Bihar Board Class 12 Political Science Question Paper 2023 PDF is available for download here. The Political Science exam was conducted on February 2, 2023 in the Evening Shift from 1:45 PM to 5:00 PM. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be easy to moderate.
Bihar Board Class 12 Political Science Question Paper 2023 with Solutions
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निम्नलिखित में से कौन एक भारत की विदेश नीति का मुख्य आधार है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
भारत की विदेश नीति स्वतंत्रता के बाद से ही कुछ मौलिक सिद्धांतों पर आधारित रही है। इसका मुख्य उद्देश्य भारत की संप्रभुता को बनाए रखना, क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना और तीव्र आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
Step 2: Detailed Explanation:
(a) गुटनिरपेक्षता (Non-alignment): यह भारत की विदेश नीति का सबसे प्रमुख और केंद्रीय आधार रहा है। इसका अर्थ है कि भारत शीत युद्ध के दौरान किसी भी सैन्य गुट (संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट और सोवियत संघ के नेतृत्व वाले पूर्वी गुट) में शामिल नहीं हुआ। भारत ने स्वतंत्र रूप से विदेशी मामलों पर निर्णय लेने की नीति अपनाई।
(b) अमेरिका से दोस्ती: भारत के अमेरिका के साथ संबंध हैं, लेकिन यह विदेश नीति का एकमात्र या मुख्य आधार नहीं है। संबंध समय के साथ बदलते रहे हैं।
(c) चीन से दोस्ती: चीन भारत का एक महत्वपूर्ण पड़ोसी है, और शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना एक लक्ष्य है, लेकिन यह विदेश नीति का मुख्य आधार नहीं है, खासकर सीमा विवादों को देखते हुए।
(d) सोवियत संघ से दोस्ती: शीत युद्ध के दौरान भारत के सोवियत संघ के साथ घनिष्ठ संबंध थे, लेकिन यह दोस्ती भी गुटनिरपेक्षता की व्यापक नीति के तहत थी, न कि नीति का एकमात्र आधार।
Step 3: Final Answer:
उपरोक्त विकल्पों में से, गुटनिरपेक्षता वह सिद्धांत है जो दशकों से भारत की विदेश नीति का मार्गदर्शन करता रहा है। इसलिए, यह सबसे उपयुक्त उत्तर है।
Quick Tip: गुटनिरपेक्षता के अलावा, 'पंचशील' के सिद्धांत (शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत) भी भारत की विदेश नीति के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। इन्हें भी याद रखें।
चीन ने भारत पर अचानक आक्रमण किया था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के स्वतंत्रता के बाद के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना - चीन के साथ युद्ध के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
चीन और भारत के बीच सीमा विवाद को लेकर 1962 में एक बड़ा युद्ध हुआ था। 20 अक्टूबर, 1962 को, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने लद्दाख और तत्कालीन नॉर्थ-ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) में एक साथ हमले शुरू किए। यह संघर्ष लगभग एक महीने तक चला और 21 नवंबर, 1962 को चीन द्वारा एकतरफा युद्धविराम की घोषणा के साथ समाप्त हुआ। इस घटना को भारत-चीन युद्ध के रूप में जाना जाता है।
अन्य विकल्प:
(A) 1948: इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर को लेकर पहला युद्ध हुआ।
(C) 1965: इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच दूसरा बड़ा युद्ध हुआ।
(D) 1971: इस वर्ष भारत और पाकिस्तान के बीच तीसरा युद्ध हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ।
Step 3: Final Answer:
चीन ने भारत पर 1962 में आक्रमण किया था।
Quick Tip: भारत के प्रमुख युद्धों की तारीखें याद रखना महत्वपूर्ण है: 1947-48 (पाकिस्तान), 1962 (चीन), 1965 (पाकिस्तान), 1971 (पाकिस्तान), और 1999 (कारगिल, पाकिस्तान)।
लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिये कितनी सीटें आरक्षित हैं ?
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Step 1: Understanding the Concept:
भारतीय संविधान समाज के कमजोर वर्गों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए लोकसभा (संसद का निचला सदन) में सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। यह प्रश्न विशेष रूप से अनुसूचित जनजातियों (ST) के लिए आरक्षित सीटों की संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 330 लोकसभा में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए सीटों के आरक्षण का प्रावधान करता है। यह आरक्षण राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उनकी जनसंख्या के अनुपात के आधार पर किया जाता है।
वर्तमान परिसीमन के अनुसार, लोकसभा की कुल 543 सीटों में से:
84 सीटें अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित हैं।
47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं।
कुल मिलाकर 131 सीटें आरक्षित हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, लोकसभा में अनुसूचित जनजाति के लिए 47 सीटें आरक्षित हैं।
Quick Tip: अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) दोनों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या याद रखें। SC के लिए 84 और ST के लिए 47। ये आंकड़े अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
किस अनुच्छेद के अन्तर्गत पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया गया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान में पंचायती राज संस्थाओं को दिए गए संवैधानिक दर्जे से संबंधित अनुच्छेद के बारे में है। पंचायती राज प्रणाली स्थानीय स्वशासन की एक महत्वपूर्ण प्रणाली है।
Step 2: Detailed Explanation:
पंचायतों को 73वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया था। इस संशोधन ने संविधान में एक नया भाग-IX जोड़ा, जिसका शीर्षक 'पंचायत' है।
इस भाग में अनुच्छेद 243 से 243-O तक के प्रावधान शामिल हैं, जो पंचायतों की संरचना, चुनाव, शक्तियों और जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हैं। इस प्रकार, पंचायतों से संबंधित संवैधानिक प्रावधान अनुच्छेद 243 से शुरू होते हैं।
Step 3: Final Answer:
पंचायतों को अनुच्छेद 243 के तहत संवैधानिक दर्जा दिया गया है।
Quick Tip: 73वां संशोधन अधिनियम (पंचायतों के लिए) और 74वां संशोधन अधिनियम (नगरपालिकाओं के लिए) दोनों ही बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनके वर्ष (1992) और संबंधित भागों (भाग IX और भाग IX-A) को याद रखें।
'नाथूला दर्रा' भारत को उसके किस पड़ोसी देश से जोड़ता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के महत्वपूर्ण भौगोलिक दर्रों और उनकी रणनीतिक स्थिति के बारे में है। दर्रे पहाड़ों के बीच आवागमन के प्राकृतिक मार्ग होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
नाथूला दर्रा हिमालय में स्थित एक पहाड़ी दर्रा है, जो भारतीय राज्य सिक्किम को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र से जोड़ता है। यह समुद्र तल से लगभग 14,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।
1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया था और 2006 में व्यापार के लिए फिर से खोल दिया गया था। यह भारत और चीन के बीच तीन खुली व्यापार चौकियों में से एक है।
Step 3: Final Answer:
नाथूला दर्रा भारत को चीन से जोड़ता है।
Quick Tip: भारत के प्रमुख दर्रों और वे किन राज्यों में स्थित हैं तथा किन क्षेत्रों को जोड़ते हैं, इसकी एक सूची बनाना और याद करना सहायक होता है (जैसे - ज़ोजिला दर्रा, शिपकी ला, लिपुलेख आदि)।
बीस सूत्री कार्यक्रम का उद्देश्य क्या था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
बीस सूत्री कार्यक्रम (Twenty Point Programme - TPP) भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया एक सामाजिक-आर्थिक कार्यक्रम था। इसका उद्देश्य गरीबी और असमानता को कम करना और ग्रामीण भारत में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना था।
Step 2: Detailed Explanation:
बीस सूत्री कार्यक्रम की घोषणा 1975 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा की गई थी। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य गरीबी उन्मूलन ("गरीबी हटाओ") और समाज के कमजोर वर्गों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना था।
यह एक बहुआयामी कार्यक्रम था जिसमें गरीबी, रोजगार, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य, कृषि, भूमि सुधार, और सार्वजनिक वितरण प्रणाली जैसे कई क्षेत्र शामिल थे।
दिए गए विकल्प बहुत विशिष्ट हैं:
(A) शिक्षा में आत्मनिर्भरता: यह कार्यक्रम का एक हिस्सा था, लेकिन एकमात्र उद्देश्य नहीं।
(B) सुरक्षा में आत्मनिर्भरता: यह कार्यक्रम का सीधा उद्देश्य नहीं था।
(C) खाद्यान्न में आत्मनिर्भरता: कृषि उत्पादन बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण बिंदु था, लेकिन यह कार्यक्रम के व्यापक दायरे का केवल एक हिस्सा था।
चूंकि कार्यक्रम का उद्देश्य बहुत व्यापक था और दिए गए विकल्पों में से कोई भी इसके पूर्ण उद्देश्य को समाहित नहीं करता है, इसलिए "इनमें से कोई नहीं" सबसे उपयुक्त उत्तर है। कार्यक्रम का मुख्य जोर गरीबी उन्मूलन पर था, जो विकल्पों में नहीं दिया गया है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से कोई भी बीस सूत्री कार्यक्रम के व्यापक और मुख्य उद्देश्य (गरीबी उन्मूलन) का सटीक वर्णन नहीं करता है। अतः, सही उत्तर (D) इनमें से कोई नहीं है।
Quick Tip: प्रमुख सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों के लॉन्च वर्ष और उनके मुख्य उद्देश्यों को याद रखें, खासकर उन कार्यक्रमों को जिन्होंने भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है।
भारत में वास्तविक कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग कौन करता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
भारत में संसदीय शासन प्रणाली है, जिसमें कार्यपालिका के दो प्रमुख होते हैं - एक नाममात्र (nominal) और एक वास्तविक (real)। यह प्रश्न वास्तविक कार्यकारी शक्तियों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
राष्ट्रपति (President): भारत का राष्ट्रपति राज्य का प्रमुख (Head of State) और नाममात्र का कार्यकारी प्रमुख (de jure executive) होता है। संविधान के अनुसार, संघ की सभी कार्यपालिका शक्तियाँ राष्ट्रपति में निहित होती हैं, लेकिन वह इन शक्तियों का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद की सलाह पर करता है।
प्रधानमंत्री (Prime Minister): प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख (Head of Government) होता है। वह और उसकी मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से वास्तविक कार्यपालिका (de facto executive) का गठन करते हैं। सरकार के सभी महत्वपूर्ण निर्णय प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद द्वारा लिए जाते हैं और वही वास्तविक शक्तियों का प्रयोग करते हैं।
भारत के मुख्य न्यायाधीश: वे न्यायपालिका के प्रमुख हैं, कार्यपालिका के नहीं।
लोकसभा अध्यक्ष: वे लोकसभा के पीठासीन अधिकारी हैं और विधायिका का हिस्सा हैं।
Step 3: Final Answer:
भारत में वास्तविक कार्यपालिका शक्ति का प्रयोग प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद द्वारा किया जाता है, जिसका प्रमुख प्रधानमंत्री होता है।
Quick Tip: संसदीय प्रणाली में 'नाममात्र प्रमुख' (De Jure Head - राष्ट्रपति) और 'वास्तविक प्रमुख' (De Facto Head - प्रधानमंत्री) के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
पंचायत समिति का प्रमुख कौन होता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
भारत में पंचायती राज व्यवस्था त्रि-स्तरीय (three-tier) संरचना पर आधारित है। यह प्रश्न मध्यवर्ती स्तर, यानी पंचायत समिति, के प्रमुख के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
पंचायती राज की त्रि-स्तरीय प्रणाली में शामिल हैं:
ग्राम पंचायत (Gram Panchayat): यह ग्राम स्तर पर होती है। इसके प्रमुख को मुखिया या सरपंच कहा जाता है।
पंचायत समिति (Panchayat Samiti): यह मध्यवर्ती या ब्लॉक स्तर पर होती है। इसके निर्वाचित सदस्यों द्वारा अपने में से एक अध्यक्ष चुना जाता है, जिसे 'प्रमुख' कहा जाता है।
जिला परिषद (Zila Parishad): यह जिला स्तर पर सर्वोच्च संस्था है। इसके अध्यक्ष को 'जिला प्रमुख' या 'चेयरपर्सन' कहा जाता है।
पंचायत सेवक एक सरकारी कर्मचारी होता है जो पंचायत के प्रशासनिक कार्यों में सहायता करता है।
Step 3: Final Answer:
पंचायत समिति का प्रमुख 'प्रमुख' कहलाता है।
Quick Tip: पंचायती राज व्यवस्था के तीनों स्तरों (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद) और उनके संबंधित प्रमुखों के नाम याद रखें, क्योंकि यह अक्सर परीक्षाओं में पूछा जाता है।
मैकमोहन रेखा कहाँ है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और उनके नामों से संबंधित है। मैकमोहन रेखा भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण सीमांकन रेखा है।
Step 2: Detailed Explanation:
मैकमोहन रेखा भारत और चीन के बीच की प्रभावी सीमा रेखा है, जो विशेष रूप से पूर्वी हिमालय क्षेत्र में है। यह रेखा भारत के अरुणाचल प्रदेश राज्य को चीन के तिब्बत क्षेत्र से अलग करती है।
इस रेखा का निर्धारण 1914 में शिमला समझौते के तहत ब्रिटिश भारत और तिब्बत के प्रतिनिधियों के बीच हुआ था। सर हेनरी मैकमोहन, जो तत्कालीन ब्रिटिश भारत के विदेश सचिव थे, के नाम पर इसका नाम रखा गया। हालांकि, चीन इस रेखा की वैधता को मान्यता नहीं देता है, जिससे इस क्षेत्र में सीमा विवाद बना हुआ है।
Step 3: Final Answer:
मैकमोहन रेखा मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित है।
Quick Tip: भारत की अन्य महत्वपूर्ण सीमा रेखाओं को भी याद रखें: \textbf{रेडक्लिफ रेखा (Radcliffe Line):} भारत और पाकिस्तान के बीच। \textbf{डूरंड रेखा (Durand Line):} पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच (ऐतिहासिक रूप से ब्रिटिश भारत और अफगानिस्तान के बीच)। \textbf{वास्तविक नियंत्रण रेखा (Line of Actual Control - LAC):} भारत और चीन के बीच अपरिभाषित सीमा।
भारत के संविधान के किस भाग को संविधान की 'आत्मा' कहाँ जाता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान के उस हिस्से की पहचान करने के बारे में है जिसे अक्सर इसकी "आत्मा" के रूप में वर्णित किया जाता है, क्योंकि यह संविधान के मूल दर्शन और उद्देश्यों को समाहित करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रस्तावना (Preamble): भारतीय संविधान की प्रस्तावना को "संविधान की आत्मा" कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह संविधान के मूल सिद्धांतों, आदर्शों और दर्शन को संक्षेप में प्रस्तुत करती है। यह उन उद्देश्यों को बताती है जिन्हें संविधान स्थापित करना और बढ़ावा देना चाहता है, जैसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व।
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) को "संविधान का हृदय और आत्मा" कहा था। उनका तर्क था कि इस अधिकार के बिना अन्य मौलिक अधिकार अर्थहीन हो जाते हैं, क्योंकि यह नागरिकों को अपने अधिकारों के हनन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार देता है।
हालांकि, जब प्रश्न सामान्य रूप से "संविधान की आत्मा" के बारे में पूछता है, तो पारंपरिक और व्यापक रूप से स्वीकृत उत्तर "प्रस्तावना" ही होता है।
Step 3: Final Answer:
संविधान की प्रस्तावना को संविधान की 'आत्मा' कहा जाता है।
Quick Tip: इस प्रश्न के दो संभावित उत्तरों के बीच के अंतर को समझें। यदि प्रश्न सामान्य रूप से "संविधान की आत्मा" के बारे में है, तो उत्तर 'प्रस्तावना' है। यदि प्रश्न विशेष रूप से डॉ. बी.आर. अंबेडकर के दृष्टिकोण के बारे में पूछता है, तो उत्तर 'अनुच्छेद 32' है।
वैश्वीकरण है
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Step 1: Understanding the Concept:
वैश्वीकरण (Globalization) एक जटिल प्रक्रिया है जिसके द्वारा दुनिया के देश, समाज और अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से अधिक जुड़ते जा रहे हैं। यह प्रश्न वैश्वीकरण की प्रकृति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना (Multidimensional phenomenon) है। इसका मतलब है कि इसका प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करता है। इसके मुख्य आयामों में शामिल हैं:
आर्थिक आयाम: व्यापार, निवेश और पूंजी के मुक्त प्रवाह के माध्यम से राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं का वैश्विक अर्थव्यवस्था में एकीकरण।
राजनीतिक आयाम: अंतरराष्ट्रीय संगठनों (जैसे संयुक्त राष्ट्र, विश्व व्यापार संगठन) का बढ़ता महत्व और वैश्विक शासन के विचार।
सांस्कृतिक आयाम: विचारों, मूल्यों और सांस्कृतिक उत्पादों (जैसे फिल्म, संगीत, भोजन) का दुनिया भर में प्रसार, जिससे एक वैश्विक संस्कृति का उदय होता है।
तकनीकी आयाम: सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (जैसे इंटरनेट, मोबाइल फोन) में क्रांति, जिसने दुनिया भर के लोगों को तुरंत जोड़ा है।
चूंकि वैश्वीकरण में ये सभी आयाम शामिल हैं, इसलिए इसे एकल आयामी (जैसे केवल राजनीतिक या केवल सांस्कृतिक) नहीं कहा जा सकता। यह एक व्यापक और बहुआयामी प्रक्रिया है।
Step 3: Final Answer:
वैश्वीकरण एक बहुआयामी परिघटना है।
Quick Tip: जब भी वैश्वीकरण के बारे में सोचें, तो इसके विभिन्न प्रभावों पर विचार करें - आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले उत्पाद (आर्थिक), अंतर्राष्ट्रीय समाचार (राजनीतिक), और आपके द्वारा देखे जाने वाले शो (सांस्कृतिक)। इससे आपको इसकी बहुआयामी प्रकृति को याद रखने में मदद मिलेगी।
निम्न में से कौन संयुक्त राष्ट्र संघ की एक आधिकारिक भाषा नहीं है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
संयुक्त राष्ट्र (UN) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 1945 में हुई थी। इसके कामकाज को सुविधाजनक बनाने के लिए, इसने कुछ भाषाओं को आधिकारिक भाषाओं के रूप में नामित किया है।
Step 2: Detailed Explanation:
संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएँ हैं:
अरबी (Arabic)
चीनी (Chinese)
अंग्रेज़ी (English)
फ्रांसीसी (French)
रूसी (Russian)
स्पेनिश (Spanish)
इन भाषाओं का उपयोग संयुक्त राष्ट्र की बैठकों और इसके सभी आधिकारिक दस्तावेजों में किया जाता है।
दिए गए विकल्पों में से, जापानी संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा नहीं है।
Step 3: Final Answer:
अतः, जापानी संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा नहीं है।
Quick Tip: संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं को याद रखने के लिए आप "FACES-R" (French, Arabic, Chinese, English, Spanish, Russian) जैसे संक्षिप्त नाम का उपयोग कर सकते हैं।
1956 में भारतीय राज्यों के पुनर्गठन का आधार क्या था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
स्वतंत्रता के बाद, भारत में विभिन्न क्षेत्रों से भाषाई आधार पर अलग राज्यों की मांग उठ रही थी। इस मुद्दे को हल करने के लिए, भारत सरकार ने राज्य पुनर्गठन आयोग का गठन किया।
Step 2: Detailed Explanation:
राज्य पुनर्गठन आयोग (फजल अली आयोग) की सिफारिशों के आधार पर, भारत की संसद ने 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित किया। इस अधिनियम ने भारत के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सीमाओं को पुनर्गठित किया।
इस पुनर्गठन का मुख्य और प्रमुख आधार भाषा थी। इसका उद्देश्य भाषाई समरूपता के आधार पर राज्यों का निर्माण करना था ताकि प्रशासन और संचार आसान हो सके और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिल सके। इसके परिणामस्वरूप 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बने।
Step 3: Final Answer:
1956 में भारतीय राज्यों के पुनर्गठन का मुख्य आधार भाषा थी।
Quick Tip: याद रखें कि भाषाई आधार पर गठित होने वाला पहला राज्य आंध्र प्रदेश था, जिसका गठन 1953 में पोट्टी श्रीरामुलु के आमरण अनशन के बाद हुआ था।
भारत में 1946 की अंतरिम सरकार किस योजना के तहत बनी थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत की स्वतंत्रता से पहले सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण चरण - अंतरिम सरकार के गठन - से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
1946 में, ब्रिटिश सरकार ने भारत में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण के लिए एक योजना तैयार करने के लिए एक उच्च-शक्ति मिशन भेजा, जिसे कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है।
कैबिनेट मिशन योजना के प्रस्तावों में से एक एक संविधान सभा का गठन करना और एक अंतरिम सरकार की स्थापना करना था जिसमें प्रमुख भारतीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल हों। इसी योजना के आधार पर, 2 सितंबर, 1946 को जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में भारत की अंतरिम सरकार का गठन किया गया था।
माउंटबेटन योजना (1947): यह भारत के विभाजन और स्वतंत्रता से संबंधित थी।
क्रिप्स मिशन (1942): यह द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सहयोग प्राप्त करने का एक असफल प्रयास था।
Step 3: Final Answer:
1946 की अंतरिम सरकार कैबिनेट मिशन योजना के तहत बनी थी।
Quick Tip: प्रमुख मिशनों और योजनाओं का कालक्रम याद रखें: क्रिप्स मिशन (1942) \(\rightarrow\) कैबिनेट मिशन (1946) \(\rightarrow\) माउंटबेटन योजना (1947)।
भारत में पहला आम चुनाव कब हुआ था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्र भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक मील के पत्थर - पहले आम चुनाव (लोकसभा चुनाव) के समय के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक कई महीनों की अवधि में हुआ था।
चूंकि मतदान का अधिकांश हिस्सा और परिणामों की घोषणा 1952 में हुई थी, और पहली लोकसभा का गठन अप्रैल 1952 में हुआ था, इसलिए आमतौर पर पहले आम चुनाव का वर्ष 1952 माना जाता है। हालांकि चुनाव 1951 में शुरू हुए थे, लेकिन इसका समापन 1952 में हुआ। दिए गए विकल्पों में, 1952 सबसे उपयुक्त उत्तर है क्योंकि यह चुनाव प्रक्रिया के समापन और सरकार के गठन का वर्ष है।
Step 3: Final Answer:
भारत में पहला आम चुनाव 1951-52 में संपन्न हुआ, जिसे सामान्यतः 1952 का चुनाव कहा जाता है।
Quick Tip: यदि विकल्प में "1951-52" दिया गया हो, तो वह सबसे सटीक उत्तर होगा। यदि केवल एक वर्ष चुनना हो, तो 1952 को प्राथमिकता दी जाती है क्योंकि पहली लोकसभा इसी वर्ष अस्तित्व में आई थी।
'भारतीय जनसंघ के संस्थापक कौन थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में एक प्रमुख राजनीतिक दल के इतिहास और उसके संस्थापक के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय जनसंघ एक भारतीय राष्ट्रवादी राजनीतिक दल था। इसकी स्थापना श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर, 1951 को दिल्ली में की थी।
यह दल भारतीय संस्कृति और राष्ट्रीय पहचान के विचारों पर आधारित था। बाद में, 1980 में, भारतीय जनसंघ का विलय जनता पार्टी के अन्य गुटों के साथ हुआ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) का गठन हुआ। इसलिए, भारतीय जनसंघ को भाजपा का वैचारिक और संगठनात्मक पूर्ववर्ती माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे।
Quick Tip: भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच संबंध को याद रखें। यह आपको आधुनिक भारतीय राजनीति के विकास को समझने में मदद करेगा।
भारत का संविधान लागू हुआ था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान के निर्माण और उसके प्रभाव में आने की महत्वपूर्ण तिथियों से संबंधित है। इसमें "अंगीकृत" (adopted) और "लागू" (enforced/implemented) होने के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत का संविधान भारत की संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर, 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था। इस दिन संविधान निर्माण का कार्य पूरा हो गया था। नागरिकता, चुनाव, अंतरिम संसद जैसे कुछ प्रावधान इसी दिन लागू हो गए थे।
हालांकि, संविधान का बड़ा हिस्सा 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ था। इस दिन को "संविधान के प्रारंभ" की तारीख के रूप में जाना जाता है और इसे गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।
