CUET PG B.Ed. Languages Question Paper 2024 will be available here for download. NTA conducted CUET PG B.Ed. Languages paper 2024 on from March 28 in Shift 1. CUET PG Question Paper 2024 is based on objective-type questions (MCQs). According to latest exam pattern, candidates get 105 minutes to solve 75 MCQs in CUET PG 2024 B.Ed. Languages question paper.
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CUET PG 2024 B.Ed. Languages Questions with Solutions
Question 1:
पूर्वी हिंदी की उत्पत्ति किस अपभ्रंश से हुई है?
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पूर्वी हिंदी का विकास अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। अर्द्धमागधी अपभ्रंश मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाओं में से एक है। यह भाषा प्राचीन भारत में मगध क्षेत्र (जो अब बिहार और आसपास के क्षेत्रों में स्थित था) में बोली जाती थी।
विकास की प्रक्रिया:
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अर्द्धमागधी अपभ्रंश: अर्द्धमागधी अपभ्रंश, जो पाली और संस्कृत से विकसित हुआ था, एक महत्वपूर्ण मध्यकालीन भाषा थी। यह विशेष रूप से दक्षिणी और पूर्वी भारत के क्षेत्रों में बोली जाती थी और धीरे-धीरे इसका प्रभाव उत्तर भारत में भी देखा गया।
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पूर्वी हिंदी का उद्भव: अर्द्धमागधी अपभ्रंश के प्रभाव से पूर्वी हिंदी का विकास हुआ। इस भाषा का प्रारंभिक रूप आज के हिंदी-भाषी क्षेत्रों में से कुछ हिस्सों में बोला जाता था, जैसे कि पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्से।
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भाषाई परिवर्तन: अर्द्धमागधी अपभ्रंश की शब्दावली, व्याकरण और ध्वनियों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए, जिसके परिणामस्वरूप वह पूर्वी हिंदी में बदल गई। इन परिवर्तनों में प्रमुख रूप से स्वर, व्यंजन और उच्चारण में बदलाव देखा गया।
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भाषा का प्रसार: पूर्वी हिंदी का प्रसार समय के साथ बढ़ा और यह बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में और पूर्वी उत्तर प्रदेश में प्रमुख रूप से बोली जाने लगी।
निष्कर्ष: पूर्वी हिंदी का विकास एक लंबी भाषाई प्रक्रिया का परिणाम था, जिसमें अर्द्धमागधी अपभ्रंश की महत्वपूर्ण भूमिका थी। यह भाषाई परिवर्तन धीरे-धीरे समाज और संस्कृति में अपने स्थान बना सके और आज की आधुनिक हिंदी में समाहित हो गया।
अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। यह मध्यकालीन भारतीय आर्य भाषाओं में से एक है, जो मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों में बोली जाती थी।
Question 2:
वर्तनी के अनुसार शुद्ध शब्द का चयन कीजिए:
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दिए गए विकल्पों में, 'व्यावहारिक' शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'व्यवहार में लाया जाने योग्य' या 'प्रयोग करने योग्य'। यह शब्द उन चीजों या क्रियाओं को व्यक्त करता है, जिन्हें दैनिक जीवन में प्रयोग किया जा सकता है या जो व्यवहार में लायी जा सकती हैं।
वर्तनी संबंधी शुद्धता:
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व्यावहारिक: यह शब्द सही वर्तनी के साथ लिखा गया है। इसका अर्थ है कुछ ऐसा जो वास्तविक जीवन में प्रयोग करने योग्य हो, जैसे कि 'व्यावहारिक ज्ञान', 'व्यावहारिक दृष्टिकोण' आदि।
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वैवाहारिक: यह शब्द गलत वर्तनी का उदाहरण है। इसे सही रूप में 'व्यावहारिक' लिखा जाना चाहिए। 'वैवाहारिक' का प्रयोग गलत तरीके से होता है और इसका कोई अर्थ नहीं बनता।
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व्यवाहारिक: यह भी गलत वर्तनी है। सही रूप 'व्यावहारिक' है, और 'व्यवाहारिक' शब्द का प्रयोग हिंदी में आमतौर पर अशुद्ध होता है।
निष्कर्ष: 'व्यावहारिक' शब्द वर्तनी और अर्थ दोनों की दृष्टि से सही है। अन्य शब्द जैसे 'वैवाहारिक' और 'व्यवाहारिक' वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ हैं, जो हिंदी में गलत तरीके से प्रयोग किए जाते हैं।
व्यावहारिक' शब्द वर्तनी की दृष्टि से शुद्ध है। इसका अर्थ है 'प्रयोग में लाया जाने योग्य'। अन्य विकल्पों में वर्तनी संबंधी अशुद्धियाँ हैं।
Question 3:
'भौंरा' का पर्यायवाची शब्द नहीं है:
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'भौंरा' शब्द के पर्यायवाची शब्द हैं अलि, भ्रमर और मधुप, ये सभी शब्द भौंरे को दर्शाते हैं। भौंरा एक प्रकार का कीट है, जो फूलों के पास मंडराता है और मधु इकट्ठा करता है। इन पर्यायवाचियों का प्रयोग भी इस कीट को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
वहीं, 'शालूर' शब्द भौंरे का पर्यायवाची नहीं है। शालूर एक प्रकार की जंगली बिल्ली को कहा जाता है, जो आमतौर पर जंगलों में पाई जाती है। यह शब्द विशेष रूप से जंगली बिल्ली के लिए इस्तेमाल किया जाता है, और इसका भौंरे से कोई संबंध नहीं है।
निष्कर्ष: इसलिए, दिए गए विकल्पों में से शालूर शब्द सही उत्तर है, क्योंकि यह भौंरे का पर्यायवाची नहीं है।
शालूर' एक प्रकार की जंगली बिल्ली को कहते हैं, जो भौंरे का पर्यायवाची नहीं है।
Question 4:
निम्नलिखित में से रस और स्थायी भाव के सही युग्मों को चुनिए:
- (अ) श्रृंगार - रति
- (ब) वीर - उत्साह
- (स) शांत - निर्वेद
- (द) वीभत्स - भय
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
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दिए गए सभी युग्म रस और उनके स्थायी भाव के सही मेल हैं। हिंदी साहित्य में नौ रसों का महत्व है, और प्रत्येक रस एक विशेष स्थायी भाव से जुड़ा होता है, जो उस रस के अनुभव को व्यक्त करता है।
श्रृंगार रस: इसका स्थायी भाव रति होता है, जो प्रेम और आकर्षण के भाव को दर्शाता है। यह रस प्रेम, सौंदर्य और मिलन की भावना को व्यक्त करता है।
वीर रस: इसका स्थायी भाव उत्साह है, जो साहस, पराक्रम और संघर्ष की भावना को व्यक्त करता है। यह रस विशेष रूप से युद्ध, बहादुरी और नायकत्व से जुड़ा होता है।
शांत रस: इसका स्थायी भाव निर्वेद है, जो आत्म-संतोष, शांति और निष्कलंकता की स्थिति को दर्शाता है। यह रस व्यक्ति के मानसिक और आत्मिक शांति की ओर इंगीत करता है।
वीभत्स रस: इसका स्थायी भाव भय है, जो घृणा, डर और भय की भावना को व्यक्त करता है। यह रस अप्रिय और घृणित स्थितियों को चित्रित करता है।
निष्कर्ष: यह सभी भाव साहित्य में नौ रसों का हिस्सा हैं, और प्रत्येक रस एक विशेष स्थायी भाव से जुड़ा होता है, जो उसे और भी अधिक अभिव्यक्तिपूर्ण बनाता है।
सुझाव
अपभ्रंश भाषाएँ आधुɟनक भारतीय भाषाओं के ɟवकास का आधार मानी जाती हैं।
Question 5:
संधि-विच्छेद के अनुसार सही विकल्प का चयन करें:
- (अ) वि + अर्थ = व्यर्थ
- (ब) रौ + अन = रावण
- (स) सत् + चिदानंद = सच्चिदानंद
- (द) स्व + आगत = स्वागत
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
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दिए गए विकल्पों में, केवल '(अ) वि + अर्थ = व्यर्थ' और '(स) सत् + चिदानंद = सच्चिदानंद' सही संधि विच्छेद हैं। संधि विच्छेद एक महत्वपूर्ण भाषिक प्रक्रिया है, जिसमें दो या दो से अधिक शब्दों को जोड़कर नया शब्द बनाया जाता है, और यह सही संधि विच्छेद शब्दों के अर्थ को स्पष्ट करने में मदद करता है।
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(अ) वि + अर्थ = व्यर्थ: यह संधि विच्छेद सही है। 'वि' और 'अर्थ' को जोड़कर 'व्यर्थ' शब्द बनता है, जिसका अर्थ होता है 'निरर्थक' या 'जो कोई उपयोगी न हो।'
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(स) सत् + चिदानंद = सच्चिदानंद: यह भी सही संधि विच्छेद है। 'सत्' और 'चिदानंद' को जोड़कर 'सच्चिदानंद' शब्द बनता है, जिसका अर्थ होता है 'सत्य, ज्ञान और आनंद का मिलाजुला रूप', जो विशेष रूप से तात्त्विक या धार्मिक संदर्भ में उपयोग होता है।
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(ब) रौ + अन = रावण: यह गलत संधि विच्छेद है। सही संधि विच्छेद 'रु + अण् = रावण' होता है। 'रावण' का अर्थ होता है एक प्रसिद्ध राक्षस राजा, जो रामायण के प्रमुख पात्र हैं।
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(द) स्व + आगत = स्वागत: यह भी गलत संधि विच्छेद है। सही संधि विच्छेद 'सु + आगत = स्वागत' होता है। 'स्वागत' शब्द का अर्थ है 'अच्छे तरीके से किसी का स्वागत करना।'
निष्कर्ष: सही संधि विच्छेद शब्दों का अर्थ समझने में मदद करते हैं, और गलत संधि विच्छेद से गलत अर्थ निकल सकते हैं।
Question 6:
इनमें से विकारी शब्द कौन सा है?
