Bihar Board Class 12 History Question Paper 2023 with Answer Key pdf is available for download here. The exam was conducted by Bihar School Examination Board (BSEB). The question paper comprised a total of 138 questions divided among 2 sections.
Bihar Board Class 12 History Question Paper 2023 with Answer Key
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1857 के विद्रोह को किसने 'राष्ट्रीय विद्रोह' कहा है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1857 के भारतीय विद्रोह के विभिन्न व्याख्याओं और इतिहासकारों द्वारा दिए गए नामों से संबंधित है।
विभिन्न विद्वानों ने इस विद्रोह को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा है, जैसे 'सिपाही विद्रोह', 'स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम', या 'राष्ट्रीय विद्रोह'।
Step 2: Detailed Explanation:
(A) कार्ल मार्क्स: प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक और अर्थशास्त्री कार्ल मार्क्स ने न्यूयॉर्क डेली ट्रिब्यून में अपने लेखों में 1857 के विद्रोह का विश्लेषण किया था। उन्होंने इसे केवल एक सिपाही विद्रोह नहीं माना, बल्कि इसे भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक "राष्ट्रीय विद्रोह" (National Revolt) की संज्ञा दी।
(B) लारेन्स: सर जॉन लॉरेंस जैसे ब्रिटिश अधिकारियों ने इसे मुख्य रूप से एक 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) माना, जिसका कारण सैनिकों की शिकायतों तक ही सीमित था।
(C) सावरकर: विनायक दामोदर सावरकर ने अपनी पुस्तक "The Indian War of Independence of 1857" में इस विद्रोह को 'भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' कहा। हालांकि यह 'राष्ट्रीय विद्रोह' के समान है, लेकिन "राष्ट्रीय विद्रोह" शब्द का सीधा श्रेय कार्ल मार्क्स और बेंजामिन डिजरायली (जो विकल्प में नहीं हैं) को दिया जाता है।
(D) इनमें से कोई नहीं: चूंकि कार्ल मार्क्स ने इसे राष्ट्रीय विद्रोह कहा है, यह विकल्प गलत है।
Step 3: Final Answer:
प्रश्न में पूछे गए विशिष्ट शब्द "राष्ट्रीय विद्रोह" का प्रयोग कार्ल मार्क्स ने किया था। इसलिए, विकल्प (A) सही उत्तर है।
Quick Tip: याद रखें कि विभिन्न इतिहासकारों ने 1857 के विद्रोह को अलग-अलग नाम दिए हैं: \textbf{सिपाही विद्रोह:} सर जॉन सीली, सर जॉन लॉरेंस \textbf{राष्ट्रीय विद्रोह:} कार्ल मार्क्स, बेंजामिन डिजरायली \textbf{भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम:} वी. डी. सावरकर इन अंतरों को याद रखने से आपको परीक्षा में सही उत्तर चुनने में मदद मिलेगी।
बीबीघर कत्लेआम कहाँ पर हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1857 के विद्रोह के दौरान हुई एक प्रमुख और दुखद घटना, बीबीघर हत्याकांड के स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
बीबीघर हत्याकांड (Bibighar Massacre) 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान कानपुर (तत्कालीन Cawnpore) में हुआ था।
इस घटना में, नाना साहेब के सैनिकों ने लगभग 200 ब्रिटिश महिलाओं और बच्चों को, जिन्हें बीबीघर नामक एक छोटे घर में बंदी बनाया गया था, मार डाला था।
यह नरसंहार ब्रिटिशों के लिए विद्रोह को क्रूरतापूर्वक दबाने का एक प्रमुख कारण बन गया।
Step 3: Final Answer:
बीबीघर हत्याकांड कानपुर में हुआ था। अतः, सही उत्तर विकल्प (B) है।
Quick Tip: 1857 के विद्रोह से संबंधित प्रमुख स्थानों और वहां के नेताओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। \textbf{दिल्ली:} बहादुर शाह जफर, जनरल बख्त खान \textbf{कानपुर:} नाना साहेब, तात्या टोपे \textbf{लखनऊ:} बेगम हजरत महल \textbf{झाँसी:} रानी लक्ष्मीबाई
स्वेज नहर व्यापार हेतु कब खोली गयी थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विश्व इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना, स्वेज नहर के उद्घाटन की तिथि से संबंधित है, जिसने वैश्विक व्यापार और परिवहन में क्रांति ला दी।
Step 2: Detailed Explanation:
स्वेज नहर एक मानव निर्मित जलमार्ग है जो मिस्र में स्थित है और भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ता है।
इसका निर्माण 1859 से 1869 तक दस वर्षों तक चला।
इस नहर को आधिकारिक तौर पर व्यापार और जहाजों के आवागमन के लिए 17 नवंबर, 1869 को खोला गया था।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से, 1869 ई. सही तिथि है जब स्वेज नहर को व्यापार हेतु खोला गया था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: स्वेज नहर ने यूरोप और एशिया के बीच समुद्री मार्ग को काफी छोटा कर दिया, जिससे अफ्रीका के चारों ओर चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त हो गई। यह वैश्विक व्यापार के लिए आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
सात द्वीपों का नगर किसे कहा जाता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय शहरों के उपनामों से संबंधित है, जो उनकी भौगोलिक या ऐतिहासिक विशेषताओं पर आधारित होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
मुंबई शहर, जिसे पहले बम्बई के नाम से जाना जाता था, को 'सात द्वीपों का नगर' कहा जाता है।
यह नाम इसलिए है क्योंकि वर्तमान मुंबई शहर का निर्माण मूल रूप से सात अलग-अलग द्वीपों को भूमि-सुधार परियोजनाओं (land reclamation) के माध्यम से जोड़कर किया गया था।
ये सात द्वीप थे: आइल ऑफ बॉम्बे, कोलाबा, ओल्ड वूमन्स आइलैंड (लिटिल कोलाबा), माहिम, मझगांव, परेल और वर्ली।
Step 3: Final Answer:
बम्बई (मुंबई) को सात द्वीपों का नगर कहा जाता है। इसलिए, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: अन्य भारतीय शहरों के प्रसिद्ध उपनामों को भी याद रखें: \textbf{पिंक सिटी (गुलाबी शहर):} जयपुर \textbf{सिटी ऑफ जॉय (आनंद का शहर):} कोलकाता \textbf{गार्डन सिटी ऑफ इंडिया (भारत का बगीचा शहर):} बैंगलोर \textbf{क्वीन ऑफ द अरेबियन सी (अरब सागर की रानी):} कोच्चि
अखिल भारतीय स्तर पर पहली जनगणना कब हुई थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में जनगणना के इतिहास से संबंधित है, विशेष रूप से पहले अखिल भारतीय प्रयास के बारे में।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में जनगणना का पहला प्रयास ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के कार्यकाल में 1872 में किया गया था।
हालांकि यह एक गैर-समकालिक जनगणना थी, जिसका अर्थ है कि यह देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग समय पर आयोजित की गई थी, इसे अखिल भारतीय स्तर पर पहला जनगणना प्रयास माना जाता है।
भारत में पहली समकालिक (synchronous) जनगणना 1881 में लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में हुई थी।
Step 3: Final Answer:
प्रश्न "पहली जनगणना" के बारे में पूछ रहा है, जो 1872 में हुई थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: जनगणना से संबंधित दो महत्वपूर्ण वर्षों में अंतर याद रखें: \textbf{1872:} पहला (गैर-समकालिक) जनगणना प्रयास। \textbf{1881:} पहली समकालिक जनगणना, जिसके बाद हर 10 साल में नियमित रूप से जनगणना होती है।
'करो या मरो' का नारा किसने दिया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रसिद्ध नारे और उसे देने वाले नेता से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'करो या मरो' (Do or Die) का नारा महात्मा गांधी ने दिया था।
उन्होंने यह नारा 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सत्र में भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) की शुरुआत करते हुए दिया था।
इस नारे का उद्देश्य भारतीयों को ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए अंतिम संघर्ष करने के लिए प्रेरित करना था।
Step 3: Final Answer:
'करो या मरो' का नारा महात्मा गांधी ने दिया था। इसलिए, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: स्वतंत्रता संग्राम के अन्य महत्वपूर्ण नारों को भी याद रखें: \textbf{तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा:} सुभाष चंद्र बोस \textbf{स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा:} बाल गंगाधर तिलक \textbf{इंकलाब जिंदाबाद:} भगत सिंह द्वारा लोकप्रिय बनाया गया।
दांडी यात्रा का नेतृत्व किसने किया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक महत्वपूर्ण घटना, दांडी यात्रा (या नमक सत्याग्रह) और उसके नेता के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
दांडी यात्रा का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था।
यह यात्रा 12 मार्च, 1930 को साबरमती आश्रम से शुरू हुई और 6 अप्रैल, 1930 को गुजरात के तटीय गाँव दांडी में समाप्त हुई।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए नमक कानून का उल्लंघन करना था, जो भारतीयों को नमक बनाने और बेचने से रोकता था।
गांधीजी ने दांडी में समुद्र के पानी से नमक बनाकर इस कानून को तोड़ा, जिससे देशव्यापी सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत हुई।
Step 3: Final Answer:
दांडी यात्रा का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: दांडी यात्रा से जुड़ी मुख्य बातें याद रखें: \textbf{शुरुआत:} 12 मार्च 1930, साबरमती आश्रम \textbf{अंत:} 6 अप्रैल 1930, दांडी \textbf{दूरी:} लगभग 240 मील (388 किलोमीटर) \textbf{उद्देश्य:} नमक कानून तोड़ना \textbf{परिणाम:} सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत
चम्पारण आंदोलन किस वर्ष शुरू हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न महात्मा गांधी के भारत में पहले प्रमुख सत्याग्रह, चम्पारण आंदोलन के प्रारंभ वर्ष के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
चम्पारण आंदोलन 1917 में बिहार के चम्पारण जिले में हुआ था।
यह महात्मा गांधी के नेतृत्व में भारत में पहला सत्याग्रह आंदोलन था।
यह आंदोलन 'तिनकठिया प्रणाली' के खिलाफ था, जिसके तहत किसानों को अपनी जमीन के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी पड़ती थी।
राजकुमार शुक्ल नामक एक स्थानीय किसान के अनुरोध पर गांधीजी चम्पारण गए और किसानों के अधिकारों के लिए सफल आंदोलन किया।
Step 3: Final Answer:
चम्पारण आंदोलन 1917 ई. में शुरू हुआ था। इसलिए, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: गांधीजी के प्रारंभिक सत्याग्रहों का क्रम याद रखें: \textbf{1917:} चम्पारण सत्याग्रह (बिहार) - नील किसानों के लिए \textbf{1918:} अहमदाबाद मिल हड़ताल (गुजरात) - मिल मजदूरों के लिए \textbf{1918:} खेड़ा सत्याग्रह (गुजरात) - फसल खराब होने पर कर माफी के लिए
महात्मा गांधी के बचपन का क्या नाम था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न महात्मा गांधी के व्यक्तिगत जीवन, विशेष रूप से उनके बचपन के नाम से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महात्मा गांधी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था।
बचपन में, उनके परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त उन्हें प्यार से 'मोनिया' कहकर बुलाते थे।
कुछ लोग उन्हें 'मनु' भी कहते थे, लेकिन 'मोनिया' अधिक प्रचलित था।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में, 'मोनिया' महात्मा गांधी का बचपन का नाम था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: महापुरुषों के बचपन के नामों या मूल नामों को याद रखना सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के लिए उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए: \textbf{स्वामी विवेकानंद:} नरेंद्रनाथ दत्त \textbf{गौतम बुद्ध:} सिद्धार्थ \textbf{रानी लक्ष्मीबाई:} मणिकर्णिका (मनु)
गांधीजी ने असहयोग आंदोलन किस वर्ष आरम्भ किया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गांधीजी के नेतृत्व में हुए एक प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलन, असहयोग आंदोलन की शुरुआत के वर्ष के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
महात्मा गांधी ने 1 अगस्त 1920 को असहयोग आंदोलन (Non-Cooperation Movement) की शुरुआत की थी।
इस आंदोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के साथ सभी प्रकार के सहयोग को समाप्त करना था ताकि उन पर स्वराज देने के लिए दबाव बनाया जा सके।
यह आंदोलन रॉलेट एक्ट, जलियाँवाला बाग हत्याकांड और खिलाफत के मुद्दे की प्रतिक्रिया में शुरू किया गया था।
फरवरी 1922 में चौरी-चौरा की हिंसक घटना के बाद गांधीजी ने इस आंदोलन को वापस ले लिया था।
Step 3: Final Answer:
असहयोग आंदोलन 1920 में आरम्भ हुआ था। इसलिए, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: गांधीजी के नेतृत्व में हुए प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों के वर्षों को याद रखें: \textbf{1920-22:} असहयोग आंदोलन \textbf{1930-34:} सविनय अवज्ञा आंदोलन (दांडी मार्च से शुरुआत) \textbf{1942:} भारत छोड़ो आंदोलन
जजिया किससे लिया जाता था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में प्रचलित एक प्रकार के कर 'जजिया' के बारे में है और यह किन लोगों से वसूला जाता था।
Step 2: Detailed Explanation:
जजिया एक प्रकार का प्रति व्यक्ति कर था जो इस्लामी राज्यों द्वारा उनकी प्रजा में रहने वाले गैर-मुस्लिमों पर लगाया जाता था।
इन गैर-मुस्लिम प्रजाजनों को 'जिम्मी' (या धिम्मी) कहा जाता था, जिसका अर्थ है "संरक्षित व्यक्ति"।
यह कर उन्हें राज्य में अपने धर्म का पालन करने और सैन्य सेवा से छूट के बदले में सुरक्षा प्रदान करने के लिए लिया जाता था।
Step 3: Final Answer:
जजिया कर जिम्म्यों (गैर-मुस्लिमों) से लिया जाता था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: जजिया कर के बारे में कुछ मुख्य तथ्य: \textbf{लगाने वाला पहला:} भारत में मुहम्मद बिन कासिम। \textbf{ब्राह्मणों पर लगाने वाला पहला सुल्तान:} फिरोज शाह तुगलक। \textbf{समाप्त करने वाला मुगल सम्राट:} अकबर (1564 में)। \textbf{पुनः लगाने वाला मुगल सम्राट:} औरंगजेब (1679 में)।
दिल्ली किस नदी के किनारे स्थित है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के प्रमुख शहरों की भौगोलिक स्थिति, विशेषकर नदियों के किनारे बसे शहरों, से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत की राजधानी, दिल्ली, यमुना नदी के किनारे स्थित है।
यमुना नदी, जो गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी है, शहर के पूर्वी हिस्से से होकर बहती है।
ऐतिहासिक रूप से, दिल्ली के कई शहरों की स्थापना इसी नदी के किनारे हुई है।
Step 3: Final Answer:
दिल्ली शहर यमुना नदी के तट पर स्थित है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: परीक्षा के लिए नदियों के किनारे बसे अन्य प्रमुख भारतीय शहरों की सूची याद रखें: \textbf{आगरा:} यमुना \textbf{लखनऊ:} गोमती \textbf{पटना:} गंगा \textbf{कोलकाता:} हुगली \textbf{वाराणसी:} गंगा \textbf{अहमदाबाद:} साबरमती
कबीर शिष्य थे
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत के भक्ति आंदोलन के प्रमुख संतों और उनके गुरु-शिष्य संबंधों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
कबीर दास 15वीं सदी के एक महान संत, कवि और समाज सुधारक थे।
उनकी शिक्षाओं ने भक्ति आंदोलन पर गहरा प्रभाव डाला।
परंपरा के अनुसार, कबीर संत-कवि स्वामी रामानन्द के शिष्य थे।
रामानन्द ने भक्ति को उत्तर भारत में लोकप्रिय बनाया और उन्होंने सामाजिक बाधाओं को तोड़ा, विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, जिनमें कबीर भी शामिल थे।
Step 3: Final Answer:
कबीर, स्वामी रामानन्द के शिष्य थे। अतः, सही उत्तर विकल्प (C) है।
Quick Tip: भक्ति और सूफी आंदोलन के प्रमुख संतों और उनके गुरुओं को याद रखना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, अमीर खुसरो निजामुद्दीन औलिया के शिष्य थे।
भारत में रेलवे की शुरुआत हुई थी
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में ब्रिटिश शासन के दौरान हुए महत्वपूर्ण अवसंरचनात्मक विकास, विशेष रूप से रेलवे की शुरुआत, के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में रेलवे की शुरुआत लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में हुई थी।
भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल, 1853 को चलाई गई थी।
यह ट्रेन बॉम्बे (अब मुंबई) के बोरी बंदर स्टेशन से ठाणे तक 34 किलोमीटर की दूरी तक चली थी।
Step 3: Final Answer:
भारत में रेलवे की शुरुआत 1853 ई. में हुई थी। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि भारतीय रेलवे की शुरुआत लॉर्ड डलहौजी के गवर्नर-जनरल काल में हुई थी, जिन्हें 'भारतीय रेलवे का जनक' भी कहा जाता है।
महात्मा गाँधी की आत्मकथा किस भाषा में है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न महात्मा गांधी के साहित्यिक कार्यों, विशेष रूप से उनकी आत्मकथा की मूल भाषा के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
महात्मा गांधी की आत्मकथा का शीर्षक "सत्य के प्रयोग अथवा आत्मकथा" (The Story of My Experiments with Truth) है।
उन्होंने यह आत्मकथा मूल रूप से अपनी मातृभाषा गुजराती में लिखी थी।
इसे बाद में महादेव देसाई द्वारा अंग्रेजी में और कई अन्य भाषाओं में अनुवादित किया गया।
Step 3: Final Answer:
महात्मा गांधी की आत्मकथा मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखी गई थी। इसलिए, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: प्रमुख भारतीय नेताओं द्वारा लिखी गई महत्वपूर्ण पुस्तकों और उनकी मूल भाषा को याद रखना परीक्षा में उपयोगी हो सकता है। उदाहरण के लिए, जवाहरलाल नेहरू की 'डिस्कवरी ऑफ इंडिया' मूल रूप से अंग्रेजी में लिखी गई थी।
बंगाल के विभाजन की घोषणा किस वर्ष हुई?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत के एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटना, बंगाल के विभाजन की तिथि से संबंधित है, जिसने भारतीय राष्ट्रवाद को तीव्र किया।
Step 2: Detailed Explanation:
बंगाल के विभाजन का निर्णय तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा लिया गया था।
विभाजन की घोषणा जुलाई 1905 में की गई थी और यह 16 अक्टूबर, 1905 को प्रभावी हुआ।
इसका उद्देश्य बंगाल में बढ़ती राष्ट्रवादी गतिविधियों को कमजोर करना था, जिसे 'फूट डालो और राज करो' की नीति का एक हिस्सा माना जाता है।
इस विभाजन के कारण स्वदेशी आंदोलन का उदय हुआ।
Step 3: Final Answer:
बंगाल के विभाजन की घोषणा वर्ष 1905 में हुई थी। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: बंगाल विभाजन से संबंधित दो महत्वपूर्ण तिथियां याद रखें: \textbf{1905:} बंगाल का विभाजन (लॉर्ड कर्जन)। \textbf{1911:} बंगाल विभाजन को रद्द करना (लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय) और राजधानी को कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करना।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक कौन थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के सबसे पुराने राजनीतिक दलों में से एक, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर, 1885 को बॉम्बे (अब मुंबई) में हुई थी।
इसके संस्थापक एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश सिविल सेवक, एलन ऑक्टेवियन ह्यूम (ए. ओ. ह्यूम) थे।
उन्होंने भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन के समर्थन से इसकी स्थापना की थी।
पहला अधिवेशन बॉम्बे के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में हुआ था, जिसकी अध्यक्षता व्योमेश चन्द्र बनर्जी ने की थी।
Step 3: Final Answer:
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक ए. ओ. ह्यूम थे। इसलिए, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: कांग्रेस के प्रारंभिक अधिवेशनों से संबंधित प्रमुख तथ्यों को याद रखें, जैसे कि पहले अध्यक्ष (व्योमेश चन्द्र बनर्जी), पहले मुस्लिम अध्यक्ष (बदरुद्दीन तैयबजी), और पहली महिला अध्यक्ष (एनी बेसेंट)।
भारत किस वर्ष गणतंत्र हुआ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के इतिहास की दो महत्वपूर्ण तिथियों - स्वतंत्रता और गणतंत्र बनने - के बीच के अंतर को समझने से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हुआ, लेकिन उस समय यह एक डोमिनियन था और इसका अपना स्थायी संविधान नहीं था।
भारत का संविधान 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था।
यह संविधान 26 जनवरी, 1950 को पूरी तरह से लागू हुआ। इसी दिन भारत ब्रिटिश डोमिनियन से एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना।
इसी दिन को हम हर साल गणतंत्र दिवस के रूप में मनाते हैं।
Step 3: Final Answer:
भारत वर्ष 1950 में एक गणतंत्र बना। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: ध्यान दें कि: \textbf{15 अगस्त 1947:} भारत को स्वतंत्रता मिली (स्वतंत्रता दिवस)। \textbf{26 जनवरी 1950:} भारत एक गणतंत्र बना (गणतंत्र दिवस)। दोनों तिथियों और उनके महत्व के बीच भ्रमित न हों।
घोड़े की हड्डियों के साक्ष्य कहाँ से मिले हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक स्थलों और वहां पाए गए महत्वपूर्ण अवशेषों से संबंधित है, विशेष रूप से घोड़े की उपस्थिति के विवादास्पद साक्ष्य के बारे में।
Step 2: Detailed Explanation:
सिंधु घाटी सभ्यता में घोड़े की उपस्थिति एक बहस का विषय रही है। हालांकि, कुछ स्थलों से इसके साक्ष्य मिले हैं।