प्रश्न "लागू हुआ था" पूछता है, और दिए गए विकल्पों में 26 जनवरी, 1950 नहीं है। विकल्पों में से, 26 नवंबर, 1949 वह तारीख है जब संविधान को अपनाया गया और उसके कुछ हिस्से लागू हुए, जो इसे दिए गए विकल्पों में सबसे निकट और प्रासंगिक उत्तर बनाता है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों के अनुसार, 26 नवंबर, 1949 को संविधान को अंगीकृत किया गया और आंशिक रूप से लागू किया गया, जो सबसे उपयुक्त उत्तर है।
Quick Tip: संविधान के संबंध में दो तिथियों को स्पष्ट रूप से याद रखें: \textbf{अंगीकरण की तिथि (Date of Adoption):} 26 नवंबर, 1949 (संविधान दिवस) \textbf{प्रारंभ/लागू होने की तिथि (Date of Commencement):} 26 जनवरी, 1950 (गणतंत्र दिवस)
मंडल आयोग के अध्यक्ष कौन थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
मंडल आयोग भारत में एक महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक मील का पत्थर था, जिसे सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों की स्थिति का आकलन करने के लिए स्थापित किया गया था।
Step 2: Detailed Explanation:
1979 में, प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के नेतृत्व वाली जनता पार्टी सरकार ने दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया। इस आयोग का उद्देश्य "सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों" की पहचान करना और उनके उत्थान के लिए सिफारिशें देना था।
इस आयोग के अध्यक्ष बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल (बी.पी. मंडल) थे। इसीलिए इसे आमतौर पर मंडल आयोग के नाम से जाना जाता है। आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27% आरक्षण की सिफारिश की गई थी।
Step 3: Final Answer:
मंडल आयोग के अध्यक्ष बिंदेश्वरी प्रसाद मंडल थे।
Quick Tip: मंडल आयोग का नाम उसके अध्यक्ष बी.पी. मंडल के नाम पर रखा गया है। इसकी सबसे प्रसिद्ध सिफारिश OBC के लिए 27% आरक्षण थी, जिसे 1990 में वी.पी. सिंह सरकार द्वारा लागू किया गया था।
भारत के किस राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्रता के बाद के भारत के राजनीतिक इतिहास के बारे में है, जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लगभग सभी राज्यों में प्रभुत्व था।
Step 2: Detailed Explanation:
1957 के राज्य विधानसभा चुनावों में, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने केरल में बहुमत हासिल किया। यह पहली बार था जब भारत के किसी राज्य में एक गैर-कांग्रेसी दल ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी।
ई. एम. एस. नंबूदरीपाद के नेतृत्व में कम्युनिस्ट सरकार ने 5 अप्रैल, 1957 को शपथ ली। यह घटना ऐतिहासिक थी क्योंकि यह दुनिया के पहले उदाहरणों में से एक थी जहां एक कम्युनिस्ट पार्टी लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से सत्ता में आई थी।
Step 3: Final Answer:
भारत में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार केरल राज्य में बनी थी।
Quick Tip: इस महत्वपूर्ण घटना को याद रखें: वर्ष 1957, राज्य केरल, पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), और मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरीपाद।
भारतीय संविधान के अनुसार संप्रभुता निहित है।
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Step 1: Understanding the Concept:
संप्रभुता (Sovereignty) का अर्थ है राज्य की सर्वोच्च शक्ति, जो किसी भी बाहरी या आंतरिक नियंत्रण से स्वतंत्र है। यह प्रश्न भारतीय संदर्भ में इस सर्वोच्च शक्ति के स्रोत के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान की प्रस्तावना "हम, भारत के लोग..." शब्दों से शुरू होती है। यह स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि संविधान का स्रोत भारत की जनता है, और सभी शक्तियाँ जनता से ही प्राप्त होती हैं।
इसका मतलब है कि भारत में लोकप्रिय संप्रभुता का सिद्धांत अपनाया गया है, जिसके अनुसार अंतिम शक्ति जनता के हाथों में निहित है। जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करके अपनी संप्रभु शक्ति का प्रयोग करती है और अपनी सरकार चुनती है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और न्यायपालिका सभी संविधान के तहत कार्य करते हैं, जिसे जनता ने स्वयं को दिया है।
Step 3: Final Answer:
भारतीय संविधान के अनुसार, संप्रभुता भारत की जनता में निहित है।
Quick Tip: संविधान की प्रस्तावना की पहली पंक्ति ("हम, भारत के लोग...") इस प्रश्न का सीधा उत्तर देती है। यह भारतीय लोकतंत्र का मूल आधार है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व राजनीति के दो ध्रुव कौन-कौन थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
द्वितीय विश्वयुद्ध (1939-1945) के बाद, वैश्विक शक्ति संतुलन में भारी बदलाव आया। दुनिया दो प्रमुख शक्ति गुटों या "ध्रुवों" में विभाजित हो गई, जिससे शीत युद्ध का दौर शुरू हुआ।
Step 2: Detailed Explanation:
युद्ध के बाद, पुराने साम्राज्य (जैसे ब्रिटेन और फ्रांस) कमजोर हो गए, और दो नई महाशक्तियाँ उभरीं:
संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): जो पूंजीवादी और लोकतांत्रिक गुट का नेतृत्व कर रहा था।
सोवियत संघ (USSR): जो साम्यवादी गुट का नेतृत्व कर रहा था।
इन दो महाशक्तियों के बीच वैचारिक, राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य प्रतिस्पर्धा ने लगभग 45 वर्षों तक विश्व राजनीति को आकार दिया। इस द्विध्रुवीय (bipolar) विश्व व्यवस्था को शीत युद्ध के रूप में जाना जाता है।
Step 3: Final Answer:
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद विश्व राजनीति के दो ध्रुव अमेरिका और सोवियत संघ थे।
Quick Tip: शीत युद्ध को दो महाशक्तियों - अमेरिका और सोवियत संघ - के बीच एक अप्रत्यक्ष संघर्ष के रूप में याद रखें, जो सीधे तौर पर कभी नहीं लड़े, लेकिन दुनिया भर में प्रॉक्सी युद्धों में लगे रहे।
नाटो की स्थापना कब हुई थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
नाटो (NATO) शीत युद्ध के दौरान गठित एक महत्वपूर्ण सैन्य गठबंधन है। इसकी स्थापना की तारीख विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना है।
Step 2: Detailed Explanation:
नाटो का पूरा नाम उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (North Atlantic Treaty Organization) है। यह एक सामूहिक सुरक्षा प्रणाली है, जिसके तहत सदस्य देश किसी भी बाहरी हमले की स्थिति में एक-दूसरे की रक्षा करने के लिए सहमत होते हैं।
नाटो की स्थापना 4 अप्रैल, 1949 को वाशिंगटन, डी.सी. में उत्तर अटलांटिक संधि पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ द्वारा उत्पन्न कथित खतरे का मुकाबला करना था। इसके संस्थापक सदस्यों में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और दस यूरोपीय देश शामिल थे।
Step 3: Final Answer:
नाटो की स्थापना 1949 में हुई थी।
Quick Tip: नाटो की स्थापना (1949) और इसके जवाब में सोवियत संघ द्वारा वारसा संधि (1955) के गठन को एक साथ याद रखें। यह शीत युद्ध के दो प्रतिद्वंद्वी सैन्य गुटों को दर्शाता है।
'सीटो' और 'सेंटो' किस प्रकार के संगठन थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
सीटो और सेंटो शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका की साम्यवाद को रोकने की 'कंटेनमेंट' नीति के हिस्से के रूप में बनाए गए संगठन थे।
Step 2: Detailed Explanation:
सीटो (SEATO - Southeast Asia Treaty Organization): इसकी स्थापना 1954 में दक्षिण पूर्व एशिया में साम्यवाद के प्रसार को रोकने के लिए की गई थी। यह एक सैनिक गठबंधन था।
सेंटो (CENTO - Central Treaty Organization): मूल रूप से 1955 में बगदाद संधि के रूप में स्थापित, इसका उद्देश्य मध्य पूर्व (या जिसे पश्चिमी एशिया कहा जाता है) में सोवियत प्रभाव को रोकना था। यह भी एक सैनिक गठबंधन था।
दोनों संगठन नाटो के समान थे और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा समर्थित थे, जिनका मुख्य उद्देश्य सामूहिक रक्षा के माध्यम से साम्यवादी विस्तारवाद का मुकाबला करना था।
Step 3: Final Answer:
सीटो और सेंटो सैनिक गठबंधन थे।
Quick Tip: शीत युद्ध के दौरान अमेरिका के नेतृत्व वाले तीन प्रमुख सैन्य गठबंधनों को याद रखें: नाटो (यूरोप), सीटो (दक्षिण पूर्व एशिया), और सेंटो (मध्य पूर्व)।
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के प्रथम सम्मेलन में कितने देशों ने भाग लिया था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) शीत युद्ध के दौरान नए स्वतंत्र देशों द्वारा गठित एक मंच था, जिसका उद्देश्य किसी भी प्रमुख शक्ति गुट (अमेरिका या सोवियत संघ) में शामिल होने से बचना था।
Step 2: Detailed Explanation:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन सितंबर 1961 में बेलग्रेड, यूगोस्लाविया में आयोजित किया गया था। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में, 25 सदस्य देशों ने भाग लिया था (साथ ही 3 पर्यवेक्षक देश भी थे)।
इस सम्मेलन ने औपचारिक रूप से आंदोलन की स्थापना की और इसके सिद्धांतों को निर्धारित किया, जिसमें स्वतंत्र विदेश नीति, संप्रभुता का सम्मान और उपनिवेशवाद का विरोध शामिल था।
Step 3: Final Answer:
गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के प्रथम सम्मेलन में 25 देशों ने भाग लिया था।
Quick Tip: प्रथम NAM सम्मेलन के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य याद रखें: स्थान - बेलग्रेड (यूगोस्लाविया), वर्ष - 1961, प्रतिभागी देश - 25।
सोवियत संघ ने कौन-सा सैनिक गुट बनाया था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न शीत युद्ध के दौरान दो प्रतिद्वंद्वी सैन्य गठबंधनों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
1949 में संयुक्त राज्य अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा नाटो (NATO) के गठन के जवाब में, सोवियत संघ ने अपने स्वयं के सैन्य गठबंधन का गठन किया।
मई 1955 में, सोवियत संघ और मध्य और पूर्वी यूरोप के सात अन्य साम्यवादी राज्यों ने वारसा संधि (Warsaw Pact) पर हस्ताक्षर किए। इसका आधिकारिक नाम "मैत्री, सहयोग और पारस्परिक सहायता की संधि" था। यह नाटो के लिए एक सीधा सैन्य प्रतिकार था और इसने पूर्वी ब्लॉक के देशों को एक औपचारिक सैन्य गठबंधन के तहत एकजुट किया।
नाटो, सीटो और सेंटो पश्चिमी गुट के गठबंधन थे।
Step 3: Final Answer:
सोवियत संघ ने वारसा संधि नामक सैनिक गुट बनाया था।
Quick Tip: हमेशा याद रखें: नाटो (अमेरिका के नेतृत्व में) बनाम वारसा संधि (सोवियत संघ के नेतृत्व में)। ये शीत युद्ध के दो मुख्य सैन्य स्तंभ थे।
क्यूबा का मिसाइल संकट निम्न में से किससे सम्बन्धित था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
क्यूबा मिसाइल संकट शीत युद्ध की सबसे खतरनाक घटनाओं में से एक था, जिसने दुनिया को परमाणु युद्ध के कगार पर ला खड़ा किया था।
Step 2: Detailed Explanation:
अक्टूबर 1962 में, संयुक्त राज्य अमेरिका को पता चला कि सोवियत संघ चुपके से क्यूबा में परमाणु मिसाइलें तैनात कर रहा है, जो अमेरिकी धरती से केवल 90 मील की दूरी पर है।
इसके जवाब में, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने क्यूबा की नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दिया। इसके बाद 13 दिनों तक संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच एक तीव्र गतिरोध चला। अंततः, सोवियत नेता निकिता ख्रुश्चेव अमेरिका द्वारा क्यूबा पर आक्रमण न करने और तुर्की से अमेरिकी मिसाइलों को हटाने के आश्वासन के बदले में मिसाइलों को हटाने पर सहमत हुए।
यह संकट सीधे तौर पर संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ के बीच था।
Step 3: Final Answer:
क्यूबा का मिसाइल संकट सोवियत संघ से सम्बन्धित था।
Quick Tip: क्यूबा मिसाइल संकट के तीन मुख्य नेता थे: जॉन एफ कैनेडी (अमेरिका), निकिता ख्रुश्चेव (सोवियत संघ), और फिदेल कास्त्रो (क्यूबा)।
सोवियत संघ का विघटन कब हुआ ?
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Step 1: Understanding the Concept:
सोवियत संघ (USSR) का विघटन 20वीं सदी की एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटना थी, जिसने शीत युद्ध के अंत और एक नई विश्व व्यवस्था की शुरुआत को चिह्नित किया।
Step 2: Detailed Explanation:
1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में, सोवियत संघ को गंभीर आर्थिक ठहराव और अपने विभिन्न गणराज्यों में बढ़ते राष्ट्रवादी आंदोलनों का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति मिखाइल गोर्बाचेव द्वारा शुरू किए गए 'ग्लासनोस्ट' (खुलेपन) और 'पेरेस्त्रोइका' (पुनर्गठन) के सुधारों ने अनजाने में इन विघटनकारी ताकतों को तेज कर दिया।
एक असफल तख्तापलट के प्रयास के बाद, एक-एक करके सोवियत गणराज्यों ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा करना शुरू कर दिया। अंततः, 26 दिसंबर, 1991 को, सोवियत संघ को औपचारिक रूप से भंग कर दिया गया।
Step 3: Final Answer:
सोवियत संघ का विघटन 1991 में हुआ।
Quick Tip: सोवियत संघ के विघटन (1991) को शीत युद्ध की समाप्ति की निश्चित तारीख के रूप में याद रखें। यह घटना बर्लिन की दीवार के गिरने (1989) के बाद हुई।
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना कब हुई थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन, संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations - UN) की स्थापना के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भविष्य में विश्व युद्धों को रोकना, राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित करना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना और मानवाधिकारों की रक्षा करना था।
50 देशों के प्रतिनिधियों ने 26 जून, 1945 को सैन फ्रांसिस्को में संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर हस्ताक्षर किए। यह चार्टर 24 अक्टूबर, 1945 को प्रभावी हुआ, जिसे संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की आधिकारिक तिथि माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में हुई थी।
Quick Tip: संयुक्त राष्ट्र की स्थापना की सटीक तारीख - 24 अक्टूबर, 1945 - याद रखें। इसी दिन को प्रतिवर्ष 'संयुक्त राष्ट्र दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
शीत युद्ध के संदर्भ में एल०डी०सी० से क्या अभिप्राय है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न शीत युद्ध के दौरान उपयोग किए जाने वाले एक आर्थिक और राजनीतिक वर्गीकरण के संक्षिप्त नाम LDC के पूर्ण रूप के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
LDC का पूर्ण रूप Least Developed Countries (अल्प विकसित देश) है। शीत युद्ध के संदर्भ में, ये वे देश थे जो नव-स्वतंत्र थे और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए थे।
इन देशों को अक्सर "तीसरी दुनिया" (Third World) कहा जाता था, जो न तो संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाले पूंजीवादी गुट (पहली दुनिया) का हिस्सा थे और न ही सोवियत संघ के नेतृत्व वाले साम्यवादी गुट (दूसरी दुनिया) का। गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) में LDCs की महत्वपूर्ण भूमिका थी, क्योंकि वे दोनों महाशक्तियों के दबाव से स्वतंत्र रहना चाहते थे।
Step 3: Final Answer:
शीत युद्ध के संदर्भ में LDC का अभिप्राय अल्प विकसित देश है।
Quick Tip: LDC (अल्प विकसित देश) शब्द आज भी संयुक्त राष्ट्र द्वारा उन देशों को वर्गीकृत करने के लिए उपयोग किया जाता है जो सामाजिक-आर्थिक विकास के निम्नतम संकेतकों को प्रदर्शित करते हैं।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच की दुश्मनी जानी जाती है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद दो महाशक्तियों - अमेरिका और सोवियत संघ - के बीच चले लंबे वैचारिक और राजनीतिक संघर्ष को दिए गए नाम की पहचान करने के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, दुनिया दो प्रमुख शक्ति गुटों में विभाजित हो गई: एक का नेतृत्व पूंजीवादी संयुक्त राज्य अमेरिका कर रहा था और दूसरे का नेतृत्व साम्यवादी सोवियत संघ। इन दोनों के बीच सीधे सैन्य संघर्ष के बजाय वैचारिक, राजनीतिक, आर्थिक और छद्म युद्धों (proxy wars) का दौर चला।
इस तनावपूर्ण दुश्मनी को शीत युद्ध (Cold War) के रूप में जाना जाता है क्योंकि दोनों महाशक्तियों के बीच कभी भी सीधा "गर्म युद्ध" (यानी प्रत्यक्ष सैन्य टकराव) नहीं हुआ। यह दौर लगभग 1947 से 1991 (सोवियत संघ के विघटन तक) चला।
Step 3: Final Answer:
अमेरिका और सोवियत संघ के बीच की दुश्मनी को शीत युद्ध के रूप में जाना जाता है।
Quick Tip: 'शीत युद्ध' शब्द का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इसमें सीधे तौर पर हथियारों का प्रयोग नहीं हुआ, बल्कि तनाव, प्रचार और प्रॉक्सी युद्धों का माहौल बना रहा।
निम्न में से कौन भूमिबद्ध देश है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
भूमिबद्ध (Landlocked) देश वह देश होता है जिसकी सीमाएँ पूरी तरह से भूमि से घिरी होती हैं और जिसका कोई सीधा संपर्क समुद्र से नहीं होता।
Step 2: Detailed Explanation:
आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(A) मालदीव: यह हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप राष्ट्र है, इसलिए यह भूमिबद्ध नहीं है।
(B) नेपाल: यह पूरी तरह से भूमि से घिरा हुआ है। इसके उत्तर में चीन और दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में भारत है। इसका कोई समुद्री तट नहीं है।
(C) पाकिस्तान: इसका दक्षिणी तट अरब सागर से लगता है।
(D) बांग्लादेश: इसका दक्षिणी तट बंगाल की खाड़ी से लगता है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से नेपाल एक भूमिबद्ध देश है।
Quick Tip: भारत के पड़ोसियों में, नेपाल, भूटान और अफगानिस्तान भूमिबद्ध देश हैं। मानचित्र पर इन देशों की स्थिति को देखने से यह याद रखने में आसानी होती है।
नेपाल संवैधानिक राजतंत्र था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न नेपाल के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन से संबंधित है, जब देश राजतंत्र से गणतंत्र बना।
Step 2: Detailed Explanation:
नेपाल में लंबे समय तक संवैधानिक राजतंत्र रहा, जहाँ राजा राज्य का प्रमुख होता था लेकिन उसकी शक्तियाँ संविधान द्वारा सीमित थीं। हालांकि, 2005 में तत्कालीन राजा ज्ञानेंद्र ने पूर्ण शक्ति अपने हाथ में ले ली थी।
इसके जवाब में, 2006 में एक बड़ा लोकतंत्र आंदोलन ('लोकतंत्र आंदोलन') हुआ। इस आंदोलन की सफलता के बाद, राजा को अपनी शक्तियाँ छोड़नी पड़ीं और संसद को बहाल किया गया। इस घटना ने प्रभावी रूप से संवैधानिक राजतंत्र के युग का अंत कर दिया। इसके बाद, 2008 में, नेपाल को औपचारिक रूप से एक संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया और राजशाही को समाप्त कर दिया गया।
चूंकि 2006 का आंदोलन निर्णायक मोड़ था जिसने राजशाही की शक्तियों को समाप्त कर दिया, इसलिए 2006 तक इसे संवैधानिक राजतंत्र माना जा सकता है।
Step 3: Final Answer:
नेपाल में संवैधानिक राजतंत्र का प्रभावी अंत 2006 के लोकतंत्र आंदोलन के साथ हुआ।
Quick Tip: नेपाल में राजशाही की समाप्ति के लिए दो महत्वपूर्ण वर्ष याद रखें: 2006 (निर्णायक लोकतंत्र आंदोलन) और 2008 (गणतंत्र की औपचारिक घोषणा)।
आण्विक अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर कब हुआ था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
आण्विक अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty - NPT) एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और हथियार प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और पूर्ण निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
Step 2: Detailed Explanation:
इस संधि पर बातचीत 1960 के दशक में हुई थी। यह संधि 1 जुलाई, 1968 को हस्ताक्षर के लिए खोली गई थी। यह 1970 में लागू हुई।
NPT के तहत, पांच देशों - संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस (तत्कालीन सोवियत संघ), यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और चीन - को परमाणु-हथियार वाले राज्यों के रूप में मान्यता दी गई है, जबकि अन्य सभी हस्ताक्षरकर्ता देशों ने परमाणु हथियार हासिल न करने का वचन दिया है।
Step 3: Final Answer:
आण्विक अप्रसार संधि पर 1968 में हस्ताक्षर शुरू हुए थे।
Quick Tip: यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि भारत, पाकिस्तान, इज़राइल और दक्षिण सूडान ने NPT पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उत्तर कोरिया ने हस्ताक्षर किए थे लेकिन बाद में इससे हट गया।
सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों की संख्या है।
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Step 1: Understanding the Concept:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है। यह अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जिम्मेदार है।
Step 2: Detailed Explanation:
सुरक्षा परिषद की संरचना में कुल 15 सदस्य होते हैं:
5 स्थायी सदस्य (Permanent Members - P5): चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम, और संयुक्त राज्य अमेरिका। इनके पास वीटो शक्ति होती है।
10 अस्थायी सदस्य (Non-permanent Members): इन्हें महासभा द्वारा दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है।
यह प्रश्न विशेष रूप से अस्थायी सदस्यों की संख्या के बारे में है।
Step 3: Final Answer:
सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों की संख्या 10 है।
Quick Tip: सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या को इस प्रकार याद रखें: 5 स्थायी + 10 अस्थायी = 15 कुल सदस्य।
संयुक्त राष्ट्र दिवस मनाया जाता है।
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Step 1: Understanding the Concept:
संयुक्त राष्ट्र दिवस उस तारीख को चिह्नित करता है जब संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक चार्टर प्रभावी हुआ था।
Step 2: Detailed Explanation:
संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर 26 जून, 1945 को हस्ताक्षर किए गए थे। यह चार्टर 24 अक्टूबर, 1945 को तब लागू हुआ जब चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और अधिकांश अन्य हस्ताक्षरकर्ता देशों ने इसकी पुष्टि कर दी।
इसलिए, 1948 से, 24 अक्टूबर को हर साल 'संयुक्त राष्ट्र दिवस' के रूप में मनाया जाता है ताकि लोगों को संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और उपलब्धियों के बारे में जानकारी दी जा सके।
Step 3: Final Answer:
संयुक्त राष्ट्र दिवस 24 अक्टूबर को मनाया जाता है।
Quick Tip: संयुक्त राष्ट्र की स्थापना का वर्ष (1945) और संयुक्त राष्ट्र दिवस की तारीख (24 अक्टूबर) को एक साथ याद करें।
निम्न में से कौन G-8 का सदस्य नहीं है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
G-8 (ग्रुप ऑफ एट) दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह था। यह प्रश्न इसके सदस्य देशों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
G-8 के सदस्य देश थे:
कनाडा
फ्रांस
जर्मनी
इटली
जापान
रूस
यूनाइटेड किंगडम
संयुक्त राज्य अमेरिका
चीन कभी भी G-8 का सदस्य नहीं रहा है। 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के कारण रूस को समूह से निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद यह समूह फिर से G-7 बन गया।
Step 3: Final Answer:
चीन G-8 का सदस्य नहीं है।
Quick Tip: वर्तमान G-7 सदस्यों को याद रखें: अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान। चीन G-20 और BRICS जैसे अन्य समूहों का एक महत्वपूर्ण सदस्य है।
महासभा के कुल सदस्यों की संख्या है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के सदस्य देशों की कुल संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की संख्या समय के साथ बढ़ी है।
2002 में स्विट्जरलैंड और पूर्वी तिमोर के शामिल होने के बाद सदस्य संख्या 191 हो गई थी।
2006 में मोंटेनेग्रो के शामिल होने के बाद यह संख्या 192 हो गई।
2011 में दक्षिण सूडान के शामिल होने के बाद, वर्तमान सदस्य संख्या 193 है।
चूंकि 193 विकल्प में नहीं है, और यह प्रश्न संभवतः 2006-2011 की अवधि का है, दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर 192 है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों के अनुसार, महासभा के कुल सदस्यों की संख्या 192 है। (हालांकि वर्तमान संख्या 193 है)।