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विकारी शब्द वे होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक आदि के कारण परिवर्तन होता है। इन शब्दों के रूप में किसी विशेष संदर्भ के आधार पर बदलाव होते हैं, जैसे लिंग (पुरुष, स्त्री) और वचन (एकवचन, बहुवचन)।
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हाथी: यह एक विकारी शब्द है क्योंकि इसका रूप लिंग और वचन के अनुसार बदलता है। उदाहरण के तौर पर, हाथी का बहुवचन भी 'हाथी' ही रहता है, लेकिन स्त्रीलिंग में इसका रूप 'हथिनी' हो जाता है।
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यहाँ, इधर, और उधर: ये अविकारी शब्द हैं, क्योंकि इन शब्दों में कोई बदलाव नहीं होता। इनका रूप हमेशा एक जैसा ही रहता है, चाहे संदर्भ कोई भी हो।
निष्कर्ष: विकारी शब्दों में लिंग, वचन, और कारक के आधार पर परिवर्तन होता है, जबकि अविकारी शब्दों में कोई परिवर्तन नहीं होता।
Question 7:
निम्नलिखित में से अंतस्थ व्यंजन नहीं है:
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अंतस्थ व्यंजन वे व्यंजन होते हैं जो स्वर और व्यंजन के मध्य में स्थित होते हैं। इन व्यंजनों का उच्चारण करते समय हमारी जीभ और ओठें स्वर और अन्य व्यंजन के बीच स्थित होती हैं।
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'य', 'र', 'ल' और 'व' : ये अंतस्थ व्यंजन हैं क्योंकि इनका उच्चारण करते समय स्वर और अन्य व्यंजन के बीच स्थित होते हैं। इनका स्थान और उच्चारण भी इस प्रकार होता है कि ये बीच में होते हैं।
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'ह': यह एक ऊष्म व्यंजन है, अंतस्थ व्यंजन नहीं। ऊष्म व्यंजन वे होते हैं जिनके उच्चारण में मुख से गर्म हवा निकलती है। 'ह' में मुख से हवा का अत्यधिक उच्छ्वास होता है, जिससे यह ऊष्म व्यंजन कहलाता है।
निष्कर्ष: अंतस्थ व्यंजन उन व्यंजनों को कहा जाता है, जो स्वर और अन्य व्यंजन के बीच में होते हैं, जबकि ऊष्म व्यंजन उन व्यंजनों को कहते हैं जिनके उच्चारण में गर्म हवा निकलती है।
Question 8:
'दुष्कर' शब्द का संधि विच्छेद है:
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'दुष्कर' शब्द का सही संधि विच्छेद 'दु: + कर' है। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है, जिसमें विसर्ग (:) का 'स्' में परिवर्तन होता है और आगे 'क' आने पर 'ष' में परिवर्तन हो जाता है।
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दु: + कर: यह सही संधि विच्छेद है, क्योंकि 'दु:' (विसर्ग) और 'कर' को मिलाकर 'दुष्कर' शब्द बनता है। इसमें विसर्ग संधि का पालन किया जाता है, जिसमें विसर्ग का उच्चारण 'स्' में बदलकर 'ष' में होता है, जिससे 'दुष्कर' शब्द उत्पन्न होता है।
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अन्य विकल्प: अन्य विकल्प संधि विच्छेद की दृष्टि से गलत हैं। विसर्ग संधि का नियम स्पष्ट रूप से 'दु: + कर' में लागू होता है, जबकि अन्य उदाहरणों में ऐसा परिवर्तन नहीं होता।
निष्कर्ष: 'दुष्कर' शब्द का सही संधि विच्छेद 'दु: + कर' है, और यह विसर्ग संधि का उदाहरण है। अन्य विकल्प संधि विच्छेद की दृष्टि से गलत हैं।
Question 9:
'ज़ाकिर हुसैन तबला बजा रहे हैं.' किस काल का उदाहरण है?
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'दुष्कर' शब्द का सही संधि विच्छेद 'दु: + कर' है। यह विसर्ग संधि का उदाहरण है, जिसमें विसर्ग (:) का 'स्' में परिवर्तन होता है और आगे 'क' आने पर 'ष' में परिवर्तन हो जाता है।
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दु: + कर: यह सही संधि विच्छेद है, क्योंकि 'दु:' (विसर्ग) और 'कर' को मिलाकर 'दुष्कर' शब्द बनता है। इसमें विसर्ग संधि का पालन किया जाता है, जिसमें विसर्ग का उच्चारण 'स्' में बदलकर 'ष' में होता है, जिससे 'दुष्कर' शब्द उत्पन्न होता है।
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अन्य विकल्प: अन्य विकल्प संधि विच्छेद की दृष्टि से गलत हैं। विसर्ग संधि का नियम स्पष्ट रूप से 'दु: + कर' में लागू होता है, जबकि अन्य उदाहरणों में ऐसा परिवर्तन नहीं होता।
निष्कर्ष: 'दुष्कर' शब्द का सही संधि विच्छेद 'दु: + कर' है, और यह विसर्ग संधि का उदाहरण है। अन्य विकल्प संधि विच्छेद की दृष्टि से गलत हैं।
Question 10:
'देव+ईश = देवेश' शब्द में कौन सी स्वर संधि है?
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'देव+ईश = देवेश' शब्द में गुण स्वर संधि है। गुण स्वर संधि में 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आने पर 'ए' हो जाता है।
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गुण स्वर संधि: इस संधि में 'अ' या 'आ' के बाद 'इ' या 'ई' आने पर 'ए' बन जाता है। उदाहरण के रूप में, 'देव' (अ + ई) और 'ईश' (ई) को जोड़ने पर 'देवेश' (दे + ईश) बनता है, जिसमें 'अ' और 'ई' मिलकर 'ए' बनते हैं।
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दीर्घ स्वर संधि: इसमें समान स्वर मिलते हैं, जैसे 'आ' + 'आ' = 'आ'। यह संधि दीर्घ स्वर को उत्पन्न करती है।
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वृद्धि संधि: इसमें स्वर की मात्रा में वृद्धि होती है, जैसे 'अ' + 'अ' = 'आ'। यहां मात्रा में वृद्धि होती है, लेकिन कोई नया स्वर उत्पन्न नहीं होता।
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अयादि संधि: इसमें 'अय', 'आय', 'अव', या 'आव' होते हैं, जैसे 'आ' + 'व' = 'आव'।
निष्कर्ष: 'देव+ईश = देवेश' शब्द में गुण स्वर संधि का उदाहरण है, जिसमें 'अ' और 'ई' मिलकर 'ए' बनते हैं। दीर्घ स्वर संधि, वृद्धि संधि, और अयादि संधि के उदाहरण भी अलग-अलग प्रकार की संधियों को व्यक्त करते हैं।
Question 11:
'लालटेन' शब्द इनमें से किस वर्ग में आता है?