गुजरात के कच्छ जिले में स्थित पुरातात्विक स्थल सुरकोतड़ा में घोड़े की हड्डियों (अस्थियों) के निश्चित साक्ष्य मिले हैं।
यह खोज महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मान जाता है कि घोड़े आर्यों द्वारा भारत में लाए गए थे, लेकिन यह साक्ष्य सिंधु घाटी के लोगों द्वारा घोड़े के उपयोग की संभावना को इंगित करता है।
लोथल से घोड़े की एक संदिग्ध टेराकोटा की मूर्ति मिली है, लेकिन हड्डियों के सबसे स्पष्ट साक्ष्य सुरकोतड़ा से हैं।
Step 3: Final Answer:
घोड़े की हड्डियों के साक्ष्य सुरकोतड़ा से मिले हैं। इसलिए, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थलों और उनकी अनूठी खोजों को याद रखें: \textbf{हड़प्पा:} अन्न भंडार, R-37 कब्रिस्तान। \textbf{मोहनजोदड़ो:} विशाल स्नानागार, कांस्य की नर्तकी। \textbf{लोथल:} बंदरगाह (Dockyard), चावल के साक्ष्य। \textbf{कालीबंगा:} जुते हुए खेत, अग्नि वेदिकाएं।
सर्वाधिक प्राचीन स्मृति ग्रंथ कौन है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत के धर्मशास्त्र साहित्य, विशेषकर स्मृति ग्रंथों के कालानुक्रमिक क्रम से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
स्मृति ग्रंथ प्राचीन भारतीय कानून और सामाजिक आचार संहिता से संबंधित ग्रंथ हैं।
इनमें से, मनुस्मृति को सबसे प्राचीन और सबसे प्रसिद्ध माना जाता है।
इसका रचना काल लगभग 200 ईसा पूर्व से 200 ईस्वी के बीच माना जाता है।
अन्य स्मृतियाँ, जैसे याज्ञवल्क्य स्मृति और नारद स्मृति, इसके बाद की मानी जाती हैं।
Step 3: Final Answer:
सर्वाधिक प्राचीन स्मृति ग्रंथ मनुस्मृति है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि 'स्मृति' का अर्थ 'याद किया हुआ' है और यह श्रुति (जैसे वेद, जिन्हें 'सुना हुआ' माना जाता है) से अलग है। स्मृति ग्रंथ हिंदू धर्म में कानूनी और सामाजिक परंपराओं के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
अल-बरूनी का जन्म कहाँ हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत में आए एक प्रसिद्ध विदेशी विद्वान और यात्री, अल-बरूनी के जीवन और उत्पत्ति से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अबु रेहान अल-बरूनी एक फारसी विद्वान थे जिनका जन्म 973 ई. में ख्वारिज्म (आधुनिक उज्बेकिस्तान में खीवा) में हुआ था।
जब महमूद गजनवी ने 1017 में ख्वारिज्म पर आक्रमण किया, तो वह अल-बरूनी को बंदी बनाकर अपने साथ गजनी ले गया।
अल-बरूनी महमूद गजनवी के साथ भारत आया और यहां भारतीय संस्कृति, धर्म, विज्ञान और समाज का गहन अध्ययन किया।
उसने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'किताब-उल-हिन्द' (तहकीक-ए-हिन्द) में अपने अनुभवों और अवलोकनों को लिखा।
Step 3: Final Answer:
अल-बरूनी का जन्म ख्वारिज्म में हुआ था। इसलिए, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रमुख मध्यकालीन यात्रियों और उनके मूल स्थान को याद रखें: \textbf{इब्न बतूता:} मोरक्को (तैंजियर) \textbf{मार्को पोलो:} वेनिस, इटली \textbf{अल-बरूनी:} ख्वारिज्म (उज्बेकिस्तान)
रैयतवाड़ी बन्दोबस्त कहाँ लागू किया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों और उनके लागू होने के क्षेत्रों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
रैयतवाड़ी बन्दोबस्त एक भू-राजस्व प्रणाली थी जिसे ब्रिटिशों द्वारा शुरू किया गया था।
इस प्रणाली में, सरकार सीधे 'रैयत' (किसान) से राजस्व वसूलती थी, और कोई मध्यस्थ (जैसे जमींदार) नहीं होता था।
इसे पहली बार कैप्टन अलेक्जेंडर रीड और थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी के बारामहल जिले में लागू किया गया था।
बाद में, इसे मद्रास प्रेसीडेंसी, बॉम्बे प्रेसीडेंसी, असम के कुछ हिस्सों और कुर्ग में विस्तारित किया गया।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में, रैयतवाड़ी बन्दोबस्त बम्बई एवं मद्रास में लागू किया गया था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: ब्रिटिश भारत की तीन प्रमुख भू-राजस्व प्रणालियों को याद रखें: \textbf{स्थायी बंदोबस्त (जमींदारी):} बंगाल, बिहार, उड़ीसा। \textbf{रैयतवाड़ी प्रणाली:} मद्रास, बॉम्बे, असम। \textbf{महालवाड़ी प्रणाली:} उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत, पंजाब।
महालवाड़ी बन्दोबस्त कहाँ लागू किया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत में लागू की गई भू-राजस्व प्रणालियों में से एक, महालवाड़ी प्रणाली, और उसके लागू होने के क्षेत्रों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महालवाड़ी बन्दोबस्त को हॉल्ट मैकेंजी द्वारा 1822 में पेश किया गया था।
इस प्रणाली में, भू-राजस्व का निर्धारण पूरे गाँव या 'महाल' (गाँवों के समूह) के आधार पर किया जाता था।
राजस्व का भुगतान करने की जिम्मेदारी पूरे गाँव समुदाय की होती थी, जिसका प्रतिनिधित्व गाँव का मुखिया (लंबरदार) करता था।
यह प्रणाली उत्तर-पश्चिम प्रांत (जिसका अधिकांश भाग अब उत्तर प्रदेश में है), मध्य प्रांत, और पंजाब में लागू की गई थी।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों के अनुसार, महालवाड़ी बन्दोबस्त उत्तर प्रदेश और मध्य प्रांत में लागू किया गया था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: तीनों प्रणालियों में अंतर को समझें: \textbf{जमींदारी:} सरकार और किसान के बीच मध्यस्थ जमींदार होता है। \textbf{रैयतवाड़ी:} सरकार और किसान (रैयत) के बीच सीधा संबंध। \textbf{महालवाड़ी:} राजस्व इकाई पूरा गाँव (महाल) होता है।
मुंडा विद्रोह का नेता था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 19वीं सदी के अंत में हुए प्रमुख आदिवासी विद्रोहों में से एक, मुंडा विद्रोह (उलगुलान) और उसके नेता से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुंडा विद्रोह, जिसे 'उलगुलान' (महान हलचल) भी कहा जाता है, 1899-1900 में छोटानागपुर क्षेत्र (वर्तमान झारखंड) में हुआ था।
इस विद्रोह का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया था, जो एक करिश्माई आदिवासी नेता और धार्मिक उपदेशक थे।
विद्रोह का मुख्य कारण ब्रिटिश नीतियों, जमींदारों और साहूकारों द्वारा आदिवासियों की पारंपरिक भूमि व्यवस्था (खूंटकटी) का विनाश और उनका शोषण था।
बिरसा मुंडा ने मुंडा राज स्थापित करने और बाहरी लोगों (दिकुओं) को भगाने का आह्वान किया।
(C) सिद्धू और (B) कान्हू मुर्मू 1855-56 के संथाल विद्रोह के नेता थे, न कि मुंडा विद्रोह के।
Step 3: Final Answer:
मुंडा विद्रोह का नेता बिरसा मुंडा था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रमुख आदिवासी विद्रोहों और उनके नेताओं की सूची बनाना उपयोगी है: \textbf{संथाल विद्रोह (1855-56):} सिद्धू और कान्हू मुर्मू \textbf{मुंडा विद्रोह (1899-1900):} बिरसा मुंडा \textbf{कोल विद्रोह (1831):} बुद्धो भगत \textbf{अहोम विद्रोह (1828):} गोमधर कोंवर
फोर्ट विलियम कहाँ स्थापित किया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारत में स्थापित किए गए प्रमुख किलों में से एक, फोर्ट विलियम की भौगोलिक स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
फोर्ट विलियम की स्थापना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) शहर में की गई थी।
यह किला हुगली नदी के पूर्वी तट पर स्थित है।
इसका नाम इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय के नाम पर रखा गया था।
यह किला बंगाल प्रेसीडेंसी के मुख्यालय के रूप में कार्य करता था और ब्रिटिश भारत में एक प्रमुख सैन्य गढ़ था।
Step 3: Final Answer:
फोर्ट विलियम कलकत्ता में स्थापित किया गया था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा स्थापित अन्य प्रमुख किलों को भी याद रखें: \textbf{फोर्ट सेंट जॉर्ज:} मद्रास (चेन्नई) में, यह भारत में पहला ब्रिटिश किला था। \textbf{फोर्ट सेंट डेविड:} कुड्डालोर, तमिलनाडु में।
'सर्वे ऑफ इण्डिया' का गठन किया गया था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के राष्ट्रीय सर्वेक्षण और मानचित्रण संगठन 'सर्वे ऑफ इंडिया' (भारतीय सर्वेक्षण विभाग) की स्थापना के वर्ष के बारे में है। प्रश्न में 'सर्व' एक वर्तनी की त्रुटि है, इसका सही नाम 'सर्वे' है।
Step 2: Detailed Explanation:
सर्वे ऑफ इंडिया भारत सरकार का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है।
इसकी स्थापना 1767 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गई थी।
इसका उद्देश्य भारत के विशाल भूभाग का सर्वेक्षण करना, नक्शे तैयार करना और ब्रिटिश प्रशासन और सैन्य अभियानों में सहायता करना था।
यह दुनिया के सबसे पुराने सर्वेक्षण संगठनों में से एक है।
Step 3: Final Answer:
सर्वे ऑफ इंडिया का गठन 1767 ई. में किया गया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: सर्वे ऑफ इंडिया की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हैं: ग्रेट ट्रिगोनोमेट्रिकल सर्वे और माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई का पहला सटीक मापन।
संविधान सभा में कुल कितने सदस्य थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत का संविधान बनाने वाली संस्था, संविधान सभा के सदस्यों की कुल संख्या से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
कैबिनेट मिशन योजना, 1946 के तहत गठित अविभाजित भारत की संविधान सभा में कुल 389 सदस्य होने थे।
इन 389 सीटों में से:
296 सीटें ब्रिटिश भारत के प्रांतों के लिए थीं।
93 सीटें रियासतों (Princely States) के लिए थीं।
दिए गए विकल्पों में से कोई भी संख्या 389 से बिल्कुल मेल नहीं खाती है। हालांकि, विकल्प (D) 398, संख्या 389 के सबसे करीब है और संभवतः यह एक मुद्रण त्रुटि (typo) है।
भारत के विभाजन के बाद, संविधान सभा के सदस्यों की संख्या घटकर 299 रह गई थी।
Step 3: Final Answer:
प्रारंभिक संविधान सभा की निर्धारित संख्या 389 थी। दिए गए विकल्पों में से 398 सबसे निकटतम संख्या है, इसलिए हम इसे सही उत्तर मानेंगे, यह मानते हुए कि यह एक त्रुटि है।
Quick Tip: संविधान सभा से संबंधित महत्वपूर्ण संख्याओं को याद रखें: \textbf{389:} अविभाजित भारत में कुल सदस्य। \textbf{299:} विभाजन के बाद भारत में कुल सदस्य। \textbf{2 वर्ष, 11 महीने, 18 दिन:} संविधान को बनाने में लगा कुल समय।
तलवन्डी किसका जन्म स्थान है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिख धर्म के संस्थापक और पहले गुरु के जन्म स्थान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में तलवंडी नामक स्थान पर हुआ था।
यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है और अब इसे 'ननकाना साहिब' के नाम से जाना जाता है।
यह सिखों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थ स्थल है।
Step 3: Final Answer:
तलवंडी गुरु नानक का जन्म स्थान है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: प्रमुख संतों और धार्मिक नेताओं के जन्म स्थानों को याद रखें: \textbf{कबीर:} वाराणसी (लहरतारा) \textbf{गुरु नानक:} तलवंडी (ननकाना साहिब) \textbf{मीरा बाई:} कुड़की (पाली, राजस्थान) \textbf{गौतम बुद्ध:} लुंबिनी (नेपाल)
भारत का अंतिम मुगल शासक कौन थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में मुगल साम्राज्य के अंत और अंतिम सम्राट की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुगल साम्राज्य का अंतिम शासक बहादुर शाह द्वितीय था, जिसे उनके उपनाम 'जफर' से बेहतर जाना जाता है।
वह एक कवि थे और उनका वास्तविक शासन दिल्ली के लाल किले तक ही सीमित था।
1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान, विद्रोहियों ने उन्हें हिंदुस्तान का सम्राट घोषित किया।
विद्रोह के दमन के बाद, अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बना लिया और रंगून (वर्तमान यांगून, म्यांमार) निर्वासित कर दिया, जहाँ 1862 में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के साथ ही मुगल वंश का अंत हो गया।
Step 3: Final Answer:
भारत के अंतिम मुगल शासक बहादुरशाह जफर थे। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: मुगल वंश के महत्वपूर्ण शासकों का क्रम याद रखें: \textbf{संस्थापक:} बाबर \textbf{महान शासक:} अकबर \textbf{अंतिम शक्तिशाली शासक:} औरंगजेब \textbf{अंतिम शासक:} बहादुर शाह जफर
महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'राष्ट्रपिता' महात्मा गांधी के जीवन की एक मूलभूत जानकारी, उनके जन्म की तिथि, से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।
उनके जन्मदिन, 2 अक्टूबर, को भारत में गांधी जयंती के रूप में राष्ट्रीय अवकाश के तौर पर मनाया जाता है और विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
Step 3: Final Answer:
महात्मा गांधी का जन्म 1869 ई. में हुआ था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: प्रमुख राष्ट्रीय नेताओं की जन्म और मृत्यु तिथियों को याद रखना सामान्य ज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को हुआ था, जिसे बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है।
1942 में कौन-सा आंदोलन हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम और सबसे निर्णायक आंदोलनों में से एक की पहचान करने के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
अगस्त 1942 में, महात्मा गांधी ने भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) की शुरुआत की।
यह आंदोलन द्वितीय विश्व युद्ध की पृष्ठभूमि में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य भारत से ब्रिटिश शासन को तत्काल समाप्त करना था।
गांधीजी ने बॉम्बे के ग्वालिया टैंक मैदान में 'करो या मरो' का प्रसिद्ध नारा दिया।
अन्य आंदोलन अलग-अलग समय पर हुए:
खिलाफत आंदोलन: 1919-1924
असहयोग आंदोलन: 1920-1922
सविनय अवज्ञा आंदोलन: 1930-1934
Step 3: Final Answer:
1942 में भारत छोड़ो आंदोलन हुआ था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: गांधीजी के तीन बड़े जन आंदोलनों का क्रम और वर्ष याद रखें: असहयोग (1920), सविनय अवज्ञा (1930), और भारत छोड़ो (1942)। यह परीक्षा में कालानुक्रमिक प्रश्नों को हल करने में मदद करेगा।
सुभाष चन्द्र बोस भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष कब चुने गए थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख नेता, सुभाष चन्द्र बोस के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सुभाष चंद्र बोस दो बार भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए:
1938: हरिपुरा अधिवेशन में, वह निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए।
1939: त्रिपुरी अधिवेशन में, उन्होंने गांधीजी द्वारा समर्थित उम्मीदवार पट्टाभि सीतारमैया को चुनाव में हराया।
हालांकि, त्रिपुरी में जीतने के बाद, गांधीजी और कांग्रेस कार्यसमिति के अन्य सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेदों के कारण, उन्होंने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
Step 3: Final Answer:
सुभाष चंद्र बोस 1938 और 1939 दोनों वर्षों में कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: 1939 के त्रिपुरी संकट को याद रखें। बोस के इस्तीफे के बाद, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इसके बाद बोस ने 'फॉरवर्ड ब्लॉक' नामक अपनी अलग पार्टी की स्थापना की।
काला कानून किसे कहा गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश सरकार द्वारा पारित एक दमनकारी कानून की पहचान करने के बारे में है, जिसका भारतीयों ने व्यापक विरोध किया था।
Step 2: Detailed Explanation:
रॉलेट एक्ट, जिसे आधिकारिक तौर पर अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम, 1919 (Anarchical and Revolutionary Crimes Act of 1919) कहा जाता था, को भारतीयों द्वारा 'काला कानून' कहा गया।
यह कानून ब्रिटिश सरकार को किसी भी व्यक्ति को बिना किसी मुकदमे के केवल संदेह के आधार पर दो साल तक के लिए जेल में डालने का अधिकार देता था।
यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन था और इसका उद्देश्य राष्ट्रवादी गतिविधियों को कुचलना था।
महात्मा गांधी ने इस कानून के खिलाफ रॉलेट सत्याग्रह का आह्वान किया, और इसी कानून के विरोध में जलियाँवाला बाग में सभा हो रही थी।
Step 3: Final Answer:
रौलेट एक्ट को 'काला कानून' कहा गया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: रॉलेट एक्ट को "न वकील, न दलील, न अपील" वाला कानून भी कहा जाता था, क्योंकि यह बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार को निलंबित करता था।
1939 में फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना किसने की थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से अलग होकर एक नए राजनीतिक दल की स्थापना से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
1939 में त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद, सुभाष चंद्र बोस ने कांग्रेस के भीतर ही एक वामपंथी गुट के रूप में 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की।
इसका उद्देश्य कांग्रेस की नीतियों को अधिक उग्र और समाजवादी दिशा में ले जाना था।
बोस का मानना था कि कांग्रेस का नेतृत्व ब्रिटिशों के खिलाफ संघर्ष के लिए पर्याप्त आक्रामक नहीं था।
Step 3: Final Answer:
1939 में फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना सुभाष चंद्र बोस ने की थी। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान विभिन्न नेताओं द्वारा स्थापित पार्टियों को याद रखें: \textbf{स्वराज पार्टी (1923):} मोतीलाल नेहरू और सी. आर. दास \textbf{फॉरवर्ड ब्लॉक (1939):} सुभाष चंद्र बोस \textbf{कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी (1934):} जयप्रकाश नारायण, राम मनोहर लोहिया
कैबिनेट मिशन किस वर्ष भारत आया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया पर चर्चा करने के लिए भेजे गए एक महत्वपूर्ण मिशन के आगमन के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
ब्रिटिश प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने भारत में सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की योजनाओं पर चर्चा करने के लिए तीन कैबिनेट मंत्रियों का एक उच्च-शक्ति मिशन भेजा था।
यह मिशन, जिसे कैबिनेट मिशन के नाम से जाना जाता है, मार्च 1946 में भारत आया।
इसके सदस्य थे:
लॉर्ड पेथिक-लॉरेंस (भारत के राज्य सचिव)
सर स्टैफ़ोर्ड क्रिप्स (व्यापार बोर्ड के अध्यक्ष)
ए. वी. अलेक्जेंडर (एडमिरल्टी के पहले लॉर्ड)
कैबिनेट मिशन ने ही भारत की संविधान सभा के गठन का प्रस्ताव रखा था।
Step 3: Final Answer:
कैबिनेट मिशन 1946 ई. में भारत आया था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: क्रिप्स मिशन (1942) और कैबिनेट मिशन (1946) के बीच भ्रमित न हों। क्रिप्स मिशन का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध में भारत का सहयोग प्राप्त करना था, जबकि कैबिनेट मिशन का उद्देश्य सत्ता हस्तांतरण की योजना बनाना था।
मुस्लिम लीग द्वारा मुक्ति दिवस कब मनाया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुस्लिम लीग द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्रवाई की तिथि से संबंधित है, जो कांग्रेस के साथ उसके बढ़ते मतभेदों को दर्शाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
1937 के प्रांतीय चुनावों के बाद, कांग्रेस ने कई प्रांतों में सरकारें बनाईं।
जब सितंबर 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, तो वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं से परामर्श किए बिना भारत को युद्ध में शामिल घोषित कर दिया।
इसके विरोध में, कांग्रेस के मंत्रालयों ने अक्टूबर और नवंबर 1939 में सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया।
मुस्लिम लीग के नेता मुहम्मद अली जिन्ना ने इस अवसर का उपयोग करते हुए, कांग्रेस शासन के अंत का जश्न मनाने के लिए 22 दिसंबर, 1939 को 'मुक्ति दिवस' (Day of Deliverance) के रूप में मनाने का आह्वान किया।
Step 3: Final Answer:
मुस्लिम लीग ने 22 दिसंबर, 1939 को मुक्ति दिवस मनाया। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: 'मुक्ति दिवस' (1939) और 'सीधी कार्रवाई दिवस' (1946) के बीच अंतर को समझें। दोनों का आह्वान मुस्लिम लीग ने किया था, लेकिन उनके संदर्भ और परिणाम बहुत अलग थे। सीधी कार्रवाई दिवस के कारण बड़े पैमाने पर सांप्रदायिक दंगे हुए।
भारत का विभाजन ब्रिटिश शासन की किस योजना का परिणाम है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न उस विशिष्ट योजना की पहचान करने के बारे में है जिसके कारण ब्रिटिश भारत का दो स्वतंत्र डोमिनियन - भारत और पाकिस्तान - में विभाजन हुआ।
Step 2: Detailed Explanation:
लॉर्ड माउंटबेटन को फरवरी 1947 में भारत का अंतिम वायसराय नियुक्त किया गया था, जिसका मुख्य कार्य सत्ता का हस्तांतरण करना था।
बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच समझौते की असंभवता को देखते हुए, माउंटबेटन इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि विभाजन ही एकमात्र समाधान है।
उन्होंने 3 जून, 1947 को एक योजना प्रस्तुत की, जिसे 'माउंटबेटन योजना' या '3 जून योजना' के रूप में जाना जाता है।
इस योजना में भारत को भारत और पाकिस्तान में विभाजित करने की प्रक्रिया की रूपरेखा दी गई थी। इसी योजना के आधार पर भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया गया।
Step 3: Final Answer:
भारत का विभाजन माउंटबेटन योजना का परिणाम था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: ध्यान दें कि कैबिनेट मिशन योजना (1946) ने एक अविभाजित भारत के लिए एक कमजोर केंद्र के साथ त्रि-स्तरीय संघीय संरचना का प्रस्ताव रखा था, लेकिन यह योजना विफल हो गई, जिससे अंततः माउंटबेटन योजना और विभाजन का मार्ग प्रशस्त हुआ।
सीधी कार्रवाई की धमकी किसने दी थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1940 के दशक में भारत के विभाजन से पहले की एक हिंसक घटना, 'सीधी कार्रवाई दिवस' के आह्वान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब कैबिनेट मिशन योजना विफल हो गई और कांग्रेस ने एक मजबूत केंद्र के साथ सरकार बनाने की अपनी मंशा स्पष्ट कर दी, तो मुस्लिम लीग को लगा कि एक अलग पाकिस्तान की उनकी मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है।
इसके जवाब में, मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए 16 अगस्त, 1946 को 'सीधी कार्रवाई दिवस' (Direct Action Day) मनाने का आह्वान किया।
इस दिन का उद्देश्य एक अलग मुस्लिम राष्ट्र की मांग को बलपूर्वक प्रदर्शित करना था।
दुर्भाग्य से, इस आह्वान के कारण कलकत्ता में और बाद में नोआखली और बिहार में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए, जिन्हें 'द ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स' के रूप में जाना जाता है।
Step 3: Final Answer:
सीधी कार्रवाई की धमकी (और आह्वान) मुस्लिम लीग ने दी थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'सीधी कार्रवाई दिवस' (16 अगस्त 1946) भारत के विभाजन की ओर ले जाने वाली घटनाओं में एक महत्वपूर्ण और दुखद मोड़ था। इसने दिखाया कि सांप्रदायिक विभाजन कितना गहरा हो गया था।
स्वतंत्र भारत का प्रथम गवर्नर जनरल कौन था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न स्वतंत्रता के बाद भारत के पहले संवैधानिक प्रमुख की पहचान से संबंधित है, जिसमें 'प्रथम' और 'प्रथम भारतीय' के बीच के अंतर को समझना महत्वपूर्ण है।
Step 2: Detailed Explanation:
जब भारत 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्र हुआ, तो यह एक डोमिनियन बना रहा, जिसका अर्थ है कि ब्रिटिश सम्राट अभी भी राज्य का प्रमुख था, जिसका प्रतिनिधित्व गवर्नर-जनरल करता था।
भारत के अंतिम वायसराय, लॉर्ड माउंटबेटन को स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर-जनरल के रूप में पद पर बने रहने के लिए कहा गया था। वह इस पद पर जून 1948 तक रहे।
(B) सी. राजगोपालाचारी लॉर्ड माउंटबेटन के बाद भारत के गवर्नर-जनरल बने। वह स्वतंत्र भारत के दूसरे और अंतिम गवर्नर-जनरल थे, और इस पद को संभालने वाले पहले और एकमात्र भारतीय थे।
(C) डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के पहले राष्ट्रपति थे, जब भारत 1950 में गणतंत्र बना और गवर्नर-जनरल का पद समाप्त हो गया।
Step 3: Final Answer:
स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल लॉर्ड माउंटबेटन थे। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: परीक्षा में इस तरह के प्रश्नों पर ध्यान दें: \textbf{स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल:} लॉर्ड माउंटबेटन। \textbf{स्वतंत्र भारत के प्रथम भारतीय गवर्नर-जनरल:} सी. राजगोपालाचारी। \textbf{भारत के प्रथम राष्ट्रपति:} डॉ. राजेंद्र प्रसाद।
भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष कौन थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत का संविधान बनाने वाली संस्था, संविधान सभा के अध्यक्ष की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
संविधान सभा की पहली बैठक 9 दिसंबर, 1946 को हुई, जिसके अस्थायी (interim) अध्यक्ष डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा थे।
इसके बाद, 11 दिसंबर, 1946 को, डॉ. राजेंद्र प्रसाद को संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध चुना गया और वे संविधान निर्माण की प्रक्रिया पूरी होने तक इस पद पर बने रहे।
(D) बी. आर. अम्बेडकर प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष थे, न कि पूरी संविधान सभा के।
(A) जवाहरलाल नेहरू संघ शक्ति समिति (Union Powers Committee) के अध्यक्ष थे।
Step 3: Final Answer:
भारतीय संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: परीक्षा में अक्सर संविधान सभा के अध्यक्ष (डॉ. राजेंद्र प्रसाद) और प्रारूप समिति के अध्यक्ष (डॉ. बी. आर. अम्बेडकर) के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जाती है। इन दोनों भूमिकाओं के अंतर को स्पष्ट रूप से याद रखें।
मोहनजोदड़ो किस नदी के किनारे स्थित है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों की भौगोलिक स्थिति से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मोहनजोदड़ो, जिसका अर्थ 'मृतकों का टीला' है, सिंधु घाटी सभ्यता के सबसे बड़े और सबसे प्रसिद्ध शहरों में से एक था।
यह स्थल वर्तमान पाकिस्तान के सिंध प्रांत में सिंधु नदी (Indus River) के पश्चिमी किनारे पर स्थित है।
(A) हड़प्पा, एक अन्य प्रमुख स्थल, रावी नदी के तट पर स्थित था।
Step 3: Final Answer:
मोहनजोदड़ो सिंधु नदी के किनारे स्थित है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: सिंधु घाटी सभ्यता के प्रमुख स्थलों और उनसे संबंधित नदियों की एक सूची बनाएं: \textbf{हड़प्पा} - रावी नदी \textbf{मोहनजोदड़ो} - सिंधु नदी \textbf{लोथल} - भोगवा नदी \textbf{कालीबंगा} - घग्गर नदी
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में किसने की थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के महत्वपूर्ण स्थलों के खोजकर्ताओं और खोज के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सिंधु घाटी सभ्यता के स्थलों की खोज 20वीं सदी की शुरुआत में हुई।
हड़प्पा की खोज सबसे पहले 1921 में दयाराम साहनी ने की थी।
इसके एक साल बाद, 1922 में, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के एक अधिकारी राखालदास बनर्जी (R. D. Banerji) ने मोहनजोदड़ो के स्थल की खोज की।
Step 3: Final Answer:
मोहनजोदड़ो की खोज 1922 में राखालदास बनर्जी ने की थी। इसलिए, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: दो सबसे महत्वपूर्ण स्थलों के खोजकर्ताओं को याद रखें: हड़प्पा (1921 - दयाराम साहनी) और मोहनजोदड़ो (1922 - आर. डी. बनर्जी)। यह कालानुक्रमिक क्रम आपको याद रखने में मदद करेगा।
कालीबंगा कहाँ स्थित है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के एक प्रमुख स्थल की वर्तमान भौगोलिक स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
कालीबंगा, जिसका शाब्दिक अर्थ 'काली चूड़ियाँ' है, सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण प्रांतीय केंद्र था।
यह स्थल भारत के राजस्थान राज्य के हनुमानगढ़ जिले में घग्गर नदी के तट पर स्थित है।
यहाँ से जुते हुए खेत और अग्नि वेदिकाओं जैसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं।
Step 3: Final Answer:
कालीबंगा राजस्थान में स्थित है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख हड़प्पा स्थलों के वर्तमान भारतीय राज्यों को याद रखें: \textbf{लोथल, धोलावीरा:} गुजरात \textbf{कालीबंगा:} राजस्थान \textbf{राखीगढ़ी, बनवाली:} हरियाणा \textbf{रोपड़:} पंजाब
सिन्धु सभ्यता में गोदी कहाँ से मिला है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता के विभिन्न स्थलों पर पाई गई विशिष्ट संरचनाओं और अवशेषों से संबंधित है। 'गोदी' का अर्थ है गोदी बाड़ा या डॉकयार्ड।
Step 2: Detailed Explanation:
लोथल, जो गुजरात में स्थित है, सिंधु घाटी सभ्यता का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर था।
यहाँ की सबसे प्रमुख खोज एक विशाल मानव निर्मित गोदी बाड़ा (डॉकयार्ड) है।
यह संरचना दुनिया के सबसे पुराने ज्ञात डॉकयार्ड में से एक मानी जाती है और यह लोथल के समुद्री व्यापार का एक मजबूत प्रमाण है, विशेष रूप से मेसोपोटामिया के साथ।
Step 3: Final Answer:
सिंधु सभ्यता में गोदी (डॉकयार्ड) लोथल से मिला है। इसलिए, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख स्थलों को उनकी अनूठी खोजों के साथ जोड़ें: \textbf{मोहनजोदड़ो:} विशाल स्नानागार, कांस्य नर्तकी, पशुपति मुहर। \textbf{हड़प्पा:} R-37 कब्रिस्तान, अन्न भंडार। \textbf{कालीबंगा:} जुते हुए खेत, अग्नि वेदिकाएं। \textbf{लोथल:} गोदी बाड़ा (डॉकयार्ड), चावल के साक्ष्य।
निम्नलिखित देवताओं में से कौन सैन्धव सभ्यता के प्रमुख देवता थे?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता (सैन्धव सभ्यता) के धार्मिक विश्वासों और उनके प्रमुख देवताओं से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सिंधु घाटी सभ्यता के लोग मातृदेवी की पूजा करते थे, जैसा कि बड़ी संख्या में मिली टेराकोटा की मूर्तियों से पता चलता है।
इसके अलावा, वे एक पुरुष देवता की भी पूजा करते थे, जिसका चित्रण मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर मिलता है। इस मुहर पर एक त्रिमुखी व्यक्ति को एक योगी की मुद्रा में बैठा दिखाया गया है, जो जानवरों से घिरा हुआ है। इस आकृति को 'पशुपति' या 'आद्य-शिव' (Proto-Shiva) के रूप में पहचाना गया है, जो हिंदू देवता शिव का प्रारंभिक रूप माना जाता है।
वैदिक देवता जैसे विष्णु और वरुण के प्रमाण सिंधु सभ्यता में नहीं मिलते हैं।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में, शिव (आद्य-शिव के रूप में) सिंधु सभ्यता के एक प्रमुख देवता थे। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है, इसलिए उनके धर्म के बारे में हमारा ज्ञान पुरातात्विक साक्ष्यों जैसे मुहरों, मूर्तियों और संरचनाओं पर आधारित है।
अशोक का संबंध किस वंश से है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत के एक महानतम सम्राट की वंशावली से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अशोक महान मौर्य वंश के तीसरे शासक थे।
इस वंश की स्थापना उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने लगभग 322 ईसा पूर्व में नंद वंश को उखाड़ फेंक कर की थी।
अशोक के पिता का नाम बिन्दुसार था। अशोक ने लगभग 268 ईसा पूर्व से 232 ईसा पूर्व तक शासन किया।
Step 3: Final Answer:
अशोक का संबंध मौर्य वंश से है। इसलिए, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: मगध के प्रमुख राजवंशों का कालानुक्रमिक क्रम याद रखें: हर्यक वंश → शिशुनाग वंश → नंद वंश → मौर्य वंश → शुंग वंश → कण्व वंश। यह आपको शासकों को उनके सही वंश से जोड़ने में मदद करेगा।
मेगास्थनीज भारत में किसके दरबार में आया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत में आए प्रसिद्ध विदेशी यात्रियों और उनके मेजबान भारतीय शासकों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मेगास्थनीज एक यूनानी इतिहासकार और राजनयिक था।
उसे सेल्यूकस प्रथम निकेटर (सिकंदर के एक जनरल) ने अपने राजदूत के रूप में मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में भेजा था।
मेगास्थनीज ने पाटलिपुत्र (मौर्य राजधानी) में काफी समय बिताया और भारत पर 'इंडिका' नामक एक विस्तृत पुस्तक लिखी। यद्यपि मूल पुस्तक खो गई है, इसके अंश बाद के यूनानी लेखकों के कार्यों में संरक्षित हैं।
Step 3: Final Answer:
मेगास्थनीज चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में आया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रमुख विदेशी यात्रियों और वे जिन भारतीय शासकों के दरबार में आए, उनकी एक सूची बनाएं: \textbf{मेगास्थनीज} → चंद्रगुप्त मौर्य \textbf{फाह्यान} → चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) \textbf{ह्वेनसांग} → हर्षवर्धन \textbf{इब्न बतूता} → मुहम्मद बिन तुगलक
महाभाष्य के लेखक कौन हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय साहित्य के एक महत्वपूर्ण ग्रंथ और उसके लेखक से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महाभाष्य संस्कृत व्याकरण पर एक प्रसिद्ध ग्रंथ है।
यह पाणिनि के 'अष्टाध्यायी' पर एक टिप्पणी (भाष्य) है।
इसकी रचना महर्षि पतंजलि ने की थी, जो शुंग वंश के शासक पुष्यमित्र शुंग के समकालीन माने जाते हैं।
पतंजलि को योग सूत्रों के संकलनकर्ता के रूप में भी जाना जाता है।
Step 3: Final Answer:
महाभाष्य के लेखक पतंजलि हैं। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख प्राचीन लेखकों और उनके कार्यों को याद रखें: \textbf{कौटिल्य} - अर्थशास्त्र \textbf{कालिदास} - अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूतम् \textbf{हरिषेण} - प्रयाग प्रशस्ति \textbf{पाणिनि} - अष्टाध्यायी
प्रयाग प्रशस्ति का संबंध किस गुप्त शासक से है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गुप्त काल के एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत, प्रयाग प्रशस्ति, और इसके संबंधित शासक के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रयाग प्रशस्ति, जिसे इलाहाबाद स्तंभ शिलालेख भी कहा जाता है, एक प्रशस्ति (राजा की प्रशंसा में लिखा गया लेख) है।
इसकी रचना संस्कृत में समुद्रगुप्त के दरबारी कवि हरिषेण द्वारा की गई थी।
यह शिलालेख मूल रूप से अशोक द्वारा बनवाए गए एक स्तंभ पर उत्कीर्ण है।
इसमें समुद्रगुप्त की विजयों, उसके व्यक्तित्व और उसके साम्राज्य की सीमाओं का विस्तृत वर्णन है, जिसके कारण वी. ए. स्मिथ ने उसे 'भारत का नेपोलियन' कहा।
Step 3: Final Answer:
प्रयाग प्रशस्ति का संबंध समुद्रगुप्त से है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: महत्वपूर्ण शिलालेखों को उनके संबंधित शासकों से जोड़ना सीखें: \textbf{हाथीगुम्फा शिलालेख} - खारवेल \textbf{प्रयाग प्रशस्ति} - समुद्रगुप्त \textbf{ऐहोल शिलालेख} - पुलकेशिन द्वितीय \textbf{जूनागढ़ शिलालेख} - रुद्रदामन
किस शासक को प्रियदर्शी कहा गया है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारतीय शासकों द्वारा अपनाई गई उपाधियों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मौर्य सम्राट अशोक ने अपने अधिकांश शिलालेखों में 'देवानांप्रिय प्रियदर्शी' (देवताओं का प्रिय, जो प्रिय दृष्टि से देखता है) की उपाधि का उपयोग किया है।
'प्रियदर्शी' (या प्रियदसि) उपाधि अशोक के साथ इतनी निकटता से जुड़ी हुई है कि यह लगभग उसका पर्याय बन गई है।
1837 में जेम्स प्रिंसेप द्वारा ब्राह्मी लिपि को पढ़ने के बाद ही यह स्पष्ट हुआ कि यह उपाधि मौर्य सम्राट अशोक के लिए थी।
Step 3: Final Answer:
अशोक को प्रियदर्शी कहा गया है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रमुख शासकों की उपाधियाँ याद रखें: \textbf{अशोक} - देवानांप्रिय प्रियदर्शी \textbf{समुद्रगुप्त} - कविराज, पराक्रमांक \textbf{चंद्रगुप्त द्वितीय} - विक्रमादित्य \textbf{कनिष्क} - देवपुत्र
गौतम बुद्ध का जन्म कब हुआ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जीवन की महत्वपूर्ण तिथियों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
ऐतिहासिक साक्ष्यों और बौद्ध परंपराओं के आधार पर, गौतम बुद्ध (जन्म का नाम सिद्धार्थ गौतम) का जन्म 563 ईसा पूर्व (BCE) में लुंबिनी नामक स्थान पर हुआ था, जो वर्तमान नेपाल में स्थित है।
उनके पिता शुद्धोदन शाक्य गण के राजा थे।
उनकी मृत्यु (महापरिनिर्वाण) 80 वर्ष की आयु में 483 ईसा पूर्व में कुशीनगर में हुई।
(D) 540 ई. पूर्व महावीर स्वामी का जन्म वर्ष माना जाता है।
Step 3: Final Answer:
गौतम बुद्ध का जन्म 563 ई. पूर्व में हुआ था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: बुद्ध के जीवन की चार महत्वपूर्ण घटनाओं और उनसे जुड़े स्थानों को याद रखें: \textbf{जन्म:} लुंबिनी \textbf{ज्ञान प्राप्ति:} बोधगया \textbf{प्रथम उपदेश:} सारनाथ \textbf{महापरिनिर्वाण:} कुशीनगर
महावीर स्वामी की माता का नाम था
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, महावीर स्वामी के पारिवारिक जीवन से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महावीर स्वामी का जन्म कुण्डग्राम (वैशाली के पास) में हुआ था।
उनके पिता का नाम सिद्धार्थ था, जो ज्ञातृक क्षत्रिय वंश के प्रमुख थे।
उनकी माता का नाम त्रिशला था, जो लिच्छवि राजकुमारी और राजा चेटक की बहन थीं।
(B) महामाया गौतम बुद्ध की माता थीं। (C) यशोधरा गौतम बुद्ध की पत्नी थीं। (D) अणोज्जा (या प्रियदर्शना) महावीर स्वामी की पुत्री थीं।
Step 3: Final Answer:
महावीर स्वामी की माता का नाम त्रिशला था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: गौतम बुद्ध और महावीर स्वामी के परिवार के सदस्यों के नामों के बीच भ्रमित न हों। एक तुलनात्मक तालिका बनाना सहायक हो सकता है। \textbf{बुद्ध:} पिता - शुद्धोदन, माता - महामाया, पत्नी - यशोधरा \textbf{महावीर:} पिता - सिद्धार्थ, माता - त्रिशला, पत्नी - यशोदा
भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना कब हुई?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में एक प्रमुख साम्राज्य की स्थापना की निर्णायक तिथि के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना बाबर ने की थी।
21 अप्रैल, 1526 को, बाबर ने पानीपत के प्रथम युद्ध में दिल्ली सल्तनत के अंतिम शासक इब्राहिम लोदी को हराया।
इस जीत ने लोदी वंश का अंत किया और भारत में मुगल शासन की नींव रखी।
(A) 1206 ई. दिल्ली सल्तनत की स्थापना का वर्ष है। (D) 1556 ई. पानीपत के दूसरे युद्ध का वर्ष है।
Step 3: Final Answer:
भारत में मुगल साम्राज्य की स्थापना 1526 ई. में हुई। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: पानीपत की तीन लड़ाइयाँ भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण मोड़ हैं: \textbf{प्रथम (1526):} बाबर ने लोदी को हराया, मुगल साम्राज्य की स्थापना हुई। \textbf{द्वितीय (1556):} अकबर ने हेमू को हराया, मुगल शासन मजबूत हुआ। \textbf{तृतीय (1761):} अब्दाली ने मराठों को हराया, मराठा शक्ति को झटका लगा।
पानीपत का द्वितीय युद्ध कब हुआ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण लड़ाई की तिथि से संबंधित है जिसने मुगल साम्राज्य के भाग्य का फैसला किया।
Step 2: Detailed Explanation:
पानीपत का दूसरा युद्ध 5 नवंबर, 1556 को लड़ा गया था।
यह युद्ध मुगल सम्राट अकबर (जिसका प्रतिनिधित्व उसके संरक्षक बैरम खान कर रहे थे) और हेमू (हेमचंद्र विक्रमादित्य), जो आदिल शाह सूर के हिंदू जनरल और मुख्यमंत्री थे, के बीच हुआ था।
इस युद्ध में हेमू की हार और मृत्यु ने अकबर के लिए भारत में मुगल सत्ता को फिर से स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त किया।
(A) 1526 ई. पानीपत के पहले युद्ध का वर्ष है। (D) 1761 ई. पानीपत के तीसरे युद्ध का वर्ष है।
Step 3: Final Answer:
पानीपत का द्वितीय युद्ध 1556 ई. में हुआ था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: तीनों पानीपत युद्धों के वर्षों (1526, 1556, 1761) और उनके मुख्य प्रतिभागियों को याद रखना प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
मुगल काल में सिंचाई का साधन क्या था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगलकालीन भारत में कृषि के लिए उपयोग की जाने वाली सिंचाई तकनीकों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुगल काल में भारत एक कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था थी। सिंचाई के लिए विभिन्न पारंपरिक साधनों का उपयोग किया जाता था।
(A) कुँआ: कुएँ सिंचाई का एक आम और महत्वपूर्ण स्रोत थे, खासकर उत्तरी भारत में। 'रहट' (persian wheel) का उपयोग कुओं से पानी निकालने के लिए किया जाता था।
(B) तालाब: तालाब और जलाशय वर्षा जल को संग्रहीत करने और सिंचाई के लिए उपयोग करने के लिए बनाए जाते थे, विशेषकर दक्षिण भारत में।
(C) नहर: सल्तनत काल के शासकों (जैसे फिरोज शाह तुगलक) द्वारा बनाई गई नहरों को मुगलों ने बनाए रखा और उनका विस्तार किया। शाहजहाँ ने भी नहरों का निर्माण करवाया।
चूंकि ये सभी साधन उपयोग में थे, इसलिए सही उत्तर 'इनमें से सभी' है।
Step 3: Final Answer:
मुगल काल में सिंचाई के लिए कुआँ, तालाब और नहर सभी साधन उपयोग में थे। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: जब किसी ऐतिहासिक काल में कृषि या प्रौद्योगिकी के बारे में प्रश्न पूछा जाए और विकल्प में कई पारंपरिक तरीके दिए गए हों, तो अक्सर 'उपरोक्त सभी' सही उत्तर होता है, क्योंकि उस समय विविध तकनीकों का सह-अस्तित्व होता था।
बाबर द्वारा कौन-सा ग्रंथ लिखा गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल शासकों द्वारा लिखे या लिखवाए गए महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्यों, विशेषकर आत्मकथाओं से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
बाबर, मुगल साम्राज्य के संस्थापक, ने अपनी आत्मकथा लिखी, जिसे 'बाबरनामा' (या 'तुजुक-ए-बाबरी') के नाम से जाना जाता है।
यह मूल रूप से चगताई तुर्की भाषा में लिखी गई थी। यह ग्रंथ न केवल बाबर के जीवन और विजयों का विवरण देता है, बल्कि उस समय के भारत के भूगोल, समाज, वनस्पतियों और जीवों का भी जीवंत चित्रण करता है।
(A) अकबरनामा अबुल फजल ने लिखा था। (C) हुमायूँनामा बाबर की बेटी गुलबदन बेगम ने लिखा था। (D) जहाँगीरनामा (तुजुक-ए-जहाँगीरी) जहाँगीर की आत्मकथा है।
Step 3: Final Answer:
बाबर द्वारा लिखा गया ग्रंथ बाबरनामा है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: मुगल काल की प्रमुख जीवनियों और उनके लेखकों को याद रखें: \textbf{बाबरनामा} - बाबर (आत्मकथा) \textbf{हुमायूँनामा} - गुलबदन बेगम (जीवनी) \textbf{अकबरनामा} - अबुल फजल (जीवनी) \textbf{तुजुक-ए-जहाँगीरी} - जहाँगीर (आत्मकथा)