Quick Tip: प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए, हमेशा नवीनतम डेटा याद रखें। वर्तमान में, संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देश हैं। सबसे नया सदस्य दक्षिण सूडान (2011) है।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन कहाँ हुआ था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) उन राज्यों का एक मंच है जो औपचारिक रूप से किसी भी प्रमुख शक्ति गुट के साथ या उसके खिलाफ गठबंधन नहीं करते हैं। यह प्रश्न इसके पहले शिखर सम्मेलन के स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन 1-6 सितंबर, 1961 को बेलग्रेड, युगोस्लाविया की राजधानी में आयोजित किया गया था।
इस सम्मेलन की मेजबानी युगोस्लाविया के राष्ट्रपति जोसिप ब्रोज़ टीटो ने की थी और इसमें भारत के जवाहरलाल नेहरू, मिस्र के गमाल अब्देल नासर, घाना के क्वामे न्क्रूमा और इंडोनेशिया के सुकर्णो जैसे प्रमुख नेताओं ने भाग लिया था।
Step 3: Final Answer:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का पहला शिखर सम्मेलन युगोस्लाविया में हुआ था।
Quick Tip: बांडुंग सम्मेलन (1955, इंडोनेशिया) को NAM के गठन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है, लेकिन पहला आधिकारिक शिखर सम्मेलन 1961 में बेलग्रेड में हुआ था। इन दोनों में भ्रमित न हों।
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अठारहवां शिखर सम्मेलन हुआ था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के हाल के शिखर सम्मेलनों में से एक के स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का 18वां शिखर सम्मेलन 25-26 अक्टूबर, 2019 को बाकू, अजरबैजान की राजधानी में आयोजित किया गया था।
इस सम्मेलन ने अजरबैजान को 2019-2022 की अवधि के लिए NAM की अध्यक्षता प्रदान की।
Step 3: Final Answer:
गुटनिरपेक्ष आंदोलन का अठारहवां शिखर सम्मेलन अजरबैजान में हुआ था।
Quick Tip: प्रमुख अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलनों के नवीनतम संस्करणों पर नजर रखें। उदाहरण के लिए, 19वां NAM शिखर सम्मेलन जनवरी 2024 में कंपाला, युगांडा में हुआ।
सिंधु नदी भारत के किस राज्य से गुजरती है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत की एक प्रमुख नदी, सिंधु नदी के प्रवाह मार्ग के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
सिंधु नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के पास से निकलती है। यह भारत में लद्दाख के माध्यम से प्रवेश करती है। यह लद्दाख और बाल्टिस्तान क्षेत्रों से होकर बहती है और फिर पाकिस्तान में प्रवेश करती है।
अगस्त 2019 से पहले, लद्दाख जम्मू और कश्मीर राज्य का हिस्सा था। दिए गए विकल्पों में, कश्मीर (जम्मू और कश्मीर राज्य का जिक्र करते हुए) सबसे उपयुक्त उत्तर है, क्योंकि नदी ऐतिहासिक रूप से इसी राज्य के क्षेत्र से होकर बहती थी। यह पंजाब, पश्चिम बंगाल या असम से होकर नहीं बहती है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों के अनुसार, सिंधु नदी कश्मीर से होकर गुजरती है। (वर्तमान में, यह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से होकर बहती है)।
Quick Tip: नक्शे पर देखें: मुख्य सिंधु नदी भारत में केवल लद्दाख से होकर बहती है। इसकी सहायक नदियाँ जैसे झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होकर बहती हैं।
'पेरेस्ट्रोइका' और 'ग्लासनोस्ट' शब्द सम्बन्धित है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सोवियत संघ के अंतिम नेता द्वारा शुरू की गई दो प्रसिद्ध सुधार नीतियों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
1985 में सोवियत संघ के नेता बनने के बाद, मिखाइल गोर्बाचेव ने देश की स्थिर अर्थव्यवस्था और कठोर राजनीतिक व्यवस्था में सुधार के लिए दो प्रमुख नीतियां शुरू कीं:
पेरेस्ट्रोइका (Perestroika): इसका अर्थ है "पुनर्गठन"। यह सोवियत आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में संरचनात्मक सुधारों से संबंधित था।
ग्लासनोस्ट (Glasnost): इसका अर्थ है "खुलापन"। यह सरकार की गतिविधियों के बारे में अधिक खुलेपन और सूचना के प्रसार की स्वतंत्रता से संबंधित था।
इन सुधारों ने अनजाने में सोवियत संघ के विघटन की प्रक्रिया को तेज कर दिया।
Step 3: Final Answer:
'पेरेस्ट्रोइका' और 'ग्लासनोस्ट' शब्द मिखाइल गोर्बाचेव से सम्बन्धित हैं।
Quick Tip: गोर्बाचेव को इन दो सुधारों और शीत युद्ध की समाप्ति में उनकी भूमिका के लिए याद किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के कितने अंग हैं ?
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Step 1: Understanding the Concept:
संयुक्त राष्ट्र (UN) अपने विभिन्न कार्यों को करने के लिए कई विशेष निकायों या अंगों में संरचित है। यह प्रश्न इसके प्रमुख अंगों की संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंग हैं:
महासभा (The General Assembly)
सुरक्षा परिषद (The Security Council)
आर्थिक और सामाजिक परिषद (The Economic and Social Council - ECOSOC)
न्यास परिषद (The Trusteeship Council) - (1994 से निष्क्रिय)
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (The International Court of Justice - ICJ)
सचिवालय (The Secretariat)
Step 3: Final Answer:
संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 प्रमुख अंग हैं।
Quick Tip: भले ही न्यास परिषद (Trusteeship Council) अब सक्रिय नहीं है, फिर भी इसे संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक माना जाता है।
यूक्रेन अवस्थित है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रमुख देश, यूक्रेन, की महाद्वीपीय स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
यूक्रेन पूर्वी यूरोप में स्थित एक देश है। यह रूस के बाद यूरोप का दूसरा सबसे बड़ा देश है। इसकी सीमाएं पूर्व में रूस, उत्तर में बेलारूस, पश्चिम में पोलैंड, स्लोवाकिया और हंगरी, और दक्षिण में रोमानिया और मोल्दोवा से लगती हैं। इसका दक्षिणी तट काला सागर और आज़ोव सागर से घिरा है।
Step 3: Final Answer:
यूक्रेन यूरोप में अवस्थित है।
Quick Tip: हाल के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण यूक्रेन की भौगोलिक स्थिति और उसके पड़ोसियों का ज्ञान बहुत महत्वपूर्ण हो गया है। इसे मानचित्र पर देखें।
'ऑपरेशन डेजर्ट थंडर' सम्बन्धित है।
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Step 1: Understanding the Concept:
'ऑपरेशन डेजर्ट थंडर' एक सैन्य अभियान था। इस तरह के प्रश्न अंतर्राष्ट्रीय संबंधों और सैन्य इतिहास के ज्ञान का परीक्षण करते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
'ऑपरेशन डेजर्ट थंडर' (Operation Desert Thunder) 1998 में संयुक्त राज्य अमेरिका और ग्रेट ब्रिटेन द्वारा नियोजित एक सैन्य अभियान था।
यह अभियान इराक पर बमबारी करने की तैयारी थी क्योंकि इराक संयुक्त राष्ट्र के हथियार निरीक्षकों के साथ सहयोग करने से इनकार कर रहा था।
यह घटनाक्रम 1990-91 के खाड़ी युद्ध के बाद के घटनाक्रमों का हिस्सा था, जहाँ इराक पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन करने का दबाव बनाया जा रहा था।
इसलिए, इसका सीधा संबंध खाड़ी युद्ध और उसके बाद के परिणामों से है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में, 'ऑपरेशन डेजर्ट थंडर' सबसे निकटता से 'खाड़ी युद्ध' से संबंधित है, क्योंकि यह उसी संघर्ष की अगली कड़ी के रूप में उत्पन्न हुआ था।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख सैन्य अभियानों और वे किन संघर्षों से संबंधित हैं, उनकी एक सूची बनाना परीक्षा की तैयारी के लिए सहायक हो सकता है। 'ऑपरेशन डेजर्ट स्टॉर्म' (खाड़ी युद्ध का मुख्य अभियान) और 'ऑपरेशन डेजर्ट थंडर' (बाद की घटना) के बीच के अंतर को याद रखें।
निम्न में से किसने खुले द्वार की नीति अपनाई ?
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Step 1: Understanding the Concept:
'खुले द्वार की नीति' (Open Door Policy) एक आर्थिक नीति को संदर्भित करती है जिसके तहत एक देश विदेशी व्यापार और निवेश के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को खोलता है।
Step 2: Detailed Explanation:
चीन ने 1978 में तत्कालीन नेता देंग शियाओपिंग के नेतृत्व में 'खुले द्वार की नीति' की घोषणा की थी।
इस नीति का उद्देश्य चीन की अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाना और तेजी से आर्थिक विकास हासिल करना था।
इसके तहत, चीन ने विदेशी पूंजी, प्रौद्योगिकी और प्रबंधन तकनीकों को आकर्षित करने के लिए अपने बाजार खोले।
इस नीति ने चीन के आर्थिक परिवर्तन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना दिया।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से चीन ने 'खुले द्वार की नीति' अपनाई थी।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: विश्व के प्रमुख देशों द्वारा अपनाई गई महत्वपूर्ण आर्थिक नीतियों, जैसे चीन की 'खुले द्वार की नीति', भारत के 1991 के आर्थिक सुधार (LPG), आदि को याद रखना महत्वपूर्ण है।
निम्न में से कौन आसियान का संस्थापक सदस्य नहीं है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
आसियान (ASEAN - Association of Southeast Asian Nations) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। प्रश्न इसके संस्थापक सदस्यों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
आसियान की स्थापना 8 अगस्त, 1967 को बैंकॉक, थाईलैंड में हुई थी।
इसके पाँच संस्थापक सदस्य देश थे:
1. इंडोनेशिया
2. मलेशिया
3. फिलीपींस
4. सिंगापुर
5. थाईलैंड
भारत आसियान का संस्थापक सदस्य नहीं है। भारत आसियान का एक संवाद भागीदार (Dialogue Partner) है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में इंडोनेशिया, मलेशिया और थाईलैंड आसियान के संस्थापक सदस्य हैं, जबकि भारत नहीं है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे आसियान, सार्क, ब्रिक्स, जी-20 आदि के सदस्य देशों, संस्थापक सदस्यों और मुख्यालयों को याद रखें। यह सामान्य ज्ञान के प्रश्नों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
1992 में किस शहर में पृथ्वी सम्मेलन हुआ था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
पृथ्वी सम्मेलन (Earth Summit) पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था।
Step 2: Detailed Explanation:
1992 में पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (UNCED), जिसे 'पृथ्वी सम्मेलन' या 'रियो शिखर सम्मेलन' के रूप में भी जाना जाता है, ब्राजील के रियो डि जेनेरियो शहर में आयोजित किया गया था।
यह सम्मेलन 3 से 14 जून, 1992 तक चला।
इस सम्मेलन का उद्देश्य पर्यावरणीय सुरक्षा और सतत विकास से संबंधित मुद्दों पर वैश्विक सहमति बनाना था।
इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप 'एजेंडा 21' नामक एक कार्य योजना को अपनाया गया।
Step 3: Final Answer:
1992 में पृथ्वी सम्मेलन रियो डि जेनेरियो में हुआ था।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: पर्यावरण से संबंधित प्रमुख सम्मेलनों और प्रोटोकॉल (जैसे रियो शिखर सम्मेलन, क्योटो प्रोटोकॉल, पेरिस समझौता) के वर्ष और स्थान को याद रखना महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
भूमंडलीकरण का अर्थ होता है।
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Step 1: Understanding the Concept:
भूमंडलीकरण (Globalization) एक बहुआयामी प्रक्रिया है जो दुनिया भर के लोगों, कंपनियों और सरकारों के बीच अंतःक्रिया और एकीकरण को संदर्भित करती है।
Step 2: Detailed Explanation:
भूमंडलीकरण केवल आर्थिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। यह एक व्यापक प्रक्रिया है जिसमें शामिल हैं:
मुक्त आर्थिक आदान-प्रदान: वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और सूचना का राष्ट्रीय सीमाओं के पार स्वतंत्र प्रवाह।
राजनीतिक आदान-प्रदान: विभिन्न देशों के बीच राजनीतिक विचारों, नीतियों और सहयोग का बढ़ना।
सामाजिक-सांस्कृतिक आदान-प्रदान: विचारों, मूल्यों, संस्कृतियों और जीवन शैली का वैश्विक स्तर पर प्रसार और आदान-प्रदान।
इसलिए, भूमंडलीकरण आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सभी प्रकार के आदान-प्रदान को समाहित करता है।
Step 3: Final Answer:
चूंकि भूमंडलीकरण में मुक्त आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक आदान-प्रदान सभी शामिल हैं, इसलिए सही उत्तर (D) इनमें से सभी है।
Quick Tip: भूमंडलीकरण, उदारीकरण और निजीकरण (LPG) जैसे शब्दों के अर्थ और उनके बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें। भूमंडलीकरण एक व्यापक अवधारणा है जो आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को कवर करती है।
'यू. एन. वीमेन' की स्थापना हुई है।
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Step 1: Understanding the Concept:
'यू. एन. वीमेन' (UN Women) लैंगिक समानता और महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए समर्पित संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था है।
Step 2: Detailed Explanation:
'यू. एन. वीमेन' (United Nations Entity for Gender Equality and the Empowerment of Women) की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2 जुलाई, 2010 को की गई थी।
यह संस्था जनवरी 2011 में कार्यरत हुई।
इसका उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ भेदभाव को खत्म करना है।
यह संयुक्त राष्ट्र के चार पूर्ववर्ती निकायों के कार्यों को मिलाकर बनाया गया था।
Step 3: Final Answer:
यू. एन. वीमेन की स्थापना वर्ष 2010 में हुई थी।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: संयुक्त राष्ट्र और उसकी प्रमुख एजेंसियों (जैसे UNICEF, UNESCO, WHO, UN Women) की स्थापना के वर्ष और उनके मुख्यालयों को याद रखें। यह प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना किस वर्ष हुई थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
विश्व व्यापार संगठन (World Trade Organization - WTO) एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जो राष्ट्रों के बीच व्यापार के नियमों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना 1 जनवरी, 1995 को हुई थी।
इसकी स्थापना 1994 में मोरक्को के मारकेश में हस्ताक्षरित 'मारकेश समझौते' के तहत की गई थी।
WTO ने 1948 में स्थापित 'प्रशुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते' (General Agreement on Tariffs and Trade - GATT) का स्थान लिया।
इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्जरलैंड में है।
Step 3: Final Answer:
विश्व व्यापार संगठन की स्थापना वर्ष 1995 में हुई थी।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: GATT और WTO के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। GATT मुख्य रूप से वस्तुओं के व्यापार से संबंधित एक समझौता था, जबकि WTO एक स्थायी संगठन है जो वस्तुओं, सेवाओं और बौद्धिक संपदा को कवर करता है।
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल कौन थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल के पद के बारे में है, जो भारत की स्वतंत्रता के तुरंत बाद का एक महत्वपूर्ण पद था।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ। स्वतंत्रता के बाद, लॉर्ड माउंटबेटन, जो ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय थे, को स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल के रूप में बने रहने के लिए कहा गया था।
उन्होंने 1947 से 1948 तक इस पद पर कार्य किया।
सी. राजगोपालाचारी लॉर्ड माउंटबेटन के बाद भारत के गवर्नर-जनरल बने। वह स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर-जनरल थे।
प्रश्न "पहले" गवर्नर-जनरल के बारे में पूछ रहा है, न कि "पहले भारतीय" गवर्नर-जनरल के बारे में।
Step 3: Final Answer:
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन थे।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: इस तरह के प्रश्नों में शब्दों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। "स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल" (लॉर्ड माउंटबेटन) और "स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय गवर्नर-जनरल" (सी. राजगोपालाचारी) के बीच भ्रमित न हों।
'माउंटेन मैन' की उपाधि किसे दी गई है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
'माउंटेन मैन' एक उपाधि है जो किसी व्यक्ति को पहाड़ से संबंधित असाधारण कार्य के लिए दी जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
दशरथ मांझी को 'माउंटेन मैन' के नाम से जाना जाता है।
वह बिहार के गया जिले के गहलौर गाँव के एक मजदूर थे।
उन्होंने केवल एक हथौड़े और छेनी का उपयोग करके 22 वर्षों (1960-1982) में एक पहाड़ को काटकर एक रास्ता बना दिया।
यह रास्ता 360 फीट लंबा, 30 फीट चौड़ा और 25 फीट ऊंचा था, जिसने अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को 55 किमी से घटाकर 15 किमी कर दिया।
उनकी इस असाधारण उपलब्धि के लिए उन्हें 'माउंटेन मैन' की उपाधि दी गई।
Step 3: Final Answer:
'माउंटेन मैन' की उपाधि दशरथ मांझी को दी गई है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: भारत की प्रमुख हस्तियों और उन्हें दी गई उपाधियों (जैसे - राष्ट्रपिता, लौह पुरुष, माउंटेन मैन) को याद रखें। यह सामान्य ज्ञान का एक सामान्य विषय है।
बोडोलैण्ड प्रादेशिक क्षेत्र कहाँ स्थित है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
बोडोलैण्ड प्रादेशिक क्षेत्र (Bodoland Territorial Region - BTR) भारत में एक स्वायत्त क्षेत्र है। प्रश्न इसके स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
बोडोलैण्ड प्रादेशिक क्षेत्र भारत के असम राज्य में स्थित एक स्वायत्त क्षेत्र है।
इसका गठन फरवरी 2003 में हुआ था।
यह क्षेत्र ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर स्थित है और इसमें कोकराझार, चिरांग, बक्सा और उदलगुरी जिले शामिल हैं।
यह क्षेत्र मुख्य रूप से बोडो जनजाति के लोगों का निवास स्थान है।
Step 3: Final Answer:
बोडोलैण्ड प्रादेशिक क्षेत्र असम में स्थित है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारत के विभिन्न राज्यों में स्थित स्वायत्त परिषदों और प्रादेशिक क्षेत्रों (जैसे बोडोलैण्ड, गोरखालैंड) के बारे में जानकारी रखें। यह भारतीय राजनीति और भूगोल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पंचवर्षीय योजना की अवधारणा कहाँ से ली गई थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
पंचवर्षीय योजना (Five-Year Plan) भारत में आर्थिक विकास और नियोजन के लिए उपयोग की जाने वाली एक केंद्रीकृत राष्ट्रीय आर्थिक कार्यक्रम प्रणाली थी। प्रश्न इसके प्रेरणा स्रोत के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में पंचवर्षीय योजनाओं की अवधारणा पूर्व सोवियत संघ (USSR) से प्रेरित थी।
जोसेफ स्टालिन ने 1928 में सोवियत संघ में पहली पंचवर्षीय योजना लागू की थी।
भारत के पहले प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू, सोवियत संघ की नियोजित अर्थव्यवस्था के मॉडल से बहुत प्रभावित थे और उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत के विकास के लिए इसी मॉडल को अपनाया।
भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की गई थी।
Step 3: Final Answer:
पंचवर्षीय योजना की अवधारणा सोवियत संघ से ली गई थी।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारतीय संविधान और नीतियों के विभिन्न स्रोतों को याद रखना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, मौलिक अधिकार अमेरिका से, संसदीय प्रणाली ब्रिटेन से और पंचवर्षीय योजनाएँ सोवियत संघ से ली गई हैं।
वर्तमान में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कौन है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के वर्तमान प्रधानमंत्री के बारे में है, जो एक समसामयिक विषय है।
Step 2: Detailed Explanation:
दिए गए विकल्प ऋषि सुनक, बोरिस जॉनसन और लिज ट्रस, सभी ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री हैं।
ऋषि सुनक अक्टूबर 2022 से जुलाई 2024 तक प्रधानमंत्री थे।
लिज ट्रस सितंबर 2022 से अक्टूबर 2022 तक प्रधानमंत्री थीं।
बोरिस जॉनसन जुलाई 2019 से सितंबर 2022 तक प्रधानमंत्री थे।
जुलाई 2024 में हुए आम चुनाव के बाद, लेबर पार्टी के नेता, कीर स्टारमर (Keir Starmer) ब्रिटेन के वर्तमान प्रधानमंत्री बने।
Step 3: Final Answer:
चूंकि कीर स्टारमर, जो वर्तमान प्रधानमंत्री हैं, विकल्पों में नहीं हैं, इसलिए सही उत्तर 'इनमें से कोई नहीं' है।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: विश्व के प्रमुख देशों के वर्तमान राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के नाम याद रखना समसामयिक मामलों (Current Affairs) का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। परीक्षा से पहले नवीनतम जानकारी की जाँच अवश्य करें क्योंकि यह जानकारी बदल सकती है।
आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव पास किया गया था
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Step 1: Understanding the Concept:
आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव शिरोमणि अकाली दल द्वारा पारित एक दस्तावेज था जिसमें पंजाब और सिखों से संबंधित कुछ मांगें रखी गई थीं।
Step 2: Detailed Explanation:
आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव को शिरोमणि अकाली दल की कार्यसमिति द्वारा 16-17 अक्टूबर, 1973 को आनंदपुर साहिब में अपनाया गया था।
इस प्रस्ताव में राज्यों के लिए अधिक स्वायत्तता की मांग की गई थी और यह कहा गया था कि केंद्र सरकार को केवल रक्षा, विदेश मामले, संचार और मुद्रा जैसे कुछ विषयों पर ही अधिकार रखना चाहिए।
यह प्रस्ताव पंजाब की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों में एक महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
आनन्दपुर साहिब प्रस्ताव 1973 में पास किया गया था।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण प्रस्तावों, समझौतों और आयोगों (जैसे आनंदपुर साहिब प्रस्ताव, पंजाब समझौता, शाह आयोग) के वर्ष और उनके मुख्य प्रावधानों को याद रखें।
निम्न में से कौन-सा राज्य 1966 में बना था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है, विशेष रूप से वर्ष 1966 में हुए गठन के बारे में।
Step 2: Detailed Explanation:
पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के आधार पर, तत्कालीन पंजाब राज्य को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया था।
इसके परिणामस्वरूप, 1 नवंबर, 1966 को हरियाणा को एक अलग राज्य के रूप में बनाया गया।
इस पुनर्गठन ने हिंदी भाषी क्षेत्र को हरियाणा के रूप में और पंजाबी भाषी क्षेत्र को वर्तमान पंजाब राज्य के रूप में स्थापित किया।
कुछ पहाड़ी क्षेत्रों को हिमाचल प्रदेश में स्थानांतरित कर दिया गया।
गुजरात और महाराष्ट्र का गठन 1960 में बंबई राज्य के विभाजन से हुआ था। राजस्थान पहले से ही एक राज्य था।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से, हरियाणा राज्य 1966 में बना था।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारत में राज्यों के गठन और पुनर्गठन के महत्वपूर्ण वर्षों की एक समयरेखा (timeline) बनाकर याद करें, जैसे कि 1953 (आंध्र प्रदेश), 1960 (महाराष्ट्र, गुजरात), 1966 (पंजाब, हरियाणा), 2000 (छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड) और 2014 (तेलंगाना)।
मार्च, 2022 में किन दो राज्यों ने सीमा विवाद पर समझौता किया है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के राज्यों के बीच सीमा विवाद और उनके समाधान से संबंधित एक समसामयिक घटना के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
29 मार्च, 2022 को, असम और मेघालय की सरकारों ने अपने दशकों पुराने सीमा विवाद को हल करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में नई दिल्ली में हुआ।
समझौते के तहत, विवादित 12 क्षेत्रों में से 6 में सीमा का सीमांकन किया गया, जिससे लगभग 70% विवादित सीमा का समाधान हो गया।
यह समझौता दोनों राज्यों के बीच शांति और सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम था।
Step 3: Final Answer:
मार्च 2022 में मेघालय एवं असम ने सीमा विवाद पर समझौता किया था।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: पूर्वोत्तर भारत के राज्यों के बीच के सीमा विवाद एक महत्वपूर्ण और अक्सर समाचारों में रहने वाला विषय है। असम का अपने कई पड़ोसी राज्यों के साथ सीमा विवाद है, इसलिए इन पर विशेष ध्यान दें।
निम्न में से किस राज्य में चिपको आन्दोलन की शुरूआत हुई ?