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'लालटेन' शब्द विदेशज है, क्योंकि यह हिंदी में अंग्रेजी भाषा से आया है। विदेशज शब्द वे होते हैं जो किसी अन्य भाषा से हिंदी में लिए गए हैं।
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विदेशज शब्द: ये शब्द किसी अन्य भाषा से हिंदी में लिए जाते हैं, जैसे कि 'लालटेन' (अंग्रेजी से) या 'चाय' (पुर्तगाली से)। इन शब्दों का आदान-प्रदान भाषा के विकास और संपर्क के कारण होता है।
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तत्सम शब्द: ये वे शब्द होते हैं जो संस्कृत से बिना किसी बदलाव के हिंदी में आए हैं। उदाहरण के लिए, 'पुस्तक' और 'शास्त्र'।
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तद्भव शब्द: ये शब्द संस्कृत से उत्पन्न होकर रूप बदलने वाले होते हैं। उदाहरण के रूप में 'घर' (संस्कृत 'गृह' से) और 'बड़' (संस्कृत 'वट' से)।
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देशज शब्द: ये शब्द किसी विशेष क्षेत्रीय भाषा या बोली से आते हैं। उदाहरण के लिए, 'ढेर' (हिंदी में क्षेत्रीय रूप से प्रयुक्त)।
निष्कर्ष: 'लालटेन' शब्द विदेशी भाषा से लिया गया है, इसलिए यह एक विदेशज शब्द है। तत्सम, तद्भव और देशज शब्द अलग-अलग प्रकार के शब्द होते हैं जो संस्कृत या क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े होते हैं।
Question 12:
सूची-1 के साथ सूची-॥ का मिलान करें:
| सूची -। (मुहावरा/लोकोक्तियाँ) | सूची -॥ (अर्थ) |
|---|---|
| (अ) काठ मारना | (1) जड़ हो जाना |
| (ब) कागज़ की नाव | (2) अस्थायी |
| (स) कान देना | (3) ध्यान देना |
| (द) कलई खुलना | (4) भेद खुलना |
Choose the correct answer from the options given below:
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सही मिलान इस प्रकार है:
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'काठ मारना' का अर्थ है 'जड़ हो जाना'। यह मुहावरा उस स्थिति को दर्शाता है जब कोई व्यक्ति या वस्तु गतिहीन या बिना किसी प्रतिक्रिया के हो जाती है।
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'कागज की नाव' का अर्थ है 'अस्थायी'। यह मुहावरा किसी चीज़ के अस्थिर या अस्थायी होने को व्यक्त करता है, जैसे कि कागज की नाव पानी में जल्दी टूट सकती है।
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'कान देना' का अर्थ है 'ध्यान देना'। यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है जब किसी की बात को ध्यान से सुना या समझा जाता है।
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'कलई खुलना' का अर्थ है 'भेद खुलना'। यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है जब किसी का गुप्त या छिपा हुआ सच बाहर आ जाता है।
निष्कर्ष: मुहावरों और लोकोक्तियों का सही अर्थ समझना भाषा को प्रभावी ढंग से प्रयोग करने के लिए जरूरी है, क्योंकि इससे हम सही तरीके से अपनी बातों को व्यक्त कर सकते हैं और भाषा का सही उपयोग कर सकते हैं।
Question 13:
सूची-1 का सूची-॥ से मिलान करें:
| सूची-। (पुस्तक/रचना) | सूची-॥ (लेखक/रचनाकार) |
|---|---|
| (अ) गोदान | (1) प्रेमचंद |
| (ब) कामायनी | (3) जयशंकर प्रसाद |
| (स) रामचरितमानस | (4) तुलसीदास |
| (द) अंधेर नगरी | (2) भारतेंदु |
Choose the correct answer from the options given below:
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सही मिलान इस प्रकार है:
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'गोदान' प्रेमचंद द्वारा रचित है। यह उपन्यास भारतीय समाज की सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को दर्शाता है, और प्रेमचंद की लेखनी में ग्रामीण जीवन की समस्याओं का चित्रण किया गया है।
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'कामायनी' जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित है। यह एक प्रसिद्ध काव्य है, जिसमें मानवता, आदर्श और जीवन के गूढ़ प्रश्नों का विवेचन किया गया है।
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'रामचरितमानस' तुलसीदास द्वारा रचित है। यह महाकाव्य भगवान श्रीराम के जीवन और कार्यों का वर्णन करता है, और भारतीय संस्कृति में अत्यधिक प्रतिष्ठित है।
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'अंधेर नगरी' भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा रचित है। यह एक प्रसिद्ध नाटक है, जो समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार और अराजकता को उजागर करता है।
निष्कर्ष: साहित्य में रचनाओं और रचनाकारों का ज्ञान हिंदी साहित्य को समझने के लिए आवश्यक है, क्योंकि यह हमें उनके विचारों, समाज के प्रति दृष्टिकोण और साहित्यिक योगदान को समझने का अवसर देता है।
Question 14:
निम्नलिखित काव्यांश को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:
- (अ) सब उन्नति को मूल
- (ब) मिटत न हिय को शूल
- (स) निज भाषा उन्नति अहै
- (द) बिन निज भाषा ज्ञान के
Choose the correct answer from the options given below:
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काव्यांश का सही क्रम है:
- (स) निज भाषा उन्नति अहै
- (अ) सब उन्नति को मूल
- (द) बिन निज भाषा ज्ञान के
- (ब) मिटत न हिय को शूल
यह काव्यांश निज भाषा के महत्व को दर्शाता है। इसमें यह कहा गया है कि अपनी मातृभाषा का ज्ञान और उपयोग ही व्यक्ति की उन्नति का मूल है। बिना अपनी भाषा के ज्ञान के, व्यक्ति के हृदय में दुख और कष्ट रहते हैं, जो कि एक शूल के समान होते हैं। यह काव्यांश हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को उजागर करता है।
निष्कर्ष: इस काव्यांश का सही क्रम भाषा और अर्थ को स्पष्ट करता है, और यह निज भाषा के महत्व को रेखांकित करता है।
Question 15:
निम्नलिखित गद्यांश को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:
- (अ) कर्मों की ओर हर्ष और तत्परता
- (ब) आनन्द भी साधक को
- (स) फल की भावना से उत्पन्न
- (द) के साथ प्रवृत्त करता है।
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गद्यांश का सही क्रम है:
- (स) फल की भावना से उत्पन्न
- (अ) कर्मों की ओर हर्ष और तत्परता
- (ब) आनन्द भी साधक को
- (द) के साथ प्रवृत्त करता है।
यह क्रम गद्यांश में दिए गए विचारों को तार्किक रूप से प्रस्तुत करता है। इस क्रम में पहले फल की भावना का उत्पन्न होना बताया गया है, फिर कर्मों की ओर हर्ष और तत्परता की प्रवृत्ति उत्पन्न होती है, और अंत में यह आनंद साधक को प्रेरित करता है, जिससे वह आगे बढ़ता है।
निष्कर्ष: इस क्रम से गद्यांश के विचारों को स्पष्ट और तार्किक तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
Question 16:
निम्नलिखित काव्यांश को क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए:
- (अ) बही होगी कविता अनजान
- (ब) वियोगी होगा पहला कवि
- (स) निकलकर आखों से चुपचाप
- (द) आह से उपजा होगा गान
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काव्यांश का सही क्रम है:
- (ब) वियोगी होगा पहला कवि
- (द) आह से उपजा होगा गान
- (स) निकलकर आखों से चुपचाप
- (अ) बही होगी कविता अनजान
यह क्रम एक भावना और कविता के जन्म की प्रक्रिया को दर्शाता है। इसमें पहले वियोग और पीड़ा के कारण कवि की उत्पत्ति होती है, फिर आह और दर्द से गान का जन्म होता है। यह गान चुपचाप आँखों से निकलकर कविता के रूप में व्यक्त होता है, जो अनजाने में बहती है और शब्दों के रूप में परिवर्तित होती है।
निष्कर्ष: यह क्रम कविता के भावनात्मक जन्म और उसकी प्रक्रिया को सही ढंग से दर्शाता है।
Question 17:
किस समास में पहला पद प्रधान होता है और समस्त पद वाक्य में क्रियाविशेषण का काम करता है?
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अव्ययीभाव समास में पहला पद प्रधान होता है और समस्त पद वाक्य में क्रियाविशेषण का कार्य करता है। इस समास में पहला पद अव्यय होता है, जिसके कारण पूरा पद भी अव्यय बन जाता है।
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अव्ययीभाव समास: इसमें पहला पद अव्यय होता है, जैसे 'बहुत + समय' = 'बहुतसमय'। इस समास में पूरा पद वाक्य में क्रियाविशेषण का कार्य करता है, जिससे यह वाक्य में क्रिया के साथ जुड़कर उसकी विशेषता बताता है।
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तत्पुरुष समास: इसमें पहला पद प्रधान होता है, लेकिन यह अव्यय नहीं होता। उदाहरण के रूप में 'राज + महल' = 'राजमहल', यहाँ 'राज' प्रधान होता है, लेकिन यह अव्यय नहीं है।
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बहुव्रीहि समास: इसमें दोनों पदों का सम्मिलन होता है, लेकिन यह भी अव्ययीभाव समास की तरह नहीं होता। उदाहरण के रूप में 'अंधा + हाथी' = 'अंधाहाथी'। यह शब्द दोनों पदों से मिलकर कुछ नया अर्थ उत्पन्न करता है।
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द्वंद्व समास: इसमें दोनों पद समान रूप से समान अर्थ व्यक्त करते हैं, जैसे 'गुण + दोष' = 'गुणदोष'। यहाँ पर दोनों पदों का मिलाकर एक नया शब्द बनता है, लेकिन यह भी अव्ययीभाव समास की तरह नहीं होता।
निष्कर्ष: अव्ययीभाव समास में पहला पद अव्यय होने के कारण पूरा समास अव्यय बन जाता है और यह क्रियाविशेषण का कार्य करता है, जबकि अन्य समासों में ऐसा नहीं होता।
Question 18:
'उस मैदान में पाँच लड़के खेल रहे हैं' इस वाक्य में कौन सा विशेषण प्रयुक्त हुआ है?