विजयनगर साम्राज्य से सम्बंधित वंश है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण भारत के शक्तिशाली विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाले विभिन्न राजवंशों की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का ने की थी, जो संगम वंश के थे। इस साम्राज्य पर चार प्रमुख राजवंशों ने क्रमिक रूप से शासन किया:
संगम वंश (c. 1336–1485)
सुलुव (या सालुव) वंश (c. 1485–1505)
तुलुव वंश (c. 1505–1570)
आरवीडु वंश (c. 1570–1646)
चूंकि दिए गए विकल्प (A), (B), और (C) सभी विजयनगर साम्राज्य से संबंधित हैं, इसलिए सही उत्तर 'इनमें से सभी' है।
Step 3: Final Answer:
संगम, सुलुव और तुलुव वंश सभी विजयनगर साम्राज्य से संबंधित हैं। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: विजयनगर के राजवंशों को क्रम में याद रखने के लिए S-S-T-A (संगम, सुलुव, तुलुव, आरवीडु) का स्मरक (mnemonic) उपयोग करें। यह भी याद रखें कि सबसे प्रसिद्ध शासक, कृष्णदेवराय, तुलुव वंश के थे।
विजयनगर की स्थानीय मातृदेवी कौन थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विजयनगर साम्राज्य की धार्मिक मान्यताओं और उनकी प्रमुख स्थानीय देवी से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
विजयनगर के शासकों के मुख्य संरक्षक देवता विरुपाक्ष (शिव का एक रूप) थे।
स्थानीय परंपरा के अनुसार, पम्पादेवी इस क्षेत्र की स्थानीय मातृदेवी थीं, जिन्होंने विरुपाक्ष से विवाह करने के लिए तुंगभद्रा नदी के किनारे तपस्या की थी।
विजयनगर की राजधानी का नाम, हम्पी, 'पम्पा' के पुराने कन्नड़ रूप 'पम्पे' से लिया गया है। इस प्रकार, पम्पादेवी विजयनगर की स्थानीय मातृदेवी थीं।
(D) महानवमी एक त्योहार था, देवी नहीं।
Step 3: Final Answer:
विजयनगर की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी थीं। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: विजयनगर साम्राज्य के बारे में याद रखें कि उनके मुख्य देवता विरुपाक्ष थे और स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी थीं। इन्हीं के नाम पर राजधानी को पम्पा-क्षेत्र या हम्पी कहा जाता था।
कृष्णास्वामी मंदिर का निर्माता कौन था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विजयनगर साम्राज्य की स्थापत्य कला और उसके प्रमुख संरक्षकों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
कृष्णास्वामी मंदिर विजयनगर की राजधानी हम्पी में स्थित एक महत्वपूर्ण मंदिर है।
इसका निर्माण तुलुव वंश के सबसे महान शासक कृष्णदेवराय ने 1513 ईस्वी में करवाया था।
उन्होंने यह मंदिर उदयगिरि (वर्तमान ओडिशा में) पर अपनी विजय के उपलक्ष्य में बनवाया था। मंदिर का मुख्य देवता बालकृष्ण (भगवान कृष्ण का शिशु रूप) की एक मूर्ति थी जिसे वे उदयगिरि से लाए थे।
Step 3: Final Answer:
कृष्णास्वामी मंदिर का निर्माता कृष्णदेवराय था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: कृष्णदेवराय एक महान निर्माता थे। उनके द्वारा बनवाए गए अन्य प्रमुख निर्माणों में हजारा राम मंदिर और विट्ठलस्वामी मंदिर परिसर का विस्तार शामिल है।
हिन्दू परम्परा में मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न हिंदू धर्म के केंद्रीय दार्शनिक लक्ष्य 'मोक्ष' (जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्ति) को प्राप्त करने के विभिन्न मार्गों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
हिंदू दर्शन, विशेष रूप से भगवद्गीता में, मोक्ष प्राप्त करने के लिए तीन मुख्य मार्गों या योगों का वर्णन किया गया है:
ज्ञान मार्ग (ज्ञान का मार्ग): यह दार्शनिक चिंतन और आत्म-ज्ञान के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने पर जोर देता है।
कर्म मार्ग (कर्म का मार्ग): यह बिना किसी फल की इच्छा के अपने कर्तव्यों और कार्यों को निस्वार्थ भाव से करने पर जोर देता है।
भक्ति मार्ग (भक्ति का मार्ग): यह ईश्वर के प्रति पूर्ण प्रेम, समर्पण और भक्ति के माध्यम से मुक्ति प्राप्त करने पर जोर देता है।
ये तीनों मार्ग मोक्ष प्राप्ति के वैध साधन माने जाते हैं।
Step 3: Final Answer:
ज्ञान मार्ग, कर्म मार्ग और भक्ति मार्ग, ये सभी हिंदू परंपरा में मोक्ष प्राप्ति के मार्ग हैं। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: जब हिंदू दर्शन जैसे व्यापक विषयों पर प्रश्न हों, तो अक्सर कई दृष्टिकोणों को सही माना जाता है। ऐसे मामलों में 'इनमें से सभी' या 'उपरोक्त सभी' एक संभावित सही उत्तर हो सकता है।
धम्म महामात्रों को किसने नियुक्त किया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मौर्यकालीन प्रशासन में एक विशिष्ट प्रकार के अधिकारी की नियुक्ति से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
कलिंग युद्ध के बाद, मौर्य सम्राट अशोक ने युद्ध की नीति को त्याग दिया और 'धम्म' (नैतिकता और सदाचार का एक कोड) के प्रचार को अपने शासन का आधार बनाया।
अपने 'धम्म' के संदेश को साम्राज्य के भीतर और बाहर फैलाने के लिए, अशोक ने अपने राज्याभिषेक के 13वें वर्ष में 'धम्म महामात्र' नामक एक नए पद का सृजन किया।
इन अधिकारियों का काम धम्म का प्रचार करना, लोगों को नैतिक जीवन जीने के लिए प्रेरित करना और विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच सद्भाव सुनिश्चित करना था।
Step 3: Final Answer:
धम्म महामात्रों को अशोक ने नियुक्त किया था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'धम्म' शब्द का संबंध सीधे तौर पर अशोक से है। यदि किसी प्रश्न में 'धम्म' या 'धम्म महामात्र' का उल्लेख हो, तो उत्तर लगभग हमेशा अशोक ही होगा।
महाभारत की रचना किस भाषा में हुई थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के दो महान महाकाव्यों में से एक की मूल भाषा से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महाभारत, जिसे दुनिया का सबसे लंबा काव्य ग्रंथ माना जाता है, की रचना मूल रूप से संस्कृत भाषा में हुई थी।
परंपरागत रूप से इसका श्रेय महर्षि वेदव्यास को दिया जाता है।
(B) पाली और (C) प्राकृत भाषाएं क्रमशः प्रारंभिक बौद्ध और जैन साहित्य से जुड़ी हैं। (D) हिन्दी एक आधुनिक भारतीय भाषा है जिसका विकास बहुत बाद में हुआ।
Step 3: Final Answer:
महाभारत की रचना संस्कृत भाषा में हुई थी। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि भारत के प्रमुख प्राचीन ग्रंथ जैसे वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत और पुराण संस्कृत में रचे गए थे।
मनुस्मृति में कितने प्रकार के विवाह का उल्लेख है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत के एक प्रमुख धर्मशास्त्र ग्रंथ, मनुस्मृति में वर्णित सामाजिक रीति-रिवाजों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मनुस्मृति, जो प्राचीन भारतीय कानूनी और सामाजिक संहिताओं में से एक है, में आठ प्रकार के विवाहों का वर्णन किया गया है।
इन्हें दो श्रेणियों में बांटा गया है:
प्रशस्त (अनुमोदित) विवाह (4 प्रकार): ब्रह्म, दैव, आर्ष, प्राजापत्य।
अप्रशस्त (अस्वीकृत) विवाह (4 प्रकार): असुर, गांधर्व, राक्षस, पैशाच।
कुल मिलाकर, आठ प्रकार के विवाहों का उल्लेख है।
Step 3: Final Answer:
मनुस्मृति में आठ प्रकार के विवाह का उल्लेख है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: यह याद रखना उपयोगी है कि आठ विवाहों को दो समान समूहों में विभाजित किया गया था: चार 'अच्छे' या स्वीकृत और चार 'बुरे' या अस्वीकृत। यह आपको संख्या 8 को याद रखने में मदद करेगा।
महात्मा बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति कहाँ हुई थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न महात्मा बुद्ध के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना, यानी 'ज्ञान प्राप्ति' या 'संबोधि' के स्थान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े चार प्रमुख स्थान हैं, जिनकी अपनी-अपनी महत्ता है:
(A) लुम्बिनी: यह बुद्ध का जन्म स्थान है। यह वर्तमान में नेपाल में स्थित है।
(B) सारनाथ: ज्ञान प्राप्ति के बाद, बुद्ध ने यहाँ अपना पहला उपदेश दिया था, जिसे 'धर्मचक्रप्रवर्तन' कहा जाता है।
(C) बोधगया: यह वह स्थान है जहाँ बुद्ध को एक पीपल के पेड़ (जिसे अब बोधि वृक्ष कहा जाता है) के नीचे ज्ञान (निर्वाण) की प्राप्ति हुई थी। यह बिहार में स्थित है।
(D) कुशीनगर: यह वह स्थान है जहाँ बुद्ध ने अपने शरीर का त्याग किया था, जिसे 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है।
Step 3: Final Answer:
प्रश्न ज्ञान प्राप्ति के स्थान के बारे में है, जो बोधगया है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: बुद्ध के जीवन की चार महान घटनाओं को उनके स्थानों के साथ याद रखें: जन्म (लुम्बिनी), ज्ञान (बोधगया), प्रथम उपदेश (सारनाथ), और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर)।
बुद्ध का बचपन का नाम क्या था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न बौद्ध धर्म के संस्थापक, गौतम बुद्ध के मूल नाम के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
गौतम बुद्ध का जन्म शाक्य वंश के राजा शुद्धोदन के घर हुआ था और उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ था।
ज्ञान प्राप्ति के बाद ही वे 'बुद्ध' कहलाए, जिसका अर्थ है 'ज्ञानी' या 'जागृत'।
(A) वर्धमान, जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी के बचपन का नाम था।
(C) देवदत्त, बुद्ध के चचेरे भाई थे।
(D) राहुल, बुद्ध के पुत्र का नाम था।
Step 3: Final Answer:
बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: परीक्षा में अक्सर बुद्ध (सिद्धार्थ) और महावीर (वर्धमान) के बचपन के नामों के बीच भ्रम पैदा किया जाता है। इन दोनों को स्पष्ट रूप से याद रखें।
वेदों की संख्या कितनी है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथों, वेदों की कुल संख्या के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
वेद हिंदू धर्म के आधार स्तंभ हैं। इनकी संख्या चार है। ये चार वेद हैं:
ऋग्वेद: सबसे प्राचीन वेद, जिसमें देवताओं की स्तुति में रचे गए सूक्त हैं।
यजुर्वेद: इसमें यज्ञ की विधियों और मंत्रों का वर्णन है।
सामवेद: इसमें यज्ञ के अवसर पर गाए जाने वाले मंत्रों का संग्रह है। इसे भारतीय संगीत का मूल माना जाता है।
अथर्ववेद: इसमें तंत्र-मंत्र, जादू-टोना, और औषधियों का वर्णन है।
Step 3: Final Answer:
वेदों की कुल संख्या 4 है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: कभी-कभी पहले तीन वेदों (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद) को मिलाकर 'वेदत्रयी' कहा जाता है, जिससे 3 की संख्या को लेकर भ्रम हो सकता है। लेकिन कुल वेद हमेशा चार ही माने जाते हैं, जिसमें अथर्ववेद भी शामिल है।
प्राचीन भारत में धम्म की शुरूआत किस शासक ने की थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक विशिष्ट प्रशासनिक और नैतिक नीति 'धम्म' की शुरुआत करने वाले शासक से संबंधित है। यह प्रश्न 61 का दोहराव है।
Step 2: Detailed Explanation:
'धम्म' एक प्राकृत शब्द है, जो संस्कृत के 'धर्म' शब्द का रूपांतरण है।
मौर्य सम्राट अशोक ने कलिंग युद्ध की भयावहता को देखने के बाद, अपनी प्रजा के नैतिक उत्थान के लिए एक आचार संहिता प्रस्तुत की, जिसे 'अशोक का धम्म' कहा जाता है।
यह कोई नया धर्म नहीं था, बल्कि सभी धर्मों के अच्छे सिद्धांतों का सार था, जैसे बड़ों का आदर करना, अहिंसा, सत्य बोलना और दान करना।
अशोक ने इस धम्म के प्रचार के लिए 'धम्म महामात्र' नामक अधिकारियों की नियुक्ति की और शिलालेखों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार किया।
Step 3: Final Answer:
धम्म की शुरुआत अशोक ने की थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: अशोक की 'धम्म' नीति उसकी सबसे अनूठी विशेषताओं में से एक है। यह उसे प्राचीन विश्व के अन्य शासकों से अलग करती है। 'धम्म' और 'अशोक' को हमेशा एक साथ जोड़कर याद रखें।
किस ग्रंथ में आदम से लेकर अकबर के काल तक का इतिहास मिलता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगलकालीन एक विशिष्ट ऐतिहासिक ग्रंथ की विषय-वस्तु के विस्तार से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अकबरनामा, जिसकी रचना अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने की थी, अकबर के शासनकाल का आधिकारिक इतिहास है।
यह ग्रंथ तीन खंडों में विभाजित है। इसका पहला खंड मानव जाति के इतिहास से शुरू होता है, जिसमें आदम से लेकर अकबर के पूर्वजों और उनके प्रारंभिक जीवन तक का वर्णन है।
दूसरा खंड अकबर के शासनकाल की घटनाओं का वर्णन करता है।
तीसरे खंड को 'आइन-ए-अकबरी' कहा जाता है, जिसमें अकबर के प्रशासन, सेना, राजस्व और साम्राज्य के भूगोल का विस्तृत विवरण है।
Step 3: Final Answer:
अकबरनामा में आदम से लेकर अकबर के काल तक का इतिहास मिलता है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: याद रखें कि बाबरनामा और जहाँगीरनामा (तुजुक-ए-जहाँगीरी) आत्मकथाएँ हैं, जो मुख्य रूप से उन शासकों के व्यक्तिगत जीवन और शासनकाल पर केंद्रित हैं। अकबरनामा का दायरा बहुत व्यापक है।
आइन-ए-अकबरी में भूमि को कितने भागों में बाँटा गया है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न अकबर की राजस्व प्रणाली के एक महत्वपूर्ण पहलू से संबंधित है, जैसा कि आइन-ए-अकबरी में वर्णित है, जो कि भूमि का वर्गीकरण है।
Step 2: Detailed Explanation:
आइन-ए-अकबरी के अनुसार, राजस्व निर्धारण के उद्देश्य से भूमि की उत्पादकता और खेती की निरंतरता के आधार पर उसे चार श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
पोलज: वह भूमि जिस पर हर साल नियमित रूप से खेती की जाती थी। यह सबसे उपजाऊ भूमि थी।
परौती: वह भूमि जिसे अपनी उर्वरता वापस पाने के लिए एक या दो साल के लिए खाली छोड़ दिया जाता था।
चाचर: वह भूमि जिसे तीन या चार साल के लिए खाली छोड़ दिया जाता था।
बंजर: वह भूमि जिस पर पाँच या अधिक वर्षों से खेती नहीं की गई थी।
Step 3: Final Answer:
आइन-ए-अकबरी में भूमि को चार भागों में बाँटा गया है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: इन चार प्रकार की भूमि (पोलज, परौती, चाचर, बंजर) को उनकी खेती की आवृत्ति के क्रम में याद रखें, जो उनकी गुणवत्ता को भी दर्शाता है।
मुगल दरबार में अभिवादन का तरीका निम्न में से कौन-सा था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल दरबार में प्रचलित विभिन्न प्रकार के शाही अभिवादन और शिष्टाचार से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुगल दरबार में सम्राट के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए कई विस्तृत तरीके थे, जो समय और सम्राट के साथ बदलते रहे।
(A) कोर्निश: यह अभिवादन का एक तरीका था जिसमें व्यक्ति अपने दाहिने हाथ की हथेली को अपने माथे पर रखता था और सिर झुकाता था। यह अकबर के दरबार में प्रचलित था।
(B) सजदा: इसका अर्थ है पूर्ण दंडवत प्रणाम। यह प्रथा दिल्ली सल्तनत में शुरू हुई थी लेकिन अकबर और शाहजहाँ के शासनकाल में भी इसका पालन किया जाता था, हालांकि बाद में इसे गैर-इस्लामिक मानकर बदल दिया गया।
(C) पायबोस: इसका अर्थ है सम्राट के सिंहासन या पैरों को चूमना। यह भी सल्तनत काल की एक प्रथा थी, और इसी तरह की सम्मान प्रदर्शन की प्रथाएँ (जैसे जमीनबोस) मुगलों के अधीन भी मौजूद थीं।
चूंकि ये सभी तरीके किसी न किसी रूप में मुगल दरबार या उससे प्रभावित व्यवस्था का हिस्सा थे, इसलिए 'इनमें से सभी' सबसे उपयुक्त उत्तर है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए सभी तरीके मुगल दरबार में अभिवादन या सम्मान प्रदर्शन के रूप थे। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: मुगल दरबार शिष्टाचार बहुत औपचारिक था। कोर्निश, तस्लीम, और चहार तस्लीम जैसे शब्द विशेष रूप से मुगल काल से जुड़े हैं, जबकि सजदा और पायबोस सल्तनत काल से शुरू हुए और मुगल दरबार में भी कुछ हद तक जारी रहे।
वल्लभाचार्य का जन्म कहाँ हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भक्ति आंदोलन के एक प्रमुख संत और दार्शनिक वल्लभाचार्य के जन्म स्थान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
वल्लभाचार्य, जिन्होंने पुष्टिमार्ग की स्थापना की, का जन्म 1479 ई. में चम्पारण्य (वर्तमान छत्तीसगढ़) में हुआ था।
हालांकि, उनके माता-पिता वाराणसी के निवासी थे और वे एक तीर्थ यात्रा पर थे जब वल्लभाचार्य का जन्म हुआ। उन्होंने अपना अधिकांश प्रारंभिक जीवन और शिक्षा वाराणसी में ही प्राप्त की।
दिए गए विकल्पों में, चम्पारण्य मौजूद नहीं है। वाराणसी उनके परिवार का गृह नगर और उनकी गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र था, इसलिए विकल्पों में से यह सबसे निकटतम और प्रासंगिक उत्तर है।
Step 3: Final Answer:
दिए गए विकल्पों में से, वल्लभाचार्य का सबसे गहरा संबंध वाराणसी से था। अतः, विकल्प (C) सही उत्तर माना जाएगा।
Quick Tip: प्रमुख संतों के वास्तविक जन्मस्थान और उनके कर्मक्षेत्र (जहाँ उन्होंने काम किया) के बीच अंतर को समझना महत्वपूर्ण है। वल्लभाचार्य का जन्म चम्पारण्य में हुआ था, लेकिन उनका कर्मक्षेत्र मुख्य रूप से वाराणसी और ब्रज क्षेत्र था।
निजामुद्दीन औलिया की दरगाह कहाँ है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न चिश्ती सिलसिले के एक महान सूफी संत की दरगाह (मकबरे) की स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
हजरत निजामुद्दीन औलिया 13वीं-14वीं शताब्दी के एक प्रमुख सूफी संत थे। उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर का प्रिय) भी कहा जाता है।
उनकी दरगाह भारत की राजधानी दिल्ली में स्थित है और यह सभी धर्मों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है।
(C) अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह है।
(D) फतेहपुर सीकरी में शेख सलीम चिश्ती की दरगाह है।
Step 3: Final Answer:
निजामुद्दीन औलिया की दरगाह दिल्ली में है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: भारत में चिश्ती सिलसिले के प्रमुख संतों और उनकी दरगाहों के स्थानों को याद रखें: \textbf{मोइनुद्दीन चिश्ती} - अजमेर \textbf{कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी} - दिल्ली \textbf{निजामुद्दीन औलिया} - दिल्ली \textbf{शेख सलीम चिश्ती} - फतेहपुर सीकरी
'किताब-उर-रेहला' में किसका यात्रा वृत्तान्त मिलता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मध्यकालीन भारत के एक प्रसिद्ध यात्रा वृत्तांत और उसके लेखक की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'किताब-उर-रेहला' या केवल 'रेहला' (जिसका अर्थ है 'यात्रा') 14वीं शताब्दी के प्रसिद्ध मोरक्को के यात्री इब्न-बतूता द्वारा लिखा गया यात्रा वृत्तांत है।
इस पुस्तक में उन्होंने अपनी व्यापक यात्राओं का वर्णन किया है, जिसमें मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल के दौरान भारत में उनके अनुभव भी शामिल हैं।
(A) अल-बरूनी ने 'किताब-उल-हिन्द' लिखी थी। (B) अब्दुर्रज्जाक ने विजयनगर साम्राज्य का वर्णन किया था। (D) बर्नियर ने मुगल साम्राज्य, विशेषकर शाहजहाँ और औरंगजेब के काल का वर्णन किया।
Step 3: Final Answer:
'किताब-उर-रेहला' में इब्न-बतूता का यात्रा वृत्तान्त मिलता है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: प्रमुख यात्रियों को उनकी पुस्तकों के साथ सुमेलित करना सीखें: \textbf{मेगास्थनीज} \(\rightarrow\) इंडिका \textbf{अल-बरूनी} \(\rightarrow\) किताब-उल-हिन्द \textbf{इब्न-बतूता} \(\rightarrow\) रेहला
मध्ययुगीन यात्रियों का सरताज किस यात्री को कहा जाता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रसिद्ध मध्ययुगीन यात्री को दी गई एक मानद उपाधि से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'मध्ययुगीन यात्रियों का सरताज' (या Prince of Medieval Travellers) की उपाधि आमतौर पर वेनिस के यात्री मार्को पोलो को दी जाती है।
यह उपाधि उन्हें उनकी असाधारण रूप से लंबी और साहसिक यात्राओं के लिए दी गई है, विशेष रूप से चीन तक की उनकी यात्रा, जो उन्होंने 13वीं शताब्दी में की थी।
उनकी पुस्तक "द ट्रेवल्स ऑफ मार्को पोलो" ने यूरोपियों को पूर्व की दुनिया से परिचित कराने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई।
Step 3: Final Answer:
मध्ययुगीन यात्रियों का सरताज मार्को पोलो को कहा जाता है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: हालांकि इब्न-बतूता ने मार्को पोलो से भी अधिक यात्रा की, लेकिन यूरोपीय दृष्टिकोण से मार्को पोलो की यात्रा अधिक प्रभावशाली और अभूतपूर्व मानी जाती है, इसलिए यह उपाधि अक्सर उन्हें ही दी जाती है।
इब्न-बतूता किस शासक के शासनकाल में भारत आया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रमुख विदेशी यात्री के भारत आगमन के समय दिल्ली सल्तनत के तत्कालीन शासक से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
इब्न-बतूता, जो मोरक्को का एक प्रसिद्ध विद्वान और यात्री था, 1333 ईस्वी में भारत पहुँचा।
उस समय दिल्ली सल्तनत पर तुगलक वंश के सुल्तान मुहम्मद बिन तुगलक का शासन था।
सुल्तान इब्न-बतूता की विद्वता से बहुत प्रभावित हुआ और उसे दिल्ली का काजी (न्यायाधीश) नियुक्त किया। इब्न-बतूता लगभग सात वर्षों तक इस पद पर रहा।
Step 3: Final Answer:
इब्न-बतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: विदेशी यात्रियों और समकालीन भारतीय शासकों की जोड़ी बनाकर याद रखना एक प्रभावी तरीका है। उदाहरण के लिए: मेगास्थनीज-चंद्रगुप्त मौर्य, फाह्यान-चंद्रगुप्त द्वितीय, ह्वेनसांग-हर्षवर्धन, इब्न-बतूता-मुहम्मद बिन तुगलक।