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Step 1: Understanding the Concept:
चिपको आंदोलन भारत में एक प्रसिद्ध पर्यावरण संरक्षण आंदोलन था, जो पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए शुरू हुआ था।
Step 2: Detailed Explanation:
चिपको आंदोलन की शुरुआत 1973 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के चमोली जिले (अब उत्तराखंड) के मंडल गाँव में हुई थी।
इस आंदोलन में, जब ठेकेदार पेड़ों को काटने आते थे, तो गाँव की महिलाएँ पेड़ों से चिपककर खड़ी हो जाती थीं, ताकि उन्हें काटा न जा सके।
गौरा देवी, सुंदरलाल बहुगुणा और चंडी प्रसाद भट्ट इस आंदोलन के प्रमुख नेता थे।
चूंकि आंदोलन का उत्पत्ति स्थल अब उत्तराखंड राज्य का हिस्सा है, इसलिए विकल्पों में उत्तराखंड सबसे सटीक उत्तर है। यदि उत्तराखंड विकल्प में नहीं होता, तो उत्तर प्रदेश सही होता।
Step 3: Final Answer:
चिपको आंदोलन की शुरुआत वर्तमान उत्तराखंड राज्य में हुई थी।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: भारत के प्रमुख पर्यावरण आंदोलनों (जैसे चिपको आंदोलन, नर्मदा बचाओ आंदोलन, अप्पिको आंदोलन) के स्थान, वर्ष और संबंधित प्रमुख नेताओं के नाम याद रखना परीक्षा के लिए बहुत उपयोगी है।
निम्न में से कौन सरकारी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न उन समूहों के बारे में है जो सरकार के निर्णयों और नीतियों पर प्रभाव डालने का प्रयास करते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
दबाव समूह (Pressure Groups): ये ऐसे संगठन होते हैं जो अपने विशेष हितों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा के लिए सरकारी नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास करते हैं। ये समूह लॉबिंग, विरोध प्रदर्शन, और जनमत अभियानों जैसे तरीकों का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, व्यापार संघ, किसान संगठन, और छात्र संगठन।
गैर-सरकारी संगठन (NGOs): यद्यपि एनजीओ भी नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं, उनका मुख्य उद्देश्य सामाजिक कल्याण होता है, न कि केवल अपने सदस्यों के हितों को बढ़ावा देना।
दबाव समूह शब्द विशेष रूप से नीति को प्रभावित करने के उद्देश्य से बने समूहों के लिए उपयोग किया जाता है, इसलिए यह सबसे सटीक उत्तर है।
Step 3: Final Answer:
सरकारी नीतियों को प्रभावित करने की कोशिश करने वाले संगठन को 'दबाव समूह' कहा जाता है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: दबाव समूह और राजनीतिक दल के बीच अंतर को समझें। राजनीतिक दल सत्ता हासिल करना चाहते हैं, जबकि दबाव समूह सत्ता में आए बिना सरकार की नीतियों को बाहर से प्रभावित करना चाहते हैं।
सरदार सरोवर बांध किस नदी पर अवस्थित है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के प्रमुख बांधों और उनकी भौगोलिक स्थिति से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सरदार सरोवर बांध भारत का दूसरा सबसे बड़ा बांध है।
यह गुजरात राज्य में नर्मदा नदी पर बनाया गया है।
यह बांध गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्यों को पानी और बिजली प्रदान करता है।
यह नर्मदा घाटी परियोजना का एक हिस्सा है।
Step 3: Final Answer:
सरदार सरोवर बांध नर्मदा नदी पर स्थित है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारत की प्रमुख नदियों और उन पर बने महत्वपूर्ण बांधों की एक सूची बनाएं और उन्हें मानचित्र पर अंकित करके याद करें। यह भूगोल के प्रश्नों के लिए बहुत मददगार होता है।
राष्ट्रीय विकास परिषद् के अध्यक्ष होते हैं।
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Step 1: Understanding the Concept:
राष्ट्रीय विकास परिषद् (National Development Council - NDC) भारत में पंचवर्षीय योजनाओं को मंजूरी देने वाली सर्वोच्च संस्था थी।
Step 2: Detailed Explanation:
राष्ट्रीय विकास परिषद् की स्थापना 6 अगस्त, 1952 को हुई थी।
इसके अध्यक्ष पदेन रूप से भारत के प्रधानमंत्री होते थे।
इसके सदस्यों में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासक और योजना आयोग के सदस्य शामिल होते थे।
योजना आयोग के अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होते थे, इसलिए विकल्प (D) भी अप्रत्यक्ष रूप से सही है, लेकिन (A) अध्यक्ष के पद का सीधा उल्लेख करता है।
योजना आयोग को 2014 में भंग कर दिया गया और उसकी जगह नीति आयोग ने ले ली, जिसके बाद NDC भी वस्तुतः निष्क्रिय हो गई है।
Step 3: Final Answer:
राष्ट्रीय विकास परिषद् के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: याद रखें कि योजना आयोग और राष्ट्रीय विकास परिषद् दोनों के अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते थे। नीति आयोग के अध्यक्ष भी प्रधानमंत्री ही होते हैं।
योजना आयोग को भंग कर दिया गया था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत की नियोजन प्रणाली में हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव से संबंधित है, जिसमें योजना आयोग को समाप्त कर दिया गया।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2014 को लाल किले से अपने भाषण में योजना आयोग को भंग करने की घोषणा की थी।
इसके बाद, 17 अगस्त, 2014 को योजना आयोग को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया।
योजना आयोग के स्थान पर, 1 जनवरी, 2015 को नीति आयोग (National Institution for Transforming India) का गठन किया गया, जो सरकार के लिए एक 'थिंक टैंक' के रूप में कार्य करता है।
Step 3: Final Answer:
योजना आयोग को वर्ष 2014 में भंग किया गया था।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: योजना आयोग के भंग होने की तिथि (2014) और नीति आयोग के गठन की तिथि (1 जनवरी, 2015) दोनों को याद रखें। अक्सर इन दोनों तिथियों में भ्रम हो जाता है।
प्रथम पंचवर्षीय योजना शुरू हुई थी
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्र भारत के आर्थिक नियोजन के इतिहास के एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत की पहली पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू की गई थी और यह 1956 तक चली।
इस योजना को प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में प्रस्तुत किया था।
यह योजना हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी और इसका मुख्य ध्यान देश के कृषि विकास पर था।
इस योजना के दौरान भाखड़ा-नांगल और हीराकुंड जैसे कई बड़े बांधों का निर्माण शुरू हुआ।
Step 3: Final Answer:
प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 में शुरू हुई थी।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: प्रमुख पंचवर्षीय योजनाओं (विशेषकर पहली, दूसरी और पाँचवीं) के लक्ष्य, मॉडल और उनकी अवधि को याद रखें, क्योंकि इनसे संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं।
पंचायती राज है
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Step 1: Understanding the Concept:
पंचायती राज भारत में ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की एक प्रणाली है। प्रश्न इसकी संरचना के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में पंचायती राज प्रणाली की संरचना त्रिस्तरीय (three-tier) है।
यह संरचना बलवंत राय मेहता समिति (1957) की सिफारिश पर आधारित है।
73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 ने इस प्रणाली को संवैधानिक दर्जा दिया।
इसके तीन स्तर हैं:
1. ग्राम पंचायत (ग्राम स्तर पर)
2. पंचायत समिति (मध्यवर्ती या ब्लॉक स्तर पर)
3. जिला परिषद् (जिला स्तर पर)
Step 3: Final Answer:
पंचायती राज एक त्रिस्तरीय व्यवस्था है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण समितियों (बलवंत राय मेहता, अशोक मेहता, एल. एम. सिंघवी) और 73वें संविधान संशोधन की मुख्य विशेषताओं को याद रखें।
राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना हुई थी
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्र भारत में राज्यों की सीमाओं को फिर से परिभाषित करने के लिए गठित आयोग से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत सरकार ने भाषाई आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग पर विचार करने के लिए अगस्त 1953 में राज्य पुनर्गठन आयोग (States Reorganisation Commission - SRC) की स्थापना की।
इस आयोग के अध्यक्ष फजल अली थे, और इसके अन्य सदस्य के. एम. पणिक्कर और एच. एन. कुंजरू थे।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट 1955 में प्रस्तुत की, और इसकी सिफारिशों के आधार पर राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 पारित किया गया, जिसके तहत 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए।
Step 3: Final Answer:
राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना 1953 में हुई थी।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: राज्य पुनर्गठन आयोग की स्थापना (1953), रिपोर्ट प्रस्तुत करना (1955) और राज्य पुनर्गठन अधिनियम का पारित होना (1956) - इन तीनों वर्षों को क्रम में याद रखें।
संविधान में "धर्मनिरपेक्ष" शब्द कब जोड़ा गया ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान की प्रस्तावना में किए गए एक महत्वपूर्ण संशोधन के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
"धर्मनिरपेक्ष" (Secular) शब्द को मूल संविधान की प्रस्तावना में शामिल नहीं किया गया था।
इसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से प्रस्तावना में जोड़ा गया था।
इस संशोधन के द्वारा तीन नए शब्द जोड़े गए थे: 'समाजवादी' (Socialist), 'धर्मनिरपेक्ष' (Secular), और 'अखंडता' (Integrity)।
यह संशोधन इंदिरा गांधी सरकार द्वारा आपातकाल के दौरान किया गया था।
Step 3: Final Answer:
संविधान में "धर्मनिरपेक्ष" शब्द 1976 में जोड़ा गया।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: 42वें संशोधन (1976) को 'लघु संविधान' (Mini-Constitution) भी कहा जाता है क्योंकि इसने संविधान में व्यापक बदलाव किए थे। इसके द्वारा जोड़े गए तीन शब्दों - समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और अखंडता - को हमेशा याद रखें।
सम्पत्ति का अधिकार है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न संपत्ति के अधिकार की वर्तमान संवैधानिक स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
मूल रूप से, संपत्ति का अधिकार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(f) और अनुच्छेद 31 के तहत एक मौलिक अधिकार (Fundamental Right) था।
हालांकि, 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा इसे मौलिक अधिकारों की सूची से हटा दिया गया।
इस संशोधन ने एक नया अनुच्छेद, अनुच्छेद 300-A, जोड़ा, जिसके तहत संपत्ति के अधिकार को एक कानूनी अधिकार (Legal Right) या संवैधानिक अधिकार बना दिया गया।
इसका मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को कानून के अधिकार के बिना उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जा सकता है, लेकिन यह अब एक मौलिक अधिकार नहीं है जिसके उल्लंघन पर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में जाया जा सके।
Step 3: Final Answer:
वर्तमान में, संपत्ति का अधिकार एक कानूनी अधिकार है।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि 44वें संशोधन (1978) ने संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकार से हटाकर कानूनी अधिकार बनाया और इसे अनुच्छेद 300-A के तहत रखा।
44वाँ संविधान संशोधन कब पारित हुआ ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान के एक प्रमुख संशोधन के वर्ष के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
44वाँ संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 में पारित किया गया था।
यह संशोधन जनता पार्टी सरकार द्वारा लाया गया था, जिसने 1977 में चुनाव जीता था।
इस संशोधन का मुख्य उद्देश्य 42वें संशोधन अधिनियम, 1976 (आपातकाल के दौरान पारित) के कुछ प्रावधानों को उलटना था।
इसके सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक संपत्ति के अधिकार को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाना था। इसने राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के लिए आंतरिक अशांति के स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द को भी प्रतिस्थापित किया।
Step 3: Final Answer:
44वाँ संविधान संशोधन 1978 में पारित हुआ।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: 42वें (1976) और 44वें (1978) संशोधनों को एक साथ याद रखें। 42वां संशोधन आपातकाल के दौरान शक्तियों को केंद्रित करने के लिए था, जबकि 44वां संशोधन लोकतंत्र को मजबूत करने और 42वें संशोधन के कुछ प्रभावों को उलटने के लिए था।
पंचशील समझौता पर हस्ताक्षर करनेवाले देश थे भारत और
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Step 1: Understanding the Concept:
पंचशील समझौता भारत की विदेश नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांतों पर आधारित है।
Step 2: Detailed Explanation:
पंचशील समझौता पर 29 अप्रैल, 1954 को हस्ताक्षर किए गए थे।
यह समझौता भारत और चीन के तिब्बत क्षेत्र के बीच व्यापार और यातायात को लेकर हुआ था।
इस पर भारत के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और चीन के पहले प्रधानमंत्री चाउ एन-लाई ने हस्ताक्षर किए थे।
समझौते में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत शामिल थे, जो बाद में गुटनिरपेक्ष आंदोलन का आधार बने।
Step 3: Final Answer:
पंचशील समझौते पर भारत और चीन ने हस्ताक्षर किए थे।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारत के अपने पड़ोसियों के साथ हुए प्रमुख समझौतों को याद रखें, जैसे पंचशील समझौता (चीन, 1954), सिंधु जल संधि (पाकिस्तान, 1960), ताशकंद समझौता (पाकिस्तान, 1966), और शिमला समझौता (पाकिस्तान, 1972)।
राज्य विधान परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल होता है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय राज्यों के ऊपरी सदन (विधान परिषद्) के सदस्यों के कार्यकाल के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
राज्य विधान परिषद् (Vidhan Parishad) एक स्थायी सदन है, जिसे भंग नहीं किया जा सकता, यह राज्यसभा के समान है।
इसके सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है।
प्रत्येक दो वर्ष में इसके एक-तिहाई (1/3) सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनके स्थान पर नए सदस्य चुने जाते हैं।
इसके विपरीत, राज्य विधान सभा (Vidhan Sabha) का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
Step 3: Final Answer:
राज्य विधान परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: राज्यसभा और राज्य विधान परिषद् के सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष होता है, जबकि लोकसभा और राज्य विधान सभा के सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्ष होता है। इस अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
भारत के संविधान में कुल कितने अध्याय हैं ?
