Bihar Board Class 12 Biology Question Paper 2023 PDF is available for download here. The Biology (Elective) exam was conducted on February 3, 2023 in the Evening Shift from 9:30 AM to 12:45 PM. The total marks for the theory paper are 100. Students reported the paper to be easy to moderate.
Bihar Board Class 12 Biology Question Paper 2023 with Solutions
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कीट द्वारा पुष्प परागण की अनुकूलता का अध्ययन कर लिखें।
Study and write about the flowers adapted to pollination by insects.
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Step 1: परिचय.
कीट द्वारा परागण (Entomophily) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें फूलों का पराग कीटों (जैसे मधुमक्खी, तितली, भृंग, मक्खी आदि) द्वारा स्त्रीकेसर तक पहुँचाया जाता है। यह परागण का सबसे सामान्य प्रकार है और पुष्पों में विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं।
Step 2: पुष्पों की प्रमुख अनुकूलताएँ.
1. रंग और आकार: फूल प्रायः बड़े, रंगीन और आकर्षक होते हैं ताकि कीट आसानी से आकर्षित हों।
2. सुगंध: कई फूल सुगंध छोड़ते हैं जो परागण करने वाले कीटों को आकर्षित करती है।
3. मधु (Nectar): फूलों में मधुरस (nectar) उत्पन्न होता है, जो कीटों का मुख्य आहार है।
4. परागकण की विशेषता: परागकण चिपचिपे या काँटेदार होते हैं ताकि कीट के शरीर से चिपककर दूसरे फूल तक पहुँच सकें।
5. समयबद्धता: फूल अक्सर दिन में खुलते हैं जब कीट सक्रिय रहते हैं।
Step 3: उदाहरण.
- सूरजमुखी (Helianthus)
- गुलाब (Rosa)
- आम (Mangifera indica)
- सरसों (Brassica)
Step 4: निष्कर्ष.
कीट परागण पौधों और कीटों के बीच सहजीवी संबंध (mutualism) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। पौधों को परागण और प्रजनन का लाभ मिलता है जबकि कीटों को मधु और परागकण भोजन के रूप में प्राप्त होते हैं।
Quick Tip: Entomophilous flowers में चमकीला रंग, सुगंध और मधु प्रमुख अनुकूलन होते हैं।
दिए गए पुष्प (A) का विच्छेदन करें तथा प्रजनन अंगों का नामांकित चित्र की सहायता से वर्णन करें।
Dissect the given flower (A) and describe the reproductive parts with the help of a well labelled diagram.
(A) → सूर्यमुखी (Sunflower) अथवा गुड़हल (China rose)
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Step 1: परिचय.
फूल पौधों का प्रजनन अंग है। इसमें नर प्रजनन अंग (पुंकेसर – Androecium) और मादा प्रजनन अंग (स्त्रीकेसर – Gynoecium) पाए जाते हैं। यहाँ हम गुड़हल (China rose) और सूर्यमुखी (Sunflower) दोनों के संदर्भ में अध्ययन करेंगे।
Step 2: गुड़हल (China rose).
- इसमें नग्नबीजी पौधों की तरह उभयलिंगी पुष्प होते हैं।
- पुंकेसर (Androecium): अनेक पुंकेसर एकत्र होकर स्तंभनुमा संरचना बनाते हैं।
- स्त्रीकेसर (Gynoecium): अंडाशय बहुखंडी होता है और शीर्ष पर पाँच शाखाओं वाला वर्तिकाग्र (stigma) होता है।
Step 3: सूर्यमुखी (Sunflower).
- यह एक संयुक्त पुष्पक्रम (inflorescence) है, जिसमें असंख्य छोटे-छोटे पुष्प (florets) होते हैं।
- पुंकेसर: प्रत्येक पुष्प में 5 पुंकेसर होते हैं, जो आपस में जुड़कर नलिका बनाते हैं।
- स्त्रीकेसर: अंडाशय अधःस्थ होता है और इसमें एक बीजांड (ovule) पाया जाता है।
Step 4: नामांकित चित्र.
\[ \]
\[ \]
(नोट: Overleaf में सही ढंग से चित्र दिखाने के लिए “china_rose_flower.png” और “sunflower_floret.png” नाम से चित्र अपलोड करने होंगे।)
Step 5: निष्कर्ष.