फ्रांसिस बुकानन कौन था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्रारंभिक औपनिवेशिक भारत में एक महत्वपूर्ण ब्रिटिश अधिकारी की भूमिका और पेशे से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
फ्रांसिस बुकानन (जो बाद में फ्रांसिस हैमिल्टन के नाम से जाने गए) एक स्कॉटिश चिकित्सक, वनस्पतिशास्त्री और भूगोलवेत्ता थे।
उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए एक चिकित्सक के रूप में काम किया, लेकिन उनकी मुख्य प्रसिद्धि उन व्यापक सर्वेक्षणों के कारण है जो उन्होंने भारत में किए।
गवर्नर-जनरल लॉर्ड वेलेस्ली ने उन्हें कंपनी के अधीन क्षेत्रों का विस्तृत सर्वेक्षण करने का काम सौंपा था। उन्होंने भूमि, लोगों, कृषि, संसाधनों, इतिहास और संस्कृति पर व्यापक जानकारी एकत्र की। इसलिए, उनकी प्राथमिक भूमिका एक सर्वेक्षक की थी।
Step 3: Final Answer:
फ्रांसिस बुकानन एक सर्वेक्षक था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: बुकानन की रिपोर्टें आज भी 19वीं सदी की शुरुआत के बंगाल और दक्षिण भारत के बारे में जानकारी का एक अमूल्य स्रोत हैं। उन्हें ईस्ट इंडिया कंपनी के "सूचना संग्राहक" के रूप में याद रखें।
रैयतवाड़ी व्यवस्था में भूमि का स्वामी कौन होता था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत में लागू की गई एक प्रमुख भू-राजस्व प्रणाली, रैयतवाड़ी व्यवस्था, के तहत भूमि के स्वामित्व की स्थिति से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'रैयत' का अर्थ किसान होता है। रैयतवाड़ी व्यवस्था में, ब्रिटिश सरकार ने सीधे रैयत (किसान) के साथ राजस्व का समझौता किया।
इस प्रणाली में, जमींदार जैसे कोई मध्यस्थ नहीं थे।
किसान को भूमि का स्वामी माना जाता था, और उसे तब तक अपनी भूमि से बेदखल नहीं किया जा सकता था जब तक वह नियमित रूप से सरकार को भू-राजस्व का भुगतान करता रहता था।
इस प्रकार, व्यावहारिक रूप से भूमि का स्वामी किसान था।
Step 3: Final Answer:
रैयतवाड़ी व्यवस्था में भूमि का स्वामी किसान (रैयत) होता था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: ब्रिटिश भू-राजस्व प्रणालियों को उनके नाम से समझें: \textbf{जमींदारी:} मध्यस्थ जमींदार। \textbf{रैयतवाड़ी:} स्वामी रैयत (किसान)। \textbf{महालवाड़ी:} इकाई महाल (गाँव)।
सिद्ध-कान्हु ने किसका नेतृत्व किया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी विद्रोह और उसके नेताओं की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सिद्धू मुर्मू और कान्हू मुर्मू दो भाई थे जिन्होंने 1855-56 में ब्रिटिश शासन और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ संथाल विद्रोह का नेतृत्व किया था।
यह विद्रोह, जिसे 'संथाल हूल' भी कहा जाता है, वर्तमान झारखंड और पश्चिम बंगाल के संथाल परगना क्षेत्र में हुआ था।
यह 1857 के विद्रोह से ठीक पहले हुए सबसे बड़े और सबसे हिंसक आदिवासी विद्रोहों में से एक था।
(B) मुंडा विद्रोह का नेतृत्व बिरसा मुंडा ने किया था।
Step 3: Final Answer:
सिद्ध-कान्हु ने संथालों का नेतृत्व किया था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: प्रमुख आदिवासी विद्रोहों और उनके नेताओं को सुमेलित करके याद करें: \textbf{संथाल विद्रोह:} सिद्धू-कान्हू \textbf{मुंडा विद्रोह (उलगुलान):} बिरसा मुंडा \textbf{कोल विद्रोह:} बुद्धो भगत
रानी लक्ष्मीबाई को और किस नाम से जाना जाता था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1857 के विद्रोह की एक प्रमुख नायिका, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के विभिन्न नामों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जीवन कई नामों से जुड़ा है:
(C) मणिकर्णिका: यह उनका जन्म का नाम था। उनका पूरा नाम मणिकर्णिका तांबे था।
(B) मनु: परिवार के लोग और करीबी उन्हें प्यार से 'मनु' कहकर बुलाते थे।
(A) छबीली: बाजीराव द्वितीय के दरबार में उनके चंचल स्वभाव के कारण उन्हें 'छबीली' उपनाम दिया गया था।
चूंकि ये सभी नाम उन्हीं के हैं, इसलिए सही उत्तर 'इनमें से सभी' है।
Step 3: Final Answer:
रानी लक्ष्मीबाई को छबीली, मनु और मणिकर्णिका, इन सभी नामों से जाना जाता था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: अक्सर महान हस्तियों के कई नाम या उपनाम होते हैं। रानी लक्ष्मीबाई के मामले में, मणिकर्णिका (जन्म नाम), मनु (प्यार का नाम), और छबीली (उपनाम) सभी महत्वपूर्ण हैं।
व्यपगत के सिद्धान्त का संबंध किससे है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत की एक प्रसिद्ध विलय नीति और उसे लागू करने वाले गवर्नर-जनरल से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
व्यपगत का सिद्धान्त (Doctrine of Lapse), जिसे 'हड़प नीति' भी कहा जाता है, एक विलय नीति थी।
इस नीति के अनुसार, यदि किसी संरक्षित राज्य का शासक बिना किसी प्राकृतिक (पुरुष) उत्तराधिकारी के मर जाता, तो उसका राज्य ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया जाता था। गोद लिए हुए पुत्र को उत्तराधिकार का अधिकार नहीं दिया जाता था।
इस नीति को सबसे आक्रामक रूप से लॉर्ड डलहौजी (गवर्नर-जनरल, 1848-1856) द्वारा लागू किया गया था। उन्होंने इस नीति का उपयोग करके सतारा, जैतपुर, संबलपुर, झांसी और नागपुर जैसे कई राज्यों का विलय कर लिया।
Step 3: Final Answer:
व्यपगत के सिद्धान्त का संबंध लॉर्ड डलहौजी से है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: लॉर्ड डलहौजी को तीन चीजों के लिए याद रखें: व्यपगत का सिद्धान्त, भारत में रेलवे की शुरुआत, और डाक और तार प्रणाली की शुरुआत।
'जय हिन्द' का नारा किसने दिया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रसिद्ध नारे और उसके प्रणेता से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'जय हिन्द' का नारा, जिसका अर्थ है 'भारत की विजय हो', नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा लोकप्रिय बनाया गया था।
यह नारा आजाद हिन्द फौज (INA) का आधिकारिक अभिवादन और युद्ध घोष बन गया।
हालांकि कुछ लोगों का मानना है कि यह नारा मूल रूप से आबिद हसन सफ़रानी ने दिया था, लेकिन इसे राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने और लोकप्रिय बनाने का श्रेय पूरी तरह से सुभाष चंद्र बोस को ही जाता है। स्वतंत्रता के बाद यह भारत का एक राष्ट्रीय नारा बन गया।
Step 3: Final Answer:
'जय हिन्द' का नारा सुभाष बोस ने दिया था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों के नारों को याद रखें: \textbf{सुभाष चंद्र बोस:} "जय हिन्द", "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा", "दिल्ली चलो" \textbf{भगत सिंह:} "इंकलाब जिंदाबाद" \textbf{महात्मा गांधी:} "करो या मरो"
अकबर के राज में राजस्व व्यवस्था किसके हाथ में था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल सम्राट अकबर के प्रशासन में राजस्व और वित्त विभाग के प्रमुख की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
राजा टोडरमल अकबर के नवरत्नों में से एक थे और उनके वित्त मंत्री (दीवान-ए-अशरफ) थे।
उन्होंने अकबर की राजस्व प्रणाली को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने भूमि की पैमाइश, वर्गीकरण और राजस्व निर्धारण की एक विस्तृत प्रणाली शुरू की जिसे 'दहसाला प्रणाली' या 'ज़ब्ती प्रणाली' के रूप में जाना जाता है।
यह प्रणाली इतनी सफल रही कि यह मुगल राजस्व प्रशासन का आधार बन गई।
अन्य विकल्पों की भूमिकाएँ: (A) बीरबल एक सलाहकार थे, (B) बैरम खाँ अकबर के संरक्षक थे, और (C) मान सिंह एक प्रमुख सैन्य कमांडर थे।
Step 3: Final Answer:
अकबर के राज में राजस्व व्यवस्था टोडरमल के हाथ में थी। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: अकबर के प्रशासन में 'टोडरमल' का नाम 'राजस्व' (revenue) का पर्याय है। इन दोनों को हमेशा एक साथ याद रखें।
ताजमहल किस नदी के किनारे स्थित है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विश्व के सात अजूबों में से एक, ताजमहल की भौगोलिक स्थिति के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
ताजमहल भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के आगरा शहर में स्थित एक विश्व धरोहर मकबरा है।
इसका निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में करवाया था।
यह शानदार स्मारक यमुना नदी के दाहिने (दक्षिणी) किनारे पर स्थित है। नदी का किनारा इसके डिजाइन का एक अभिन्न अंग है और इसकी सुंदरता को बढ़ाता है।
Step 3: Final Answer:
ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: यमुना नदी के किनारे बसे प्रमुख ऐतिहासिक शहरों और स्मारकों को याद रखें: दिल्ली (लाल किला, हुमायूँ का मकबरा) और आगरा (ताजमहल, आगरा का किला)।
मौर्य साम्राज्य का प्रथम शासक कौन था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के पहले महान साम्राज्य, मौर्य साम्राज्य, के संस्थापक की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मौर्य साम्राज्य की स्थापना लगभग 322 ईसा पूर्व में चंद्रगुप्त मौर्य ने की थी।
उन्होंने अपने गुरु और सलाहकार चाणक्य (कौटिल्य) की सहायता से अंतिम नंद शासक धनानंद को पराजित कर पाटलिपुत्र पर अधिकार कर लिया और मौर्य वंश की नींव रखी।
(A) बिन्दुसार, चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र और उत्तराधिकारी थे।
(C) अशोक, बिन्दुसार के पुत्र और चंद्रगुप्त के पोते थे, जो मौर्य वंश के सबसे महान शासक बने।
(D) महेन्द्र, अशोक के पुत्र थे, जिन्हें अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए श्रीलंका भेजा था।
Step 3: Final Answer:
मौर्य साम्राज्य का प्रथम शासक चन्द्रगुप्त मौर्य था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: मौर्य वंश के पहले तीन शासकों का क्रम याद रखें: चंद्रगुप्त मौर्य (संस्थापक) \(\rightarrow\) बिन्दुसार \(\rightarrow\) अशोक (सबसे प्रसिद्ध)।
भारतीय पुरातत्व का पिता किसे कहा जाता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में पुरातत्व के क्षेत्र में foundational work करने वाले व्यक्ति की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
सर अलेक्जेंडर कनिंघम एक ब्रिटिश सेना इंजीनियर थे, जिन्होंने भारतीय पुरातत्व में गहरी रुचि विकसित की।
1861 में, उन्हें भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India - ASI) का पहला महानिदेशक नियुक्त किया गया।
उन्होंने भारत भर में कई पुरातात्विक स्थलों का व्यापक सर्वेक्षण और उत्खनन किया, जिससे भारत के अतीत को समझने की नींव पड़ी। उनके इस अग्रणी कार्य के लिए, उन्हें 'भारतीय पुरातत्व का पिता' (Father of Indian Archaeology) कहा जाता है।
Step 3: Final Answer:
भारतीय पुरातत्व का पिता अलेक्जेंडर कनिंघम को कहा जाता है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: अलेक्जेंडर कनिंघम को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के संस्थापक और पहले महानिदेशक के रूप में याद रखें। यह तथ्य उन्हें 'भारतीय पुरातत्व का पिता' की उपाधि से सीधे जोड़ता है।
ईस्ट इंडिया कम्पनी को बंगाल की दीवानी किसने प्रदान की?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न उस ऐतिहासिक घटना से संबंधित है जिसके द्वारा ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व एकत्र करने का कानूनी अधिकार प्राप्त हुआ।
Step 2: Detailed Explanation:
1764 में बक्सर के युद्ध में ईस्ट इंडिया कंपनी की निर्णायक जीत के बाद, कंपनी ने मुगल सम्राट, अवध के नवाब और बंगाल के नवाब की संयुक्त सेना को हरा दिया।
इस युद्ध के परिणामस्वरूप, 1765 में इलाहाबाद की संधि हुई।
इस संधि के तहत, तत्कालीन मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की 'दीवानी' (राजस्व एकत्र करने का अधिकार) प्रदान की। इसके बदले में कंपनी ने सम्राट को वार्षिक पेंशन देना स्वीकार किया।
Step 3: Final Answer:
ईस्ट इंडिया कम्पनी को बंगाल की दीवानी मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय ने प्रदान की थी। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: याद रखें: प्लासी का युद्ध (1757) ने कंपनी को राजनीतिक शक्ति दी, लेकिन बक्सर का युद्ध (1764) ने उन्हें दीवानी के माध्यम से वास्तविक प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण प्रदान किया।
'मज्म-उल-बहरीन' की रचना किसने की?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल काल के एक महत्वपूर्ण तुलनात्मक धार्मिक ग्रंथ और उसके लेखक से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'मज्म-उल-बहरीन' (जिसका अर्थ है 'दो समुद्रों का संगम') एक ग्रंथ है जिसकी रचना मुगल राजकुमार दारा शिकोह ने की थी।
दारा शिकोह, शाहजहाँ का सबसे बड़ा पुत्र था और वह एक उदारवादी और विद्वान व्यक्ति था।
इस पुस्तक में, उन्होंने इस्लामी सूफीवाद और हिंदू वेदांत दर्शन के बीच की समानताओं को उजागर करने का प्रयास किया, यह तर्क देते हुए कि दोनों एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं।
Step 3: Final Answer:
'मज्म-उल-बहरीन' की रचना दारा शिकोह ने की थी। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: दारा शिकोह को अक्सर उनके उदार और समधर्मी विचारों के लिए जाना जाता है। उन्होंने उपनिषदों का फारसी में 'सिर्र-ए-अकबर' ('महान रहस्य') नाम से अनुवाद भी करवाया था।
लिंगायत आंदोलन का प्रादुर्भाव कहाँ हुआ?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण भारत में उत्पन्न हुए एक महत्वपूर्ण शैव भक्ति आंदोलन, लिंगायत (या वीरशैव) आंदोलन, के उद्गम स्थल से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
लिंगायत आंदोलन का उदय 12वीं शताब्दी में कर्नाटक में हुआ था।
इस आंदोलन के प्रणेता बसवन्ना (या बसवेश्वर) थे, जो कलचुरी राजा बिज्जल द्वितीय के दरबार में एक मंत्री थे।
यह एक क्रांतिकारी सामाजिक और धार्मिक आंदोलन था जिसने जाति व्यवस्था, ब्राह्मणवादी कर्मकांडों और मूर्तिपूजा का विरोध किया। यह आंदोलन 'इष्टलिंग' (शिव का प्रतीक) की पूजा पर केंद्रित है।
Step 3: Final Answer:
लिंगायत आंदोलन का प्रादुर्भाव कर्नाटक में हुआ। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: लिंगायत आंदोलन को उसके संस्थापक 'बसवन्ना' और उद्गम स्थल 'कर्नाटक' के साथ जोड़कर याद रखें। यह 12वीं सदी का एक प्रमुख सुधार आंदोलन था।
इब्न-बतूता कितने वर्षों तक भारत में रहा?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्रसिद्ध मोरक्कन यात्री इब्न-बतूता के भारतीय उपमहाद्वीप में रहने की कुल अवधि से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
इब्न-बतूता 1333 ईस्वी में भारतीय उपमहाद्वीप में आया था।
उसने मुहम्मद बिन तुगलक के दरबार में दिल्ली के काजी के रूप में लगभग 8 वर्षों तक सेवा की।
बाद में, उसे सुल्तान द्वारा चीन में एक दूत के रूप में भेजा गया। चीन जाने से पहले और वहाँ से लौटते समय, उसने भारत के अन्य हिस्सों जैसे मालाबार तट, बंगाल और मालदीव की यात्रा की।
भारत में उसके आगमन (1333) से लेकर उपमहाद्वीप से उसके अंतिम प्रस्थान (लगभग 1347) तक की कुल अवधि लगभग 14 वर्ष बनती है।
Step 3: Final Answer:
इब्न-बतूता लगभग 14 वर्षों तक भारत में रहा। अतः, विकल्प (C) सबसे उपयुक्त उत्तर है।
Quick Tip: ध्यान दें कि इब्न-बतूता की दिल्ली में सेवा की अवधि (लगभग 8 वर्ष) और भारत में उसके कुल प्रवास की अवधि (लगभग 14 वर्ष) अलग-अलग है। प्रश्न को ध्यान से पढ़ें कि क्या पूछा जा रहा है।
'लॉटरी कमेटी' का गठन कब किया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश भारत में शहरी नियोजन के लिए गठित एक विशिष्ट समिति की स्थापना के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'लॉटरी कमेटी' की स्थापना 1817 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में ब्रिटिश सरकार द्वारा की गई थी।
इस समिति का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक लॉटरी के माध्यम से धन जुटाना था ताकि कलकत्ता शहर का शहरी नियोजन और विकास किया जा सके।
इस समिति ने शहर में कई महत्वपूर्ण सड़कों, चौकों का निर्माण किया और जल निकासी व्यवस्था में सुधार किया, जिससे कलकत्ता के शहरी परिदृश्य को एक नया रूप मिला।
Step 3: Final Answer:
'लॉटरी कमेटी' का गठन 1817 ई. में किया गया था। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 'लॉटरी कमेटी' का नाम याद रखें क्योंकि यह ब्रिटिशों द्वारा भारत में शहरी नियोजन के शुरुआती प्रयासों में से एक का प्रतिनिधित्व करता है, जिसे सार्वजनिक धन से वित्तपोषित किया गया था।
भारत का प्रथम मुगल सम्राट कौन था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक की पहचान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत का प्रथम मुगल सम्राट बाबर था।
उसने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में दिल्ली सल्तनत के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर भारत में मुगल शासन की स्थापना की।
(B) औरंगजेब छठा मुगल सम्राट था। (C) मुहम्मद शाह बाद के मुगल शासकों में से एक था। (D) बहादुर शाह जफर अंतिम मुगल सम्राट था।
Step 3: Final Answer:
भारत का प्रथम मुगल सम्राट बाबर था। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: मुगल वंश के संस्थापक (बाबर) और अंतिम शासक (बहादुर शाह जफर) को हमेशा याद रखें। यह प्रतियोगी परीक्षाओं में एक सामान्य प्रश्न है।
अकबर निम्नलिखित में से किस पर अधिकार नहीं कर सका?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल सम्राट अकबर की राजपूत नीति और उसके खिलाफ सबसे लंबे समय तक चले राजपूत प्रतिरोध से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अकबर ने अधिकांश राजपूत राज्यों को अपनी अधीनता में लाने में सफलता प्राप्त की, लेकिन मेवाड़ का राज्य हमेशा एक अपवाद बना रहा।
हालांकि अकबर ने 1568 में मेवाड़ की राजधानी चित्तौड़गढ़ (चित्तौड़) के किले पर कब्जा कर लिया था, लेकिन मेवाड़ के शासक, राणा उदय सिंह और बाद में उनके पुत्र महाराणा प्रताप ने मुगलों की अधीनता कभी स्वीकार नहीं की और संघर्ष जारी रखा।
अकबर कभी भी पूरे मेवाड़ राज्य पर पूर्ण अधिकार स्थापित नहीं कर सका और न ही महाराणा प्रताप को पकड़ सका।
मारवाड़ और जोधपुर ने अंततः अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली थी।
Step 3: Final Answer:
अकबर मेवाड़ पर पूर्ण अधिकार नहीं कर सका। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: चित्तौड़ किले की विजय और मेवाड़ पर पूर्ण अधिकार न कर पाने के बीच के अंतर को समझें। किला जीत लिया गया था, लेकिन राज्य का प्रतिरोध जारी रहा, जिसका नेतृत्व महाराणा प्रताप ने किया।
दीन-ए-इलाही किससे संबंधित है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल सम्राट अकबर द्वारा शुरू की गई एक समधर्मी धार्मिक-दार्शनिक प्रणाली से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'दीन-ए-इलाही' ('ईश्वर का धर्म') की स्थापना मुगल सम्राट अकबर ने 1582 में की थी।
यह एक नया धर्म नहीं था, बल्कि एक नैतिक संहिता थी जो विभिन्न धर्मों जैसे इस्लाम, हिंदू धर्म, पारसी धर्म, और ईसाई धर्म के अच्छे सिद्धांतों को समाहित करती थी।
इसका उद्देश्य साम्राज्य के विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच की खाई को पाटना और सुलह-ए-कुल (सार्वभौमिक शांति) को बढ़ावा देना था।
Step 3: Final Answer:
दीन-ए-इलाही अकबर से संबंधित है। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: अकबर की धार्मिक नीति से संबंधित दो महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं: 'सुलह-ए-कुल' (सार्वभौमिक शांति) और 'दीन-ए-इलाही'। दोनों अकबर की उदार और समधर्मी सोच को दर्शाते हैं।
तुजुक-ए-बाबरी के लेखक कौन हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल साम्राज्य के संस्थापक की आत्मकथा और उसके लेखक से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
'तुजुक-ए-बाबरी' मुगल सम्राट बाबर की आत्मकथा है, जिसे 'बाबरनामा' भी कहा जाता है।
बाबर ने इसे अपनी मातृभाषा चगताई तुर्की में लिखा था। यह विश्व साहित्य की उत्कृष्ट कृतियों में से एक मानी जाती है, जिसमें बाबर ने अपने जीवन, संघर्षों और भारत के बारे में अपने अवलोकनों का स्पष्ट और विस्तृत वर्णन किया है।
Step 3: Final Answer:
तुजुक-ए-बाबरी के लेखक स्वयं बाबर हैं। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: 'तुजुक' शब्द अक्सर आत्मकथाओं के लिए प्रयोग किया जाता है, जैसे 'तुजुक-ए-बाबरी' (बाबर द्वारा) और 'तुजुक-ए-जहाँगीरी' (जहाँगीर द्वारा)।
आलमगीर के नाम से कौन-सा मुगल बादशाह जाना जाता था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल सम्राटों द्वारा अपनाई गई शाही उपाधियों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
छठे मुगल सम्राट औरंगजेब ने सिंहासन पर बैठने के बाद 'आलमगीर' की उपाधि धारण की थी।
'आलमगीर' एक फारसी शब्द है जिसका अर्थ है 'विश्व विजेता'।
इसलिए, उन्हें अक्सर औरंगजेब आलमगीर के नाम से जाना जाता है।
Step 3: Final Answer:
औरंगजेब को आलमगीर के नाम से जाना जाता था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: प्रमुख मुगल सम्राटों की उपाधियाँ याद रखें: \textbf{जहाँगीर:} नूर-उद-दीन मुहम्मद सलीम \textbf{शाहजहाँ:} शिहाब-उद-दीन मुहम्मद खुर्रम \textbf{औरंगजेब:} मुही-उद-दीन मुहम्मद औरंगजेब आलमगीर