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Step 1: Understanding the Concept:
प्रश्न भारतीय संविधान में 'अध्याय' या 'भाग' (Parts) की कुल संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
मूल रूप से, 1950 में लागू हुए भारतीय संविधान में 22 भाग (Parts) थे।
समय के साथ, संशोधनों के माध्यम से इसमें बदलाव हुए हैं:
- नए भाग जोड़े गए: भाग IV-A (मौलिक कर्तव्य), भाग IX-A (नगर पालिकाएं), भाग IX-B (सहकारी समितियां), और भाग XIV-A (अधिकरण)।
- एक भाग हटाया गया: भाग VII (पहली अनुसूची के भाग ख के राज्य) को 7वें संशोधन, 1956 द्वारा हटा दिया गया।
इस प्रकार, वर्तमान में भागों की कुल संख्या की गणना इस प्रकार है: 22 (मूल) - 1 (हटाया गया) + 4 (जोड़े गए) = 25।
हालांकि अंतिम भाग की संख्या अभी भी XXII है, लेकिन कुल संख्या 25 है।
Step 3: Final Answer:
भारत के संविधान में वर्तमान में कुल 25 भाग (अध्याय) हैं।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: संविधान के भागों की संख्या पर प्रश्न भ्रमित करने वाला हो सकता है। याद रखें कि मूल रूप से 22 भाग थे, लेकिन वर्तमान में गिनती में 25 भाग हैं, भले ही अंतिम क्रमांक 22 हो।
अनुच्छेद 18 सम्बन्धित है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संविधान के एक विशिष्ट मौलिक अधिकार से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
आइए दिए गए विकल्पों और अनुच्छेद 18 का विश्लेषण करें:
(A) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: यह अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत आता है।
(B) शिक्षा का अधिकार: यह अनुच्छेद 21A के अंतर्गत आता है।
(C) सूचना का अधिकार: यह एक कानूनी अधिकार है, जिसे अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार के रूप में व्याख्या किया गया है।
अनुच्छेद 18: यह 'उपाधियों के अंत' (Abolition of Titles) से संबंधित है। यह राज्य को सैन्य और शैक्षणिक सम्मानों को छोड़कर कोई भी उपाधि प्रदान करने से रोकता है।
चूंकि 'उपाधियों का अंत' विकल्पों में नहीं है, इसलिए सही उत्तर 'इनमें से कोई नहीं' है।
Step 3: Final Answer:
अनुच्छेद 18 'उपाधियों के अंत' से संबंधित है, जो दिए गए विकल्पों में से कोई नहीं है।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14-18) के सभी अनुच्छेदों को याद रखें: 14 (कानून के समक्ष समानता), 15 (भेदभाव का निषेध), 16 (अवसर की समानता), 17 (अस्पृश्यता का अंत), और 18 (उपाधियों का अंत)।
भारत में राष्ट्रीय आपात की घोषणा कौन करता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में राष्ट्रीय आपातकाल लागू करने की संवैधानिक शक्ति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करने की शक्ति भारत के राष्ट्रपति के पास है।
राष्ट्रपति यह घोषणा तब कर सकते हैं जब उन्हें यह विश्वास हो कि युद्ध, बाहरी आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत की सुरक्षा को खतरा है।
हालांकि, राष्ट्रपति यह घोषणा केवल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल की लिखित सिफारिश पर ही कर सकते हैं (यह प्रावधान 44वें संशोधन, 1978 द्वारा जोड़ा गया था)।
घोषणा करने का अंतिम प्राधिकारी राष्ट्रपति ही होता है।
Step 3: Final Answer:
भारत में राष्ट्रीय आपात की घोषणा राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: आपातकालीन प्रावधानों (अनुच्छेद 352 - राष्ट्रीय आपातकाल, अनुच्छेद 356 - राष्ट्रपति शासन, अनुच्छेद 360 - वित्तीय आपातकाल) और उनकी घोषणा कौन करता है, इसे स्पष्ट रूप से याद रखें।
शिमला समझौता किन दो देशों के बीच हुआ था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण एशिया के इतिहास में एक महत्वपूर्ण शांति समझौते के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
शिमला समझौता 2 जुलाई, 1972 को भारत और पाकिस्तान के बीच हस्ताक्षरित एक शांति संधि थी।
यह समझौता 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।
इस पर भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हस्ताक्षर किए थे।
इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाना और द्विपक्षीय रूप से मुद्दों को हल करना था।
Step 3: Final Answer:
शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: भारत और पाकिस्तान के बीच हुए प्रमुख समझौतों/घटनाओं को कालानुक्रम में याद करें: सिंधु जल संधि (1960), ताशकंद समझौता (1966), शिमला समझौता (1972), और लाहौर घोषणा (1999)।
पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान किस वर्ष अलग हुआ ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम से संबंधित है, जिसके परिणामस्वरूप एक नए देश का निर्माण हुआ।
Step 2: Detailed Explanation:
1947 में भारत के विभाजन के समय, पाकिस्तान दो भागों में बना था - पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान (जो वर्तमान बांग्लादेश है)।
पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने भाषाई, सांस्कृतिक और आर्थिक भेदभाव के कारण पश्चिमी पाकिस्तान के प्रभुत्व के खिलाफ संघर्ष शुरू किया।
यह संघर्ष 1971 में एक पूर्ण पैमाने पर युद्ध में बदल गया, जिसे बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के नाम से जाना जाता है।
भारत ने पूर्वी पाकिस्तान की मुक्ति वाहिनी का समर्थन किया। 16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के साथ युद्ध समाप्त हुआ और पूर्वी पाकिस्तान एक स्वतंत्र देश 'बांग्लादेश' के रूप में उभरा।
Step 3: Final Answer:
पूर्वी पाकिस्तान 1971 में पाकिस्तान से अलग होकर बांग्लादेश बना।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: दक्षिण एशिया के इतिहास की प्रमुख घटनाओं, जैसे कि 1947 का विभाजन, 1965 का भारत-पाक युद्ध, और 1971 का बांग्लादेश का निर्माण, की तिथियों को याद रखना महत्वपूर्ण है।
संसद के संयुक्त अधिवेशन को कौन संबोधित करता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संसद की संयुक्त बैठक की प्रक्रिया से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 108 के अनुसार, किसी साधारण विधेयक पर दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) के बीच गतिरोध की स्थिति में राष्ट्रपति संसद का संयुक्त अधिवेशन बुला सकते हैं।
संविधान के अनुच्छेद 87 के अनुसार, राष्ट्रपति प्रत्येक आम चुनाव के बाद पहले सत्र की शुरुआत में और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र की शुरुआत में संसद के दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करते हैं।
जब संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाता है, तो उसे संबोधित करने का कार्य भी राष्ट्रपति द्वारा किया जाता है। हालांकि, संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 118(4))।
प्रश्न 'संबोधित करने' के बारे में है, न कि 'अध्यक्षता करने' के बारे में।
Step 3: Final Answer:
संसद के संयुक्त अधिवेशन को राष्ट्रपति संबोधित करते हैं।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: संयुक्त अधिवेशन के संबंध में दो महत्वपूर्ण तथ्यों को याद रखें: इसे राष्ट्रपति 'बुलाते' और 'संबोधित' करते हैं, लेकिन इसकी 'अध्यक्षता' लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।
राज्य के राज्यपाल को कौन नियुक्त करता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय संघीय प्रणाली में राज्यों के संवैधानिक प्रमुख (राज्यपाल) की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 155 के अनुसार, राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं, जिसका अर्थ है कि राष्ट्रपति उन्हें कभी भी पद से हटा सकते हैं।
यद्यपि नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, यह व्यवहार में केंद्रीय मंत्रिपरिषद (विशेषकर प्रधानमंत्री) की सलाह पर किया जाता है।
राज्यपाल राज्य के कार्यकारी प्रमुख होते हैं और केंद्र सरकार के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य करते हैं।
Step 3: Final Answer:
राज्य के राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों को याद रखें: राष्ट्रपति राज्यपाल, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों, और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते हैं। मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।
निम्न में से कौन-सी नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा नहीं की जाती है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के राष्ट्रपति की नियुक्ति शक्तियों के दायरे के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
आइए प्रत्येक विकल्प का विश्लेषण करें:
(A) भारत के मुख्य न्यायाधीश: इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 124)।
(C) राज्यों के राज्यपाल: इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है (अनुच्छेद 155)।
(D) भारत के प्रधानमंत्री: इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। राष्ट्रपति लोकसभा में बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 75)।
(B) लोकसभा अध्यक्ष: लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा नहीं की जाती है। उनका चुनाव लोकसभा के सदस्यों द्वारा अपने में से ही किया जाता है (अनुच्छेद 93)।
Step 3: Final Answer:
लोकसभा अध्यक्ष की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा नहीं की जाती है; उनका चुनाव होता है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि लोकसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव होता है, जबकि राज्यसभा के सभापति (उपराष्ट्रपति) का भी चुनाव होता है, और उपसभापति का चुनाव राज्यसभा सदस्यों द्वारा किया जाता है। इनकी नियुक्ति नहीं होती।
निम्न में से किसके विरुद्ध अविश्वास लाया जा सकता है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
अविश्वास प्रस्ताव (No-confidence motion) संसदीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जिसके द्वारा विधायिका कार्यपालिका में अपना अविश्वास व्यक्त करती है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(3) के अनुसार, मंत्रिपरिषद (यानी सरकार) सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
इसका मतलब है कि सरकार को तभी तक पद पर बने रहने का अधिकार है जब तक उसे लोकसभा में बहुमत का विश्वास प्राप्त हो।
अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में ही लाया जा सकता है।
यह प्रस्ताव पूरी मंत्रिपरिषद (सरकार) के विरुद्ध लाया जाता है, न कि किसी एक मंत्री या संसद, न्यायाधीशों या राज्यपाल के विरुद्ध।
यदि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है।
Step 3: Final Answer:
अविश्वास प्रस्ताव सरकार (मंत्रिपरिषद) के विरुद्ध लाया जा सकता है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: याद रखें, अविश्वास प्रस्ताव केवल लोकसभा में और केवल पूरी मंत्रिपरिषद के खिलाफ लाया जा सकता है। न्यायाधीशों को हटाने की प्रक्रिया को 'महाभियोग' (Impeachment) कहा जाता है, जो एक अलग और जटिल प्रक्रिया है।
रूस संयुक्त राष्ट्र संघ में सोवियत संघ की जगह कब लिया ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न शीत युद्ध के अंत में सोवियत संघ के विघटन और संयुक्त राष्ट्र में उसके उत्तराधिकार से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सोवियत संघ का विघटन 26 दिसंबर, 1991 को औपचारिक रूप से हुआ।
विघटन के बाद, रूसी संघ (Russian Federation) को सोवियत संघ (USSR) का उत्तराधिकारी राज्य माना गया।
परिणामस्वरूप, रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में सोवियत संघ की स्थायी सीट सहित संयुक्त राष्ट्र में उसकी सभी सदस्यता अधिकारों और दायित्वों को विरासत में प्राप्त किया।
यह घटनाक्रम दिसंबर 1991 में हुआ।
Step 3: Final Answer:
रूस ने दिसंबर 1991 में संयुक्त राष्ट्र में सोवियत संघ की जगह ली।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: सोवियत संघ के विघटन का वर्ष (1991) याद रखें। यह शीत युद्ध के अंत, अमेरिकी प्रभुत्व की शुरुआत और कई नए देशों के उदय जैसी कई महत्वपूर्ण घटनाओं से जुड़ा है।
बर्लिन की दीवार गिरी थी
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Step 1: Understanding the Concept:
बर्लिन की दीवार का गिरना शीत युद्ध के अंत का एक प्रतीकात्मक और महत्वपूर्ण क्षण था।
Step 2: Detailed Explanation:
बर्लिन की दीवार का निर्माण 1961 में पूर्वी जर्मनी की कम्युनिस्ट सरकार द्वारा पूर्वी बर्लिन और पश्चिमी बर्लिन को अलग करने के लिए किया गया था।
यह दीवार शीत युद्ध के दौरान 'आयरन कर्टेन' और दुनिया के वैचारिक विभाजन का सबसे बड़ा प्रतीक बन गई थी।
पूर्वी यूरोप में सुधारों और विरोध प्रदर्शनों की लहर के बीच, 9 नवंबर, 1989 को बर्लिन की दीवार को गिरा दिया गया, जिससे लोगों को दोनों तरफ स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति मिल गई।
इस घटना ने जर्मनी के एकीकरण और पूर्वी यूरोप में साम्यवाद के पतन का मार्ग प्रशस्त किया।
Step 3: Final Answer:
बर्लिन की दीवार 1989 में गिरी थी।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: शीत युद्ध के अंत से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण तिथियों को याद रखें: बर्लिन की दीवार का गिरना (1989), जर्मनी का एकीकरण (1990), और सोवियत संघ का विघटन (1991)।
बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना की गई थी
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 20वीं सदी की शुरुआत में रूसी क्रांति के एक प्रमुख राजनीतिक दल की स्थापना से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
बोल्शेविक मूल रूप से 'रूसी सोशल डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी' (RSDLP) का एक गुट था, जो 1903 में पार्टी के विभाजन के बाद बना।
इस गुट का नेतृत्व व्लादिमीर लेनिन ने किया था। 'बोल्शेविक' का अर्थ 'बहुमत' है।
लेनिन के नेतृत्व में, बोल्शेविकों ने एक अनुशासित, पेशेवर क्रांतिकारियों की पार्टी की वकालत की।
अंततः, इसी बोल्शेविक पार्टी ने अक्टूबर 1917 में रूस में सत्ता पर कब्जा कर लिया, जिसे रूसी क्रांति के रूप में जाना जाता है, और दुनिया के पहले कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना की।
स्टालिन, ख्रुश्चेव और ब्रेझनेव बाद में सोवियत संघ के नेता बने।
Step 3: Final Answer:
बोल्शेविक कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना लेनिन के द्वारा की गई थी।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: रूसी क्रांति के प्रमुख नेताओं और उनकी भूमिकाओं को समझें: लेनिन (क्रांति के नेता और पार्टी के संस्थापक), ट्रॉट्स्की (लाल सेना के आयोजक), और स्टालिन (लेनिन के उत्तराधिकारी और तानाशाह)।
शीत युद्ध का कालखंड था
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Step 1: Understanding the Concept:
शीत युद्ध 20वीं सदी के उत्तरार्ध में एक वैश्विक भू-राजनीतिक, वैचारिक और आर्थिक संघर्ष था।
Step 2: Detailed Explanation:
शीत युद्ध मोटे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के अंत के तुरंत बाद शुरू हुआ।
यह मुख्य रूप से दो महाशक्तियों के बीच था: संयुक्त राज्य अमेरिका (पूंजीवादी गुट का नेतृत्व) और सोवियत संघ (कम्युनिस्ट गुट का नेतृत्व)।
इस संघर्ष को 'शीत' कहा जाता है क्योंकि दोनों महाशक्तियों के बीच कोई सीधा बड़ा सैन्य संघर्ष नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने प्रॉक्सी युद्ध, हथियारों की होड़, और प्रचार के माध्यम से संघर्ष किया।
शीत युद्ध का अंत 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ हुआ।
इसलिए, इसका कालखंड 1945 से 1991 माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
शीत युद्ध का कालखंड 1945 से 1991 था।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: अन्य विकल्पों को पहचानें: 1914-1919 प्रथम विश्व युद्ध का कालखंड है, और 1939-1945 द्वितीय विश्व युद्ध का कालखंड है। इन प्रमुख संघर्षों की तिथियों को अलग-अलग याद रखें।
अमरीकी प्रभुत्व की शुरूआत कब हुई थी ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न उस दौर की शुरुआत के बारे में है जब संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया की एकमात्र महाशक्ति बन गया।
Step 2: Detailed Explanation:
शीत युद्ध (1945-1991) के दौरान, दुनिया द्विध्रुवीय थी, जिसमें दो महाशक्तियाँ - संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ - थीं।
1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ, शीत युद्ध समाप्त हो गया और दुनिया में शक्ति का संतुलन बदल गया।
सोवियत संघ के पतन ने संयुक्त राज्य अमेरिका को दुनिया की एकमात्र राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य महाशक्ति के रूप में छोड़ दिया।
इस घटना के बाद के युग को अक्सर एकध्रुवीय विश्व या अमेरिकी प्रभुत्व (American Hegemony) का युग कहा जाता है। इसलिए, इसकी शुरुआत 1991 से मानी जाती है।
Step 3: Final Answer:
अमरीकी प्रभुत्व की शुरूआत 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद हुई।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: 'द्विध्रुवीय विश्व' (शीत युद्ध के दौरान) और 'एकध्रुवीय विश्व' (शीत युद्ध के बाद) की अवधारणाओं को समझें। ये शब्द अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में शक्ति संतुलन का वर्णन करते हैं।
पेंटागन नामक इमारत अवस्थित है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दुनिया की एक प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण सरकारी इमारत के स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
पेंटागन संयुक्त राज्य अमेरिका के रक्षा विभाग (Department of Defense) का मुख्यालय है।
इसका नाम इसकी पांच-भुजाओं वाली (pentagonal) वास्तुकला के कारण रखा गया है।
यह इमारत आर्लिंगटन, वर्जीनिया में स्थित है, जो वाशिंगटन, डी.सी. के निकट है।
यह अमेरिकी सैन्य शक्ति का एक प्रमुख प्रतीक है।
Step 3: Final Answer:
पेंटागन नामक इमारत अमेरिका में अवस्थित है।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: दुनिया की प्रमुख सरकारी इमारतों और उनके स्थानों को जानें, जैसे व्हाइट हाउस (यूएसए), क्रेमलिन (रूस), 10 डाउनिंग स्ट्रीट (यूके), और संसद भवन (भारत)।
परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर कब हुए थे ?
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Step 1: Understanding the Concept:
परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty - NPT) परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संधि है।
Step 2: Detailed Explanation:
NPT का मसौदा तैयार किया गया और 1 जुलाई, 1968 को हस्ताक्षर के लिए खोला गया।
यह संधि 5 मार्च, 1970 को लागू हुई।
इस संधि के तीन मुख्य स्तंभ हैं: अप्रसार (non-proliferation), निरस्त्रीकरण (disarmament), और परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग।
यह संधि उन देशों को परमाणु हथियार रखने की अनुमति देती है जिन्होंने 1 जनवरी, 1967 से पहले परमाणु परीक्षण किया था (अमेरिका, रूस, यूके, फ्रांस, चीन), और अन्य सभी देशों को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकती है।
भारत ने इस संधि को भेदभावपूर्ण मानते हुए इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।
Step 3: Final Answer:
परमाणु अप्रसार संधि पर 1968 में हस्ताक्षर शुरू हुए थे।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संधियों जैसे NPT, CTBT (व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि) के बारे में जानें और भारत का उनके प्रति क्या रुख है, इसे भी समझें।
निम्न में से कौन मानवाधिकार का एक प्रकार है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
मानवाधिकार वे मौलिक अधिकार और स्वतंत्रताएं हैं जिनके सभी मनुष्य हकदार हैं। प्रश्न इन अधिकारों के विभिन्न प्रकारों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
मानवाधिकारों को अक्सर विभिन्न पीढ़ियों या श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:
नागरिक और राजनीतिक अधिकार (पहली पीढ़ी): इनमें जीवन का अधिकार, कानून के समक्ष समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता शामिल है। (विकल्प A)
आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार (दूसरी पीढ़ी): इनमें काम करने का अधिकार, भोजन का अधिकार, शिक्षा का अधिकार और सामाजिक समानता शामिल है। (विकल्प B और C)
ये सभी प्रकार के अधिकार मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) और अन्य अंतरराष्ट्रीय संधियों में निहित हैं।
Step 3: Final Answer:
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सामाजिक समानता, और आर्थिक अधिकार सभी मानवाधिकार के प्रकार हैं।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: मानवाधिकारों की विभिन्न श्रेणियों (नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक) को समझें। यह आपको अधिकारों से संबंधित प्रश्नों का बेहतर उत्तर देने में मदद करेगा।
संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल सदस्यों की संख्या है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विश्व के सबसे बड़े अंतर्राष्ट्रीय संगठन, संयुक्त राष्ट्र (UN) के सदस्य देशों की वर्तमान संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
वर्तमान में, संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में 51 संस्थापक सदस्यों के साथ हुई थी।
समय के साथ, नए स्वतंत्र देशों के शामिल होने से इसकी सदस्य संख्या में वृद्धि हुई है।
सबसे हाल ही में शामिल होने वाला सदस्य देश दक्षिण सूडान है, जो 2011 में संयुक्त राष्ट्र का 193वां सदस्य बना।
Step 3: Final Answer:
संयुक्त राष्ट्र संघ के कुल सदस्यों की संख्या 193 है।
अतः, सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों की वर्तमान संख्या (193) और सबसे नए सदस्य (दक्षिण सूडान) का नाम याद रखें। यह सामान्य ज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
निम्न में से कौन-सा क्षेत्रीय संगठन 1992 में गठित किया गया था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्रमुख क्षेत्रीय संगठनों की स्थापना के वर्षों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
आइए प्रत्येक संगठन के गठन के वर्ष को देखें:
(A) ब्रिक्स (BRICS): यह 21वीं सदी की अवधारणा है, पहला शिखर सम्मेलन 2009 में हुआ।
(B) आसियान (ASEAN): इसकी स्थापना 1967 में हुई थी।
(C) सार्क (SAARC): इसकी स्थापना 1985 में हुई थी।
(D) यूरोपीय यूनियन (European Union - EU): यूरोपीय यूनियन को उसके वर्तमान स्वरूप में स्थापित करने वाली 'मास्ट्रिच संधि' (Maastricht Treaty) पर 7 फरवरी, 1992 को हस्ताक्षर किए गए थे, और यह 1 नवंबर, 1993 को लागू हुई। प्रश्न 'गठित किया गया था' पूछ रहा है, जो 1992 में संधि पर हस्ताक्षर को संदर्भित करता है, जिसने संगठन की नींव रखी।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में, यूरोपीय यूनियन का गठन 1992 की मास्ट्रिच संधि से जुड़ा है।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय और क्षेत्रीय संगठनों (जैसे UN, EU, ASEAN, SAARC, BRICS) की स्थापना के वर्ष और उनके मुख्यालयों की एक सूची बनाना परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायक होता है।
सर्वप्रथम किसने 'तृतीय विश्व' शब्दावली का प्रयोग किया था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'तृतीय विश्व' (Third World) शब्द की उत्पत्ति और इसके प्रस्तावक के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
'तृतीय विश्व' शब्द का प्रयोग पहली बार 1952 में फ्रांसीसी जनसांख्यिकीविद्, मानवविज्ञानी और इतिहासकार एल्फ्रेड सोवे (Alfred Sauvy) ने अपने एक लेख में किया था।
शीत युद्ध के संदर्भ में, उन्होंने इस शब्द का इस्तेमाल उन देशों का वर्णन करने के लिए किया जो न तो पश्चिमी (पूंजीवादी) गुट ('प्रथम विश्व') के साथ थे और न ही पूर्वी (कम्युनिस्ट) गुट ('द्वितीय विश्व') के साथ।
ये देश ज्यादातर गुटनिरपेक्ष, विकासशील और पूर्व-औपनिवेशिक राष्ट्र थे।
यह शब्द फ्रांसीसी क्रांति के 'तीसरे एस्टेट' (आम लोग) से प्रेरित था।
Step 3: Final Answer:
'तृतीय विश्व' शब्दावली का प्रयोग सर्वप्रथम एल्फ्रेड सोवे ने किया था।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में प्रयुक्त प्रमुख शब्दावलियों जैसे 'प्रथम विश्व', 'द्वितीय विश्व', 'तृतीय विश्व', 'गुटनिरपेक्षता', और 'प्रभुत्व' के अर्थ और उत्पत्ति को समझें।
यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय कहाँ अवस्थित है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठन, यूरोपीय यूनियन (EU), के मुख्यालय के स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
यूरोपीय यूनियन का वास्तविक (de facto) मुख्यालय ब्रसेल्स, बेल्जियम में है।
यूरोपीय संघ के कई प्रमुख संस्थान ब्रसेल्स में स्थित हैं, जिनमें शामिल हैं:
- यूरोपीय आयोग (European Commission)
- यूरोपीय परिषद् (European Council)
- यूरोपीय संघ की परिषद् (Council of the European Union)
हालांकि, यूरोपीय संसद स्ट्रासबर्ग (फ्रांस) में और यूरोपीय न्यायालय लक्ज़मबर्ग में स्थित है, फिर भी ब्रसेल्स को EU की राजधानी माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
यूरोपीय यूनियन का मुख्यालय ब्रसेल्स में अवस्थित है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे UN, EU, NATO, ASEAN, SAARC और उनके मुख्यालयों की सूची बनाना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बहुत उपयोगी है।
सक्षेस का सम्बन्ध है
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Step 1: Understanding the Concept:
प्रश्न में 'सक्षेस' संभवतः दक्षेस (SAARC) को संदर्भित करता है, जो एक क्षेत्रीय संगठन है।
Step 2: Detailed Explanation:
'सक्षेस' या 'दक्षेस' का पूरा नाम 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' (South Asian Association for Regional Cooperation - SAARC) है।
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह दक्षिण एशिया के देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है।
इसकी स्थापना 8 दिसंबर, 1985 को हुई थी।
इसके सदस्य देशों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, मालदीव और अफगानिस्तान शामिल हैं, जो सभी दक्षिण एशिया में स्थित हैं।
Step 3: Final Answer:
सक्षेस (SAARC) का सम्बन्ध दक्षिण एशिया से है।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: संगठनों के नाम में ही अक्सर उनके कार्यक्षेत्र का संकेत छिपा होता है। 'दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन' नाम स्पष्ट रूप से बताता है कि इसका संबंध दक्षिण एशिया से है।
वर्तमान में आसियान के कितने सदस्य देश हैं ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) के सदस्य देशों की संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
आसियान (Association of Southeast Asian Nations) की स्थापना 1967 में हुई थी।
वर्तमान में, आसियान के 10 सदस्य देश हैं। ये देश हैं:
इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार और कंबोडिया।
पूर्वी तिमोर (Timor-Leste) को 11वें सदस्य के रूप में शामिल करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी तक वह पूर्ण सदस्य नहीं बना है।
Step 3: Final Answer:
वर्तमान में आसियान के 10 सदस्य देश हैं।
अतः, सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के संस्थापक सदस्यों और वर्तमान सदस्यों की संख्या को याद रखना महत्वपूर्ण है। आसियान के लिए, वर्तमान सदस्य संख्या 10 है।
निम्न में से कौन भारत का पड़ोसी देश नहीं है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के पड़ोसी देशों और भारतीय राज्यों के बीच अंतर को पहचानने की क्षमता का परीक्षण करता है।
Step 2: Detailed Explanation:
आइए विकल्पों का विश्लेषण करें:
(A) नेपाल: यह भारत का एक पड़ोसी देश है, जिसकी सीमा उत्तर में लगती है।
(B) पाकिस्तान: यह भारत का एक पड़ोसी देश है, जिसकी सीमा पश्चिम में लगती है।
(D) भूटान: यह भारत का एक पड़ोसी देश है, जिसकी सीमा पूर्व में लगती है।
(C) सिक्किम: यह एक देश नहीं है, बल्कि भारत का एक राज्य है। 1975 में सिक्किम का भारत में विलय हो गया था। यह नेपाल, भूटान और चीन जैसे देशों के साथ सीमा साझा करता है, लेकिन यह स्वयं एक देश नहीं है।
Step 3: Final Answer:
सिक्किम भारत का एक राज्य है, न कि पड़ोसी देश।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: भारत के मानचित्र का अध्ययन करें और सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और पड़ोसी देशों की स्थिति को स्पष्ट रूप से समझें। इससे ऐसे प्रश्नों को हल करने में आसानी होगी।
10 दिसम्बर मनाया जाता है।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय दिवस की तिथि के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस (International Human Rights Day) के रूप में मनाया जाता है।
इसी दिन 1948 में, संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (Universal Declaration of Human Rights - UDHR) को अपनाया था।
अन्य महत्वपूर्ण दिवस हैं:
- पर्यावरण दिवस: 5 जून
- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस: 8 मार्च
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: 21 जून
Step 3: Final Answer:
10 दिसम्बर को मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: प्रमुख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दिवसों की एक सूची बनाएं और उन्हें नियमित रूप से दोहराएं। यह सामान्य ज्ञान के स्कोर को बढ़ाने में मदद करता है।
बांग्लादेश अस्तित्व में कब आया ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण एशिया के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना, बांग्लादेश के निर्माण के वर्ष के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
1947 में भारत के विभाजन के बाद, बांग्लादेश (तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान) पाकिस्तान का हिस्सा था।
भाषाई और सांस्कृतिक मतभेदों और राजनीतिक उपेक्षा के कारण, पूर्वी पाकिस्तान में स्वतंत्रता के लिए एक आंदोलन शुरू हुआ।
1971 में, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम हुआ, जिसमें भारत ने मुक्ति वाहिनी की सहायता की।
16 दिसंबर, 1971 को पाकिस्तानी सेना के आत्मसमर्पण के बाद, बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया।
Step 3: Final Answer:
बांग्लादेश 1971 में अस्तित्व में आया।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध को याद रखें, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ। यह घटना दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को बदलने वाली एक महत्वपूर्ण घटना थी।
पश्चिमी पाकिस्तान के विरुद्ध सफल संघर्ष का नेतृत्व किसने किया था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के प्रमुख नेता के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश के संस्थापक नेता और पहले राष्ट्रपति थे। उन्हें बांग्लादेश में 'राष्ट्रपिता' (बंगबंधु) के रूप में जाना जाता है।
वह अवामी लीग के नेता थे, जिसने 1970 के चुनावों में पूर्वी पाकिस्तान में भारी बहुमत हासिल किया था।
जब पश्चिमी पाकिस्तान के सैन्य शासन ने सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया, तो शेख मुजीबुर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष का नेतृत्व किया।
अन्य विकल्प (याह्या खान, जिया-उल-हक, बाजवा) पाकिस्तान के सैन्य शासक या सेना प्रमुख थे।
Step 3: Final Answer:
पश्चिमी पाकिस्तान के विरुद्ध सफल संघर्ष का नेतृत्व शेख मुजीबुर रहमान ने किया था।
अतः, सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: विश्व के प्रमुख स्वतंत्रता आंदोलनों और उनके नेताओं के बारे में जानना महत्वपूर्ण है, जैसे भारत में महात्मा गांधी, दक्षिण अफ्रीका में नेल्सन मंडेला और बांग्लादेश में शेख मुजीबुर रहमान।
भारत ने किस पड़ोसी देश में भारतीय शांति सेना भेजा था ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत की विदेश नीति के एक महत्वपूर्ण अध्याय से संबंधित है, जिसमें एक शांति मिशन शामिल था।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत ने 1987 में श्रीलंका में भारतीय शांति सेना (Indian Peace Keeping Force - IPKF) भेजी थी।
यह कदम 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के तहत उठाया गया था, जिसका उद्देश्य श्रीलंका के गृहयुद्ध को समाप्त करना और तमिल विद्रोहियों को निरस्त्र करना था।
IPKF का मुख्य उद्देश्य लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (LTTE) सहित विभिन्न तमिल समूहों से हथियार डलवाना था।
यह मिशन 1990 तक चला।
Step 3: Final Answer:
भारत ने श्रीलंका में भारतीय शांति सेना भेजी थी।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: भारत की 'पड़ोसी पहले' नीति के तहत विभिन्न देशों के साथ संबंधों और महत्वपूर्ण घटनाओं, जैसे कि श्रीलंका में IPKF मिशन, को याद रखें।
फरक्का नदी जल समझौता किन देशों के बीच हुआ है ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गंगा नदी के जल बंटवारे से संबंधित एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
फरक्का समझौता गंगा नदी के पानी के बंटवारे को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच हुआ है।
भारत ने पश्चिम बंगाल में फरक्का बैराज का निर्माण किया है ताकि गंगा के कुछ पानी को हुगली नदी की ओर मोड़ा जा सके और कोलकाता बंदरगाह को गाद से बचाया जा सके।
इससे बांग्लादेश में पानी के प्रवाह में कमी आई, जो एक विवाद का विषय बन गया।
इस मुद्दे को हल करने के लिए, दोनों देशों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें सबसे महत्वपूर्ण 1996 की 'गंगा जल संधि' है, जिसे अक्सर फरक्का समझौते के रूप में जाना जाता है।
Step 3: Final Answer:
फरक्का नदी जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच हुआ है।
अतः, सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: भारत की अपने पड़ोसी देशों के साथ जल-बंटवारा संधियों को याद रखें, जैसे सिंधु जल संधि (पाकिस्तान के साथ) और गंगा जल संधि (बांग्लादेश के साथ)। ये अक्सर परीक्षाओं में पूछे जाते हैं।
नक्सलवाद क्या है ?
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नक्सलवाद एक हिंसक, वामपंथी उग्रवादी आंदोलन है जिसकी उत्पत्ति 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी गाँव से हुई। यह आंदोलन माओवादी विचारधारा से प्रेरित है और इसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र जनक्रांति के माध्यम से वर्तमान भारतीय राज्य व्यवस्था को उखाड़ फेंकना और एक कम्युनिस्ट राज्य की स्थापना करना है।
मुख्य बिंदु:
विचारधारा: यह आंदोलन मार्क्सवादी-लेनिनवादी-माओवादी विचारधारा पर आधारित है, जो मानता है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है।
कार्यप्रणाली: नक्सलवादी समूह गुरिल्ला युद्ध रणनीति का उपयोग करते हैं। वे मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में सक्रिय हैं, जहाँ वे भूमिहीन किसानों और आदिवासियों के मुद्दों का फायदा उठाकर अपना आधार बनाते हैं।
उद्देश्य: इनका अंतिम लक्ष्य बलपूर्वक राज्य सत्ता पर कब्जा करना है।
चुनौती: नक्सलवाद को भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक माना जाता है। Quick Tip: उत्तर में नक्सलबाड़ी गाँव (उत्पत्ति स्थल) और माओवादी विचारधारा का उल्लेख अवश्य करें। यह भी बताएं कि यह भारत के लिए एक गंभीर आंतरिक सुरक्षा खतरा है। 'रेड कॉरिडोर' (लाल गलियारा) शब्द का भी उल्लेख कर सकते हैं।
शून्य काल से आप क्या समझते हैं ?
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शून्य काल (Zero Hour) भारतीय संसदीय प्रक्रिया में एक अनौपचारिक व्यवस्था है। यह संसद के दोनों सदनों में प्रश्न काल के तुरंत बाद और दिन की कार्यसूची शुरू होने से पहले का समय होता है, जो आमतौर पर दोपहर 12 बजे शुरू होता है।
मुख्य विशेषताएँ:
भारतीय नवाचार: शून्य काल की व्यवस्था संसदीय नियमों में उल्लिखित नहीं है; यह 1962 के बाद से भारत में विकसित हुई एक संसदीय परंपरा है।
उद्देश्य: इस दौरान संसद सदस्य बिना किसी पूर्व सूचना के अत्यावश्यक सार्वजनिक महत्व के मामलों को उठा सकते हैं।
अनौपचारिक प्रकृति: चूँकि यह नियमों में परिभाषित नहीं है, इसलिए इस दौरान मामलों को उठाना लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति के विवेक पर निर्भर करता है। Quick Tip: शून्य काल और प्रश्न काल के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से समझें। प्रश्न काल एक औपचारिक प्रक्रिया है जिसमें पूर्व सूचना की आवश्यकता होती है, जबकि शून्य काल अनौपचारिक है और बिना पूर्व सूचना के मामले उठाने की अनुमति देता है।
आसियान की दो उपलब्धियाँ बताएँ।
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आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) की दो प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना: आसियान ने अपने सदस्य देशों के बीच संवाद, सहयोग और आम सहमति के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया में दशकों से शांति और स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। "आसियान मार्ग" (ASEAN Way), जो अहस्तक्षेप और सर्वसम्मति-निर्माण पर जोर देता है, ने सदस्य देशों के बीच बड़े संघर्षों को सफलतापूर्वक टाला है।
आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना: आसियान ने आसियान मुक्त व्यापार क्षेत्र (AFTA) और बाद में आसियान आर्थिक समुदाय (AEC) की स्थापना करके एक महत्वपूर्ण आर्थिक उपलब्धि हासिल की है। इससे सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ा है, जिससे यह क्षेत्र दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक क्षेत्रों में से एक बन गया है। Quick Tip: उपलब्धियों को स्पष्ट श्रेणियों में विभाजित करें, जैसे- 'राजनीतिक/सुरक्षा' और 'आर्थिक'। यह आपके उत्तर को अधिक संरचित और प्रभावशाली बनाता है। 'आसियान मार्ग' (ASEAN Way) का उल्लेख करना एक अच्छा बिंदु है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के अंगों के नाम बताएँ ।
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संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) के छह प्रमुख अंग हैं:
महासभा (General Assembly): यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श करने वाला अंग है, जिसमें सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है।
सुरक्षा परिषद् (Security Council): इसका मुख्य कार्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना है। इसमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं।
आर्थिक और सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council - ECOSOC): यह आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर समन्वय और संवाद के लिए जिम्मेदार है।
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice - ICJ): यह संयुक्त राष्ट्र का प्रमुख न्यायिक अंग है, जो देशों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा करता है।
सचिवालय (Secretariat): यह संयुक्त राष्ट्र के दिन-प्रतिदिन के कार्यों का प्रबंधन करता है और इसका नेतृत्व महासचिव करते हैं।
न्यास परिषद् (Trusteeship Council): इसका गठन ट्रस्ट क्षेत्रों के प्रशासन की निगरानी के लिए किया गया था। 1994 से यह निष्क्रिय है। Quick Tip: सभी छह अंगों के नाम याद रखें। यह भी ध्यान रखें कि न्यास परिषद् अब सक्रिय नहीं है, लेकिन यह अभी भी संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंगों में से एक के रूप में सूचीबद्ध है।
सार्क के पक्ष में दो तर्क दें।
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सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के पक्ष में दो प्रमुख तर्क निम्नलिखित हैं:
क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक मंच प्रदान करना: सार्क दक्षिण एशिया के देशों के लिए अपनी साझा समस्याओं, जैसे गरीबी, अशिक्षा, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन पर चर्चा करने और सहयोग करने के लिए एकमात्र क्षेत्रीय मंच है। यह सदस्य देशों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देता है, जो इस ऐतिहासिक रूप से तनावग्रस्त क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है।
आर्थिक और सामाजिक विकास को बढ़ावा देना: सार्क ने दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) जैसी पहलों के माध्यम से सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने का प्रयास किया है। इसके अलावा, यह कृषि, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को प्रोत्साहित करता है, जिससे क्षेत्र के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हो सकता है। Quick Tip: सार्क की सीमाओं (जैसे भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण धीमी प्रगति) के बावजूद, इसके महत्व को एक अद्वितीय क्षेत्रीय मंच के रूप में रेखांकित करें जो सहयोग की अपार संभावनाएं रखता है।
मानवाधिकार से आप क्या समझते हैं ?
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मानवाधिकार वे मौलिक अधिकार और स्वतंत्रताएं हैं जो दुनिया के प्रत्येक व्यक्ति को केवल मानव होने के नाते प्राप्त हैं। ये अधिकार सार्वभौमिक हैं, जिसका अर्थ है कि वे सभी पर लागू होते हैं, चाहे उनकी राष्ट्रीयता, लिंग, जाति, धर्म, भाषा या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो।
मुख्य विशेषताएँ:
सार्वभौमिक और अविभाज्य: ये अधिकार सभी के लिए समान हैं और इन्हें छीना नहीं जा सकता। सभी मानवाधिकार (चाहे नागरिक, राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक या सांस्कृतिक) आपस में जुड़े हुए और समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
कानूनी आधार: मानवाधिकारों को 1948 की मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संधियों द्वारा कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है।
उदाहरण: जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता और सुरक्षा का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, और भेदभाव से मुक्ति कुछ प्रमुख मानवाधिकार हैं। Quick Tip: अपने उत्तर में "सार्वभौमिक" (Universal) और "अविभाज्य" (Inalienable) जैसे शब्दों का प्रयोग करें। मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) का उल्लेख करना आपके उत्तर को और मजबूत बनाएगा।
एन. पी. टी. क्या है ?
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एन. पी. टी. (NPT) का पूरा नाम परमाणु अप्रसार संधि (Nuclear Non-Proliferation Treaty) है। यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों और हथियार प्रौद्योगिकी के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग में सहयोग को बढ़ावा देना और परमाणु निरस्त्रीकरण के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु:
स्थापना: इस संधि पर 1968 में हस्ताक्षर किए गए और यह 1970 में लागू हुई।
प्रावधान: यह संधि दुनिया को दो भागों में बांटती है - (1) परमाणु हथियार संपन्न देश (जिन्होंने 1 जनवरी, 1967 से पहले परमाणु परीक्षण किया था, यानी अमेरिका, रूस, यूके, फ्रांस, चीन) और (2) गैर-परमाणु हथियार संपन्न देश। यह गैर-परमाणु देशों को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकती है।
भारत का रुख: भारत ने इस संधि को भेदभावपूर्ण मानते हुए इस पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, क्योंकि यह केवल पांच देशों को परमाणु हथियार रखने का एकाधिकार देती है। Quick Tip: NPT के तीन मुख्य स्तंभों को याद रखें: अप्रसार, निरस्त्रीकरण और शांतिपूर्ण उपयोग। यह भी उल्लेख करें कि भारत इस संधि का सदस्य क्यों नहीं है।
लोकसभा अध्यक्ष की किन्हीं दो शक्तियों का वर्णन करें।
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लोकसभा अध्यक्ष की दो प्रमुख शक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
सदन की कार्यवाही का संचालन करना: अध्यक्ष लोकसभा की बैठकों की अध्यक्षता करते हैं और सदन में व्यवस्था, अनुशासन और मर्यादा बनाए रखते हैं। सदन की कार्यवाही के संचालन के संबंध में उनका निर्णय अंतिम होता है। वे सदस्यों को बोलने की अनुमति देते हैं, प्रस्तावों को पेश करने की अनुमति देते हैं और मतदान करवाते हैं।
धन विधेयक को प्रमाणित करना: कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं, इसका निर्णय करने की अंतिम शक्ति लोकसभा अध्यक्ष के पास होती है। उनके इस निर्णय को किसी भी न्यायालय में या राज्यसभा में चुनौती नहीं दी जा सकती। धन विधेयक को प्रमाणित करने की यह शक्ति अध्यक्ष को वित्तीय मामलों में अत्यधिक महत्वपूर्ण बनाती है। Quick Tip: अध्यक्ष की अन्य महत्वपूर्ण शक्तियों में शामिल हैं: मतों की बराबरी की स्थिति में निर्णायक मत (casting vote) देना और संसद की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करना।
गुट निरपेक्ष आंदोलन की कोई दो विशेषताएँ बताएँ।
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गुट निरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
स्वतंत्र विदेश नीति का पालन: गुट निरपेक्षता का मूल सिद्धांत किसी भी सैन्य गुट, विशेष रूप से शीत युद्ध के दौरान अमेरिकी नेतृत्व वाले पूंजीवादी गुट और सोवियत संघ के नेतृत्व वाले साम्यवादी गुट, में शामिल न होना था। इसका उद्देश्य सदस्य देशों को अपनी विदेश नीति का स्वतंत्र रूप से निर्धारण करने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेने में सक्षम बनाना था।
उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध: यह आंदोलन एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नव-स्वतंत्र देशों का एक मंच था। इसकी एक प्रमुख विशेषता सभी रूपों में उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और नस्लवाद का कड़ा विरोध करना था। इसने दुनिया भर में स्वतंत्रता आंदोलनों का समर्थन किया। Quick Tip: गुट निरपेक्षता का अर्थ 'तटस्थता' नहीं है। इसका अर्थ है सक्रिय रूप से वैश्विक शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना, लेकिन किसी सैन्य गठबंधन का हिस्सा बने बिना। इस सूक्ष्म अंतर को याद रखें।
'चिपको आंदोलन' के उद्देश्य का वर्णन करें।
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'चिपको आंदोलन' 1970 के दशक में भारत के उत्तराखंड (तब उत्तर प्रदेश का हिस्सा) में शुरू हुआ एक अहिंसक, पर्यावरण-संरक्षण आंदोलन था। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे:
पेड़ों की कटाई को रोकना: आंदोलन का तात्कालिक और प्राथमिक उद्देश्य व्यावसायिक कटाई के लिए चिह्नित पेड़ों और जंगलों की रक्षा करना था। स्थानीय ग्रामीण, विशेष रूप से महिलाएँ, पेड़ों से चिपक कर (या गले लगाकर) उन्हें कटने से बचाती थीं।
पारिस्थितिक संतुलन और सतत विकास को बढ़ावा देना: यह आंदोलन केवल पेड़ों को बचाने तक ही सीमित नहीं था। इसका व्यापक उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन के बारे में जागरूकता बढ़ाना था। आंदोलनकारियों ने मांग की कि वन संसाधनों पर स्थानीय समुदायों का नियंत्रण होना चाहिए और विकास नीतियां पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ होनी चाहिए। Quick Tip: आंदोलन के प्रमुख नेताओं जैसे सुंदरलाल बहुगुणा, गौरा देवी और चंडी प्रसाद भट्ट का उल्लेख करके अपने उत्तर को और प्रभावी बना सकते हैं। यह भी बताएं कि यह एक महिला-प्रधान आंदोलन था।
‘शिमला समझौते' पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखें।
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शिमला समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच 2 जुलाई, 1972 को हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हस्ताक्षरित एक शांति संधि थी। इस पर भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने हस्ताक्षर किए थे।
यह समझौता 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की समाप्ति के बाद हुआ, जिसके परिणामस्वरूप बांग्लादेश का निर्माण हुआ था।
समझौते के मुख्य बिंदु:
द्विपक्षीय समाधान: दोनों देश अपने सभी विवादों को शांतिपूर्ण तरीकों से और द्विपक्षीय बातचीत के माध्यम से हल करेंगे। किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता को अस्वीकार कर दिया गया।
नियंत्रण रेखा (LoC) का सम्मान: जम्मू और कश्मीर में 17 दिसंबर, 1971 की युद्धविराम रेखा को 'नियंत्रण रेखा' (Line of Control) के रूप में मान्यता दी गई और दोनों पक्ष इसका उल्लंघन नहीं करने पर सहमत हुए।
संबंधों का सामान्यीकरण: दोनों देश व्यापार, संचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को फिर से शुरू करके संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में काम करने पर सहमत हुए। Quick Tip: शिमला समझौते के दो सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं को याद रखें: 1971 के युद्ध के बाद होना और सभी मुद्दों के 'द्विपक्षीय समाधान' पर जोर देना।
क्षेत्रीय दल से आप क्या समझते हैं ?