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दिए गए वाक्य में 'पाँच' शब्द संख्यावाचक विशेषण है, क्योंकि यह लड़कों की संख्या बता रहा है।
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संख्यावाचक विशेषण: ये वे शब्द होते हैं जो संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध कराते हैं, जैसे 'पाँच', 'बीस', 'तीन' आदि। उदाहरण के लिए, 'पाँच लड़के' में 'पाँच' शब्द लड़कों की संख्या बता रहा है, इसलिए यह संख्यावाचक विशेषण है।
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गुणवाचक विशेषण: ये शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण को बताते हैं, जैसे 'सुंदर', 'मधुर', 'तेज' आदि। उदाहरण के रूप में, 'सुंदर फूल' में 'सुंदर' शब्द फूल का गुण बता रहा है।
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परिमाणवाचक विशेषण: ये शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम की मात्रा का बोध कराते हैं, जैसे 'ज्यादा', 'कम', 'कुछ' आदि। उदाहरण के रूप में, 'कुछ किताबें' में 'कुछ' शब्द किताबों की मात्रा बता रहा है।
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सार्वनामिक विशेषण: ये शब्द सर्वनाम के रूप में प्रयुक्त होते हैं, जैसे 'अपना', 'सभी', 'कोई' आदि। उदाहरण के रूप में, 'अपना घर' में 'अपना' शब्द सर्वनाम के रूप में कार्य कर रहा है।
निष्कर्ष: 'पाँच' शब्द संख्यावाचक विशेषण है क्योंकि यह संज्ञा की संख्या बता रहा है, जबकि अन्य विशेषण गुण, मात्रा, या सर्वनाम के रूप में कार्य करते हैं।
Question 19:
'मेज़ पर पुस्तकें पड़ी हैं' इस वाक्य में किस कारक का चिन्ह प्रयुक्त हुआ है?
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दिए गए वाक्य 'मेज़ पर पुस्तकें पड़ी हैं' में 'पर' अधिकरण कारक का चिन्ह है।
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अधिकरण कारक: यह कारक क्रिया के आधार या स्थान को दर्शाता है। उदाहरण के रूप में, 'मेज़ पर पुस्तकें पड़ी हैं' में 'पर' शब्द यह बता रहा है कि पुस्तकें कहां पड़ी हैं। इस प्रकार, 'पर' शब्द अधिकरण कारक का चिन्ह है, जो स्थान को दर्शाता है।
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करण कारक: यह कारक क्रिया के साधन या कारण को दर्शाता है। उदाहरण के रूप में, 'हाथी ने पेड़ को तोड़ा' में 'ने' करण कारक का चिन्ह है, जो क्रिया के कारण या साधन को दर्शाता है।
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संप्रदान कारक: यह कारक उस व्यक्ति या स्थान को दर्शाता है जिसके लिए कुछ किया जाए। उदाहरण के रूप में, 'राम ने श्याम को किताब दी' में 'को' संप्रदान कारक का चिन्ह है, जो दर्शाता है कि किताब किसके लिए दी गई है।
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संबंध कारक: यह दो शब्दों के बीच संबंध को दर्शाता है। उदाहरण के रूप में, 'राम का घर' में 'का' संबंध कारक का चिन्ह है, जो 'राम' और 'घर' के बीच के संबंध को दर्शाता है।
निष्कर्ष: 'पर' शब्द अधिकरण कारक का चिन्ह है, क्योंकि यह स्थान या आधार को दर्शाता है, जबकि अन्य कारक क्रमशः क्रिया के साधन, प्राप्तकर्ता और दो शब्दों के बीच के संबंध को दर्शाते हैं।
Question 20:
कौन सा विलोमार्थी शब्द युग्म सही नहीं है?
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दिए गए विकल्पों में, 'वाग्मी' और 'वाचाल' एक दूसरे के विलोम नहीं हैं, बल्कि पर्यायवाची हैं। दोनों शब्दों का अर्थ होता है 'बोलने वाला' या 'बात करने वाला', इसलिए ये पर्यायवाची हैं, न कि विलोम।
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'कृश' का विलोम 'पीन' है। 'कृश' का अर्थ होता है पतला या दुबला, जबकि 'पीन' का अर्थ होता है मोटा या तगड़ा, इसलिए ये एक दूसरे के विलोम हैं।
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'कुसुम' का विलोम 'कंटक' है। 'कुसुम' का अर्थ होता है फूल, जबकि 'कंटक' का अर्थ होता है कांटा, जो इनके विपरीत अर्थ को दर्शाता है।
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'खंडन' का विलोम 'मंडन' है। 'खंडन' का अर्थ होता है निंदा करना या विरोध करना, जबकि 'मंडन' का अर्थ होता है शृंगार या सुंदरता की वृद्धि करना, जो इन दोनों के विपरीत अर्थ को व्यक्त करता है।
निष्कर्ष: विलोमार्थी शब्दों का ज्ञान शब्दों के विपरीत अर्थ को समझने में मदद करता है। 'वाग्मी' और 'वाचाल' पर्यायवाची शब्द हैं, जबकि 'कृश' और 'पीन', 'कुसुम' और 'कंटक', और 'खंडन' और 'मंडन' विलोम शब्दों के उदाहरण हैं।
Question 21:
सूची - का सूची-॥ से सही मिलान कीजिए:
| सूची -। (रस का नाम) | सूची-॥ (स्थायी भाव) |
|---|---|
| (अ) वीभत्स | (1) शोक |
| (ब) अद्भुत | (2) जुगुप्सा |
| (स) करुण | (3) क्रोध |
| (द) रौद्र | (4) विस्मय |
Choose the correct answer from the options given below:
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सही मिलान इस प्रकार है:
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'वीभत्स' का स्थायी भाव 'जुगुप्सा' है। यह रस घृणा और अपवित्रता की भावना को व्यक्त करता है, जो किसी अप्रिय या घिनौनी स्थिति से जुड़ा होता है।
-
'अद्भुत' का स्थायी भाव 'विस्मय' है। यह रस आश्चर्य और चमत्कारी घटनाओं से उत्पन्न होता है, जो व्यक्ति को विस्मित और चकित कर देता है।
-
'करुण' का स्थायी भाव 'शोक' है। यह रस दुःख, पीड़ा और दया की भावना को व्यक्त करता है, जैसे दुखद घटनाओं पर शोक व्यक्त करना।
-
'रौद्र' का स्थायी भाव 'क्रोध' है। यह रस गुस्सा और आक्रोश की भावना को व्यक्त करता है, जो किसी अन्याय या अत्याचार के खिलाफ उत्पन्न होता है।
निष्कर्ष: रस और उनके स्थायी भावों का ज्ञान साहित्य में भावनाओं को समझने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें विभिन्न भावनाओं और उनकी अभिव्यक्तियों को बेहतर ढंग से समझने का अवसर देता है।
Question 22:
कौन से शब्द तत्सम शब्द हैं:
- (अ) योद्धा
- (ब) पक्षी
- (स) फागुन
- (द) रात्रि
Choose the correct answer from the options given below:
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दिए गए विकल्पों में, 'योद्धा', 'पक्षी' और 'रात्रि' तत्सम शब्द हैं, जो संस्कृत से हिंदी में बिना परिवर्तन के लिए गए हैं। ये शब्द संस्कृत में जैसे थे, वैसे ही हिंदी में उपयोग होते हैं, जैसे:
- 'योद्धा': संस्कृत से सीधे हिंदी में आया और इसका अर्थ होता है 'सैन्य में भाग लेने वाला व्यक्ति'।
- 'पक्षी': संस्कृत से बिना परिवर्तन के हिंदी में आया और इसका अर्थ होता है 'पक्षी' या 'पक्षी जीव'।
- 'रात्रि': संस्कृत से बिना किसी बदलाव के हिंदी में आया और इसका अर्थ होता है 'रात'।
'फागुन' एक तद्भव शब्द है, जो संस्कृत शब्द 'फाल्गुन' से विकसित हुआ है। तद्भव शब्द वे होते हैं जो संस्कृत से आकर रूप बदल लेते हैं, जैसे 'फागुन' जो 'फाल्गुन' से बना है और समय के साथ उसका रूप बदला।
निष्कर्ष: तत्सम और तद्भव शब्दों का ज्ञान हिंदी भाषा की उत्पत्ति और विकास को समझने में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें यह समझने में मदद करता है कि हिंदी शब्दों का विकास कैसे हुआ और वे संस्कृत से किस प्रकार जुड़े हैं।
Question 23:
चिपको आंदोलन किस तरह का जन आंदोलन था?