मुगल प्रशासन में जिले को किस नाम से जाना जाता था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल साम्राज्य की प्रशासनिक संरचना और उसकी इकाइयों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुगल साम्राज्य एक सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रणाली पर आधारित था। साम्राज्य को निम्नलिखित इकाइयों में विभाजित किया गया था:
सूबा: यह सबसे बड़ी इकाई थी, जिसे प्रांत कहा जा सकता है।
सरकार: प्रत्येक सूबे को कई 'सरकारों' में विभाजित किया गया था, जो आधुनिक 'जिले' के समकक्ष थे।
परगना (या महाल): प्रत्येक सरकार को आगे 'परगना' में विभाजित किया गया था, जो कई गाँवों का एक समूह होता था।
(D) दस्तूर एक राजस्व दर सूची थी, न कि कोई प्रशासनिक इकाई।
Step 3: Final Answer:
मुगल प्रशासन में जिले को 'सरकार' के नाम से जाना जाता था। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: मुगल प्रशासनिक पदानुक्रम को याद रखें: साम्राज्य > सूबा > सरकार > परगना > गाँव।
हम्पी को यूनेस्को द्वारा विश्व पुरातत्व स्थल किस वर्ष घोषित किया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता मिलने के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
हम्पी, जो मध्यकालीन विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी, अपने शानदार खंडहरों और स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है।
इस स्थल के असाधारण सार्वभौमिक महत्व को मान्यता देते हुए, संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने 1986 में 'हम्पी में स्मारकों के समूह' को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) के रूप में घोषित किया।
Step 3: Final Answer:
हम्पी को 1986 में यूनेस्को द्वारा विश्व पुरातत्व स्थल घोषित किया गया था। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: भारत में प्रमुख यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों और उनके घोषित होने के वर्षों की एक सूची बनाना सामान्य ज्ञान के प्रश्नों के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है।
तेनालीराम का संबंध किस साम्राज्य से है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक व्यक्तित्व और उनके शाही संरक्षण से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
तेनाली रामकृष्ण, जिन्हें तेनालीराम के नाम से जाना जाता है, एक प्रसिद्ध तेलुगु कवि और विजयनगर साम्राज्य के सम्राट कृष्णदेवराय के दरबार में एक दरबारी थे।
वह अपनी बुद्धिमत्ता, हास्य और चतुराई के लिए प्रसिद्ध थे और उन्हें अक्सर कृष्णदेवराय के अष्टदिग्गजों (आठ महान कवियों) में से एक माना जाता है। उनकी कहानियाँ आज भी भारत में लोकप्रिय हैं।
Step 3: Final Answer:
तेनालीराम का संबंध विजयनगर साम्राज्य से है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: जिस तरह बीरबल का संबंध अकबर और मुगल साम्राज्य से है, उसी तरह तेनालीराम का संबंध कृष्णदेवराय और विजयनगर साम्राज्य से है। यह एक क्लासिक जोड़ी है जिसे याद रखना चाहिए।
हरिहर एवं बुक्का ने कब विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण भारत के एक महान साम्राज्य, विजयनगर साम्राज्य, की स्थापना के वर्ष से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
विजयनगर साम्राज्य की स्थापना 1336 ईस्वी में संगम वंश के दो भाइयों, हरिहर प्रथम और बुक्का राय प्रथम ने की थी।
उन्होंने तुंगभद्रा नदी के दक्षिणी तट पर इस साम्राज्य की नींव रखी, जो तुगलक सल्तनत के दक्षिण में विस्तार के खिलाफ एक हिंदू प्रतिरोध के रूप में उभरा।
Step 3: Final Answer:
हरिहर एवं बुक्का ने 1336 ई. में विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: 1336 विजयनगर की स्थापना का और 1565 तालीकोटा के युद्ध का वर्ष है, जिसमें साम्राज्य को एक बड़ा झटका लगा। इन दो महत्वपूर्ण तिथियों को विजयनगर साम्राज्य के संदर्भ में याद रखें।
नानक का जन्म स्थान कहाँ है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव जी, के जन्म स्थान से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
गुरु नानक देव जी का जन्म 1469 में लाहौर के पास राय भोई की तलवंडी नामक गाँव में हुआ था।
यह स्थान वर्तमान में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित है।
उनके सम्मान में, इस स्थान का नाम बदलकर 'ननकाना साहिब' कर दिया गया है, और यह सिखों के लिए सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है।
(B) अमृतसर की स्थापना चौथे सिख गुरु, गुरु राम दास ने की थी। (C) पटना दसवें सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह का जन्म स्थान है।
Step 3: Final Answer:
नानक का जन्म स्थान तलवंडी है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: प्रमुख सिख गुरुओं से संबंधित महत्वपूर्ण स्थानों को याद रखें: \textbf{गुरु नानक:} जन्म - तलवंडी (ननकाना साहिब) \textbf{गुरु राम दास:} अमृतसर की स्थापना \textbf{गुरु गोबिंद सिंह:} जन्म - पटना
मुस्लिम लीग द्वारा मुक्ति दिवस क्यों मनाया गया?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1939 में मुस्लिम लीग द्वारा मनाए गए 'मुक्ति दिवस' (Day of Deliverance) के पीछे के राजनीतिक संदर्भ और कारणों से संबंधित है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुस्लिम लीग द्वारा मुक्ति दिवस मनाए जाने का मुख्य कारण कांग्रेस के प्रांतीय मंत्रालयों का इस्तीफा देना था। इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
कांग्रेस मंत्रालयों का इस्तीफा: 1939 में जब द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ, तो तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लिनलिथगो ने भारतीय नेताओं से परामर्श किए बिना भारत को युद्ध में शामिल करने की घोषणा कर दी। इसके विरोध में, कांग्रेस ने अपने सभी प्रांतीय मंत्रालयों को इस्तीफा देने का आदेश दिया।
जिन्ना का आह्वान: कांग्रेस के इस कदम को मुहम्मद अली जिन्ना और मुस्लिम लीग ने एक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने 22 दिसंबर, 1939 को 'मुक्ति दिवस' के रूप में मनाने का आह्वान किया। यह दिन कांग्रेस के शासन से 'मुक्ति' का जश्न मनाने के लिए था, जिसे लीग ने मुसलमानों और अन्य अल्पसंख्यकों पर 'अत्याचार' के रूप में चित्रित किया था।
Step 3: Final Answer:
अतः, मुस्लिम लीग ने कांग्रेस मंत्रालयों के इस्तीफे को कांग्रेस के 'कुशासन' से मुक्ति के रूप में मनाने के लिए 'मुक्ति दिवस' मनाया, ताकि कांग्रेस के खिलाफ अपने राजनीतिक एजेंडे को मजबूत किया जा सके।
Quick Tip: 'मुक्ति दिवस' (1939) मुस्लिम लीग की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कार्रवाई थी, जो कांग्रेस के साथ उसके बढ़ते मतभेदों और भारत में सांप्रदायिक राजनीति के तीव्र होने को दर्शाती है।
भारत के विभाजन को प्रेरित करनेवाले दो कारणों को बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1947 में भारत के विभाजन के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारकों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत के विभाजन को प्रेरित करने वाले दो प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति (Divide and Rule Policy): ब्रिटिश सरकार ने भारत पर अपना नियंत्रण बनाए रखने के लिए जानबूझकर हिंदुओं और मुसलमानों के बीच मतभेदों को बढ़ावा दिया। 1905 का बंगाल विभाजन, 1909 में मुस्लिमों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की शुरुआत, और मुस्लिम लीग को प्रोत्साहन देना इसी नीति का हिस्सा थे। इस नीति ने दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और शत्रुता को गहरा किया।
मुस्लिम लीग की द्वि-राष्ट्र सिद्धांत की मांग (Two-Nation Theory): मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने इस विचार का प्रचार किया कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं जिनके हित अलग-अलग हैं और वे एक साथ नहीं रह सकते। 1940 के लाहौर अधिवेशन में, लीग ने औपचारिक रूप से मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र 'पाकिस्तान' की मांग का प्रस्ताव पारित किया। यह मांग विभाजन का सबसे सीधा कारण बनी।
Step 3: Final Answer:
अतः, अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति और मुस्लिम लीग की द्वि-राष्ट्र सिद्धांत पर आधारित पाकिस्तान की मांग, भारत के विभाजन के दो मुख्य कारण थे।
Quick Tip: विभाजन के कारणों का विश्लेषण करते समय, दीर्घकालिक कारकों (जैसे ब्रिटिश नीतियां) और अल्पकालिक कारकों (जैसे कैबिनेट मिशन की विफलता और सीधी कार्रवाई दिवस) दोनों पर विचार करना महत्वपूर्ण है।
भारतीय संविधान की दो प्रमुख विशेषताओं को बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारत के संविधान की अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारतीय संविधान की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
लिखित एवं विश्व का सबसे लंबा संविधान: भारत का संविधान एक लिखित दस्तावेज़ है और यह दुनिया का सबसे लंबा संविधान है। इसमें सरकार की संरचना, शक्तियों और कार्यों के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों और कर्तव्यों का विस्तृत वर्णन है। इसकी विशालता का कारण भारत की भौगोलिक विविधता, ऐतिहासिक कारक और विभिन्न स्रोतों से प्रावधानों को शामिल करना है।
संसदीय सरकार एवं एकात्मकता की ओर झुकाव वाली संघीय व्यवस्था: भारत ने ब्रिटेन के समान सरकार के संसदीय स्वरूप को अपनाया है, जिसमें कार्यपालिका (मंत्रिपरिषद) अपनी नीतियों और कार्यों के लिए विधायिका (संसद) के प्रति उत्तरदायी होती है। साथ ही, यह एक संघीय राज्य है जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों का विभाजन है, लेकिन इसमें एक मजबूत केंद्र सरकार का प्रावधान है, जो इसे एकात्मक प्रणाली की ओर झुकाव देता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, भारतीय संविधान की दो मुख्य विशेषताएँ इसका विश्व का सबसे लंबा लिखित संविधान होना और संसदीय प्रणाली के साथ एक संघीय ढाँचा होना है।
Quick Tip: संविधान की अन्य महत्वपूर्ण विशेषताओं में मौलिक अधिकार, राज्य के नीति निदेशक तत्व, एक धर्मनिरपेक्ष राज्य, स्वतंत्र न्यायपालिका और एकल नागरिकता शामिल हैं।
चॉल इमारतों को समझाइये।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 'चॉल' नामक एक विशिष्ट प्रकार की आवासीय इमारत की व्याख्या करने के लिए कह रहा है, जो विशेष रूप से मुंबई में पाई जाती है।
Step 2: Detailed Explanation:
चॉल बहुमंजिला आवासीय इमारतें हैं जो भारत के पश्चिमी शहरों, विशेषकर मुंबई में पाई जाती हैं। इनकी विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
ऐतिहासिक संदर्भ: चॉलों का निर्माण 19वीं शताब्दी के मध्य में कपड़ा मिलों और कारखानों में काम करने के लिए शहरों में आने वाले प्रवासी श्रमिकों की बड़ी संख्या को आवास प्रदान करने के लिए किया गया था।
वास्तुशिल्प संरचना: एक विशिष्ट चॉल में एक या दो कमरों वाली कई छोटी आवासीय इकाइयाँ (खोली) होती हैं, जो एक लंबे, खुले गलियारे या बालकनी से जुड़ी होती हैं। शौचालय और स्नानघर आमतौर पर साझा होते हैं और प्रत्येक मंजिल पर गलियारे के अंत में स्थित होते हैं।
सामाजिक जीवन: चॉल अपने निवासियों के बीच साझा स्थानों और निकटता के कारण एक मजबूत सामुदायिक भावना और सामाजिक बंधन को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं।
Step 3: Final Answer:
संक्षेप में, चॉल मुंबई जैसे शहरों में मिल मजदूरों के लिए बनाई गई बहुमंजिला इमारतें हैं, जिनकी पहचान साझा गलियारों और सुविधाओं से होती है, और जो एक घनिष्ठ समुदाय की भावना पैदा करती हैं।
Quick Tip: चॉलों को भारत में औद्योगीकरण और शहरीकरण के सामाजिक-आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखें, जो श्रमिक वर्ग के जीवन और संस्कृति को दर्शाते हैं।
1929 ई. में आयोजित कांग्रेस का लाहौर अधिवेशन किन दो कारणों से महत्त्वपूर्ण माना जाता है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक मील का पत्थर माने जाने वाले 1929 के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन के महत्व के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
1929 का लाहौर अधिवेशन, जिसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की, दो मुख्य कारणों से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है:
'पूर्ण स्वराज' की घोषणा: इस अधिवेशन में सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव 'पूर्ण स्वराज' (Complete Independence) का पारित किया गया। कांग्रेस ने पहली बार औपनिवेशिक शासन से पूरी तरह से स्वतंत्रता को अपना अंतिम लक्ष्य घोषित किया, और डोमिनियन स्टेटस की मांग को छोड़ दिया।
26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस मनाने का निर्णय: अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि 26 जनवरी, 1930 को पूरे देश में 'पूर्ण स्वराज दिवस' या प्रथम स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाएगा। लोगों से इस दिन स्वतंत्रता की शपथ लेने का आह्वान किया गया। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में, 26 जनवरी, 1950 को भारतीय संविधान को लागू किया गया।
Step 3: Final Answer:
अतः, 1929 का लाहौर अधिवेशन 'पूर्ण स्वराज' के प्रस्ताव को अपनाने और 26 जनवरी को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने के निर्णय के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्त्वपूर्ण है।
Quick Tip: याद रखें कि 26 जनवरी की तारीख का महत्व 1929 के लाहौर अधिवेशन से ही शुरू हुआ था, यही कारण है कि इसे हमारे गणतंत्र दिवस के रूप में चुना गया।
भारत छोड़ो आंदोलन के दो कारण बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1942 में शुरू हुए भारत छोड़ो आंदोलन के पीछे के प्रमुख कारणों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
भारत छोड़ो आंदोलन के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
क्रिप्स मिशन की विफलता: 1942 में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार ने एक मिशन भारत भेजा, जिसने युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का प्रस्ताव रखा। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने इसे अस्वीकार कर दिया क्योंकि यह तत्काल पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को पूरा नहीं करता था। इस मिशन की विफलता ने भारतीयों में गहरा असंतोष और निराशा पैदा की और यह विश्वास दिलाया कि ब्रिटिश स्वेच्छा से सत्ता नहीं छोड़ेंगे।
जापानी आक्रमण का बढ़ता खतरा: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, जापानी सेना तेजी से दक्षिण-पूर्व एशिया में आगे बढ़ रही थी और भारत की सीमाओं तक पहुँच गई थी। गांधीजी और अन्य नेताओं का मानना था कि भारत में अंग्रेजों की उपस्थिति जापान को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित कर रही है। उन्हें डर था कि भारत ब्रिटेन और जापान के बीच युद्ध का मैदान बन जाएगा। इसलिए, उन्होंने महसूस किया कि भारत की सुरक्षा के लिए अंग्रेजों का तुरंत देश छोड़ना आवश्यक है।
Step 3: Final Answer:
अतः, क्रिप्स मिशन की विफलता और जापानी आक्रमण का बढ़ता खतरा भारत छोड़ो आंदोलन के दो मुख्य कारण थे।
Quick Tip: भारत छोड़ो आंदोलन को 'अगस्त क्रांति' भी कहा जाता है क्योंकि यह 8 अगस्त 1942 को शुरू हुआ था। इसी आंदोलन में गांधीजी ने "करो या मरो" का प्रसिद्ध नारा दिया था।
किन्हीं दो स्मृतियों के नाम लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत के धर्मशास्त्र साहित्य के हिस्से 'स्मृति' ग्रंथों के दो उदाहरण देने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
'स्मृति' हिंदू धर्म के उन ग्रंथों को कहते हैं जो श्रुति (जैसे वेद) पर आधारित हैं और जिनमें सामाजिक आचार-विचार, कानून और नैतिकता का वर्णन होता है। दो प्रमुख स्मृतियाँ निम्नलिखित हैं:
मनुस्मृति: यह सबसे प्राचीन और सबसे प्रसिद्ध स्मृति ग्रंथ है। इसे प्राचीन भारतीय समाज के लिए एक कानूनी और सामाजिक संहिता माना जाता है, जिसमें व्यक्तिगत आचरण से लेकर राजा के कर्तव्यों तक के नियम शामिल हैं।
याज्ञवल्क्य स्मृति: यह एक और महत्वपूर्ण स्मृति ग्रंथ है, जो मनुस्मृति के बाद का माना जाता है। यह अपनी व्यवस्थित संरचना और अधिक उदार दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है, विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों जैसे विषयों पर।
Step 3: Final Answer:
दो प्रमुख स्मृतियाँ हैं: मनुस्मृति और याज्ञवल्क्य स्मृति।
Quick Tip: अन्य प्रसिद्ध स्मृति ग्रंथों में नारद स्मृति और पराशर स्मृति शामिल हैं। स्मृति साहित्य प्राचीन भारतीय समाज और कानून को समझने के लिए महत्वपूर्ण स्रोत है।
मगध साम्राज्य के उत्थान के दो महत्त्वपूर्ण कारण बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन भारत में पहले महान साम्राज्य, मगध के उदय के पीछे के प्रमुख कारकों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
मगध साम्राज्य के उत्थान के दो महत्त्वपूर्ण कारण निम्नलिखित थे:
भौगोलिक और आर्थिक लाभ: मगध गंगा के उपजाऊ मैदान में स्थित था, जिससे कृषि उत्पादन अधिशेष में होता था। इसके अलावा, इस क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क के भंडार (विशेष रूप से छोटानागपुर पठार में) थे, जिससे मजबूत हथियार और उपकरण बनाना संभव हुआ। घने जंगलों से सेना के लिए लकड़ी और हाथी भी उपलब्ध होते थे। इसकी राजधानियाँ, राजगृह (पाँच पहाड़ियों से घिरी) और पाटलिपुत्र (नदियों के संगम पर), रणनीतिक रूप से बहुत सुरक्षित थीं।
शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी शासक: मगध को बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद और बाद में चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे कई शक्तिशाली, कुशल और महत्वाकांक्षी शासकों का नेतृत्व मिला। इन शासकों ने अपनी सैन्य शक्ति, कूटनीतिक कौशल और वैवाहिक गठबंधनों का उपयोग करके मगध साम्राज्य का लगातार विस्तार किया।
Step 3: Final Answer:
अतः, मगध के उत्थान के दो मुख्य कारण उसकी अनुकूल भौगोलिक स्थिति और आर्थिक संसाधन तथा शक्तिशाली शासकों की एक श्रृंखला का होना था।
Quick Tip: किसी भी साम्राज्य के उदय के कारणों का विश्लेषण करते समय, भौगोलिक, आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व जैसे कारकों पर विचार करना एक अच्छा तरीका है।
महात्मा बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति एवं निर्वाण स्थल के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न महात्मा बुद्ध के जीवन की दो सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं - ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण - से जुड़े स्थानों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
महात्मा बुद्ध के जीवन से जुड़े ये दो स्थल निम्नलिखित हैं:
ज्ञान प्राप्ति स्थल: महात्मा बुद्ध को बोधगया (बिहार) में एक पीपल वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इस घटना के बाद वह स्थान बोधगया और वह वृक्ष 'बोधि वृक्ष' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
निर्वाण स्थल: महात्मा बुद्ध का महापरिनिर्वाण (शरीर त्याग) कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। यह बौद्धों के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।
Step 3: Final Answer:
महात्मा बुद्ध का ज्ञान प्राप्ति स्थल बोधगया और निर्वाण स्थल कुशीनगर है।
Quick Tip: बुद्ध के जीवन के चार प्रमुख स्थलों को 'महान घटनाएँ' कहा जाता है: जन्म (लुम्बिनी), ज्ञान प्राप्ति (बोधगया), प्रथम उपदेश (सारनाथ), और महापरिनिर्वाण (कुशीनगर)।
कार्बन-14 विधि क्या है?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न पुरातत्व में उपयोग की जाने वाली एक वैज्ञानिक डेटिंग तकनीक, कार्बन-14 विधि, की व्याख्या करने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
कार्बन-14 (C-14) विधि, जिसे रेडियोकार्बन डेटिंग भी कहा जाता है, पुरातात्विक अवशेषों की आयु निर्धारित करने की एक वैज्ञानिक तकनीक है।
सिद्धांत: यह विधि इस सिद्धांत पर आधारित है कि सभी जीवित प्राणियों (पौधों और जानवरों) में कार्बन का एक स्थिर समस्थानिक (कार्बन-12) और एक रेडियोधर्मी समस्थानिक (कार्बन-14) एक निश्चित अनुपात में मौजूद होता है।
प्रक्रिया: जब कोई जीव मर जाता है, तो वह वायुमंडल से कार्बन लेना बंद कर देता है। इसके बाद, उसके शरीर में मौजूद कार्बन-14 एक ज्ञात और स्थिर दर (अर्ध-आयु लगभग 5,730 वर्ष) से क्षय होने लगता है, जबकि कार्बन-12 स्थिर रहता है।
आयु का निर्धारण: वैज्ञानिक किसी पुराने जैविक अवशेष (जैसे हड्डी, लकड़ी, कोयला) में कार्बन-12 और कार्बन-14 के अनुपात को मापकर यह गणना कर सकते हैं कि उस जीव की मृत्यु कितने समय पहले हुई थी।
Step 3: Final Answer:
संक्षेप में, कार्बन-14 विधि एक ऐसी तकनीक है जो जैविक अवशेषों में कार्बन-14 के क्षय को मापकर उनकी आयु का पता लगाती है।
Quick Tip: याद रखें कि कार्बन-14 विधि केवल जैविक पदार्थों पर काम करती है और लगभग 50,000 वर्ष तक की आयु के नमूनों के लिए ही सटीक है।
विश्व के किन्हीं चार आश्चर्यों के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दुनिया की प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित संरचनाओं, जिन्हें 'विश्व के आश्चर्य' कहा जाता है, में से चार के नाम बताने के लिए कह रहा है। हम यहाँ 'विश्व के सात नए आश्चर्य' की सूची का उपयोग करेंगे।
Step 2: Detailed Explanation:
विश्व के चार प्रसिद्ध आश्चर्य निम्नलिखित हैं:
ताजमहल, भारत: आगरा में स्थित यह शानदार मकबरा मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में बनवाया गया था।
चीन की महान दीवार, चीन: यह किलेबंदी की एक श्रृंखला है जिसे चीनी साम्राज्यों को उत्तरी आक्रमणकारियों से बचाने के लिए बनाया गया था।
कोलोसियम, इटली: रोम के केंद्र में स्थित यह एक विशाल एम्फीथिएटर है जहाँ ग्लेडिएटर प्रतियोगिताएं और सार्वजनिक प्रदर्शन होते थे।
माचू पिच्चू, पेरू: यह एंडीज पहाड़ों में स्थित 15वीं सदी का एक इंका गढ़ है, जो अपनी परिष्कृत पत्थर की संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है।
Step 3: Final Answer:
विश्व के चार आश्चर्य हैं: ताजमहल (भारत), चीन की महान दीवार (चीन), कोलोसियम (इटली), और माचू पिच्चू (पेरू)।
Quick Tip: विश्व के आश्चर्यों की कई सूचियाँ हैं (प्राचीन, मध्ययुगीन, आधुनिक)। 'विश्व के सात नए आश्चर्य' (New7Wonders of the World) सबसे हालिया और लोकप्रिय सूची है।
गुप्त काल के दो प्रसिद्ध मंदिरों के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न गुप्त काल के दौरान निर्मित दो महत्वपूर्ण मंदिरों के उदाहरण देने के लिए कह रहा है, जिसे भारतीय मंदिर वास्तुकला का स्वर्ण युग माना जाता है।
Step 2: Detailed Explanation:
गुप्त काल के दो प्रसिद्ध मंदिर निम्नलिखित हैं:
दशावतार मंदिर, देवगढ़ (उत्तर प्रदेश): यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे भारत में शिखर वाले शुरुआती मंदिरों में से एक माना जाता है। इसकी दीवारों पर रामायण और महाभारत के दृश्यों को दर्शाती शानदार नक्काशी है।
भीतरगाँव मंदिर, कानपुर (उत्तर प्रदेश): यह मंदिर पूरी तरह से पकी हुई ईंटों और टेराकोटा पैनलों से बना है और यह भारत के सबसे पुराने शेष ईंट मंदिरों में से एक है। यह गुप्तकालीन वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
Step 3: Final Answer:
गुप्त काल के दो प्रसिद्ध मंदिर देवगढ़ का दशावतार मंदिर और भीतरगाँव का ईंट मंदिर हैं।
Quick Tip: गुप्त काल वह पहला काल था जब हिंदू मंदिरों का निर्माण पत्थर और ईंट जैसी स्थायी सामग्रियों से बड़े पैमाने पर शुरू हुआ।
किताब-उल-हिन्द की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 11वीं सदी के विद्वान अल-बरूनी द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ 'किताब-उल-हिन्द' की दो मुख्य विशेषताओं के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
'किताब-उल-हिन्द' (भारत की पुस्तक) की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
विस्तृत और व्यापक विषय-वस्तु: यह ग्रंथ 11वीं सदी के भारत पर एक विश्वकोश की तरह है। अल-बरूनी ने इसमें केवल राजनीतिक इतिहास ही नहीं, बल्कि भारतीय धर्म, दर्शन, विज्ञान, गणित, खगोल विज्ञान, रीति-रिवाज, सामाजिक संरचना और कानून जैसे विविध विषयों पर विस्तृत जानकारी दी है।
व्यवस्थित और तुलनात्मक दृष्टिकोण: पुस्तक की संरचना बहुत व्यवस्थित है। इसमें 80 अध्याय हैं, और प्रत्येक अध्याय एक प्रश्न से शुरू होता है, फिर संस्कृत ग्रंथों पर आधारित विवरण दिया जाता है, और अंत में अक्सर भारतीय अवधारणाओं की तुलना यूनानी और इस्लामी विचारों से की जाती है। यह वस्तुनिष्ठ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण इसे अपने समय के अन्य यात्रा वृत्तांतों से अलग करता है।
Step 3: Final Answer:
अतः, किताब-उल-हिन्द की दो विशेषताएँ इसकी व्यापक विषय-वस्तु और इसका व्यवस्थित, तुलनात्मक दृष्टिकोण हैं।
Quick Tip: 'किताब-उल-हिन्द' को केवल एक यात्रा वृत्तांत नहीं, बल्कि मध्यकालीन भारत पर एक अकादमिक और समाजशास्त्रीय अध्ययन के रूप में देखा जाता है।
सहायक संधि से आप क्या समझते हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा भारतीय रियासतों पर अपना प्रभुत्व स्थापित करने के लिए उपयोग की गई एक महत्वपूर्ण नीति, 'सहायक संधि' (Subsidiary Alliance), की व्याख्या करने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
सहायक संधि लॉर्ड वेलेस्ली द्वारा शुरू की गई एक कूटनीतिक नीति थी। यह भारतीय रियासतों और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच एक संधि थी, जिसकी मुख्य शर्तें निम्नलिखित थीं:
भारतीय शासक को अपने राज्य में एक ब्रिटिश सेना की टुकड़ी को स्थायी रूप से रखना होता था और उसके रखरखाव का खर्च (सब्सिडी) भी देना पड़ता था।
शासक को अपने दरबार में एक ब्रिटिश प्रतिनिधि (रेजिडेंट) को रखना पड़ता था।
शासक अंग्रेजों की अनुमति के बिना किसी अन्य यूरोपीय को अपनी सेवा में नहीं रख सकता था।
शासक कंपनी की अनुमति के बिना किसी अन्य भारतीय राज्य के साथ कोई समझौता या युद्ध नहीं कर सकता था।
इसके बदले में, कंपनी उस राज्य को बाहरी आक्रमणों और आंतरिक विद्रोहों से बचाने का वादा करती थी।
Step 3: Final Answer:
संक्षेप में, सहायक संधि एक ऐसी व्यवस्था थी जिसके तहत भारतीय राज्य अपनी स्वतंत्रता और संप्रभुता खोकर ब्रिटिश संरक्षण में आ जाते थे, जिससे भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का अप्रत्यक्ष रूप से विस्तार हुआ।
Quick Tip: सहायक संधि को स्वीकार करने वाली पहली बड़ी रियासत हैदराबाद (1798) थी। यह नीति 1857 के विद्रोह के प्रमुख कारणों में से एक बनी।
प्लासी का युद्ध कब और किसके मध्य हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न भारतीय इतिहास के एक निर्णायक युद्ध, प्लासी के युद्ध, की तिथि और प्रतिभागियों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
प्लासी का युद्ध निम्नलिखित के बीच हुआ:
कब (When): यह युद्ध 23 जून, 1757 को हुआ था।
किसके मध्य (Between): यह युद्ध एक ओर बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और दूसरी ओर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुआ था। कंपनी की सेना का नेतृत्व रॉबर्ट क्लाइव कर रहे थे।
इस युद्ध में नवाब के सेनापति मीर जाफर जैसे प्रमुख अधिकारियों के विश्वासघात के कारण सिराजुद्दौला की हार हुई, जिससे भारत में ब्रिटिश शासन की नींव पड़ी।
Step 3: Final Answer:
प्लासी का युद्ध 23 जून, 1757 को बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और रॉबर्ट क्लाइव के नेतृत्व वाली ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच हुआ था।
Quick Tip: प्लासी के युद्ध को एक वास्तविक लड़ाई से अधिक एक 'षड्यंत्र' माना जाता है, क्योंकि इसका परिणाम युद्ध से पहले ही तय हो चुका था।
आइन-ए-अकबरी के अनुसार भूमि को किन-किन वर्गों में वर्गीकृत किया गया था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न अकबर की राजस्व प्रणाली के तहत भूमि के वर्गीकरण से संबंधित है, जैसा कि अबुल फजल की 'आइन-ए-अकबरी' में वर्णित है।
Step 2: Detailed Explanation:
अकबर की राजस्व प्रणाली, जिसे 'दहसाला' या 'ज़ब्ती' प्रणाली भी कहा जाता है, के तहत भूमि को उसकी उर्वरता और खेती की निरंतरता के आधार पर चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था:
पोलज: यह सर्वोत्तम प्रकार की भूमि थी जिस पर हर साल नियमित रूप से खेती की जाती थी।
परौती: यह वह भूमि थी जिसे अपनी उर्वरता पुनः प्राप्त करने के लिए एक या दो साल के लिए खाली (परती) छोड़ दिया जाता था।
चाचर: यह वह भूमि थी जो तीन या चार साल तक बिना खेती के रहती थी।
बंजर: यह सबसे निम्न गुणवत्ता वाली भूमि थी जिस पर पाँच या अधिक वर्षों से खेती नहीं की गई थी।
Step 3: Final Answer:
आइन-ए-अकबरी के अनुसार भूमि को चार वर्गों में वर्गीकृत किया गया था: पोलज, परौती, चाचर और बंजर।
Quick Tip: यह वर्गीकरण महत्वपूर्ण था क्योंकि प्रत्येक प्रकार की भूमि के लिए भू-राजस्व की दरें अलग-अलग निर्धारित की जाती थीं, जिससे प्रणाली अधिक न्यायसंगत बनती थी।
अकबर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल सम्राट अकबर के जन्म की तिथि और स्थान के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
महान मुगल सम्राट अकबर का जन्म निम्नलिखित समय और स्थान पर हुआ था:
कब (When): 15 अक्टूबर, 1542 को।
कहाँ (Where): उमरकोट (या अमरकोट) के राजपूत किले में, जो वर्तमान में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में है।
उस समय, अकबर के पिता, सम्राट हुमायूँ, शेर शाह सूरी से हारने के बाद निर्वासन में थे और उन्होंने उमरकोट के राणा प्रसाद के यहाँ शरण ली थी।
Step 3: Final Answer:
अकबर का जन्म 15 अक्टूबर, 1542 को उमरकोट (सिंध) में हुआ था।
Quick Tip: अकबर के जन्म का संदर्भ (हुमायूँ का निर्वासन) यह समझने में मदद करता है कि क्यों एक मुगल सम्राट का जन्म एक राजपूत किले में हुआ था।
मुगल दरबार में प्रचलित अभिवादन के दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न मुगल दरबार में सम्राट के प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले औपचारिक शिष्टाचार और अभिवादन के तरीकों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
मुगल दरबार में प्रचलित अभिवादन के दो तरीके निम्नलिखित थे:
कोर्निश (Kornish): यह अभिवादन का एक तरीका था जिसमें दरबारी अपनी दाहिनी हथेली को अपने माथे पर रखकर सिर झुकाता था। यह इस बात का प्रतीक था कि वह अपना सिर (जो मन और इंद्रियों का स्थान है) विनम्रता के हाथ में रखकर शाही सभा में प्रस्तुत कर रहा है।
सिजदा (Sijda): इसमें पूरी तरह से जमीन पर लेटकर सम्राट को दंडवत प्रणाम किया जाता था। हालांकि यह एक इस्लामी प्रथा नहीं थी और इस पर विवाद भी था, लेकिन यह अकबर और शाहजहाँ के दरबारों में कुछ हद तक प्रचलित थी, जो सम्राट की सर्वोच्च स्थिति को दर्शाती थी। बाद में शाहजहाँ ने इसे 'चहार तस्लीम' से बदल दिया।
Step 3: Final Answer:
मुगल दरबार में प्रचलित अभिवादन के दो तरीके कोर्निश और सिजदा थे।
Quick Tip: अन्य अभिवादन विधियों में 'तस्लीम' और 'चहार तस्लीम' भी शामिल थे, जिन्हें शाहजहाँ ने सिजदा के स्थान पर शुरू किया था।
गोपुरम से आप क्या समझते हैं?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला की एक विशिष्ट विशेषता 'गोपुरम' की परिभाषा और महत्व के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
'गोपुरम' दक्षिण भारत में, विशेष रूप से द्रविड़ शैली में बने हिंदू मंदिरों के प्रवेश द्वार पर स्थित एक स्मारकीय और अलंकृत मीनार (टावर) है।
कार्य: यह मंदिर परिसर को घेरने वाली दीवारों में एक प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है।
विशेषताएँ: गोपुरम आमतौर पर आयताकार होते हैं और ऊपर की ओर संकरे होते जाते हैं। इनकी बाहरी सतह पर देवी-देवताओं, पौराणिक कथाओं के दृश्यों की विस्तृत मूर्तियां और नक्काशी होती है।
महत्व: विजयनगर और नायक काल के दौरान, गोपुरम इतने विशाल और भव्य हो गए कि वे अक्सर मंदिर के मुख्य गर्भगृह से भी ऊंचे और अधिक प्रभावशाली दिखने लगे, जो मंदिर की शक्ति और समृद्धि का प्रतीक बन गए।
Step 3: Final Answer:
संक्षेप में, गोपुरम दक्षिण भारतीय मंदिरों का भव्य और अलंकृत प्रवेश द्वार है, जो मंदिर की वास्तुकला का एक प्रमुख तत्व है।
Quick Tip: उत्तर भारत के मंदिरों में शिखर प्रमुख होता है, जबकि दक्षिण भारत के मंदिरों में गोपुरम अक्सर सबसे प्रमुख संरचना होती है।
विजयनगर साम्राज्य पर शासन करनेवाले किन्हीं दो वंशों के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 14वीं से 17वीं शताब्दी तक दक्षिण भारत पर शासन करने वाले विजयनगर साम्राज्य के राजवंशों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
विजयनगर साम्राज्य पर कुल चार राजवंशों ने शासन किया। उनमें से कोई भी दो वंश निम्नलिखित हैं:
संगम वंश (Sangama Dynasty): यह विजयनगर साम्राज्य का संस्थापक वंश था, जिसकी स्थापना 1336 में हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने की थी।
तुलुव वंश (Tuluva Dynasty): यह विजयनगर का सबसे प्रसिद्ध और शक्तिशाली राजवंश था। साम्राज्य के सबसे महान शासक, कृष्णदेवराय, इसी वंश के थे।
Step 3: Final Answer:
विजयनगर साम्राज्य पर शासन करने वाले दो वंश संगम वंश और तुलुव वंश थे।
Quick Tip: विजयनगर के सभी चार राजवंशों को क्रम में याद रखने के लिए एक संक्षिप्त नाम S-S-T-A (संगम, सुलुव, तुलुव, अरविदु) का उपयोग कर सकते हैं।
लिंगायत समुदाय की दो विशेषताएँ बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 12वीं सदी में कर्नाटक में उत्पन्न हुए लिंगायत (या वीरशैव) समुदाय की दो प्रमुख विशेषताओं के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
बसवन्ना द्वारा स्थापित लिंगायत समुदाय की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
इष्टलिंग की पूजा: लिंगायत शिव की पूजा 'इष्टलिंग' के रूप में करते हैं, जो एक छोटा सा लिंग होता है जिसे वे चांदी के डिब्बे में रखकर अपने गले में पहनते हैं। यह ईश्वर के साथ एक व्यक्तिगत और प्रत्यक्ष संबंध का प्रतीक है, जिसमें मंदिर या पुजारियों की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं होती।
जाति व्यवस्था और कर्मकांडों का विरोध: यह एक क्रांतिकारी सामाजिक आंदोलन था जिसने ब्राह्मणवादी जाति व्यवस्था, पुनर्जन्म के सिद्धांत और वैदिक कर्मकांडों का पुरजोर विरोध किया। लिंगायतों ने सामाजिक समानता, महिलाओं की समानता का समर्थन किया और मृतकों को दफनाने की प्रथा अपनाई।
Step 3: Final Answer:
लिंगायत समुदाय की दो विशेषताएँ इष्टलिंग की पूजा और जाति व्यवस्था का विरोध हैं।
Quick Tip: लिंगायत आंदोलन को मध्यकालीन भारत में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार आंदोलन के रूप में देखा जाता है, जिसने पारंपरिक हिंदू मान्यताओं और प्रथाओं को चुनौती दी।
हड़प्पा सभ्यता की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख करें।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन सिंधु घाटी सभ्यता (हड़प्पा सभ्यता) की दो महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
हड़प्पा सभ्यता की दो प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
सुनियोजित नगर नियोजन (Systematic Town Planning): हड़प्पा सभ्यता अपने समय की सबसे उन्नत शहरी संस्कृति थी। शहर एक ग्रिड पैटर्न (सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं) पर बने होते थे। शहरों को दो भागों में विभाजित किया जाता था - एक ऊपरी गढ़ (दुर्ग) और एक निचला शहर। इसके अलावा, यहाँ एक उत्कृष्ट जल निकासी प्रणाली थी, जिसमें घरों से निकलने वाली नालियाँ सड़कों के किनारे बनी ढकी हुई मुख्य नालियों से जुड़ती थीं।
मानकीकृत ईंटें और मुहरें (Standardized Bricks and Seals): पूरी सभ्यता में निर्माण के लिए पकी हुई ईंटों का उपयोग किया जाता था, जिनका आकार एक समान अनुपात (1:2:4) में होता था। एक अन्य विशिष्ट विशेषता सेलखड़ी (steatite) से बनी मुहरें थीं। ये मुहरें अक्सर जानवरों (जैसे एकश्रृंगी) के चित्रों और एक ऐसी लिपि के साथ खुदी होती हैं जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
Step 3: Final Answer:
हड़प्पा सभ्यता की दो मुख्य विशेषताएँ सुनियोजित नगर नियोजन और मानकीकृत ईंटों तथा मुहरों का उपयोग हैं।
Quick Tip: हड़प्पा सभ्यता की अन्य विशेषताओं में विशाल स्नानागार (मोहनजोदड़ो), अन्न भंडार, और लोथल में मिला गोदी बाड़ा (डॉकयार्ड) शामिल हैं।
हड़प्पा सभ्यता के चार प्रमुख नगरों के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े चार महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के नाम बताने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
हड़प्पा सभ्यता के चार प्रमुख नगर निम्नलिखित हैं:
हड़प्पा: यह रावी नदी के तट पर (वर्तमान पाकिस्तान में) स्थित है। यह खोजा जाने वाला पहला स्थल था, जिसके नाम पर इस सभ्यता का नाम पड़ा।
मोहनजोदड़ो: यह सिंधु नदी के तट पर (वर्तमान पाकिस्तान में) स्थित है। इसे 'मृतकों का टीला' भी कहा जाता है और यहाँ विशाल स्नानागार और कांस्य की नर्तकी की मूर्ति मिली है।
धोलावीरा: यह गुजरात (भारत) में स्थित है। यह अपनी अनूठी जल प्रबंधन प्रणाली और तीन भागों में विभाजित नगर योजना के लिए प्रसिद्ध है।
लोथल: यह गुजरात (भारत) में स्थित है। यह एक प्रमुख बंदरगाह शहर था, जहाँ एक विशाल गोदी बाड़ा (डॉकयार्ड) मिला है, जो समुद्री व्यापार का प्रमाण है।
Step 3: Final Answer:
हड़प्पा सभ्यता के चार प्रमुख नगर हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, धोलावीरा और लोथल हैं।
Quick Tip: अन्य महत्वपूर्ण स्थलों में कालीबंगा (राजस्थान), राखीगढ़ी (हरियाणा), और चन्हुदड़ो (पाकिस्तान) शामिल हैं।
पाटलिपुत्र नगर की स्थापना किसने और कब की थी?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न प्राचीन मगध की राजधानी पाटलिपुत्र के संस्थापक और स्थापना काल के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
पाटलिपुत्र नगर की स्थापना निम्नलिखित प्रकार से हुई:
किसने (Who): पाटलिपुत्र की स्थापना हर्यक वंश के शासक अजातशत्रु ने की थी। उन्होंने गंगा नदी के किनारे 'पाटलिग्राम' नामक गाँव में एक किले का निर्माण करवाया था।
कब (When): इसकी स्थापना लगभग 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में हुई थी।
बाद में, अजातशत्रु के उत्तराधिकारी उदायिन ने अपनी राजधानी को राजगृह से पाटलिपुत्र स्थानांतरित कर दिया, जिससे यह मगध साम्राज्य का एक प्रमुख राजनीतिक और आर्थिक केंद्र बन गया।
Step 3: Final Answer:
पाटलिपुत्र की स्थापना 5वीं शताब्दी ईसा पूर्व में अजातशत्रु द्वारा की गई थी और बाद में उदायिन ने इसे अपनी राजधानी बनाया।
Quick Tip: अक्सर उदायिन को पाटलिपुत्र के संस्थापक के रूप में श्रेय दिया जाता है क्योंकि उन्होंने इसे राजधानी बनाया था, लेकिन किले की नींव अजातशत्रु ने रखी थी।
1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभानेवाली दो महिलाओं के नाम लिखिए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1857 के भारतीय विद्रोह में भाग लेने वाली दो प्रमुख महिला नेताओं के नाम बताने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाली दो महिलाएँ निम्नलिखित थीं:
रानी लक्ष्मीबाई: झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई 1857 के विद्रोह की सबसे प्रतिष्ठित और वीर शख्सियतों में से एक थीं। जब अंग्रेजों ने 'व्यपगत के सिद्धांत' के तहत झाँसी पर कब्जा कर लिया, तो उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह का नेतृत्व किया और बहादुरी से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुईं।
बेगम हजरत महल: वह अवध के निर्वासित नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी थीं। जब अंग्रेजों ने अवध पर कब्जा कर लिया, तो उन्होंने लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया। उन्होंने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादर को अवध का नवाब घोषित किया और अंग्रेजों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया।
Step 3: Final Answer:
1857 की क्रांति में प्रमुख भूमिका निभाने वाली दो महिलाएँ रानी लक्ष्मीबाई और बेगम हजरत महल थीं।
Quick Tip: अन्य महत्वपूर्ण महिला विद्रोहियों में अजीजन बाई (कानपुर) और रानी अवंतीबाई (रामगढ़) शामिल थीं।
बिहार में 1857 की क्रांति में भाग लेनेवाले किन्हीं दो के नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न विशेष रूप से बिहार राज्य में 1857 के विद्रोह का नेतृत्व करने वाले दो प्रमुख व्यक्तियों के नाम बताने के लिए कह रहा है।
Step 2: Detailed Explanation:
बिहार में 1857 की क्रांति में भाग लेने वाले दो प्रमुख नेता निम्नलिखित थे:
कुँवर सिंह: वह जगदीशपुर (आरा के पास) के एक बुजुर्ग जमींदार थे। लगभग 80 वर्ष की आयु के बावजूद, वह विद्रोह के सबसे कुशल सैन्य नेताओं में से एक साबित हुए। उन्होंने न केवल बिहार में विद्रोह का नेतृत्व किया, बल्कि रीवा, बांदा और कानपुर में भी विद्रोहियों की मदद की।
अमर सिंह: वह कुँवर सिंह के भाई थे। कुँवर सिंह की मृत्यु के बाद, उन्होंने विद्रोह की कमान संभाली और बिहार में गुरिल्ला युद्ध जारी रखा, जिससे अंग्रेजों को लंबे समय तक परेशानी हुई।
Step 3: Final Answer:
बिहार में 1857 की क्रांति में भाग लेने वाले दो प्रमुख व्यक्ति कुँवर सिंह और अमर सिंह थे।
Quick Tip: कुँवर सिंह को अक्सर 'बिहार का शेर' कहा जाता है और 1857 के विद्रोह में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण क्या था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न 1857 के विद्रोह को भड़काने वाली तत्काल घटना के बारे में है, जिसने पहले से मौजूद असंतोष को एक व्यापक विद्रोह में बदल दिया।
Step 2: Detailed Explanation:
1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण नई एनफील्ड राइफल के कारतूसों की शुरूआत थी।
सिपाहियों के बीच यह अफवाह फैल गई कि इन कारतूसों पर लगी ग्रीस (चर्बी) गाय और सुअर की चर्बी से बनी है।
कारतूस को राइफल में लोड करने से पहले उसे मुँह से काटना पड़ता था।
गाय हिंदुओं के लिए पवित्र है और सुअर मुसलमानों के लिए वर्जित है। इसलिए, हिंदू और मुस्लिम दोनों सिपाहियों ने महसूस किया कि यह उनके धर्म को भ्रष्ट करने का एक जानबूझकर किया गया प्रयास था।
इसने सिपाहियों की धार्मिक भावनाओं को बहुत आहत किया और वे इन कारतूसों का उपयोग करने के खिलाफ हो गए, जिससे बैरकपुर में मंगल पांडे के विद्रोह और बाद में मेरठ में व्यापक विद्रोह की शुरुआत हुई।
Step 3: Final Answer:
अतः, 1857 की क्रांति का तात्कालिक कारण चर्बी वाले कारतूसों का मुद्दा था।
Quick Tip: याद रखें कि तात्कालिक कारण केवल एक चिंगारी थी। विद्रोह के गहरे कारण राजनीतिक (व्यपगत का सिद्धांत), आर्थिक (भारी कराधान) और सामाजिक-धार्मिक (ईसाई मिशनरी गतिविधियाँ) थे।
जैन धर्म में पंच महाव्रत क्या था?