गुड़हल और सूर्यमुखी दोनों के पुष्प प्रजनन के लिए अनुकूलित हैं, जिनमें नर और मादा अंग स्पष्ट रूप से पाए जाते हैं। ये पौधों की यौन प्रजनन प्रक्रिया के लिए आवश्यक हैं।
Quick Tip: China rose = एकल पुष्प का उदाहरण, Sunflower = संयुक्त पुष्पक्रम का उदाहरण।
दिए गए स्थायी स्लाइड (B) का अध्ययन करें तथा सुस्पष्ट वर्णन करें।
(B) → मेढ़क के गैस्ट्रूला का अनुप्रस्थ काट (T.S. of Gastrula of Frog)
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Step 1: परिचय.
गैस्ट्रूला भ्रूणीय विकास का एक महत्त्वपूर्ण चरण है जिसमें तीन जर्म परतें — एक्टोडर्म (Ectoderm), मेसोडर्म (Mesoderm) और एंडोडर्म (Endoderm) — स्पष्ट रूप से बन जाती हैं।
Step 2: संरचना.
- Ectoderm: भ्रूण की बाहरी परत, जो तंत्रिका तंत्र और त्वचा का निर्माण करती है।
- Mesoderm: मध्य परत, जो मांसपेशियों, हड्डियों और परिसंचरण तंत्र को जन्म देती है।
- Endoderm: आंतरिक परत, जो पाचन तंत्र और श्वसन तंत्र की आंतरिक परतों का निर्माण करती है।
- Archenteron cavity: आद्यांत्र (primitive gut) जो बाद में पाचन तंत्र बनेगा।
- Blastopore: भ्रूण के पिछले भाग में छिद्र, जो भ्रूणीय धुरी (axis) बनाने में सहायक होता है।
Step 3: नामांकित चित्र.
\[ \]
(नोट: Overleaf में सही ढंग से चित्र प्रदर्शित करने के लिए “frog_gastrula_TS.png” नामक फ़ाइल अपलोड करनी होगी।)
Step 4: निष्कर्ष.
मेढ़क का गैस्ट्रूला भ्रूणीय विकास की आधारभूत अवस्था है। इसमें तीनों जर्म परतें बनकर भ्रूण के सभी अंगों की नींव रखती हैं।
Quick Tip: गैस्ट्रूलेशन = एक परत वाले भ्रूण (Blastula) से तीन परतों वाले भ्रूण (Gastrula) में परिवर्तन।
खरगोश के ब्लास्टुला का अनुप्रस्थ काट (T.S. of Blastula of Rabbit)
T.S. of Blastula of Rabbit
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Step 1: परिचय.
ब्लास्टुला भ्रूणीय विकास का एक प्रारंभिक चरण है, जो क्लिवेज (Cleavage) के बाद बनता है। इसमें एक गुहा होती है जिसे ब्लास्टोसील (Blastocoel) कहा जाता है। खरगोश के ब्लास्टुला का अध्ययन उच्च स्तरीय भ्रूणीय विकास को समझने के लिए महत्त्वपूर्ण है।
Step 2: संरचना.
- Trophoblast: बाहरी परत की कोशिकाएँ, जो बाद में भ्रूण झिल्ली (extra-embryonic membranes) बनाती हैं।
- Inner cell mass (ICM): कोशिकाओं का एक समूह, जो भ्रूण का वास्तविक भाग बनता है।
- Blastocoel cavity: तरल से भरी केंद्रीय गुहा।
- Zona pellucida: बाहरी पारदर्शी परत, जो भ्रूण को सुरक्षा प्रदान करती है।
Step 3: नामांकित चित्र.
\[ \]
(नोट: Overleaf में सही ढंग से चित्र प्रदर्शित करने के लिए “rabbit_blastula_TS.png” नामक फ़ाइल अपलोड करनी होगी।)
Step 4: निष्कर्ष.
खरगोश का ब्लास्टुला बहुकोशिकीय भ्रूण की वह अवस्था है जिसमें भ्रूण के वास्तविक शरीर की नींव Inner cell mass से रखी जाती है, जबकि Trophoblast भ्रूण को सहायक संरचनाएँ प्रदान करता है।
Quick Tip: Blastula = Cleavage के बाद की अवस्था, Gastrula = आगे बनने वाली तीन जर्म परतों वाली अवस्था।
दिए गए संग्रहालय नमूना (C) के मरुस्थलीय अनुकूलन का वर्णन करें।
(C) → विशधर सर्प (Rattle snake) अथवा रेगिस्तानी छिपकली (Desert lizard)
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Step 1: परिचय.
मरुस्थलीय (Xerophytic) अनुकूलन वे विशेषताएँ हैं जिनसे जीव कम पानी और अत्यधिक गर्मी वाली परिस्थितियों में जीवित रह सकते हैं। रैटल स्नेक और रेगिस्तानी छिपकली दोनों ही शुष्क वातावरण के अनुकूलित जीव हैं।
Step 2: रैटल स्नेक (Rattle Snake) के अनुकूलन.
