्थ है—
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न हिंदी भाषा में प्रयुक्त होने वाले प्रसिद्ध मुहावरों और उनके लाक्षणिक अर्थों पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'अंधे के हाथ बटेर लगना' एक लोक-प्रसिद्ध लोकोक्ति/मुहावरा है।
यहाँ 'अंधा' व्यक्ति अयोग्य या बिना प्रयास करने वाले व्यक्ति का प्रतीक है, और 'बटेर' (एक प्रकार का पक्षी जो शिकार में कठिनता से मिलता है) एक बहुमूल्य सफलता या मूल्यवान वस्तु का प्रतीक है।
जब किसी अयोग्य, अकर्मण्य या बिना किसी विशेष प्रयास और योग्यता वाले व्यक्ति को कोई बड़ी या मूल्यवान सफलता अचानक मिल जाती है, तब इस मुहावरे का प्रयोग किया जाता है।
विकल्प (B) 'किसी का अपमान करना', विकल्प (C) 'धोखा खा जाना' और विकल्प (D) 'संकट में पड़ जाना' इस मुहावरे के अर्थ से बिल्कुल भी मेल नहीं खाते हैं।
अतः इसका सबसे सही और सटीक लाक्षणिक अर्थ 'बिना परिश्रम या बिना योग्यता के कोई बड़ी सफलता या वस्तु प्राप्त होना' है, जो कि विकल्प (A) में दर्शाया गया है।
Step 4: Final Answer:
'अंधे के हाथ बटेर लगना' मुहावरे का वास्तविक अर्थ बिना किसी योग्य प्रयास या परिश्रम के अचानक ही बड़ी सफलता या अनमोल वस्तु प्राप्त कर लेना होता है।
Quick Tip: मुहावरों का कभी भी शाब्दिक अर्थ नहीं निकालना चाहिए, हमेशा उनके पीछे छिपे लाक्षणिक या व्यंग्यात्मक अर्थ को समझने का प्रयास करें।
‘दुष्कर’ शब्द में कौन-सी संधि है?
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न हिंदी व्याकरण के संधि प्रकरण पर आधारित है, जिसमें 'दुष्कर' शब्द का संधि-विच्छेद कर उसकी सही संधि की पहचान करनी है।
Step 2: Detailed Explanation:
'दुष्कर' शब्द का संधि-विच्छेद करने पर हमें दुः + कर प्राप्त होता है।
इस संधि में पहले पद के अंत में विसर्ग (\(\colon\)) है और दूसरे पद के प्रारंभ में 'क' वर्ण है।
विसर्ग संधि के नियमानुसार: यदि विसर्ग से पहले 'इ' या 'उ' स्वर हो और विसर्ग के बाद क, ख, प, फ वर्ण आएँ, तो विसर्ग का परिवर्तन मूर्धन्य 'ष्' (आधा ष) में हो जाता है।
यहाँ दुः में 'उ' स्वर के बाद विसर्ग है और उसके बाद 'क' वर्ण आया है, इसलिए नियम के तहत विसर्ग का 'ष्' हो गया, जिससे शब्द बना: दुः + कर = दुष्कर।
चूंकि इस परिवर्तन की प्रक्रिया में विसर्ग का लोप होकर 'ष्' का आगमन हुआ है, इसलिए इसमें निश्चित रूप से विसर्ग संधि कार्य कर रही है।
गुण, वृद्धि और यण संधियां स्वर संधि के भेद हैं, जिनमें केवल स्वरों का मेल होता है, अतः वे यहाँ पूर्णतः अप्रासंगिक हैं।
Step 4: Final Answer:
'दुष्कर' का संधि-विच्छेद 'दुः + कर' होता है, जो विसर्ग संधि के नियम के तहत निष्पन्न होता है। अतः सही विकल्प (C) है।
Quick Tip: विसर्ग संधि की पहचान की एक शानदार ट्रिक:
यदि किसी शब्द के बीच में आधा 'ष्', 'श्', या 'स्' दिखाई दे और उसके ठीक बाद क, ख, ट, ठ, प, फ वर्ण हों, तो वहाँ अधिकांशतः विसर्ग संधि होती है (जैसे: निष्फल = निः + फल, दुष्कर = दुः + कर)।
‘स्वाधीन’ का विलोम शब्द है—
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Step 1: Understanding the Question:
यह प्रश्न विलोम शब्दों (Antonyms) पर आधारित है, जहाँ दिए गए शब्द 'स्वाधीन' का ठीक विपरीत अर्थ देने वाला शब्द पहचानना है।
Step 2: Detailed Explanation:
'स्वाधीन' शब्द दो शब्दों के योग से बना है: 'स्व' (अपना/स्वयं का) + 'अधीन' (नियंत्रण में रहने वाला)। इसका अर्थ होता है - जो स्वयं के अधीन या नियंत्रण में हो, अर्थात् आत्मनिर्भर या स्वतंत्र।
इसका ठीक विपरीतार्थक (विलोम) शब्द वह होगा जिसका अर्थ 'दूसरे के अधीन रहने वाला' हो।
'पराधीन' शब्द का निर्माण 'पर' (दूसरा) + 'अधीन' के योग से हुआ है, जिसका अर्थ होता है - जो दूसरे के अधीन या नियंत्रण में हो।
अतः 'स्वाधीन' का सबसे सटीक विलोम 'पराधीन' है।
अन्य विकल्पों की समीक्षा करें:
'स्वतंत्र' का विलोम 'परतंत्र' होता है (स्वतंत्र और स्वाधीन लगभग समानार्थी हैं)।
'अनुशासित' का विलोम 'अनुशासनहीन' होता है।
'स्वच्छंद' का विलोम 'नियंत्रित' होता है।
इस प्रकार, विकल्प (B) ही पूर्णतः शुद्ध विलोम शब्द है।
Step 4: Final Answer:
'स्वाधीन' (स्वयं के अधीन) का सही और व्याकरण सम्मत विलोम शब्द 'पराधीन' (दूसरे के अधीन) होता है।
Quick Tip: विलोम शब्दों का चयन करते समय तत्सम शब्द का विलोम तत्सम और तद्भव का विलोम तद्भव ही होना चाहिए।
चूँकि 'स्वाधीन' एक तत्सम शब्द है, इसलिए इसका विलोम भी तत्सम शब्द 'पराधीन' ही होगा, न कि परतंत्र या गुलाम।
CUET UG 2026 Exam Pattern
| Parameter | Details |
|---|---|
| Exam Name | Common University Entrance Test (CUET UG) 2026 |
| Conducting Body | National Testing Agency (NTA) |
| Exam Mode | Computer-Based Test (CBT) |
| Exam Duration | 60 minutes per test |
| Total Sections | 3 (Languages, Domain Subjects, General Test) |
| Question Type | Multiple Choice Questions (MCQs) |
| Questions per Test | 50 questions (all compulsory) |
| Marking Scheme | +5 for correct, -1 for incorrect |
| Maximum Marks | 250 marks per test |
| Maximum Subject Choices | 5 subjects in total |
| Syllabus Base | Class 12 NCERT (mainly for Domain Subjects) |








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