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चिपको आंदोलन पर्यावरण संरक्षण के लिए एक स्थानीय आंदोलन था, जिसमें लोगों ने पेड़ों को बचाने के लिए उन्हें गले लगाया था। यह आंदोलन मुख्यतः उत्तराखंड में शुरू हुआ था और इसका उद्देश्य पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकना था।
-
चिपको आंदोलन: इस आंदोलन में स्थानीय लोग, विशेष रूप से महिलाएँ, पेड़ों को बचाने के लिए उनकी जड़ें पकड़कर उन्हें गले लगाती थीं, ताकि लकड़ी माफिया पेड़ों की कटाई न कर सके। यह आंदोलन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जो बाद में देशभर में पर्यावरणीय जागरूकता फैलाने का कारण बना।
-
महिलाओं की सक्रिय भागीदारी: चिपको आंदोलन में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उनकी सक्रिय भागीदारी के कारण ही यह आंदोलन सफल हो सका। महिलाएं अपने गाँवों और जंगलों के संरक्षण के लिए सामूहिक रूप से एकजुट हुई थीं।
निष्कर्ष: चिपको आंदोलन का मुख्य उद्देश्य पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकना और पर्यावरण का संरक्षण करना था, और यह आंदोलन महिलाओं की सक्रिय भागीदारी के लिए भी प्रसिद्ध है। अन्य विकल्प इस आंदोलन के मुख्य उद्देश्य का सटीक वर्णन नहीं करते हैं।
Question 24:
पर्यावरण संबंधी जन आंदोलन के जन्म के क्या कारण हैं?
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पर्यावरण संबंधी जन आंदोलनों का मुख्य कारण पारिस्थितिक संतुलन और विकास की प्राथमिकताओं के बीच का द्वन्द्व है। ये आंदोलन तब उत्पन्न होते हैं जब विकास के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाता है और पर्यावरण को नुकसान होता है।
1. पारिस्थितिक संतुलन और विकास: जब विकास की प्रक्रिया में पर्यावरण और पारिस्थितिक तंत्र की अनदेखी की जाती है, तो इससे पारिस्थितिकीय असंतुलन उत्पन्न होता है। इस असंतुलन के परिणामस्वरूप जलवायु परिवर्तन, वनस्पति और जीवों का विलुप्त होना, और पारिस्थितिक तंत्र के अन्य नुकसान हो सकते हैं, जो जन आंदोलनों का कारण बनते हैं।
2. मृदा अपरदन, रोजगार के अवसरों की कमी, और वनों की कटाई: ये पर्यावरण संबंधी समस्याएँ हैं, लेकिन ये आंदोलनों के जन्म के मुख्य कारण नहीं हैं। ये समस्याएँ विकास की गतिविधियों से जुड़ी हो सकती हैं, लेकिन जन आंदोलनों का मुख्य कारण पारिस्थितिकीय संतुलन और विकास के बीच का द्वन्द्व होता है।
निष्कर्ष: पर्यावरण संबंधी जन आंदोलनों का मुख्य कारण पारिस्थितिक संतुलन और विकास की प्राथमिकताओं के बीच का द्वन्द्व है, जो तब उत्पन्न होता है जब प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन किया जाता है और पर्यावरण को नुकसान पहुँचता है।
Question 25:
चिपको आंदोलन की आंदोलनकारी महिलाओं ने ठूंठ लकड़ियों के क्या लाभ बताए?
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चिपको आंदोलन की आंदोलनकारी महिलाओं ने बताया कि ठूंठ लकड़ियों का मुख्य लाभ यह है कि वे पौधों की अगली पीढ़ी के लिए भूमि की उर्वरता बढ़ाती हैं। वे पुराने और जर्जर पेड़ों को प्राकृतिक रूप से विघटित होकर मिट्टी में मिल जाने देती हैं, जिससे वह मिट्टी को उर्वर बनाती है।
1. ठूंठ लकड़ियाँ: यह लकड़ियाँ पुराने और मरने वाले पेड़ों से प्राप्त होती हैं, जो प्राकृतिक रूप से विघटित होकर मिट्टी में मिल जाती हैं। इस प्रक्रिया से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जिससे आने वाली पीढ़ी के पौधों को बढ़ने में मदद मिलती है।
2. अन्य विकल्प: अन्य विकल्प जो दिए गए हैं, वे चिपको आंदोलन के विचारों से मेल नहीं खाते। आंदोलन में यह लाभ बताया गया था कि ठूंठ लकड़ियाँ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करती हैं, लेकिन अन्य विकल्प उनके लाभों के बारे में नहीं बताते।
निष्कर्ष: चिपको आंदोलन में महिलाओं ने ठूंठ लकड़ियों के प्राकृतिक लाभों को बताया, जो मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाते हैं और आने वाली पीढ़ी के पौधों के लिए लाभकारी होते हैं।
Question 26:
In the following sentence, identify the segment which contains a grammatical error.
She picked up the books lie on the table and put them on the shelf.
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The verb "lie" is an intransitive verb, meaning it does not take a direct object and describes the state of being in a certain position. The correct form of "lie" when describing a state of rest or position is its present participle, "lying," which functions as a gerund in this case.
The sentence describes the books being in a state of rest on the table. The verb "lie" in this context is used to indicate that the books are resting or situated on the table, which requires the present participle form, "lying," to properly describe their current position.
Thus, the sentence should read: "The books are lying on the table," where "lying" functions as a gerund, indicating the ongoing state of the books.
Question 27:
Match the idioms and phrases in List-I with their meanings in List-II:
| List-I (Idioms/Phrases) | List-II (Meaning) |
|---|---|
| (A) Bull in a China shop | (1) facing imminent danger |
| (B) Play ducks and drakes | (2) to have selfish interest |
| (C) To have an axe to grind | (3) to squander money |
| (D) Sword of Damocles | (4) one who causes damage |
Choose the correct answer from the options given below:
View Solution
The correct matches are:
- Bull in a China shop: One who causes damage.
- Play ducks and drakes: To squander money.
- To have an axe to grind: To have a selfish interest.
- Sword of Damocles: Facing imminent danger.
Question 28:
Choose the option closest in meaning to the italicised word in the following sentence:
He could rise to this stature because of his invincible courage.
View Solution
The word ‘invincible’ means ‘impossible to defeat or overcome,’ which is best matched by ‘unbeatable.’ The other options, ‘inviolable’ (not able to be violated), ‘unmanageable’ (not able to be managed), and ‘immeasurable’ (impossible to measure) are not suitable synonyms.
Question 29:
Match the idioms/phrases given in List-I with their meanings in List-II:
| List-I (Idioms/Phrases) | List-II (Meaning) |
|---|---|
| (A) Forty winks | (1) to dwell excessively on a pet theory |
| (B) Ride a hobby horse | (2) Prevent something or someone from harming you |
| (C) Keep at bay | (3) To resist strongly |
| (D) To put one’s foot down | (4) A short sleep during the day |
Choose the correct answer from the options given below:
View Solution
The correct matches are:
- Forty winks: A short sleep during the day.
- Ride a hobby horse: To dwell excessively on a pet theory.
- Keep at bay: Prevent something or someone from harming you.
- To put one’s foot down: To resist strongly.
Question 30:
Which of the following sentences have an error?
Choose the correct answer from the options given below:
View Solution
Sentences (A) and (C) have grammatical errors:
- (A): ‘News’ is an uncountable noun, so it should be ‘bad news’ instead of ‘a bad news.’
- (C): ‘Scissors’ is plural, so it should be ‘are’ instead of ‘is.’
Sentences (B) and (D) are grammatically correct.
Question 31:
Choose the correct meaning of the idiom/phrase given in italics in the following sentence:
It is difficult to have a sensible discussion with her as she often flies off at a tangent.
View Solution
The idiom ‘flies off at a tangent’ means to suddenly start talking about something different or irrelevant. Therefore, the correct meaning is 'starts discussing something irrelevant.'
Question 32:
Choose the correct meaning of the idiom/phrase given in italics in the sentence:
Sachin is an indifferent student. He is often all at sea.
View Solution
The idiom ‘all at sea’ means to be completely confused or lost. Therefore, the best match for the meaning of the idiom in this sentence is 'completely confused.'
Question 33:
The italicised part of the following sentence may need improvement. Choose the correct alternative to improve the sentence:
They told me that they had already sold out all their belongings.
View Solution
The original sentence is grammatically correct. The past perfect tense “had sold out” is used correctly, showing that the selling action completed before they informed the speaker. The other options change the tense and don’t make sense in context.
Question 34:
The italicised part of the following sentence may need improvement. Choose the correct alternative to improve the sentence:
Socrates was one of the wisest man that ever lived.
View Solution
The correct phrase is ‘one of the wisest men’, as 'men' is the plural of 'man'. Here, we need a plural form because ‘one of’ implies that Socrates is among many wise men. Other options use the incorrect form.
Question 35:
Choose the option that is the passive form of the following sentence:
They need 104 more runs to win the match.
View Solution
The passive form shifts the focus to the runs, hence “104 more runs are needed...” is the passive voice of the active sentence “They need 104 more runs...”. Other options are not passive voice sentences.