- इसका शरीर शुष्क वातावरण में जल की हानि को रोकने के लिए मोटी और केराटिनयुक्त चमड़ी से ढका होता है।
- यह दिन की अधिक गर्मी से बचने के लिए प्रायः रात (nocturnal) में सक्रिय रहता है।
- चूहों और छोटे स्तनधारियों का आहार बनाकर यह रेगिस्तान के खाद्य-जाल को संतुलित करता है।
- शरीर की आकृति लंबी और शुष्क रेत पर रेंगने के अनुकूल होती है।
Step 3: रेगिस्तानी छिपकली (Desert Lizard) के अनुकूलन.
- इनकी त्वचा मोटी, सूखी और केराटिनयुक्त होती है जिससे जल की हानि नहीं होती।
- धूप की तीव्रता से बचने के लिए ये रेत में बिल बना लेती हैं।
- आहार के रूप में ये कीटभक्षी होती हैं और पानी की कमी को चयापचय (metabolism) से प्राप्त करती हैं।
- शरीर का रंग अक्सर रेत जैसा (भूरा या हल्का पीला) होता है, जो छद्मावरण (camouflage) प्रदान करता है।
Step 4: निष्कर्ष.
रैटल स्नेक और रेगिस्तानी छिपकली दोनों ही मरुस्थल में जीवित रहने के लिए विशेष शारीरिक एवं व्यवहारिक अनुकूलन दिखाते हैं। ये अनुकूलन इन्हें कठोर जलवायु, जल की कमी और गर्मी में जीवन संभव बनाने में सहायक होते हैं।
Quick Tip: Xerophytic adaptation में सबसे महत्त्वपूर्ण हैं – मोटी त्वचा, जल की बचत, छद्मावरण, और रात में सक्रिय रहना।
दिए गए पादप नमूना (C) के जलीय अनुकूलन का सचित्र वर्णन करें।
(C) → जलकुंभी (Eichhornia) अथवा हाइड्रिला (Hydrilla)
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Step 1: परिचय.
जलजीव पौधे (Hydrophytes) वे पौधे हैं जो जल में या अत्यधिक आर्द्र वातावरण में पनपते हैं। इनमें जल के अनुरूप विशेष प्रकार की शारीरिक एवं संरचनात्मक अनुकूलताएँ पाई जाती हैं। उदाहरण – Eichhornia (जलकुंभी, free-floating hydrophyte) और Hydrilla (submerged hydrophyte)।
Step 2: जलकुंभी (Eichhornia) के अनुकूलन.
- पत्तियाँ चौड़ी, पतली और चिकनी होती हैं।
- पर्ण-डंठल में एरेनकाइमा ऊतक (aerenchyma tissue) होता है, जिससे यह जल पर तैर सकती है।
- जड़ें अविकसित होती हैं और मुख्यतः पौधे को सहारा देती हैं।
- वाष्पोत्सर्जन दर अधिक होने के कारण इसमें बड़े आकार के रंध्र (stomata) होते हैं।
Step 3: हाइड्रिला (Hydrilla) के अनुकूलन.
- यह पूर्णत: डूबा हुआ पौधा है।
- पत्तियाँ लंबी और संकरी होती हैं ताकि जल का प्रतिरोध कम हो।
- मोटी क्यूटिकल अनुपस्थित होती है, क्योंकि जल का अवशोषण पूरे शरीर से होता है।
- सहायक एरेनकाइमा ऊतक तैरने और गैसों के आदान-प्रदान में मदद करता है।
Step 4: नामांकित चित्र.
\[ \]
\[ \]
(नोट: Overleaf में इन चित्रों को दिखाने के लिए “eichhornia_diagram.png” और “hydrilla_diagram.png” फ़ाइल अपलोड करनी होगी।)
Step 5: निष्कर्ष.
जलकुंभी और हाइड्रिला दोनों में जलीय जीवन के लिए विशेष अनुकूलन पाए जाते हैं। जलकुंभी जल पर तैरने वाला पौधा है जबकि हाइड्रिला जल के अंदर डूबकर पनपने वाला पौधा है।
Quick Tip: Hydrophytes में Aerenchyma ऊतक, पतली क्यूटिकल और अविकसित जड़ें जलजीवन के प्रमुख अनुकूलन हैं।
दिए गए रासायनिक घोल (D) में उपयुक्त जैव-रासायनिक परीक्षण द्वारा कार्बोहाइड्रेट की उपस्थिति की जाँच करें।
(D) → सुक्रोज का घोल (Sucrose solution) अथवा ग्लूकोज का घोल (Glucose solution)
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Step 1: परिचय.