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न जैन धर्म के नैतिक आचार संहिता के मूल, विशेष रूप से जैन भिक्षुओं और भिक्षुणियों द्वारा पालन किए जाने वाले पाँच महान व्रतों के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
जैन धर्म में 'पंच महाव्रत' वे पाँच कठोर व्रत हैं जिनका पालन जैन साधु-संतों को मोक्ष प्राप्ति के लिए करना होता है। ये निम्नलिखित हैं:
अहिंसा (Ahimsa): किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना।
सत्य (Satya): हमेशा सत्य बोलना।
अस्तेय (Asteya): चोरी न करना, अर्थात् किसी की भी कोई वस्तु बिना उसकी अनुमति के न लेना।
ब्रह्मचर्य (Brahmacharya): सभी प्रकार की यौन गतिविधियों और इंद्रिय सुखों का त्याग करना।
अपरिग्रह (Aparigraha): संपत्ति और सांसारिक वस्तुओं का संग्रह न करना और उनसे मोह न रखना।
इनमें से पहले चार व्रत पार्श्वनाथ द्वारा दिए गए थे, और पाँचवाँ व्रत 'ब्रह्मचर्य' महावीर स्वामी द्वारा जोड़ा गया था।
Step 3: Final Answer:
जैन धर्म में पंच महाव्रत अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह हैं।
Quick Tip: गृहस्थों (आम लोगों) के लिए इन व्रतों का एक सरल रूप है जिसे 'पंच अणुव्रत' कहा जाता है, जो कम कठोर होता है।
बुद्ध के संदेश भारत के बाहर किन-किन देशों में फैले? दो नाम बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न बौद्ध धर्म के अंतर्राष्ट्रीय प्रसार के बारे में है, और दो ऐसे देशों के नाम बताने के लिए कह रहा है जहाँ यह धर्म फैला।
Step 2: Detailed Explanation:
बौद्ध धर्म, जिसका उदय भारत में हुआ, दुनिया के प्रमुख धर्मों में से एक बन गया। बुद्ध के संदेश भारत के बाहर कई देशों में फैले, जिनमें से दो प्रमुख देश निम्नलिखित हैं:
श्रीलंका: मौर्य सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के संदेश के साथ श्रीलंका भेजा, जहाँ इसे व्यापक रूप से अपनाया गया और यह आज भी वहाँ का प्रमुख धर्म है।
चीन: बौद्ध धर्म पहली शताब्दी ईस्वी के आसपास रेशम मार्ग के माध्यम से चीन पहुँचा। समय के साथ, यह चीन के सबसे महत्वपूर्ण धर्मों में से एक बन गया और यहीं से यह कोरिया, जापान और वियतनाम जैसे अन्य पूर्वी एशियाई देशों में फैला।
Step 3: Final Answer:
बुद्ध के संदेश भारत के बाहर श्रीलंका और चीन जैसे देशों में फैले।
Quick Tip: अन्य देश जहाँ बौद्ध धर्म का महत्वपूर्ण प्रभाव है, उनमें तिब्बत, थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया और जापान शामिल हैं।
जैन धर्म एवं बौद्ध धर्म में चार समानताओं को बताइए।
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Step 1: Understanding the Concept:
यह प्रश्न छठी शताब्दी ईसा पूर्व में उभरे दो प्रमुख भारतीय धर्मों, जैन धर्म और बौद्ध धर्म, के बीच की समानताओं के बारे में है।
Step 2: Detailed Explanation:
जैन धर्म और बौद्ध धर्म में चार प्रमुख समानताएँ निम्नलिखित हैं:
संस्थापकों की पृष्ठभूमि: दोनों धर्मों के संस्थापक - महावीर स्वामी और गौतम बुद्ध - क्षत्रिय राजकुमार थे और उन्होंने सत्य की खोज में अपने शाही जीवन का त्याग किया था।
वैदिक कर्मकांडों का विरोध: दोनों धर्मों ने तत्कालीन ब्राह्मणवादी हिंदू धर्म में प्रचलित वेदों की सत्ता, जटिल यज्ञों और पशु बलि जैसी प्रथाओं का खंडन किया।
अहिंसा पर जोर: दोनों धर्मों ने 'अहिंसा' या गैर-हिंसा के सिद्धांत पर बहुत जोर दिया। हालांकि, जैन धर्म में अहिंसा का पालन बौद्ध धर्म की तुलना में अधिक कठोरता से किया जाता है।
लोकभाषा का प्रयोग: दोनों ने अपने उपदेश संस्कृत (जो विद्वानों की भाषा थी) के बजाय आम लोगों की भाषा में दिए। महावीर ने प्राकृत और बुद्ध ने पाली का प्रयोग किया, जिससे उनके संदेश जनता तक आसानी से पहुँच सके।
Step 3: Final Answer:
जैन धर्म और बौद्ध धर्म में चार समानताएँ हैं: क्षत्रिय संस्थापक, वैदिक कर्मकांडों का विरोध, अहिंसा पर जोर, और लोकभाषा का प्रयोग।
Quick Tip: समानताओं के अलावा, असमानताओं को भी याद रखना महत्वपूर्ण है, जैसे आत्मा की अवधारणा (जैन धर्म हर वस्तु में आत्मा मानता है, बौद्ध धर्म अनात्मवाद का समर्थन करता है) और अहिंसा की कठोरता।
हड़प्पा सभ्यता की धार्मिक एवं सामाजिक स्थिति की विवेचना कीजिए।
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चूँकि हड़प्पा लिपि को पढ़ा नहीं जा सका है, उनकी सामाजिक और धार्मिक स्थिति का ज्ञान पूरी तरह से पुरातात्विक साक्ष्यों पर आधारित है।
सामाजिक स्थिति (Social Condition):
समाज की संरचना: समाज संभवतः विभिन्न वर्गों में विभाजित था, जिसमें शासक वर्ग (जो दुर्ग में रहते थे), धनी व्यापारी, कारीगर और मजदूर शामिल थे।
आहार: हड़प्पा के लोग शाकाहारी और मांसाहारी दोनों थे। वे गेहूं, जौ, चावल, दालें और फलों का सेवन करते थे, और भेड़, बकरी, मछली जैसे जानवरों का मांस भी खाते थे।
वस्त्र एवं आभूषण: वे सूती और ऊनी वस्त्रों का प्रयोग करते थे। स्त्री और पुरुष दोनों ही आभूषणों के शौकीन थे, जिनमें हार, कंगन और अंगूठियाँ शामिल थीं, जो सोने, चांदी, कीमती पत्थरों और मिट्टी से बने होते थे।
मनोरंजन: पासा खेलना उनके मनोरंजन का प्रमुख साधन था। बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने, गाड़ियाँ और सीटियाँ मिली हैं।
अंत्येष्टि संस्कार: हड़प्पा के लोग मृतकों को दफनाते थे। कब्रों में मृतकों के साथ मिट्टी के बर्तन, आभूषण और अन्य वस्तुएं भी रखी जाती थीं, जो उनके पारलौकिक जीवन में विश्वास को दर्शाता है।
धार्मिक स्थिति (Religious Condition):
मातृदेवी की पूजा: बड़ी संख्या में मिली नारी-मूर्तियों से अनुमान लगाया जाता है कि मातृदेवी या उर्वरता की देवी की पूजा प्रमुख थी।
पशुपति शिव की पूजा: मोहनजोदड़ो से प्राप्त एक मुहर पर एक त्रिमुखी, योगी की मुद्रा में बैठे पुरुष देवता का चित्रण है, जो जानवरों से घिरे हैं। इसे 'पशुपति' या 'आद्य-शिव' माना गया है।
प्रकृति पूजा: वे प्रकृति के विभिन्न रूपों की भी पूजा करते थे, जैसे वृक्ष (विशेषकर पीपल), जल और जानवर (विशेषकर एकश्रृंगी और कूबड़ वाला बैल)।
अग्नि पूजा: कालीबंगा और लोथल जैसे स्थलों से अग्नि वेदिकाएं मिली हैं, जो अग्नि पूजा या यज्ञ के प्रचलन का संकेत देती हैं।
मंदिरों का अभाव: हड़प्पा स्थलों पर मंदिरों जैसे कोई निश्चित पूजा स्थल नहीं मिले हैं। पूजा संभवतः व्यक्तिगत या सामुदायिक स्तर पर खुले में की जाती थी। Quick Tip: उत्तर लिखते समय, हमेशा यह उल्लेख करें कि हड़प्पा सभ्यता के बारे में हमारी समझ पुरातात्विक स्रोतों जैसे मुहरों, मूर्तियों, बर्तनों और इमारतों पर आधारित है, क्योंकि उनकी लिपि अभी तक रहस्य बनी हुई है।
मगध साम्राज्य के उत्थान के क्या कारण थे?
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मगध साम्राज्य के उत्थान के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
अनुकूल भौगोलिक स्थिति: मगध की दोनों राजधानियाँ, राजगृह (जो पाँच पहाड़ियों से घिरी थी) और पाटलिपुत्र (जो गंगा, सोन और गंडक नदियों के संगम पर स्थित थी), रणनीतिक रूप से बहुत सुरक्षित थीं।
आर्थिक समृद्धि:
उपजाऊ भूमि: गंगा के मैदान में स्थित होने के कारण यहाँ की भूमि बहुत उपजाऊ थी, जिससे कृषि अधिशेष होता था और राज्य को नियमित राजस्व मिलता था।
खनिज संसाधन: दक्षिणी बिहार (अब झारखंड) के छोटानागपुर पठार क्षेत्र में प्रचुर मात्रा में लौह अयस्क के भंडार थे, जिससे मजबूत हथियार और कृषि उपकरण बनाना संभव हुआ।
सैन्य शक्ति: मगध के पास एक विशाल और संगठित सेना थी। घने जंगलों से लकड़ी और बड़ी संख्या में हाथी प्राप्त होते थे, जिन्हें सेना में इस्तेमाल किया जाता था और जो किलों को तोड़ने में बहुत प्रभावी थे।
शक्तिशाली शासक: मगध को बिंबिसार, अजातशत्रु, महापद्म नंद और चंद्रगुप्त मौर्य जैसे कई महत्वाकांक्षी और योग्य शासकों का नेतृत्व मिला, जिन्होंने अपनी कूटनीतिक और सैन्य नीतियों से साम्राज्य का लगातार विस्तार किया। Quick Tip: किसी भी साम्राज्य के उत्थान का विश्लेषण करते समय, हमेशा भौगोलिक, आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक कारकों को ध्यान में रखें। मगध के मामले में, ये सभी कारक उसके पक्ष में थे।
बौद्ध धर्म के पतन के कारणों का उल्लेख कीजिए।
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भारत में बौद्ध धर्म के पतन के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
संघ में भ्रष्टाचार और विभाजन: समय के साथ, बौद्ध मठ (संघ) धनी हो गए और भिक्षुओं का जीवन विलासितापूर्ण हो गया, जिससे नैतिक पतन हुआ। बौद्ध धर्म हीनयान, महायान और वज्रयान जैसी शाखाओं में विभाजित हो गया, जिससे इसकी मूल एकता समाप्त हो गई।
राजकीय संरक्षण का अभाव: अशोक और कनिष्क जैसे शासकों के बाद, बौद्ध धर्म को मिलने वाला राजकीय संरक्षण कम हो गया। गुप्त शासक वैष्णव धर्म के अनुयायी थे और उन्होंने हिंदू धर्म को अधिक संरक्षण दिया।
ब्राह्मणवाद या हिंदू धर्म का पुनरुत्थान: शंकराचार्य जैसे हिंदू सुधारकों ने बौद्ध दर्शन को शास्त्रार्थ में चुनौती दी और हिंदू धर्म का पुनरुत्थान किया। हिंदू धर्म ने बुद्ध को विष्णु का अवतार मानकर बौद्ध धर्म की कई अच्छी बातों को आत्मसात कर लिया, जिससे बौद्ध धर्म का अलग आकर्षण कम हो गया।
लोकभाषा का त्याग: शुरुआत में बुद्ध ने पाली भाषा (आम लोगों की भाषा) में उपदेश दिए, लेकिन बाद में बौद्ध विद्वानों ने संस्कृत को अपना लिया, जिससे यह धर्म आम जनता से दूर हो गया।
विदेशी आक्रमण: हूणों और बाद में तुर्की आक्रमणकारियों ने नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध बौद्ध मठों और विश्वविद्यालयों को नष्ट कर दिया, जिससे बौद्ध धर्म को भारी क्षति पहुँची। Quick Tip: बौद्ध धर्म का पतन अचानक नहीं हुआ, बल्कि यह एक लंबी और क्रमिक प्रक्रिया थी जो कई शताब्दियों तक चली।
मुगल कालीन भू-राजस्व व्यवस्था पर प्रकाश डालिए।
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मुगलकालीन भू-राजस्व व्यवस्था, जिसे अकबर के काल में व्यवस्थित रूप दिया गया, बहुत सुसंगठित थी। इसकी मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित थीं:
भूमि की पैमाइश (Measurement of Land): सबसे पहले, कृषि योग्य भूमि की सही-सही पैमाइश की जाती थी। अकबर ने इसके लिए बांस से बनी 'जरीब' का प्रयोग शुरू करवाया, जो रस्सी की जरीब से अधिक सटीक थी।
भूमि का वर्गीकरण (Classification of Land): भूमि को उसकी उर्वरता के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया था:
पोलज: जिस पर हर साल खेती होती थी।
परौती: जिसे एक या दो साल के लिए परती छोड़ा जाता था।
चाचर: जिसे तीन या चार साल के लिए परती छोड़ा जाता था।
बंजर: जिस पर पाँच या अधिक वर्षों से खेती नहीं हुई थी।
राजस्व का निर्धारण (Fixation of Revenue):
अकबर ने दहसाला प्रणाली (या ज़ब्ती प्रणाली) लागू की, जिसे राजा टोडरमल ने विकसित किया था।
इस प्रणाली के तहत, प्रत्येक फसल के लिए पिछले दस वर्षों के औसत उत्पादन और औसत मूल्य की गणना की जाती थी।
इस औसत का एक-तिहाई (1/3) हिस्सा भू-राजस्व के रूप में निर्धारित किया जाता था।
राजस्व की वसूली (Collection of Revenue): राजस्व नकद या फसल के रूप में चुकाया जा सकता था, लेकिन राज्य नकद वसूली को प्राथमिकता देता था। राजस्व वसूली के लिए 'अमलगुजार' जैसे अधिकारी नियुक्त किए जाते थे। Quick Tip: यह व्यवस्था मुख्य रूप से शेरशाह सूरी द्वारा शुरू किए गए सुधारों पर आधारित थी, जिसे अकबर ने राजा टोडरमल की मदद से और अधिक परिष्कृत और व्यापक बनाया।
अकबर की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
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अकबर की उपलब्धियों को विभिन्न क्षेत्रों में वर्गीकृत किया जा सकता है:
साम्राज्य का विस्तार और एकीकरण: अकबर एक महान विजेता था। उसने पानीपत की दूसरी लड़ाई (1556) में हेमू को हराकर मुगल सत्ता को फिर से स्थापित किया। उसने मालवा, गुजरात, बंगाल, काबुल, कश्मीर और दक्कन के कुछ हिस्सों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की।
प्रशासनिक सुधार:
मनसबदारी प्रणाली: उसने सेना और नागरिक प्रशासन को एकीकृत करने के लिए मनसबदारी प्रणाली शुरू की, जो साम्राज्य की रीढ़ बनी।
केंद्रीकृत प्रशासन: उसने एक मजबूत केंद्रीय सरकार की स्थापना की जिसमें विभिन्न विभागों के लिए मंत्री (जैसे दीवान, मीर बख्शी) होते थे।
राजस्व सुधार: उसने राजा टोडरमल की सहायता से 'दहसाला प्रणाली' लागू की, जो एक कुशल और न्यायसंगत भू-राजस्व व्यवस्था थी।
धार्मिक सहिष्णुता और सुलह-ए-कुल की नीति:
उसने 1563 में तीर्थयात्रा कर और 1564 में जजिया कर समाप्त कर दिया।
उसने फतेहपुर सीकरी में 'इबादत खाना' (प्रार्थना गृह) की स्थापना की, जहाँ वह सभी धर्मों के विद्वानों के साथ चर्चा करता था।
उसने 'सुलह-ए-कुल' (सार्वभौमिक शांति) के सिद्धांत का प्रचार किया और 1582 में 'दीन-ए-इलाही' नामक एक समधर्मी नैतिक संहिता की शुरुआत की।
कला और वास्तुकला को संरक्षण: उसने फतेहपुर सीकरी जैसी पूरी राजधानी का निर्माण करवाया, जिसमें बुलंद दरवाजा और पंच महल जैसी इमारतें शामिल हैं। उसने आगरा और लाहौर में किलों का निर्माण करवाया। वह साहित्य और चित्रकला का भी महान संरक्षक था। Quick Tip: अकबर की महानता इस तथ्य में निहित है कि उसने एक ऐसे साम्राज्य का निर्माण किया जो केवल सैन्य शक्ति पर नहीं, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और धर्मों के लोगों के सहयोग और सम्मान पर आधारित था।
स्थायी बन्दोबस्त पर एक लघु निबन्ध लिखें।
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परिचय:
स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement) एक भू-राजस्व व्यवस्था थी जिसे लॉर्ड कॉर्नवॉलिस ने 1793 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य ईस्ट इंडिया कंपनी के लिए एक निश्चित और स्थिर आय सुनिश्चित करना था।
प्रमुख विशेषताएँ:
ज़मींदारों को भूमि का स्वामी बनाना: इस प्रणाली के तहत, ज़मींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी मान लिया गया।
स्थायी राजस्व: ज़मींदारों द्वारा कंपनी को चुकाया जाने वाला भू-राजस्व स्थायी रूप से निश्चित कर दिया गया, जिसे भविष्य में बढ़ाया नहीं जा सकता था।
सूर्यास्त कानून (Sunset Law): यदि कोई ज़मींदार निश्चित तिथि के सूर्यास्त तक राजस्व नहीं चुका पाता था, तो उसकी ज़मींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
प्रभाव:
कंपनी पर प्रभाव: कंपनी को एक निश्चित और नियमित आय प्राप्त होने लगी, जिससे उसका वित्तीय आधार मजबूत हुआ।
ज़मींदारों पर प्रभाव: इस व्यवस्था ने ज़मींदारों का एक ऐसा वर्ग तैयार किया जो अंग्रेजों का वफादार बन गया। हालाँकि, शुरुआत में अत्यधिक उच्च राजस्व दर और सूर्यास्त कानून के कारण कई पुराने ज़मींदारों को अपनी ज़मीनें गँवानी पड़ीं।
किसानों पर प्रभाव: इस व्यवस्था का सबसे बुरा प्रभाव किसानों पर पड़ा। उन्हें ज़मींदारों की दया पर छोड़ दिया गया, जिन्होंने उनसे मनमाना लगान वसूला। किसानों के भूमि पर पारंपरिक अधिकार छीन लिए गए और वे केवल किरायेदार बनकर रह गए।
निष्कर्ष:
यद्यपि स्थायी बंदोबस्त ने कंपनी के वित्तीय हितों को पूरा किया और एक वफादार ज़मींदार वर्ग बनाया, लेकिन इसने किसानों का अत्यधिक शोषण किया और ग्रामीण समाज में असमानता को गहरा किया।
Quick Tip: स्थायी बंदोबस्त को उसके तीन मुख्य घटकों के संदर्भ में याद रखें: लॉर्ड कॉर्नवॉलिस (प्रवर्तक), ज़मींदार (मध्यस्थ), और किसान (पीड़ित)।
क्रिप्स मिशन की असफलता के कारणों की व्याख्या कीजिए।
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मार्च 1942 में सर स्टैफोर्ड क्रिप्स के नेतृत्व में क्रिप्स मिशन भारत आया। इसका उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीयों का सहयोग प्राप्त करना था। इसकी असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
तत्काल स्वतंत्रता का अभाव: मिशन ने युद्ध के बाद भारत को डोमिनियन स्टेटस देने का प्रस्ताव दिया, न कि तत्काल पूर्ण स्वतंत्रता का। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि 1929 के लाहौर अधिवेशन में ही 'पूर्ण स्वराज' को अपना लक्ष्य घोषित कर चुकी थी।
विभाजन की संभावना: मिशन के प्रस्ताव में यह प्रावधान था कि जो प्रांत भारतीय संघ में शामिल नहीं होना चाहते, वे अपना अलग संविधान बना सकते हैं। कांग्रेस ने इसे भारत के विभाजन की दिशा में एक कदम के रूप में देखा और इसका कड़ा विरोध किया।
मुस्लिम लीग की असंतुष्टि: मुस्लिम लीग ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया क्योंकि इसमें स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के निर्माण की मांग को स्वीकार नहीं किया गया था। वह आत्म-निर्णय के अधिकार के बजाय एक निश्चित विभाजन चाहती थी।
रियासतों के प्रतिनिधियों का मुद्दा: मिशन ने प्रस्ताव दिया कि रियासतों के प्रतिनिधि संविधान सभा के लिए जनता द्वारा नहीं, बल्कि शासकों द्वारा मनोनीत किए जाएंगे। यह अलोकतांत्रिक था और कांग्रेस को स्वीकार्य नहीं था।
वास्तविक शक्ति हस्तांतरण का अभाव: मिशन ने तत्काल रक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर कोई भी वास्तविक शक्ति भारतीयों को हस्तांतरित करने से इनकार कर दिया।
इन्हीं कारणों से, भारत की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों ने क्रिप्स मिशन के प्रस्तावों को अस्वीकार कर दिया। गांधीजी ने इसे "एक दिवालिया बैंक के नाम भविष्य की तारीख का चेक" (a post-dated cheque on a crashing bank) कहकर इसकी आलोचना की।
Quick Tip: क्रिप्स मिशन की विफलता एक महत्वपूर्ण मोड़ थी। इसने भारतीय नेताओं को विश्वास दिलाया कि ब्रिटिश सरकार स्वेच्छा से भारत नहीं छोड़ेगी, जिसके परिणामस्वरूप अगस्त 1942 में 'भारत छोड़ो आंदोलन' शुरू हुआ।
भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी कारणों का वर्णन करें।
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भारत के विभाजन के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारण निम्नलिखित थे:
अंग्रेजों की 'फूट डालो और राज करो' की नीति: यह विभाजन का सबसे महत्वपूर्ण दीर्घकालिक कारण था। 1857 के विद्रोह के बाद, अंग्रेजों ने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच मतभेदों को जानबूझकर बढ़ावा दिया। 1909 में मुस्लिमों के लिए अलग निर्वाचक मंडल की शुरुआत ने सांप्रदायिक राजनीति को संस्थागत बना दिया।
मुस्लिम लीग और द्वि-राष्ट्र सिद्धांत: मुहम्मद अली जिन्ना के नेतृत्व में मुस्लिम लीग ने इस विचार को आक्रामक रूप से बढ़ावा दिया कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र हैं। 1940 में लीग के लाहौर अधिवेशन में 'पाकिस्तान' की मांग का प्रस्ताव पारित होने के बाद, यह उनका एकमात्र एजेंडा बन गया।
कांग्रेस की विफलताएँ: कुछ हद तक, कांग्रेस मुस्लिम अल्पसंख्यकों के डर को दूर करने और उन्हें अपने साथ बनाए रखने में विफल रही। 1937 में संयुक्त प्रांत में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार करने जैसे फैसलों ने अलगाव की भावना को और बढ़ाया।
कैबिनेट मिशन (1946) की विफलता: यह भारत को एकजुट रखने का अंतिम गंभीर प्रयास था। इसकी विफलता ने विभाजन को लगभग अनिवार्य बना दिया।
सांप्रदायिक दंगे और सीधी कार्रवाई: कैबिनेट मिशन की विफलता के बाद, मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त, 1946 को 'सीधी कार्रवाई दिवस' का आह्वान किया, जिसके कारण भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए। इस हिंसा ने कई नेताओं को यह विश्वास दिलाया कि विभाजन ही गृहयुद्ध को रोकने का एकमात्र रास्ता है।
माउंटबेटन की भूमिका और सत्ता हस्तांतरण की शीघ्रता: अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि एक संयुक्त भारत को बनाए रखना असंभव है और उन्होंने 'माउंटबेटन योजना' के माध्यम से विभाजन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया। Quick Tip: विभाजन के कारणों का उत्तर देते समय, दीर्घकालिक ऐतिहासिक प्रक्रियाओं (जैसे ब्रिटिश नीतियां) और तात्कालिक घटनाओं (जैसे सीधी कार्रवाई) दोनों को शामिल करना महत्वपूर्ण है ताकि एक संतुलित दृष्टिकोण प्रस्तुत किया जा सके।





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