Question 36:
Choose the correct alternative to fill in the blank space in the following statement, to make it a meaningful and grammatically correct sentence:
Overlooking the fact that water scarcity intensifies during summer,
View Solution
Option 4 provides the most logical and relevant ending to the sentence. It highlights the counterintuitive action of wasting water despite water scarcity. The other options aren’t as relevant or logical in this context.
Question 37:
Choose the option that best expresses the sentence given below in direct speech:
The policeman enquired where his helmet was.
View Solution
Option 1 correctly transforms the indirect speech into direct speech with the correct tense and question form. The original sentence is a past tense indirect question, so the direct question should use present tense with the proper structure.
Question 38:
The sentences (A), (B), (C), and (D) are in jumbled order. Choose the appropriate alternative to rearrange them in the correct order to frame a coherent and meaningful paragraph:
- Due to the movie, tourists started coming to the beach there.
- Maya Bay in Thailand was in the media in 1999 when Hollywood arrived there to film ‘The Beach’.
- One of the film’s actors was Leonardo Di Caprio.
- As many as 4,000 visitors would arrive on boats every day.
View Solution
The correct order is (B), (C), (A), (D). The paragraph begins with the introduction of the movie, mentions the actor, describes the tourist influx due to the movie, and concludes with the scale of the impact.
Question 39:
The sentences (A), (B), (C), and (D) are in jumbled order. Choose the appropriate alternative to rearrange them in the correct order to frame a coherent and meaningful paragraph:
- However, different rulers and governments dealt with the different groups in a compartmentalised manner.
- Various situational political changes have taken place over the past three and a half centuries.
- This tendency resulted in a deeply embedded fragmented South-African society which became even more prominent in the period 1948 until the commencement of the new constitution on May 10, 1994.
- South Africa is a racially divided society since the first European settlers arrived in 1652.
View Solution
The correct order is (D), (B), (A), (C), which builds a logical paragraph describing South Africa’s history. The sentence should follow a chronological order for it to be a coherent paragraph. First, the history of divided society, second various changes that took place, third their compartmentalised approach and lastly, the result of the changes.
Question 40:
The sentences (A), (B), (C), and (D) are in jumbled order. Choose the appropriate alternative to rearrange them in the correct order to frame a coherent and meaningful paragraph:
- But categorisation schemes are not always helpful in determining what one can do with or about organisational culture.
- Much of the literature on organisational culture is focused on categorising types of cultures.
- It has taken the understanding of corporate culture far beyond what was called "the informal organisation".
- This literature is both interesting and informative.
View Solution
The correct order is (B), (C), (D), (A). The paragraph begins by discussing the focus of the literature, describes its advancements, evaluates its quality, and concludes with its limitations.
Question 41:
The sentences (A), (B), (C), and (D) are in jumbled order. Choose the appropriate alternative to rearrange them in the correct order to frame a coherent and meaningful paragraph:
(A) He became rich and built on their father’s business.(B) After their father’s death, the greedy Kasim married a wealthy woman.
(C) Ali Baba married a poor woman and settled into the trade of a woodcutter.
(D) Ali Baba and his elder brother Kasim were the sons of a merchant.
View Solution
The correct order is (D), (B), (A), (C). It starts by introducing the brothers, then explains Kasim's actions, followed by his wealth from the father’s business, and finally details Ali Baba's modest life as a woodcutter.
Question 42:
Match List-I with List-II:
| List-I | List-II |
|---|---|
| (A) Entomology | (III) The study of insects |
| (B) Epigraphy | (IV) The study of inscriptions |
| (C) Ethology | (I) The study of animal behaviour |
| (D) Ethnology | (II) The study of human races |
View Solution
The correct matches are:
(A) Entomology: The study of insects.
(B) Epigraphy: The study of inscriptions.
(C) Ethology: The study of animal behaviour.
(D) Ethnology: The study of human races.
Question 43:
Match List-I with List-II:
| List-I | List-II |
|---|---|
| (A) Psychiatrist | (II) Specialist of mental disorders |
| (B) Psychologist | (IV) Specialist of human mind |
| (C) Ornithologist | (I) Specialist of birds |
| (D) Horticulturist | (III) Specialist of gardens |
View Solution
The correct matches are:
(A) Psychiatrist: Specialist of mental disorders.
(B) Psychologist: Specialist of human mind.
(C) Ornithologist: Specialist of birds.
(D) Horticulturist: Specialist of gardens.
Question 44:
Choose the correctly spelt word/words:
- (A) Counterfiet
- (B) Siege
- (C) Deceive
- (D) Freight
View Solution
The correctly spelt words are:
(B) Siege
(C) Deceive
(D) Freight
(A) Counterfiet is misspelled. The correct spelling is Counterfeit.
Question 45:
Choose the correctly spelt word/words:
(A) Malignant(B) Impertinant
(C) Independent
(D) Neglegent
View Solution
The correctly spelt words are:
(A) Malignant
(C) Independent
(B) Impertinant is misspelled; the correct spelling is Impertinent.
(D) Neglegent is misspelled; the correct spelling is Negligent.
Question 46:
Choose the correctly spelt word/words:
(A) Hastten
(B) Debut
(C) Whistle
(D) Depot
View Solution
The words ‘Debut’, ‘Whistle’, and ‘Depot’ are spelled correctly. ‘Hastten’ is misspelled, the correct spelling is ‘Hasten’.
Question 47:
Which word does the C in MOOC stand for?
View Solution
In MOOC, the C stands for Course. MOOC is an acronym for Massive Open Online Course.
Question 48:
Which subject was the course that the author completed on MOOC related to?
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The text states that the author took a course related to ‘clinical trials and ethical practices’, which is a field within biology and medicine and was the only ‘Biology related course open at the time’.
Question 49:
What aspect of MOOC excited the author?
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The passage explicitly says that the author ‘did see hope in that sometime in the future I’d be able to get a glimpse of what classes are like in the hallowed halls of major educational institutions around the world’, meaning that the author was excited at the fact that he could take a course from the university he dreamt of.
Question 50:
Coursera was founded by professors from which university?
View Solution
The passage states directly that Coursera, the online education platform, ‘was founded by two Stanford professors’. The other options are mentioned universities but are not the universities of the founders of Coursera.
Question 51:
'भू+उर्ध्वम्' इत्यस्य सन्धौ कि रूपम्?
View Solution
'भू+उर्ध्वम्' की संधि होने पर 'भूर्ध्वम्' रूप बनता है। यह यण् संधि का उदाहरण है। इस संधि में, 'उ' के बाद कोई भिन्न स्वर आने पर 'व्' हो जाता है। यहाँ 'उ' के बाद 'ऊ' आने से 'व्' और 'र' मिलकर 'र्व' बनाते हैं जिससे 'भूर्ध्वम्' रूप बनता है।
Question 52:
'पितृ' शब्दस्य प्रथमा-बहुवचने किं रूपम्?
View Solution
'पितृ' शब्द का प्रथमा विभक्ति बहुवचन में रूप 'पितारः' होता है। 'पितृ' एक रिकारांत शब्द है, जिसका अर्थ 'पिता' होता है। प्रथमा विभक्ति में 'पिता' के रूप इस प्रकार होते हैं:
1. एकवचन: 'पिता' – यह रूप एक ही व्यक्ति के लिए होता है।
2. द्विवचन: 'पितरौ' – यह रूप दो व्यक्तियों के लिए होता है।
3. बहुवचन: 'पितारः' – यह रूप तीन या अधिक व्यक्तियों के लिए होता है।
निष्कर्ष: 'पितृ' शब्द का प्रथमा विभक्ति में रूप 'पितारः' बहुवचन के लिए होता है, और इस शब्द का उपयोग पिता के संदर्भ में किया जाता है।
Question 53:
'कृ' धातोः विधिलिलकारे उत्तमपुरुषैकवचने किं रूपम्?
View Solution
'कृ' धातु का विधिलिङ् लकार उत्तमपुरुष एकवचन में रूप 'कुर्याम्' होता है। विधिलिङ् लकार इच्छा या संभावना को व्यक्त करता है और इसे आदेश, प्रार्थना या संभावना के रूप में प्रयोग किया जाता है। उत्तमपुरुष में 'मैं' के लिए इसका प्रयोग होता है।
विधिलिङ् लकार के रूप इस प्रकार होते हैं:
1. उत्तमपुरुष एकवचन: 'कुर्याम्' – यह रूप 'मैं' के लिए प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ होता है "मैं करूंगा/करूंगी"।
2. प्रथमपुरुष एकवचन: 'कुर्यात्' – यह रूप 'वह' के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "वह करे"।
3. प्रथमपुरुष बहुवचन: 'कुर्युः' – यह रूप 'हम' के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "हम करें"।
4. उत्तमपुरुष बहुवचन: 'कुर्याम' – यह रूप 'हम' के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "हम करेंगे"।
निष्कर्ष: 'कृ' धातु का विधिलिङ् लकार विभिन्न पुरुषों और वचन के रूपों में भिन्न होता है। 'कुर्याम्' उत्तमपुरुष एकवचन में होता है, जबकि अन्य रूप 'कुर्यात्', 'कुर्युः' और 'कुर्याम' विभिन्न पुरुषों और वचनों के लिए होते हैं।
Question 54:
'रामस्य गृहम् अत्रैव अस्ति' इत्यत्र कति अव्ययपदानि सन्ति?