कार्बोहाइड्रेट्स की पहचान के लिए विभिन्न जैव-रासायनिक परीक्षण प्रयोग किए जाते हैं। ग्लूकोज जैसे मोनोसैकराइड और सुक्रोज जैसे डाइसेकराइड इन परीक्षणों द्वारा पहचाने जा सकते हैं।
Step 2: उपयोग किए जाने वाले परीक्षण.
1. Fehling’s Test (for Glucose):
- Fehling’s solution A और B मिलाकर घोल में डालते हैं।
- गर्म करने पर लाल या ईंट रंग का अवक्षेप (Cu\(_2\)O) बनता है।
- यह Reducing sugar (जैसे Glucose) की उपस्थिति दर्शाता है।
2. Benedict’s Test (for Glucose):
- Glucose घोल में Benedict’s reagent डालकर गर्म किया जाता है।
- नारंगी/लाल अवक्षेप प्राप्त होता है।
3. Barfoed’s Test (to distinguish Monosaccharide & Disaccharide):
- Monosaccharide (Glucose) तेजी से प्रतिक्रिया करता है और लाल अवक्षेप देता है।
- Disaccharide (Sucrose) धीरे-धीरे या अम्लीय हाइड्रोलिसिस के बाद प्रतिक्रिया करता है।
4. Molisch’s Test (General test for Carbohydrates):
- किसी भी कार्बोहाइड्रेट घोल में α-naphthol और सांद्र H\(_2\)SO\(_4\) डालने पर बैंगनी वलय (violet ring) बनता है।
- यह सभी कार्बोहाइड्रेट्स के लिए सामान्य परीक्षण है।
Step 3: निष्कर्ष.
- यदि Glucose घोल है → Fehling’s या Benedict’s परीक्षण से लाल अवक्षेप मिलेगा।
- यदि Sucrose घोल है → हाइड्रोलिसिस के बाद (Glucose + Fructose में टूटने पर) उपर्युक्त परीक्षण सकारात्मक होंगे।
Quick Tip: Molisch’s test = Universal test for Carbohydrates, Fehling’s/Benedict’s test = केवल Reducing sugars (जैसे Glucose) के लिए।
दी गई सामग्री (E) में नमी की मात्रा तथा pH ज्ञात करें।
(E) \(\rightarrow\) खेत की मिट्टी (Field soil)
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Part–A: नमी (Moisture Content) का निर्धारण
Step 1: उपकरण व सामग्री.
एल्युमिनियम/पोर्सिलेन डिब्बी, ओवन (\(105\pm2^{\circ}\)C), डेसिकेटर, वेटिंग बैलेंस।
Step 2: प्रक्रिया.
(1) खाली डिब्बी का वज़न लें = \(W_c\) (g).
(2) गीली मिट्टी डालकर कुल वज़न लें = \(W_{cw}\) (g).
(3) डिब्बी को ओवन में \(105^{\circ}\)C पर 18–24 घंटे सुखाएँ; डेसिकेटर में ठंडा कर सूखी मिट्टी सहित वज़न लें = \(W_{cd}\) (g).
Step 3: गणना.
गीली मिट्टी का वज़न: \(W_w = W_{cw} - W_c\)
सूखी मिट्टी का वज़न: \(W_d = W_{cd} - W_c\)
नमी की मात्रा (dry basis)\,: \[ %\ Moisture = \frac{W_w - W_d}{W_d}\times 100 \]
(यदि wet basis चाहिए तो: \(\frac{W_w - W_d{W_w}\times100\))
Step 4: रिपोर्ट.
नमी \(\approx \boxed{\,__%\,}\) (सूखी मिट्टी के आधार पर).
Part–B: pH का निर्धारण (soil–water suspension)
Step 1: उपकरण व सामग्री.
pH मीटर/पीएच पेपर, डिस्टिल्ड वाटर, बीकर, ग्लास रॉड, फिल्टर/डिकैंटर, बफर सोल्यूशन (pH 4.0, 7.0, 9.2).
Step 2: प्रक्रिया (pH मीटर से).
(1) कैलिब्रेशन: pH 7.0, फिर 4.0/9.2 बफर से मीटर कैलिब्रेट करें।
(2) सस्पेंशन बनाना: हवा-सूखी, 2\,mm चालनी से छनी मिट्टी लें। मिट्टी:पानी = \(1:2.5\) (या \(1:5\)) अनुपात में मिलाएँ; 30 मिनट हिलाएँ, 10–15 मिनट ठहराएँ।
(3) इलेक्ट्रोड को सुपरनेटन्ट में डुबोकर pH पढ़ें।
Step 3: रिपोर्ट.