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क्षेत्रीय दल एक ऐसा राजनीतिक दल होता है जिसका प्रभाव और जनाधार मुख्य रूप से एक विशेष राज्य या भौगोलिक क्षेत्र तक ही सीमित होता है। राष्ट्रीय दलों के विपरीत, जो राष्ट्रव्यापी मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, क्षेत्रीय दल अक्सर अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को विशिष्ट क्षेत्रीय हितों, भाषा, संस्कृति और पहचान के इर्द-गिर्द केंद्रित करते हैं।
विशेषताएँ:
इनका प्रभाव एक या कुछ राज्यों तक सीमित होता है।
ये अक्सर क्षेत्रीय स्वायत्तता और राज्यों के लिए अधिक अधिकारों की वकालत करते हैं।
ये उस क्षेत्र विशेष की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक समस्याओं को प्रमुखता से उठाते हैं।
उदाहरण: तमिलनाडु में डी.एम.के. (DMK), पंजाब में शिरोमणि अकाली दल, और महाराष्ट्र में शिवसेना। Quick Tip: एक या दो उदाहरण देकर अपने उत्तर को हमेशा स्पष्ट करें। यह दर्शाता है कि आपने अवधारणा को अच्छी तरह से समझा है।
क्योटो प्रोटोकॉल क्या है ?
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क्योटो प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे 1992 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) का विस्तार करने के लिए अपनाया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक ऊष्मन (Global Warming) के लिए जिम्मेदार ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है।
मुख्य बिंदु:
स्वीकृति: इसे 11 दिसंबर, 1997 को क्योटो, जापान में अपनाया गया और यह 16 फरवरी, 2005 को लागू हुआ।
उद्देश्य: प्रोटोकॉल ने भाग लेने वाले विकसित देशों के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किए।
सिद्धांत: यह "साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों" (common but differentiated responsibilities) के सिद्धांत पर आधारित था। इसका अर्थ है कि ग्लोबल वार्मिंग से निपटने की जिम्मेदारी सभी देशों की है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से अधिक उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार विकसित देशों को उत्सर्जन में कमी के लिए बड़ी जिम्मेदारी उठानी चाहिए। Quick Tip: क्योटो प्रोटोकॉल को UNFCCC से जोड़कर समझाएं और "साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों" के सिद्धांत का उल्लेख अवश्य करें, क्योंकि यह इसकी एक प्रमुख विशेषता है।
क्षेत्रीय संगठन किसे कहते हैं ?
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क्षेत्रीय संगठन एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय संगठन होता है जिसके सदस्य एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र के देश होते हैं। ये संगठन अपने सदस्य देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक या सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं।
ये संगठन अपने क्षेत्र की विशिष्ट चुनौतियों और अवसरों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करते हैं।
उदाहरण:
यूरोपीय संघ (EU): यूरोप में एक राजनीतिक और आर्थिक संघ।
आसियान (ASEAN): दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक संगठन।
सार्क (SAARC): दक्षिण एशियाई देशों का एक संगठन।
अफ्रीकी संघ (AU): अफ्रीका के देशों का एक संगठन। Quick Tip: परिभाषा के साथ हमेशा कुछ विविध उदाहरण (जैसे EU, ASEAN, SAARC) दें। यह आपके ज्ञान की गहराई को दर्शाता है।
संघात्मक व्यवस्था की दो विशेषताओं को लिखें।
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संघात्मक व्यवस्था (Federal System) शासन की एक प्रणाली है जिसमें शक्तियाँ एक केंद्रीय प्राधिकरण और विभिन्न घटक इकाइयों (जैसे राज्यों या प्रांतों) के बीच विभाजित होती हैं। इसकी दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
शक्तियों का विभाजन (Division of Powers): संविधान द्वारा केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विधायी, कार्यकारी और वित्तीय शक्तियों का स्पष्ट विभाजन होता है। दोनों सरकारें अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में स्वायत्त होती हैं। उदाहरण के लिए, भारत के संविधान में संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से शक्तियों का विभाजन किया गया है।
लिखित और सर्वोच्च संविधान (Written and Supreme Constitution): संघात्मक व्यवस्था में एक लिखित संविधान का होना अनिवार्य है, जो देश का सर्वोच्च कानून होता है। केंद्र और राज्य दोनों सरकारों को अपनी शक्तियाँ इसी संविधान से प्राप्त होती हैं और उन्हें इसके प्रावधानों के अनुसार ही कार्य करना होता है। संविधान की सर्वोच्चता को बनाए रखने के लिए एक स्वतंत्र न्यायपालिका भी होती है। Quick Tip: संघात्मक व्यवस्था की अन्य विशेषताओं में एक स्वतंत्र न्यायपालिका, द्विसदनीय विधायिका और एक कठोर संविधान (जिसे आसानी से संशोधित नहीं किया जा सकता) शामिल हैं।
समानता का अधिकार क्या है ?
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समानता का अधिकार भारतीय संविधान के भाग 3 में वर्णित एक मौलिक अधिकार है, जिसका उल्लेख अनुच्छेद 14 से 18 तक किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय समाज में सामाजिक, कानूनी और सार्वजनिक जीवन में सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करना और सभी नागरिकों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।
इसके अंतर्गत प्रमुख प्रावधान हैं:
अनुच्छेद 14: विधि के समक्ष समता और विधियों का समान संरक्षण।
अनुच्छेद 15: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव का निषेध।
अनुच्छेद 16: लोक नियोजन के विषयों में अवसर की समानता।
अनुच्छेद 17: अस्पृश्यता (छुआछूत) का अंत।
अनुच्छेद 18: उपाधियों का अंत (सैन्य और शैक्षणिक उपाधियों को छोड़कर)। Quick Tip: उत्तर में संबंधित अनुच्छेदों (14 से 18) का उल्लेख करना आपके उत्तर को बहुत प्रभावी बनाता है। प्रत्येक अनुच्छेद के मुख्य विषय को संक्षेप में बताएं।
मध्यावधि चुनाव से आप क्या समझते हैं ?
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मध्यावधि चुनाव (Mid-term Election) वह चुनाव होता है जो लोकसभा या किसी राज्य की विधानसभा के लिए उसके पांच वर्ष के सामान्य कार्यकाल के पूरा होने से पहले ही आयोजित किया जाता है।
ऐसा तब होता है जब सदन को समय से पहले भंग कर दिया जाता है। इसके निम्नलिखित कारण हो सकते हैं:
जब सत्तारूढ़ सरकार सदन में अपना बहुमत खो देती है और कोई वैकल्पिक सरकार बनने की संभावना नहीं होती है।
जब प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री राष्ट्रपति या राज्यपाल से सदन को भंग करने की सिफारिश करते हैं।
मध्यावधि चुनाव के बाद गठित नई लोकसभा या विधानसभा का कार्यकाल पूरे पांच वर्ष का होता है। Quick Tip: मध्यावधि चुनाव और उपचुनाव (By-election) के बीच अंतर को समझें। मध्यावधि चुनाव पूरे सदन के लिए होता है, जबकि उपचुनाव केवल एक या कुछ रिक्त सीटों को भरने के लिए होता है।
संयुक्त राष्ट्र संघ की दो असफलताएँ बताएँ।
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अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के अपने प्रयासों के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र संघ कुछ मामलों में असफल भी रहा है। इसकी दो प्रमुख असफलताएँ निम्नलिखित हैं:
नरसंहारों को रोकने में विफलता: संयुक्त राष्ट्र 1994 में रवांडा में हुए तुत्सी समुदाय के नरसंहार और 1995 में बोस्निया के स्रेब्रेनिका में हुए नरसंहार को रोकने में बुरी तरह विफल रहा। इन दोनों ही मामलों में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की मौजूदगी के बावजूद बड़े पैमाने पर हत्याएं हुईं, जिससे संगठन की क्षमता पर गंभीर सवाल उठे।
सुरक्षा परिषद् में वीटो का दुरुपयोग: सुरक्षा परिषद् के पांच स्थायी सदस्यों (P5) को प्राप्त वीटो शक्ति का उपयोग अक्सर उनके अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए किया जाता है, जिससे कई महत्वपूर्ण वैश्विक संकटों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती। सीरिया, यूक्रेन और अन्य संघर्षों में वीटो के कारण परिषद् में गतिरोध उत्पन्न हुआ और संयुक्त राष्ट्र कोई ठोस कदम उठाने में असमर्थ रहा। Quick Tip: असफलताओं का उदाहरण देते समय विशिष्ट घटनाओं (जैसे रवांडा नरसंहार) और संरचनात्मक समस्याओं (जैसे वीटो पावर) दोनों का उल्लेख करें।
संक्षेप में प्रदूषण के प्रकारों का वर्णन करें।
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प्रदूषण का अर्थ है पर्यावरण में हानिकारक पदार्थों का प्रवेश, जो प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ता है। प्रदूषण के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:
वायु प्रदूषण (Air Pollution): जब वायु में हानिकारक गैसें (जैसे कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड) और धूल के कण मिल जाते हैं, तो उसे वायु प्रदूषण कहते हैं। यह वाहनों, उद्योगों और जीवाश्म ईंधन के जलने से होता है।
जल प्रदूषण (Water Pollution): जब नदियों, झीलों और समुद्रों जैसे जल निकायों में औद्योगिक अपशिष्ट, घरेलू सीवेज और रासायनिक पदार्थ मिल जाते हैं, तो उसे जल प्रदूषण कहते हैं।
मृदा प्रदूषण (Soil Pollution): कीटनाशकों, रासायनिक उर्वरकों और औद्योगिक कचरे के भूमि में मिलने से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो जाती है, जिसे मृदा प्रदूषण कहते हैं।
ध्वनि प्रदूषण (Noise Pollution): वातावरण में अत्यधिक और असहनीय ध्वनि का होना ध्वनि प्रदूषण कहलाता है। यह यातायात, कारखानों और लाउडस्पीकरों से उत्पन्न होता है। Quick Tip: प्रत्येक प्रकार के प्रदूषण की परिभाषा के साथ उसके एक या दो मुख्य स्रोतों का उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को पूर्ण बनाता है।
अधिकार किसे कहते हैं ?
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अधिकार व्यक्ति के वे दावे हैं जिन्हें समाज द्वारा मान्यता प्राप्त होती है और राज्य द्वारा संरक्षण प्रदान किया जाता है। ये व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ हैं, जो उसे अपनी क्षमताओं का पूर्ण उपयोग करने का अवसर देती हैं।
मुख्य तत्व:
यह एक दावा है: अधिकार व्यक्ति का समाज और राज्य पर एक दावा होता है।
सामाजिक स्वीकृति: इन दावों को समाज द्वारा नैतिक और सामाजिक रूप से उचित माना जाना चाहिए।
राज्य का संरक्षण: राज्य इन अधिकारों को कानूनी रूप से लागू करता है और उनकी रक्षा करता है।
कर्तव्यों से जुड़ाव: प्रत्येक अधिकार के साथ एक कर्तव्य भी जुड़ा होता है।
अधिकार विभिन्न प्रकार के हो सकते हैं, जैसे- प्राकृतिक अधिकार, नैतिक अधिकार, कानूनी अधिकार (मौलिक अधिकार, नागरिक अधिकार, राजनीतिक अधिकार)। Quick Tip: अधिकार की परिभाषा में तीन प्रमुख शब्दों - 'दावा', 'सामाजिक स्वीकृति' और 'राज्य का संरक्षण' - को शामिल करना महत्वपूर्ण है।
वैश्विक ऊष्मायन से आप क्या समझते हैं ?
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वैश्विक ऊष्मायन (Global Warming), जिसे भूमंडलीय तापन भी कहते हैं, पृथ्वी की सतह के औसत तापमान में हो रही दीर्घकालिक वृद्धि को संदर्भित करता है। यह मुख्य रूप से मानव गतिविधियों के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों (जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड) की सांद्रता बढ़ने के कारण होता है।
प्रक्रिया:
सूर्य से आने वाली ऊर्जा पृथ्वी की सतह को गर्म करती है।
पृथ्वी इस ऊर्जा का कुछ हिस्सा वापस अंतरिक्ष में परावर्तित करती है।
वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैसें इस बाहर जाती हुई गर्मी को सोख लेती हैं, जिससे वायुमंडल गर्म हो जाता है। इसे 'ग्रीनहाउस प्रभाव' कहते हैं।
जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल) जलाने, वनों की कटाई और औद्योगिक प्रक्रियाओं से इन गैसों की मात्रा बढ़ रही है, जिससे यह प्रभाव तेज हो रहा है और पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है। Quick Tip: अपने उत्तर में 'ग्रीनहाउस गैसों' और 'ग्रीनहाउस प्रभाव' का उल्लेख अवश्य करें, क्योंकि ये वैश्विक ऊष्मायन की प्रक्रिया के मूल में हैं। कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) का उदाहरण देना अच्छा है।
प्रश्न काल क्या है ?
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प्रश्न काल (Question Hour) भारतीय संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) की प्रत्येक बैठक का पहला घंटा होता है (आमतौर पर सुबह 11 बजे से 12 बजे तक)। इस दौरान संसद के सदस्य मंत्रियों से सरकार के कामकाज और नीतियों से संबंधित प्रश्न पूछते हैं।
महत्व:
कार्यपालिका पर नियंत्रण: यह विधायिका द्वारा कार्यपालिका (सरकार) पर नियंत्रण रखने और उसे जवाबदेह बनाने का एक बहुत महत्वपूर्ण साधन है।
जानकारी प्राप्त करना: सदस्यों को सरकारी गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
जनता के प्रति जवाबदेही: इसके माध्यम से सरकार जनता के प्रति अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करती है।
प्रश्न तीन प्रकार के होते हैं: तारांकित (मौखिक उत्तर), अतारांकित (लिखित उत्तर) और अल्प सूचना प्रश्न। Quick Tip: याद रखें कि प्रश्न काल सत्र का 'पहला घंटा' होता है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकार को 'जवाबदेह' बनाना है।
अध्यादेश का क्या अर्थ है ?
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अध्यादेश (Ordinance) एक विशेष प्रकार का कानून होता है जिसे राष्ट्रपति (अनुच्छेद 123 के तहत) या किसी राज्य के राज्यपाल (अनुच्छेद 213 के तहत) द्वारा तब जारी किया जाता है जब संसद या राज्य विधानमंडल का सत्र नहीं चल रहा हो।
मुख्य विशेषताएँ:
अस्थायी कानून: यह एक अस्थायी कानून होता है और इसका प्रभाव और शक्ति संसद द्वारा बनाए गए कानून के समान ही होती है।
मंत्रिपरिषद की सलाह पर: राष्ट्रपति या राज्यपाल यह अध्यादेश केवल केंद्रीय या राज्य मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही जारी कर सकते हैं।
संसदीय अनुमोदन आवश्यक: संसद या विधानमंडल का सत्र पुनः शुरू होने पर अध्यादेश को छह सप्ताह के भीतर अनुमोदित करवाना आवश्यक होता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो अध्यादेश समाप्त हो जाता है।
इसका प्रयोग केवल अत्यावश्यक परिस्थितियों में कानून बनाने के लिए किया जाता है। Quick Tip: अध्यादेश के बारे में तीन मुख्य बातें याद रखें: 1. इसे कार्यपालिका (राष्ट्रपति/राज्यपाल) जारी करती है, 2. जब विधायिका सत्र में न हो, और 3. यह एक अस्थायी कानून है।
शंघाई सहयोग संगठन के दो उद्देश्य बताएँ।
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शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation - SCO) एक यूरेशियन राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संगठन है। इसके दो प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को बढ़ावा देना: SCO का एक मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आपसी विश्वास और मैत्री को मजबूत करना है। यह आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद (तीन बुराइयों) के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए 'क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी संरचना' (RATS) नामक एक स्थायी अंग भी है।
आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को प्रोत्साहित करना: संगठन व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, संस्कृति, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में प्रभावी सहयोग को बढ़ावा देना चाहता है। इसका लक्ष्य एक व्यापक क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग का निर्माण करना है। Quick Tip: SCO के उद्देश्यों को दो मुख्य स्तंभों में याद रखें: 'सुरक्षा' (विशेषकर आतंकवाद का मुकाबला) और 'आर्थिक सहयोग'। यह इसके दोहरे फोकस को दर्शाता है।
नगर निगम के किन्हीं दो कार्यों को लिखें।
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नगर निगम (Municipal Corporation) बड़े शहरों में स्थानीय स्वशासन की एक इकाई है। इसके दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता: इसमें शहर की साफ-सफाई, कूड़ा-कचरा प्रबंधन, नालियों की सफाई, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव, और संक्रामक रोगों की रोकथाम जैसे कार्य शामिल हैं। नगर निगम यह सुनिश्चित करता है कि शहर के नागरिक एक स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण में रहें।
बुनियादी नागरिक सुविधाओं का प्रावधान और रखरखाव: इसके अंतर्गत नागरिकों को स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति, सड़कों और गलियों का निर्माण और मरम्मत, स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, और जन्म-मृत्यु का पंजीकरण करना शामिल है। ये कार्य नागरिकों के दैनिक जीवन के लिए आवश्यक होते हैं। Quick Tip: नगर निगम के कार्यों को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने शहर में उपलब्ध सार्वजनिक सेवाओं के बारे में सोचें, जैसे- पानी, सफाई, सड़क, और लाइट।
शीत युद्ध क्या है ?
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शीत युद्ध (Cold War) द्वितीय विश्व युद्ध के बाद (लगभग 1945 से 1991 तक) संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और सोवियत संघ (USSR) तथा उनके सहयोगी देशों के बीच चले भू-राजनीतिक, वैचारिक और आर्थिक तनाव के दौर को कहते हैं।
मुख्य विशेषताएँ:
वैचारिक संघर्ष: यह पूंजीवाद (अमेरिका के नेतृत्व में) और साम्यवाद (सोवियत संघ के नेतृत्व में) की दो विपरीत विचारधाराओं के बीच का संघर्ष था।
'शीत' प्रकृति: इसे 'शीत' इसलिए कहा जाता है क्योंकि दोनों महाशक्तियों के बीच कभी भी सीधा सशस्त्र युद्ध नहीं हुआ। हालांकि, उन्होंने वियतनाम और कोरिया जैसे 'प्रॉक्सी युद्धों' (proxy wars) में एक-दूसरे का सामना किया।
हथियारों की होड़: इस दौरान दोनों गुटों के बीच परमाणु हथियारों सहित अन्य घातक हथियारों को जमा करने की एक तीव्र होड़ लगी रही।
अंत: इसका अंत 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ हुआ। Quick Tip: शीत युद्ध को परिभाषित करते समय दो महाशक्तियों (USA और USSR), वैचारिक संघर्ष (पूंजीवाद बनाम साम्यवाद), और इसके कालखंड (1945-1991) का उल्लेख अवश्य करें।
'मार्शल योजना' का उद्देश्य क्या था ?
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'मार्शल योजना' (Marshall Plan), जिसका आधिकारिक नाम 'यूरोपीय रिकवरी प्रोग्राम' था, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा शुरू की गई एक आर्थिक सहायता पहल थी। इसके दो मुख्य उद्देश्य थे:
पश्चिमी यूरोप का पुनर्निर्माण: इसका प्राथमिक उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध से तबाह हुए पश्चिमी यूरोपीय देशों की अर्थव्यवस्थाओं को फिर से खड़ा करना था। अमेरिका ने इन देशों को औद्योगिक और कृषि उत्पादन बढ़ाने, व्यापार को पुनर्जीवित करने और वित्तीय स्थिरता हासिल करने में मदद करने के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक सहायता प्रदान की।
साम्यवाद के प्रसार को रोकना: यह योजना शीत युद्ध की शुरुआत में अमेरिका की 'रोकथाम' (containment) की नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थी। अमेरिका का मानना था कि आर्थिक रूप से कमजोर और अस्थिर देशों में साम्यवाद आसानी से फैल सकता है। इसलिए, पश्चिमी यूरोप की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करके, अमेरिका वहाँ साम्यवाद के प्रभाव को रोकना चाहता था। Quick Tip: मार्शल योजना को सिर्फ एक आर्थिक सहायता कार्यक्रम के रूप में न देखें, बल्कि इसे शीत युद्ध के संदर्भ में एक राजनीतिक और रणनीतिक कदम के रूप में भी समझें, जिसका लक्ष्य साम्यवाद को रोकना था।
दलीय प्रणाली के विभिन्न प्रकारों को लिखें।
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किसी देश में राजनीतिक दलों की संख्या, उनकी भूमिका और उनके बीच प्रतिस्पर्धा की प्रकृति के आधार पर दलीय प्रणाली को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
एक-दलीय प्रणाली (One-Party System): इस प्रणाली में, देश में केवल एक ही राजनीतिक दल को शासन करने की कानूनी अनुमति होती है। कोई अन्य दल बनाने या चुनाव लड़ने की स्वतंत्रता नहीं होती। उदाहरण: चीन (कम्युनिस्ट पार्टी), उत्तर कोरिया।
द्वि-दलीय प्रणाली (Two-Party System): इस प्रणाली में, यद्यपि कई दल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन सत्ता मुख्य रूप से दो प्रमुख दलों के बीच ही बदलती रहती है। अन्य दलों का प्रभाव बहुत सीमित होता है। उदाहरण: संयुक्त राज्य अमेरिका (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी), यूनाइटेड किंगडम (कंजर्वेटिव और लेबर पार्टी)।
बहु-दलीय प्रणाली (Multi-Party System): इस प्रणाली में, दो से अधिक दलों के पास चुनाव जीतकर सत्ता में आने या गठबंधन का हिस्सा बनने का वास्तविक अवसर होता है। इसमें अक्सर गठबंधन सरकारें बनती हैं। उदाहरण: भारत, फ्रांस, जर्मनी। Quick Tip: प्रत्येक दलीय प्रणाली के प्रकार को परिभाषित करने के साथ एक उपयुक्त देश का उदाहरण देना आपके उत्तर को अधिक स्पष्ट और विश्वसनीय बनाता है।
निर्वाचन आयोग के दो कार्य लिखें।
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भारत का निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक निकाय है जो देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए जिम्मेदार है। इसके दो प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:
चुनावों का संचालन और अधीक्षण: निर्वाचन आयोग का सबसे महत्वपूर्ण कार्य संसद (लोकसभा, राज्यसभा), राज्य विधानमंडलों, और राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति के पदों के लिए चुनावों का संचालन, निर्देशन और नियंत्रण करना है। इसमें चुनाव की तारीखों की घोषणा करने से लेकर परिणामों की घोषणा तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
मतदाता सूची तैयार करना और आचार संहिता लागू करना: आयोग चुनाव के लिए मतदाता सूची (Electoral Rolls) तैयार करता है और उसे समय-समय पर अद्यतन करता है। इसके अलावा, चुनाव के दौरान सभी दलों और उम्मीदवारों के लिए एक समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए यह 'आदर्श आचार संहिता' (Model Code of Conduct) को लागू करता है। Quick Tip: आयोग के अन्य कार्यों में राजनीतिक दलों को मान्यता देना और उन्हें चुनाव चिन्ह आवंटित करना भी शामिल है।
मौलिक कर्त्तव्य से आप क्या समझते हैं ?