View Solution
दिए गए वाक्य 'रामस्य गृहम् अत्रैव अस्ति' में दो अव्यय पद हैं: 'अत्र' और 'एव'। अव्यय पद वे होते हैं जिनमें लिंग, वचन, कारक आदि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता है। 'रामस्य' और 'गृहम्' संज्ञा पद हैं और 'अस्ति' क्रिया पद है। 'अत्र' का अर्थ है 'यहाँ' और 'एव' का अर्थ है 'ही'।
Question 55:
'साधर्म्यम् ....................भेदे' - रिक्तस्थानं पूरयत ।
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दिए गए रिक्त स्थान में सही शब्द 'उपमा' है। यह एक प्रसिद्ध संस्कृत वाक्य है, 'साधर्म्यम् उपमा भेदे' जिसका अर्थ है कि जहाँ भेद होने पर भी समानता दिखाई जाए, वहाँ उपमा अलंकार होता है। अनुप्रास, रूपक और अनन्वय अन्य अलंकार हैं जो भिन्न प्रकार से समानता या अलंकरण दर्शाते हैं।
Question 56:
मन्दाक्रान्ताच्छन्दसि प्रतिपादं कति वर्णाः भवन्ति?
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मन्दाक्रान्ता छन्द में प्रत्येक पाद (चरण) में 17 वर्ण होते हैं। मन्दाक्रान्ता एक वार्णिक छंद है जो संस्कृत काव्य में प्रयुक्त होता है। यह एक जटिल छंद है जिसमें गुरु और लघु वर्णों का एक विशेष क्रम होता है।
Question 57:
दुष्यन्तशकुन्तलयोः पुनर्मेलनं कस्मिन् अङ्के भवति ?
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दुष्यन्त और शकुंतला का पुनर्मिलन कालिदास द्वारा रचित नाटक 'अभिज्ञानशाकुन्तलम्' के सप्तम अंक में होता है। इस नाटक में, राजा दुष्यंत और शकुंतला का प्रेम, विरह और अंततः पुनर्मिलन का वर्णन है। यह संस्कृत साहित्य का एक प्रसिद्ध नाटक है।
Question 58:
'मनस्' शब्दस्य षष्ठी-एकवचने किं रूपम् ?
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'मनस्' शब्द का षष्ठी विभक्ति एकवचन में रूप 'मनसः' होता है। 'मनस्' एक सकारान्त नपुंसकलिंग शब्द है जिसका अर्थ 'मन' होता है। षष्ठी विभक्ति संबंध कारक को दर्शाती है, और एकवचन में 'मन' का रूप 'मनसः' होता है। अन्य रूप जैसे 'मनांसि' प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के बहुवचन हैं, 'मन्युः' प्रथमा विभक्ति का एकवचन है, और 'मनसि' सप्तमी विभक्ति का एकवचन है।
Question 59:
'बालः शनैः दुग्धं पिबति' इत्यत्र क्रियापदं किमस्ति ?
View Solution
दिए गए वाक्य 'बालः शनैः दुग्धं पिबति' में क्रियापद 'पिवति' है, जिसका अर्थ है 'पीता है'। क्रियापद वह शब्द होता है जो वाक्य में कार्य का बोध कराता है। 'बालः' कर्ता पद है, 'दुग्धम्' कर्म पद है, और 'शनैः' क्रिया विशेषण पद है।
Question 60:
'कुर्वाणः' इति पदे कः प्रत्ययः ?
View Solution
'कुर्वाणः' पद में शानच् प्रत्यय लगा है। शानच् प्रत्यय वर्तमान काल में क्रिया करने वाले को दर्शाता है। 'कुर्वाणः' का अर्थ 'करता हुआ' होता है। 'क्त' प्रत्यय भूतकाल के क्रिया रूप में प्रयोग होता है, 'शतृ' प्रत्यय वर्तमान काल के लिए परस्मैपद में और 'क्तवतु' प्रत्यय भूतकाल को दर्शाता है।
Question 61:
'भूतबलिः' इत्यस्मिन् पदे कः समासः ?
View Solution
'भूतबलिः' पद में तत्पुरुष समास है। तत्पुरुष समास में दूसरा पद प्रधान होता है और पहला पद कारक चिह्न के साथ जुड़ा होता है। यहाँ 'भूतेभ्यः बलि' (भूतों के लिए बलि) होने के कारण चतुर्थी तत्पुरुष समास है। द्वन्द्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं, द्विगु में पहला पद संख्यावाचक होता है, और बहुव्रीहि में कोई भी पद प्रधान नहीं होता।
Question 62:
'आगमः' अस्मिन् पदे कः प्रत्ययः ?
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'आगमः' पद में 'घञ्' प्रत्यय लगा है। घञ् प्रत्यय भाववाचक संज्ञा बनाने के लिए धातुओं के साथ लगता है। 'आगमः' का अर्थ 'आना' होता है। 'क्त' प्रत्यय भूतकाल में क्रिया को दर्शाता है, 'अच्' प्रत्यय कर्ता का बोध कराता है, और 'ल्युट्' प्रत्यय भी भाववाचक संज्ञा बनाने में प्रयुक्त होता है, लेकिन 'आगमः' के लिए सही प्रत्यय 'घञ्' है।
Question 63:
विभक्तिक्रमे साधनीयः
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सही विभक्ति क्रम है: '(ब) कः, कौ, के' (प्रथमा विभक्ति), '(द) कम्, कौ, कान्' (द्वितीया विभक्ति), '(अ) केन, काभ्याम्, कैः' (तृतीया विभक्ति), और '(स) कस्य, कयोः, केषाम्' (षष्ठी विभक्ति)। यह सही विभक्ति क्रम ‘क’ शब्द के रूपों को दर्शाता है।
Question 64:
भवत्-शब्दस्य पुंलिङ्गैकवचनस्य क्रमं चिनुत -
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'भवत्' शब्द के पुल्लिंग एकवचन के रूप इस क्रम में हैं: '(ब) भवान्' (प्रथमा), '(अ) भवता' (तृतीया), '(द) भवते' (चतुर्थी) और '(स) भवति' क्रियापद है। यह 'भवत्' शब्द के विभिन्न रूपों को दर्शाता है।
Question 65:
लकाराणां क्रमं चिनुत -
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लकारों का सही क्रम है: '(द) लट्' (वर्तमान काल), '(स) लिट्' (परोक्ष भूतकाल), '(ब) लुट्' (अनद्यतन भविष्यत् काल) और '(अ) लृट्' (सामान्य भविष्यत् काल)। यह क्रम संस्कृत व्याकरण में लकारों के प्रयोग को दर्शाता है।
Question 66:
अव्ययीभावसमासस्य उदाहरणानि -
(अ) यथाशक्ति
(ब) राजपुरुषः
(स) उपकृष्णम्
(द) घनश्यामः
आधोलिखतानां विकल्पानां मध्ये समीचीनम् उत्तरं चिनुत-
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अव्ययीभाव समास के उदाहरण हैं 'यथाशक्ति' और 'उपकृष्णम्'। 'यथाशक्ति' का अर्थ 'शक्ति के अनुसार' होता है और 'उपकृष्णम्' का अर्थ 'कृष्ण के समीप' होता है। 'राजपुरुषः' तत्पुरुष समास का और 'घनश्यामः' कर्मधारय समास का उदाहरण है।
Question 67:
'पीताम्बरः' इति कस्य समासस्य उदाहरणमस्ति ?