मिट्टी का pH (1:2.5 suspension) \(\approx \boxed{\,.......\,}\).
(pH \(<7\) = अम्लीय, \(=7\) = उदासीनी, \(>7\) = क्षारीय)
Quick Tip: Moisture के लिए \textbf{\(105^{\circ\)C ओवन} मानक है और मान प्रायः % (dry basis) में रिपोर्ट किया जाता है; soil pH के लिए \textbf{1:2.5} या \textbf{1:5} मिट्टी:पानी सस्पेंशन आम मानक हैं—मीटर को हर बार बफर से \textbf{कैलिब्रेट} ज़रूर करें।
दिए गए मिट्टी के नमूनें \(E_1\) तथा \(E_2\) में जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity, WHC) की तुलना करें।
\(E_1\) = गमले की मिट्टी (Pot soil), \quad \(E_2\) = मैदान की मिट्टी (Field soil)
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Step 1: सिद्धांत (Principle).
जल धारण क्षमता वह अधिकतम जल प्रतिशत है जिसे मिट्टी गुरुत्वाकर्षण के विरुद्ध अपने रोमछिद्रों में रोक कर रख सकती है, जब मुक्त जल निकल चुका हो।
Step 2: आवश्यक सामग्री.
फनल \& फिल्टर पेपर/जालीदार कपड़ा, 100\,mL मापक सिलिंडर, बीकर, ओवन (\(105^\circ\)C), विश्लेषण तुला, रबर-बैंड/क्लिप।
Step 3: प्रक्रिया (प्रत्येक नमूने के लिए अलग-अलग).
(1) हवा-सूखी और 2\,mm चालनी से छनी मिट्टी लें।
(2) तौले हुए फिल्टर पेपर/कपड़े (\(W_f\)) को फनल पर रखें। 20–25\,g मिट्टी जोड़ें; कुल वज़न = \(W_{1}\) (फिल्टर+गीली मिट्टी)।
(3) धीरे-धीरे डिस्टिल्ड जल डालें जब तक मिट्टी पूर्णतः संतृप्त न हो जाए और नीचे से टपकना बंद हो जाए (लगभग 30–60 मिनट बाद)।
(4) संतृप्त नमूने का वज़न लें = \(W_{s}\) (फिल्टर सहित)।
(5) अब नमूने को \(105^{\circ}\)C ओवन में 18–24 घंटे सुखाएँ; डेसिकेटर में ठंडा कर वज़न लें = \(W_{d}\).
Step 4: गणना.
सूखी मिट्टी का वास्तविक वज़न: \(W_{soil} = W_{d} - W_{f}\)
संतृप्त मिट्टी में जल का वज़न: \(W_{water} = (W_{s} - W_{f}) - W_{soil}\)
\[ %\ WHC = \frac{W_{water}}{W_{soil}} \times 100 \]
इसी प्रकार \(E_1\) और \(E_2\) की WHC निकालें।
Step 5: सारणी/रिपोर्ट टेम्पलेट.
\begin{tabular{|c|c|c|c|c|
\hline
Sample & \(W_{soil}\) (g) & \(W_{water}\) (g) & %WHC & Remark
\hline \(E_1\) (Pot soil) & \phantom{00 & \phantom{00 & \phantom{00 &
\hline \(E_2\) (Field soil) & \phantom{00 & \phantom{00 & \phantom{00 &
\hline
\end{tabular
Step 6: निष्कर्ष (Comparison).