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मौलिक कर्तव्य वे नैतिक दायित्व हैं जो भारतीय संविधान द्वारा देश के सभी नागरिकों पर लागू किए गए हैं। इनका उद्देश्य नागरिकों में देशभक्ति, अनुशासन और राष्ट्र की एकता को बनाए रखने की भावना को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु:
संवैधानिक प्रावधान: इन्हें मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था। इन्हें 1976 में 42वें संविधान संशोधन द्वारा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों पर संविधान के भाग IV-A में अनुच्छेद 51-A के तहत जोड़ा गया।
संख्या: प्रारंभ में 10 मौलिक कर्तव्य थे, 2002 में 86वें संशोधन द्वारा एक और (11वां) कर्तव्य जोड़ा गया।
प्रकृति: ये कर्तव्य गैर-न्यायोचित (non-justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि इनके उल्लंघन पर अदालत द्वारा कोई कानूनी सजा नहीं दी जा सकती। हालांकि, ये नागरिकों के लिए एक नैतिक दिशा-निर्देश के रूप में कार्य करते हैं।
उदाहरण: संविधान का पालन करना, राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का आदर करना, देश की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करना, और सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखना। Quick Tip: यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि मौलिक कर्तव्य मूल संविधान का हिस्सा नहीं थे और ये कानूनी रूप से लागू करने योग्य (non-justiciable) नहीं हैं, जो इन्हें मौलिक अधिकारों से अलग करता है।
महासभा की भूमिका पर निबंध लिखें।
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संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) संयुक्त राष्ट्र के छह प्रमुख अंगों में से एक है और इसे विश्व की लघु संसद भी कहा जाता है। यह एकमात्र ऐसा अंग है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देशों का समान प्रतिनिधित्व है। महासभा की भूमिका बहुआयामी और अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
विचार-विमर्शात्मक भूमिका: महासभा अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, निरस्त्रीकरण, मानवाधिकार और सतत विकास जैसे वैश्विक महत्व के मुद्दों पर चर्चा और बहस के लिए एक केंद्रीय मंच है। यह सदस्य देशों को अपनी चिंताओं को व्यक्त करने और वैश्विक समस्याओं पर आम सहमति बनाने का अवसर प्रदान करती है।
निर्णायक और अनुशंसात्मक भूमिका: हालांकि महासभा के प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते हैं (सुरक्षा परिषद् के प्रस्तावों के विपरीत), वे विश्व जनमत का प्रतीक होते हैं और एक महत्वपूर्ण नैतिक वजन रखते हैं। यह विभिन्न मुद्दों पर सदस्य देशों को सिफारिशें कर सकती है।
वित्तीय भूमिका: महासभा संयुक्त राष्ट्र के बजट की समीक्षा और अनुमोदन करती है। यह निर्णय करती है कि प्रत्येक सदस्य देश संगठन के खर्चों में कितना योगदान देगा। यह संगठन के सुचारू कामकाज के लिए एक महत्वपूर्ण शक्ति है।
निर्वाचन संबंधी भूमिका: महासभा सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्यों, आर्थिक और सामाजिक परिषद् के सदस्यों और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीशों का चुनाव करती है। यह सुरक्षा परिषद् की सिफारिश पर महासचिव की नियुक्ति भी करती है।
'शांति के लिए एकजुट' प्रस्ताव: 1950 में अपनाए गए इस प्रस्ताव के तहत, यदि सुरक्षा परिषद् वीटो के कारण अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में विफल रहती है, तो महासभा मामले पर विचार कर सकती है और सामूहिक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है, जिसमें सैन्य बल का उपयोग भी शामिल हो सकता है।
निष्कर्षतः, महासभा वैश्विक संवाद, सहयोग और मानक-निर्धारण के लिए एक अनिवार्य मंच के रूप में कार्य करती है, जो इसे संयुक्त राष्ट्र प्रणाली का एक केंद्रीय स्तंभ बनाता है। Quick Tip: उत्तर लिखते समय महासभा को 'विश्व की लघु संसद' के रूप में वर्णित करें। इसके प्रस्तावों की 'नैतिक शक्ति' और 'विश्व जनमत का प्रतीक' होने पर जोर दें, भले ही वे कानूनी रूप से बाध्यकारी न हों।
राष्ट्रपति की आपातकालीन शक्तियों का वर्णन करें।
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भारतीय संविधान के भाग XVIII में राष्ट्रपति को देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए असाधारण आपातकालीन शक्तियाँ प्रदान की गई हैं। ये शक्तियाँ तीन प्रकार की हैं:
राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352):
घोषणा का आधार: राष्ट्रपति यह आपातकाल तब घोषित कर सकते हैं जब उन्हें विश्वास हो कि युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के कारण भारत या उसके किसी हिस्से की सुरक्षा को खतरा है।
प्रभाव: इस दौरान, केंद्र सरकार को किसी भी विषय पर राज्यों को निर्देश देने की शक्ति मिल जाती है। मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) निलंबित किए जा सकते हैं। लोकसभा का कार्यकाल एक बार में एक वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है।
राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता (राष्ट्रपति शासन) (अनुच्छेद 356):
घोषणा का आधार: यदि किसी राज्य के राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाता है कि राज्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन संविधान के प्रावधानों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता।
प्रभाव: राज्य सरकार को बर्खास्त कर दिया जाता है और राज्य का शासन सीधे राष्ट्रपति के अधीन आ जाता है। राज्य की विधायी शक्तियों का प्रयोग संसद द्वारा किया जाता है।
वित्तीय आपातकाल (अनुच्छेद 360):
घोषणा का आधार: यदि राष्ट्रपति को यह विश्वास हो जाए कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिससे भारत या उसके किसी क्षेत्र की वित्तीय स्थिरता या साख को खतरा है।
प्रभाव: केंद्र सरकार राज्यों को वित्तीय मामलों में निर्देश दे सकती है। राष्ट्रपति राज्यों के धन विधेयकों को अपने विचार के लिए आरक्षित कर सकते हैं और उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों सहित सभी सरकारी कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कमी का आदेश दे सकते हैं। Quick Tip: उत्तर में प्रत्येक प्रकार के आपातकाल के लिए संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद (352, 356, 360) का उल्लेख अवश्य करें। यह आपके उत्तर को अधिक सटीक और प्रामाणिक बनाता है।
सार्क की असफलता के कारण बतायें।
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सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) की स्थापना 1985 में दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के महान उद्देश्य के साथ की गई थी। हालाँकि, यह संगठन अपनी क्षमता के अनुसार प्रदर्शन करने में काफी हद तक असफल रहा है। इसकी असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
भारत-पाकिस्तान का तनावपूर्ण संबंध: सार्क के दो सबसे बड़े सदस्य देशों, भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार बना रहने वाला राजनीतिक और सैन्य तनाव संगठन की प्रगति में सबसे बड़ी बाधा रहा है। कश्मीर मुद्दा और सीमा पार आतंकवाद जैसे विवादों ने आपसी विश्वास को खत्म कर दिया है, जिससे कोई भी महत्वपूर्ण पहल आगे नहीं बढ़ पाती है।
आपसी अविश्वास और संदेह: सदस्य देशों के बीच, विशेष रूप से छोटे देशों में भारत को लेकर, एक गहरे अविश्वास का माहौल है। छोटे पड़ोसी देशों को अक्सर यह डर रहता है कि भारत अपने बड़े आकार और शक्ति के कारण क्षेत्र पर हावी हो सकता है।
साफ्टा (SAFTA) का अप्रभावी होना: दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र (SAFTA) की स्थापना के बावजूद, सदस्य देशों के बीच आपसी व्यापार बहुत कम (लगभग 5%) है। संरक्षणवादी नीतियों और गैर-टैरिफ बाधाओं ने आर्थिक एकीकरण को बाधित किया है।
सम्मेलनों का स्थगन: सार्क का नियम है कि यदि कोई भी सदस्य देश शिखर सम्मेलन में भाग लेने से इनकार करता है, तो उसे स्थगित कर दिया जाता है। भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण कई बार शिखर सम्मेलन रद्द या स्थगित हुए हैं, जिससे संगठन की पूरी प्रक्रिया रुक जाती है।
आतंकवाद का मुद्दा: आतंकवाद इस क्षेत्र की एक बड़ी समस्या है, लेकिन सदस्य देश इसकी एक साझा परिभाषा और इससे निपटने के लिए एक संयुक्त रणनीति पर सहमत होने में विफल रहे हैं। Quick Tip: असफलता के कारणों में भारत-पाकिस्तान संबंधों को मुख्य और सबसे महत्वपूर्ण कारण के रूप में प्रस्तुत करें, क्योंकि अधिकांश अन्य समस्याएँ इसी से जुड़ी हुई हैं।
1992 के पृथ्वी सम्मेलन की उपलब्धियों पर प्रकाश डालें।
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1992 में ब्राजील के रियो डी जनेरियो में आयोजित पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, जिसे 'पृथ्वी सम्मेलन' (Earth Summit) के नाम से जाना जाता है, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक घटना थी। इसकी प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:
एजेंडा 21 (Agenda 21): यह सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक थी। यह सतत विकास को प्राप्त करने के लिए 21वीं सदी के लिए एक व्यापक कार्य योजना है। इसमें गरीबी, उपभोग के पैटर्न, स्वास्थ्य, और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन जैसे विभिन्न मुद्दों को शामिल किया गया है।
रियो घोषणा (Rio Declaration): इसमें पर्यावरण और विकास पर 27 सिद्धांत शामिल थे जो देशों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को परिभाषित करते हैं। इसने 'साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' (Common but Differentiated Responsibilities) के महत्वपूर्ण सिद्धांत को स्थापित किया।
जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC): यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि थी जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की सांद्रता को स्थिर करना था। इसी कन्वेंशन के आधार पर बाद में क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते को अपनाया गया।
जैविक विविधता पर कन्वेंशन (Convention on Biological Diversity - CBD): यह जैव विविधता के संरक्षण, इसके घटकों के सतत उपयोग और आनुवंशिक संसाधनों से होने वाले लाभों के उचित और समान बंटवारे के लिए एक कानूनी रूप से बाध्यकारी संधि थी।
वन सिद्धांत (Forest Principles): यह सभी प्रकार के वनों के प्रबंधन, संरक्षण और सतत विकास पर एक गैर-बाध्यकारी सिद्धांतों का वक्तव्य था।
इस सम्मेलन ने पर्यावरण के मुद्दों को वैश्विक राजनीति के केंद्र में ला दिया और सतत विकास की अवधारणा को विश्व स्तर पर स्थापित किया। Quick Tip: उत्तर में 'सतत विकास' (Sustainable Development) और 'साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' जैसे प्रमुख वाक्यांशों का उपयोग करें। UNFCCC और CBD जैसी संधियों का उल्लेख करना आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका का वर्णन करें।
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भारत ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर पर्यावरण संरक्षण में एक महत्वपूर्ण और सक्रिय भूमिका निभाई है। भारत की भूमिका को दो भागों में देखा जा सकता है:
1. राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास:
संवैधानिक प्रावधान: भारत ने 42वें संशोधन (1976) के माध्यम से संविधान में अनुच्छेद 48-A (पर्यावरण की रक्षा और सुधार) और अनुच्छेद 51-A(g) (नागरिकों का कर्तव्य) जोड़कर पर्यावरण संरक्षण को एक संवैधानिक दायित्व बनाया।
कानूनी ढाँचा: भारत ने पर्यावरण की रक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा तैयार किया है, जिसमें वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972; जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974; वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980; और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 शामिल हैं।
संस्थागत तंत्र: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) जैसी संस्थाएं पर्यावरण कानूनों को लागू करने का कार्य करती हैं।
राष्ट्रीय कार्य योजनाएं: भारत ने जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC) शुरू की है, जिसमें सौर ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता और जल संरक्षण जैसे आठ मिशन शामिल हैं।
2. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका:
वैश्विक संधियों में भागीदारी: भारत ने स्टॉकहोम सम्मेलन (1972) से लेकर पृथ्वी सम्मेलन (1992), क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौते (2015) तक लगभग सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया है।
विकासशील देशों का नेतृत्व: भारत ने हमेशा 'साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों' के सिद्धांत की वकालत की है, जिसमें यह तर्क दिया गया है कि विकसित देशों को उनके ऐतिहासिक उत्सर्जन के कारण पर्यावरण संरक्षण में अधिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): 2015 में भारत और फ्रांस के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन की स्थापना की गई। यह सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 120 से अधिक देशों का एक गठबंधन है, जो पर्यावरण संरक्षण में भारत की नेतृत्वकारी भूमिका का एक प्रमुख उदाहरण है। Quick Tip: अपने उत्तर को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तरों में विभाजित करके संरचित करें। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और पेरिस समझौते में भारत के योगदान का उल्लेख करना आपके उत्तर को समकालीन और प्रभावशाली बना देगा।
संयुक्त राष्ट्रसंघ में भारत की भूमिका पर संक्षिप्त निबन्ध लिखें।
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संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की स्थापना से ही भारत इसका एक सक्रिय और महत्वपूर्ण सदस्य रहा है। भारत ने यूएन के सिद्धांतों और उद्देश्यों को बढ़ावा देने में लगातार एक रचनात्मक भूमिका निभाई है। यूएन में भारत की भूमिका को निम्नलिखित क्षेत्रों में देखा जा सकता है:
संस्थापक सदस्य और चार्टर में योगदान: भारत 1945 में यूएन के संस्थापक सदस्यों में से एक था और उसने यूएन चार्टर के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
शांति स्थापना अभियान: भारत यूएन के शांति स्थापना अभियानों में सबसे बड़े सैन्य योगदानकर्ताओं में से एक रहा है। भारतीय सैनिकों ने दुनिया भर के कई संघर्षग्रस्त क्षेत्रों जैसे कोरिया, कांगो, सोमालिया और मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता बहाल करने में अपनी सेवाएं दी हैं।
उपनिवेशवाद और रंगभेद का विरोध: भारत ने यूएन के मंच का उपयोग उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद और रंगभेद के खिलाफ जोरदार आवाज उठाने के लिए किया। भारत ने एशिया और अफ्रीका के कई देशों की स्वतंत्रता का समर्थन किया और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी शासन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अभियान का नेतृत्व किया।
गुटनिरपेक्षता और निरस्त्रीकरण: शीत युद्ध के दौरान, भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन का नेतृत्व किया और यूएन में नव-स्वतंत्र देशों के हितों का प्रतिनिधित्व किया। भारत ने हमेशा व्यापक और भेदभाव-रहित निरस्त्रीकरण, विशेषकर परमाणु निरस्त्रीकरण की वकालत की है।
सतत विकास और मानवाधिकार: भारत ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, और हमेशा विकासशील देशों (Global South) के हितों का समर्थन किया है।
यूएन सुधारों की वकालत: वर्तमान में, भारत यूएन, विशेषकर सुरक्षा परिषद् में सुधारों का एक प्रमुख पक्षधर है। भारत का तर्क है कि परिषद् को समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करना चाहिए और वह स्वयं सुरक्षा परिषद् की स्थायी सदस्यता का एक प्रबल दावेदार है।
संक्षेप में, भारत ने यूएन में एक जिम्मेदार, शांतिप्रिय और विकासशील देशों के हितों के रक्षक के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। Quick Tip: निबंध को संरचित करने के लिए, भारत की भूमिका को विभिन्न शीर्षकों जैसे - शांति स्थापना, उपनिवेशवाद का विरोध, और यूएन सुधार - में विभाजित करें। भारत के शांति सैनिकों के योगदान पर विशेष जोर दें।
समकालीन विश्व में भारत की विदेश नीति के निर्धारक तत्व बतायें।
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समकालीन विश्व में भारत की विदेश नीति गतिशील और बहुआयामी है, जिसे कई आंतरिक और बाहरी तत्व निर्धारित करते हैं। प्रमुख निर्धारक तत्व निम्नलिखित हैं:
राष्ट्रीय हित और सुरक्षा: किसी भी देश की तरह, भारत की विदेश नीति का सर्वोपरि उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। इसमें सीमा सुरक्षा, सीमा पार आतंकवाद का मुकाबला, और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल है। चीन और पाकिस्तान के साथ जटिल संबंध भारत की सुरक्षा नीति को प्रमुख रूप से आकार देते हैं।
आर्थिक विकास: 21वीं सदी में भारत की विदेश नीति का एक प्रमुख चालक आर्थिक विकास है। भारत को अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए विदेशी निवेश, प्रौद्योगिकी, बाजार और ऊर्जा संसाधनों की आवश्यकता है। इसलिए, 'मेक इन इंडिया' और 'स्किल इंडिया' जैसी घरेलू पहलों को समर्थन देने के लिए भारत दुनिया भर के देशों के साथ आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा दे रहा है।
भू-राजनीतिक स्थिति: भारत की भौगोलिक स्थिति इसे हिंद महासागर क्षेत्र और एशिया में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक खिलाड़ी बनाती है। बदलती वैश्विक व्यवस्था, विशेष रूप से चीन का उदय और हिंद-प्रशांत क्षेत्र का बढ़ता महत्व, भारत को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया (क्वाड के माध्यम से) और आसियान देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
ऐतिहासिक और वैचारिक मूल्य: भारत की विदेश नीति अभी भी गुटनिरपेक्षता की विरासत, पंचशील के सिद्धांतों और अपने लोकतांत्रिक मूल्यों से प्रभावित है। भारत 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की नीति का पालन करता है, जिसका अर्थ है कि वह अपने निर्णय स्वतंत्र रूप से लेता है।
प्रौद्योगिकी और नवाचार: प्रौद्योगिकी का बढ़ता महत्व, विशेष रूप से साइबर सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में, भारत की विदेश नीति का एक नया निर्धारक बन गया है।
प्रवासी भारतीय (Indian Diaspora): दुनिया भर में फैले लगभग 3 करोड़ प्रवासी भारतीय भी भारत की विदेश नीति को प्रभावित करते हैं, जो उन देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने में एक सेतु का काम करते हैं। Quick Tip: अपने उत्तर में 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) और 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र' (Indo-Pacific Region) जैसे समकालीन शब्दों का प्रयोग करें। यह दर्शाता है कि आप वर्तमान विदेश नीति के रुझानों से अवगत हैं।
मौलिक अधिकार व राज्य के नीति निदेशक तत्वों के बीच सम्बन्ध बतायें।
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भारतीय संविधान के भाग III में वर्णित मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) और भाग IV में वर्णित राज्य के नीति निदेशक तत्व (Directive Principles of State Policy - DPSP) के बीच का संबंध जटिल और गतिशील रहा है। ये दोनों मिलकर संविधान की आत्मा और दर्शन का निर्माण करते हैं। इनके बीच के संबंध को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
1. प्रकृति में अंतर:
मौलिक अधिकार: ये प्रकृति में नकारात्मक हैं, क्योंकि ये राज्य पर कुछ प्रतिबंध लगाते हैं। ये न्यायोचित (justiciable) हैं, अर्थात् इनके उल्लंघन पर नागरिक सीधे न्यायालय की शरण ले सकते हैं। इनका उद्देश्य राजनीतिक लोकतंत्र की स्थापना करना है।
नीति निदेशक तत्व: ये प्रकृति में सकारात्मक हैं, क्योंकि ये राज्य को कुछ सकारात्मक कार्य करने का निर्देश देते हैं। ये गैर-न्यायोचित (non-justiciable) हैं, अर्थात् इन्हें न्यायालय द्वारा लागू नहीं कराया जा सकता। इनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र की स्थापना करना है।
2. पूरक संबंध (Complementary Relationship):
शुरुआत में दोनों के बीच टकराव की स्थिति थी, लेकिन न्यायपालिका ने अपने विभिन्न निर्णयों में स्पष्ट किया है कि ये दोनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।
मौलिक अधिकार नागरिकों को कुछ मूलभूत अधिकार प्रदान करते हैं, जबकि निदेशक तत्व उन लक्ष्यों और आदर्शों को निर्धारित करते हैं जिन्हें राज्य को नीतियां बनाते समय ध्यान में रखना चाहिए।
मिनर्वा मिल्स मामला (1980): इस ऐतिहासिक मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि मौलिक अधिकारों और निदेशक तत्वों के बीच संतुलन और सामंजस्य संविधान के मूल ढांचे का एक हिस्सा है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि "वे एक ही रथ के दो पहिए हैं" और एक के बिना दूसरे का कोई मतलब नहीं है।
3. वरीयता का प्रश्न:
सामान्यतः, मौलिक अधिकारों को निदेशक तत्वों पर वरीयता दी गई है।
हालांकि, संविधान में कुछ ऐसे संशोधन किए गए हैं (जैसे 25वां और 42वां संशोधन) जिन्होंने कुछ निदेशक तत्वों (विशेषकर अनुच्छेद 39(b) और 39(c)) को लागू करने के लिए बनाए गए कानूनों को मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 14 और 19) पर वरीयता दी है।
निष्कर्षतः, मौलिक अधिकार और निदेशक तत्व दोनों एक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के लिए आवश्यक हैं। जहाँ मौलिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता सुनिश्चित करते हैं, वहीं निदेशक तत्व सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। Quick Tip: मिनर्वा मिल्स मामले का उल्लेख करना इस प्रश्न के उत्तर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। "एक ही रथ के दो पहिए" वाली उपमा का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि यह उनके पूरक संबंध को सर्वोत्तम रूप से व्यक्त करती है।





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