View Solution
'पीताम्बरः' शब्द बहुव्रीहि समास का उदाहरण है। बहुव्रीहि समास में कोई भी पद प्रधान नहीं होता, बल्कि यह किसी अन्य वस्तु या व्यक्ति को संदर्भित करता है। 'पीताम्बरः' का अर्थ है 'पीले वस्त्र धारण करने वाला', जो विष्णु या कृष्ण को संदर्भित करता है। अन्य समास जैसे अव्ययीभाव, द्वंद्व और द्विगु में ऐसा नहीं होता।
Question 68:
सूची-। सूची-द्वितीयेन सह मेलनं कुर्वन्तु-
| (अ) यण्-सन्धिः | (1) उपेन्द्रः |
| (ब) गुण-सन्धिः | (2) नायकः |
| (स) दीर्घ-सन्धिः | (3) यद्यपि |
| (द) अयादि-सन्धिः | (4) विद्यालयः |
अधोलिखितेषु विकल्पेषु समीचीनम् उत्तरं चिनुत -
View Solution
सही मिलान है: ‘यद्यपि’ यण् संधि का, ‘उपेन्द्रः’ गुण संधि का, ‘विद्यालयः’ दीर्घ संधि का और ‘नायकः’ अयादि संधि का उदाहरण है। स्वर संधि के नियमों का ज्ञान शब्दों की संरचना और उनके संधि को समझने में सहायक होता है।
Question 69:
नदीशब्दस्य तृतीयाविभक्तौ रूपाणि भवन्ति -
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'नदी' शब्द के तृतीया विभक्ति में रूप हैं: 'नद्या' (एकवचन), 'नदीभ्याम्' (द्विवचन), और 'नदीभिः' (बहुवचन)। 'नदीम्' द्वितीया विभक्ति का एकवचन रूप है, यह तृतीया विभक्ति का रूप नहीं है। विभक्तियों का ज्ञान वाक्यों को सही रूप से समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
Question 70:
सेव्-धातोः लोट्लकारमध्यमपुरुषे रूपाणि भवन्ति -
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'सेव्' धातु के लोट् लकार मध्यम पुरुष में रूप इस प्रकार हैं:
- 'सेवस्व' (एकवचन): यह रूप एक व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "तुम सेवा करो"।
- 'सेवेथाम्' (द्विवचन): यह रूप दो व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "तुम दोनों सेवा करो"।
- 'सेवध्वम्' (बहुवचन): यह रूप अधिकतम व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे "तुम लोग सेवा करो"।
'सेवै' उत्तम पुरुष एकवचन का रूप है, जो एक व्यक्ति के लिए आदेश देने या अनुमति देने के संदर्भ में प्रयोग होता है, जैसे "मैं सेवा करता हूँ"।
लोट् लकार का प्रयोग आज्ञा या अनुमति के अर्थ में किया जाता है, जैसे "सेवा करो" या "आज्ञा दी जाती है"।
निष्कर्ष: 'सेव्' धातु के लोट् लकार में विभिन्न रूप होते हैं, जो अलग-अलग पुरुषों और वचनों में प्रयोग किए जाते हैं, और यह आज्ञा या अनुमति देने के लिए इस्तेमाल होते हैं।
Question 71:
सूची-। सूची-द्वितीयेन सह मेलनं कुर्वन्तु-
| सूची-। | सूची-।। |
|---|---|
| (अ) कालिदासः | (1) किरातार्जुनीयम् |
| (ब) श्रीहर्षः | (2) शिशुपालवधम् |
| (स) भारविः | (3) अभिज्ञानशाकुन्तलम् |
| (द) माघः | (4) नैषधीयचरितम् |
अधोलिखितेषु विकल्पेषु समीचीनम् उत्तरं चिनुत -
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सही मिलान है: ‘कालिदासः’ अभिज्ञानशाकुन्तलम्, ‘श्रीहर्षः’ नैषधीयचरितम्, ‘भारविः’ किरातार्जुनीयम् और ‘माघः’ शिशुपालवधम् के रचनाकार हैं। यह संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध रचनाकारों और उनकी रचनाओं का मेल है।
Question 72:
सूचीद्वयमाश्रित्य परस्परं मेलनं कुरुत -
| सूची-। | सूची-॥ |
|---|---|
| (अ) यथाशक्ति | (1) द्वन्द्वः |
| (ब) गोहितम् | (2) अव्ययीभावसमासः |
| (स) कण्ठेकालः | (3) तत्पुरुषसमासः |
| (द) रामकृष्णौ | (4) बहुव्रीहिः |
अधोलिखितेषु विकल्पेषु समीचीनमुत्तरं चिनुत -
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सही मिलान है:
1. ‘यथाशक्ति’ - अव्ययीभाव समास: इसमें पहला पद अव्यय होता है और समस्त पद क्रियाविशेषण का कार्य करता है। 'यथा' (जैसा) और 'शक्ति' (शक्ति) के मिलने से यह 'यथाशक्ति' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है 'जितना संभव हो'।
2. ‘गोहितम्’ - तत्पुरुष समास: इसमें दो शब्दों का मिलन होता है, जहां पहला शब्द प्रधान होता है। 'गौ' (गाय) और 'हित' (लाभ) के मिलकर 'गोहितम्' शब्द बनता है, जिसका अर्थ होता है 'गाय का लाभ' या 'गाय के लिए लाभकारी'।
3. ‘कण्ठेकालः’ - बहुव्रीहि समास: इस समास में दो पदों का मिलन होता है, जिसमें दोनों पद मिलकर कोई नया अर्थ उत्पन्न करते हैं। 'कण्ठ' (गला) और 'काल' (समय) का मिलकर 'कण्ठेकालः' शब्द बनता है, जिसका अर्थ होता है 'गले का समय' (अर्थात गाने या बोलने के लिए उचित समय)।
4. ‘रामकृष्णौ’ - द्वन्द्व समास: इसमें दो समान पद होते हैं और दोनों का मिलन होता है, जो दो तत्वों के बीच का संबंध दर्शाता है। 'राम' और 'कृष्ण' के मिलकर 'रामकृष्णौ' शब्द बनता है, जिसका अर्थ होता है 'राम और कृष्ण' (द्वय का संबंध दर्शाता है)।
निष्कर्ष: संस्कृत में समास शब्दों के अर्थ और उनके प्रकारों को जानने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, क्योंकि समास के माध्यम से शब्दों के बीच के संबंध और अर्थ को समझा जा सकता है।
Question 73:
नीतिशतकं केन रचितम् ?
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नीतिशतक की रचना भर्तृहरि द्वारा की गई है। भर्तृहरि संस्कृत साहित्य के प्रसिद्ध कवि और विद्वान थे। उनके द्वारा रचित अन्य प्रसिद्ध कृतियों में शृंगारशतक और वैराग्यशतक शामिल हैं।
1. नीतिशतक: यह काव्यशतक भर्तृहरि के नैतिक और जीवन के सिद्धांतों को दर्शाता है। इसमें उन्होंने जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे रिश्ते, सम्मान, और नैतिकता पर गहरे विचार प्रस्तुत किए हैं।
2. शृंगारशतक: यह काव्यशतक प्रेम और शृंगार पर आधारित है, जिसमें भर्तृहरि ने प्रेम के भावों और सुंदरता का चित्रण किया है।
3. वैराग्यशतक: इसमें भर्तृहरि ने संसार की अस्थिरता और वैराग्य (त्याग) के महत्व पर प्रकाश डाला है। यह शतक जीवन के भौतिक सुखों से ऊपर उठने की प्रेरणा देता है।
निष्कर्ष: भर्तृहरि की रचनाएँ संस्कृत साहित्य में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, और उन्होंने जीवन के विभिन्न पहलुओं को अपनी कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया है।
Question 74:
एषः कुत्र विचरति?
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संदर्भित गद्यांश के अनुसार, 'एषः' (यह) 'संसारे' (संसार में) 'विचरति' (घूमता है)। वाक्य का अर्थ है "यह संसार में घूमता है"।
वाक्य में पदों की स्थिति इस प्रकार है:
1. 'एषः': यह कर्ता पद है, जो वाक्य में 'यह' का अर्थ देता है और क्रिया का करने वाला है।
2. 'संसारे': यह स्थान (आधिकार) पद है, जो यह दर्शाता है कि क्रिया कहाँ हो रही है (संसार में)।
3. 'विचरति': यह क्रियापद है, जो क्रिया 'घूमना' को व्यक्त करता है और यह कर्ता के द्वारा किया जा रहा कार्य है।
निष्कर्ष: वाक्य में 'एषः' कर्ता, 'संसारे' स्थान और 'विचरति' क्रिया है, जो पूरे वाक्य का अर्थ 'यह संसार में घूमता है' बनाते हैं।
Question 75:
'यः मनुष्यः न तु साहित्यं पठति' इत्यत्र कि क्रिया-पदम् ?
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दिए गए वाक्य 'यः मनुष्यः न तु साहित्यं पठति' में 'पठति' क्रियापद है। 'पठति' का अर्थ है 'पढ़ता है'। क्रियापद वह शब्द होता है जो वाक्य में क्रिया या कार्य को दर्शाता है, जैसे कि यहाँ 'पढ़ना' का कार्य दर्शाया गया है।
वाक्य में अन्य पदों की स्थिति इस प्रकार है:
1. 'यः': यह सर्वनाम पद है, जो वाक्य में 'जो' या 'वह' का अर्थ दर्शाता है।
2. 'मनुष्यः': यह संज्ञा पद है, जो 'मनुष्य' का अर्थ देता है और वाक्य में कर्ता के रूप में कार्य करता है।
3. 'साहित्यम्': यह कर्म पद है, जो 'साहित्य' का रूप है और वह क्रिया के द्वारा प्रभावित होता है।
निष्कर्ष: वाक्य में 'पठति' क्रियापद है, जो क्रिया को दर्शाता है, और 'यः', 'मनुष्यः', और 'साहित्यम्' अन्य विभिन्न पदों के रूप में कार्य कर रहे हैं।




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