जिस नमूने की %WHC अधिक होगी, वह सूक्ष्म कणिकाओं (silt/clay), जैविक पदार्थ और अच्छी संरचना वाला होगा। प्रायः गमले की मिट्टी (यदि उसमें कम्पोस्ट/पीट मिला हो) की WHC, मैदान की सामान्य मिट्टी से अधिक पाई जाती है; परंतु यह वास्तविक डेटा पर निर्भर करेगा—तालिका में प्राप्त मानों के आधार पर निष्कर्ष लिखें।
Quick Tip: WHC बढ़ती है: \textbf{क्ले \& जैविक पदार्थ} से; घटती है: \textbf{रेतीले कणों} से। तुलना करते समय दोनों नमूनों के लिए \textbf{समान द्रव्यमान} और \textbf{एक जैसी संतृप्ति अवधि} रखें।
संग्रहालय नमूना: हाइड्रा / एस्केरिस लुम्ब्रिकोइडिस (Hydra / Ascaris lumbricoides)
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A. Hydra (Hydra viridissima):
- यह एक मीठे जल का निडेरियन (Cnidaria) जीव है।
- शरीर लंबवत बेलनाकार, जिसमें टेंटाकल्स पाए जाते हैं।
- कोशिका स्तर पर संगठन होता है और इसमें निडोसाइट्स (stinging cells) होते हैं जो रक्षा और आहार पकड़ने में सहायक हैं।
- Hydra अलैंगिक (कलिकाजनन) तथा लैंगिक दोनों प्रकार से प्रजनन करता है।
- यह पुनर्जीवन (regeneration) की क्षमता के लिए प्रसिद्ध है।
B. Ascaris lumbricoides (Roundworm):
- यह परजीवी कृमि है जो मानव की आंत में रहता है।
- इसका शरीर लंबा, बेलनाकार, सिरों पर पतला और क्यूटिकल से ढका होता है।
- नर और मादा अलग-अलग (Dioecious) होते हैं; नर छोटा और पीछे की ओर मुड़ा हुआ होता है।
- Ascaris मनुष्यों में Ascariasis नामक रोग उत्पन्न करता है।
- संक्रमण गंदे भोजन और पानी के द्वारा फैलता है।
Step 3: निष्कर्ष.
Hydra जलचर, स्वतंत्र और पुनर्जीवन क्षमता युक्त जीव है जबकि Ascaris आंतरिक परजीवी है और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। संग्रहालय में इनके नमूने शिक्षा और अनुसंधान दोनों के लिए महत्त्वपूर्ण हैं।
Quick Tip: Hydra = Freshwater, regeneration क्षमता वाला जीव। Ascaris = मानव आंत का परजीवी कृमि, रोगजनक।
मॉडल/चार्ट: मेंढक का परिवहन तंत्र अथवा तिलचट्टे के तंत्रिका तंत्र का अध्ययन करें।
Model/Chart: Study the circulatory system of Frog OR nervous system of Cockroach.
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A. मेंढक का परिवहन तंत्र (Circulatory System of Frog):
- मेंढक का रक्त परिवहन तंत्र बंद (Closed) और द्वि-परिसंचारी (Double circulation) होता है।
- हृदय तीन कक्षीय (3-chambered) होता है: 2 अलिंद (atria) और 1 निलय (ventricle)।
- शिरा-कोष्ठ (sinus venosus) और धमनी-कोष्ठ (conus arteriosus) भी उपस्थित रहते हैं।
- रक्त परिसंचरण के दो प्रकार:
1. Pulmonary circulation – हृदय से फेफड़ों तक और पुनः हृदय में।
2. Systemic circulation – हृदय से शरीर के विभिन्न अंगों तक और पुनः हृदय में।
- मेंढक के रक्त में RBC, WBC और Plasma पाए जाते हैं।
निष्कर्ष: मेंढक का रक्त परिसंचरण मानव के अपूर्ण द्वि-परिसंचरण के समान है।
B. तिलचट्टे का तंत्रिका तंत्र (Nervous System of Cockroach):
- तंत्रिका तंत्र अत्यधिक विकसित और खंडित (Segmented) होता है।
- इसमें 3 प्रमुख भाग होते हैं:
1. Central Nervous System (CNS): इसमें सुप्राएसोफेजियल गैंग्लियन (brain), सब-एसोफेजियल गैंग्लियन और 3 वक्षीय एवं 6 उदर गैंग्लिया पाए जाते हैं।
2. Peripheral Nervous System (PNS): गैंग्लिया से निकलने वाली नसें शरीर के विभिन्न अंगों तक जाती हैं।
3. Sympathetic Nervous System: आंतरिक अंगों (visceral organs) को नियंत्रित करता है।
- Cockroach का मस्तिष्क अपेक्षाकृत छोटा होता है, परंतु वक्षीय गैंग्लिया अत्यधिक विकसित रहते हैं जो इसके चलन-फिरन को नियंत्रित करते हैं।
निष्कर्ष: तिलचट्टे का तंत्रिका तंत्र गैंग्लियाई प्रकार का होता है और इसमें वक्षीय गैंग्लिया का विशेष महत्व है।
Quick Tip: मेंढक = 3-कक्षीय हृदय, Double circulation। तिलचट्टा = गैंग्लियाई तंत्रिका तंत्र, वक्षीय गैंग्लिया का प्रभुत्व।
स्थायी स्लाइड: समसूत्री कोशिका विभाजन का Metaphase अथवा अर्द्धसूत्री कोशिका विभाजन-I की Zygotene अवस्था।
Permanent Slide: Metaphase of Mitotic cell division OR Zygotene stage of Meiosis-I cell division.
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A. Mitotic Metaphase (माइटोटिक विभाजन का मेटाफेज):
- यह समसूत्री विभाजन की दूसरी अवस्था है।
- गुणसूत्र (Chromosomes) सबसे अधिक संक्षिप्त और स्पष्ट होते हैं।
- सभी गुणसूत्र Equatorial plate (मध्य रेखा) पर एक पंक्ति में सज जाते हैं।
- प्रत्येक गुणसूत्र का centromere स्पिंडल रेशों (spindle fibers) से जुड़ा होता है।
- यह अवस्था गुणसूत्र संख्या गिनने और क्यारियोटाइप अध्ययन के लिए आदर्श मानी जाती है।
निष्कर्ष: मेटाफेज कोशिका विभाजन का सबसे पहचान योग्य चरण है जिसमें गुणसूत्रों का समान वितरण सुनिश्चित होता है।
B. Meiosis-I (Prophase-I) का Zygotene stage:
- यह Prophase-I की दूसरी उपावस्था है।
- इसमें Synapsis की प्रक्रिया होती है जिसमें समानान्तर गुणसूत्र (homologous chromosomes) आपस में जुड़ते हैं।
- जुड़ाव विशेष संरचना Synaptonemal complex द्वारा होता है।
- इस अवस्था में Bivalents या tetrads बनने की शुरुआत होती है।
- Crossing over अभी नहीं होती, वह अगली अवस्था (Pachytene) में होती है।
निष्कर्ष: Zygotene stage में homologous chromosomes का जोड़ा बनना meiosis की विशिष्ट विशेषता है।
Quick Tip: Mitotic Metaphase = Chromosomes equatorial plate पर। Meiotic Zygotene = Homologous chromosomes का synapsis और bivalent का निर्माण।
जंतुओं के समरूप अंगों (Analogous organs) का अध्ययन कर टिप्पणी लिखें।
Study and comment on analogous organs of animals.
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Step 1: परिभाषा.
Analogous अंग वे अंग होते हैं जिनका कार्य समान होता है, परंतु उनकी आंतरिक संरचना और उत्पत्ति (origin) भिन्न होती है। यह समानांतर विकास (convergent evolution) का परिणाम है।
Step 2: उदाहरण.
1. पक्षियों का पंख (Feathered wing of bird) और कीट का पंख (Membranous wing of insect) – दोनों उड़ान के लिए प्रयोग होते हैं, लेकिन संरचना व उत्पत्ति अलग है।
2. मछली का पंख और व्हेल का पंख (flipper) – दोनों तैरने के लिए, परंतु अस्थि संरचना अलग।
3. ऑक्टोपस की आंख और मानव की आंख – दृष्टि का कार्य समान, परंतु विकासीय स्रोत अलग।
Step 3: निष्कर्ष.
Analogous organs का अध्ययन यह सिद्ध करता है कि समान पर्यावरणीय दबाव (environmental pressure) के कारण विभिन्न जीवों में समान कार्यात्मक अंग विकसित हो जाते हैं।
Quick Tip: Homologous organs = समान उत्पत्ति, भिन्न कार्य। Analogous organs = भिन्न उत्पत्ति, समान कार्य।
पादप नमूना: कमल (Lotus) अथवा अमरबेल (Cuscuta)
Plant specimen: Lotus OR Cuscuta.
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A. Lotus (कमल):
- Lotus एक जलवासी (aquatic) पौधा है।
- इसकी जड़ें मिट्टी में जमी रहती हैं, जबकि पत्तियाँ जल सतह पर तैरती हैं।
- पत्तियों पर मोमी परत (waxy coating) होती है जो जलरोधी होती है।
- पुष्प बड़े और आकर्षक होते हैं, परागण में कीटों की भूमिका होती है।
- यह पौधा Hydrophyte के रूप में अनुकूलित है।
B. Cuscuta (अमरबेल):
- Cuscuta एक परजीवी (parasitic) पौधा है।
- इसमें हरितलवक (chlorophyll) अनुपस्थित होता है, इसलिए यह स्वपोषी नहीं है।
- पोषण के लिए यह मेजबान पौधों की तनों पर haustoria (शोषक मूल) के माध्यम से निर्भर करता है।
- यह पीले रंग की पतली, तंतु जैसी लताएँ होती हैं।
- इसका प्रजनन बीज और लताओं के द्वारा होता है।
Step 3: निष्कर्ष.
Lotus = एक जलवासी स्वपोषी पौधा।
Cuscuta = पूर्णतः परजीवी और परपोषी पौधा।
Quick Tip: Lotus = Hydrophyte adaptation. Cuscuta = Total stem parasite without chlorophyll.
पुष्पक्रम (Inflorescence): गुलमोहर अथवा धनिया अथवा तुलसी
Inflorescence: Gulmohar OR Coriander OR Tulsi
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A. Gulmohar (Delonix regia):
- Gulmohar का पुष्पक्रम corymbose raceme प्रकार का होता है।
- इसमें मुख्य अक्ष छोटी और पार्श्व अक्ष लम्बी होती है, जिससे सभी पुष्प लगभग एक स्तर पर दिखाई देते हैं।
- पुष्प द्विलिंगी (bisexual) एवं कीटपरागण (entomophilous) होते हैं।
B. Coriander (Coriandrum sativum):
- Coriander का पुष्पक्रम compound umbel होता है।
- इसमें मुख्य अक्ष से कई द्वितीयक छत्र (umbellets) निकलते हैं।
- प्रत्येक छत्रक (umbellet) में छोटे, श्वेत या गुलाबी फूल होते हैं।
C. Tulsi (Ocimum sanctum):
- Tulsi का पुष्पक्रम verticillaster होता है।
- यह पुष्पक्रम द्विदलिकायुक्त पौधों (Lamiaceae family) की विशिष्टता है।
- फूल छोटे, द्विलिंगी और मकरंद युक्त होते हैं।
निष्कर्ष: तीनों पौधों के पुष्पक्रम की संरचना अलग-अलग है: Gulmohar (corymbose raceme), Coriander (compound umbel), Tulsi (verticillaster)।
Quick Tip: Inflorescence का प्रकार पौधे की पहचान और वर्गीकरण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
फल (Fruits): सेव अथवा नारंगी
Fruits: Apple OR Orange
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A. Apple (सेब):
- Apple एक false fruit (असत्य फल) है।
- यह inferior ovary से विकसित होता है।
- इसमें पुष्पासन (thalamus) भी फल निर्माण में भाग लेता है।
- यह pome type fruit है।
B. Orange (नारंगी):
- Orange एक true fruit (सत्य फल) है।
- यह superior ovary से विकसित होता है।
- यह hesperidium type fruit है, जिसमें रसयुक्त थैलियाँ (juice sacs) पाई जाती हैं।
- छिलका (epicarp) सुगंधित तेल ग्रंथियों से युक्त होता है।
निष्कर्ष: Apple = False fruit (pome), Orange = True fruit (hesperidium)।
Quick Tip: False fruit = जब फल के निर्माण में अंडाशय के अलावा पुष्प के अन्य भाग भी सम्मिलित हों (जैसे Apple)। True fruit = केवल अंडाशय से विकसित (जैसे Orange)।
बीज (Seed): चावल अथवा मटर अथवा मसूर
Seed: Rice OR Pea OR Lentil
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A. Rice (चावल):
- Rice का बीज single cotyledon युक्त (Monocot seed) होता है।
- इसमें बीजावरण (seed coat) और फलावरण (pericarp) जुड़े रहते हैं।
- भ्रूण (embryo) में एक cotyledon (scutellum) होता है।
- Plumule (shoot apex) और radicle (root apex) को coleoptile और coleorhiza ढकते हैं।
- इसमें endosperm उपस्थित रहता है, जो पोषण का कार्य करता है।
B. Pea (मटर):
- Pea का बीज dicotyledonous seed है।
- इसमें दो cotyledons होते हैं, जो भ्रूण को पोषण प्रदान करते हैं।
- बीज में endosperm अनुपस्थित (non-endospermic) होता है।
- Plumule और radicle भ्रूणीय अक्ष से जुड़े रहते हैं।
C. Lentil (मसूर):
- Lentil का बीज भी dicotyledonous प्रकार का होता है।
- दो cotyledons मोटे और पोषण युक्त होते हैं।
- यह भी non-endospermic seed है।
- बीजावरण (testa) पतला और कठोर होता है।
Step 3: निष्कर्ष.
- Rice = Monocot, endospermic seed।
- Pea = Dicot, non-endospermic seed।
- Lentil = Dicot, non-endospermic seed।
Quick Tip: Monocot seeds (जैसे Rice) में एक cotyledon और endosperm होता है। Dicot seeds (जैसे Pea, Lentil) में दो cotyledons होते हैं और प्रायः non-endospermic होते हैं।





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