CBSE is conducting the Class 10 Hindi Course A Board Exam 2026 on March 2, 2026. Class 10 Hindi Course A Question Paper with Solution PDF is available here for download.
The official question paper of CBSE Class 10 Hindi Course A Board Exam 2026 is provided below. Students can download the official paper in PDF format for reference.
CBSE Class 10 2026 Hindi Course A Question Paper with Solution PDF
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निम्नलिखित अपठित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए।
आदमी हो, स्नेह-बाती बन नया दीपक जलाना।
दर्द की परछाइयों के दानवी बंधन हटाना।
छटपटाती ज़िंदगी को चेतना संगीत देना।
विश्व को नवपंथ देना; हारते को जीत देना।
आदमी हो, बुझ रहे ईमान को विश्वास देना।
मुस्कुराकर वाटिका में मधुभरा मधुमास देना।
शूल के बदले जगत को फूल की सौगात देना।
जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना।
आदमी हो, डूबते मँझधार में पतवार देना।
थक चला विश्वास साथी, आस्था आधार देना।
क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना।
फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना।
आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना।
कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना।
मेटना मजबूरियों को; दीन को आधार देना।
खाइयों को पाटना; बिछुड़े दिलों को जोड़ देना।
1(i).
काव्यांश में 'आदमी हो' की पुनरावृत्ति क्यों की गई है? इस प्रश्न के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. मानवोचित काम करने का आग्रह करने के लिए
II. पिछड़े हुए व्यक्तियों को नवशक्ति देने के लिए
III. रूढ़ियों को तोड़ देने के लिए
IV. आदमी होने की याद दिलाने के लिए
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Step 1: Understanding the Question: \
प्रश्न में यह जानना है कि कविता में ‘आदमी हो’ वाक्यांश को बार-बार दोहराने का उद्देश्य क्या है। दिए गए कथनों में से सही कारणों का चयन करना है। \
Step 2: Detailed Explanation: \
काव्यांश का अवलोकन करने पर स्पष्ट होता है:
कथन I (मानवोचित कार्य करने की प्रेरणा): कविता की पंक्तियाँ जैसे ‘नया दीपक जलाना’, ‘हारते को जीत देना’, ‘दीन को आधार देना’ मनुष्य को सद्कार्य और मानवीय व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं। अतः यह सही है। \
कथन II (पिछड़े लोगों को नई शक्ति देना): कविता में स्पष्ट रूप से कहा गया है — “जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना।” इसलिए यह कथन भी सही है। \
कथन III (रूढ़ियों का विरोध): “फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना” पंक्ति सीधे तौर पर पुरानी रूढ़ियों को तोड़ने का संदेश देती है। इसलिए यह भी सही है। \
कथन IV (मनुष्य को उसकी पहचान याद दिलाना): ‘आदमी हो’ की पुनरावृत्ति का मुख्य उद्देश्य मनुष्य को उसके असली धर्म, यानी मानवता, की याद दिलाना है। यह बाकी सभी भावों का सार प्रस्तुत करता है। अतः यह भी सही है। \
चूँकि सभी चारों कथन कविता के संदेश को सही रूप में व्यक्त करते हैं, इसलिए सभी सही हैं। \
Step 3: Final Answer: \
सभी कथन (I, II, III, और IV) ‘आदमी हो’ की पुनरावृत्ति के उद्देश्य को स्पष्ट करते हैं। अतः विकल्प (D) सही उत्तर है। \ Quick Tip: जब किसी कविता में कोई पंक्ति बार-बार दोहराई जाती है, तो उसका उद्देश्य उस भाव को विशेष रूप से उभारना होता है। यहाँ ‘आदमी हो’ की पुनरावृत्ति मानवता के कर्तव्य पर बल देती है। \
'शूल के बदले फूल देना' का आशय है :
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में 'शूल के बदले फूल देना' इस मुहावरेदार पंक्ति का अर्थ पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
'शूल' का शाब्दिक अर्थ 'काँटा' है, जो यहाँ दुःख, कष्ट और पीड़ा का प्रतीक है।
'फूल' का शाब्दिक अर्थ 'पुष्प' है, जो यहाँ सुख, प्रसन्नता और प्रेम का प्रतीक है।
इसलिए 'शूल के बदले फूल देना' का भावार्थ है किसी को दुःख देने के स्थान पर सुख देना, अर्थात् कष्ट के बदले आनंद प्रदान करना।
अन्य विकल्प (A) और (B) कविता में वर्णित अन्य मानवीय कर्तव्य हैं, परंतु वे इस पंक्ति के सटीक अर्थ को व्यक्त नहीं करते। विकल्प (D) अत्यधिक सामान्य है।
Step 3: Final Answer:
इस पंक्ति का सर्वाधिक उपयुक्त अर्थ 'दुःखों के बदले सुख देना' है। अतः विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: कविता में प्रयुक्त प्रतीकों को समझना आवश्यक है। 'शूल' नकारात्मक भावों (दुःख) का तथा 'फूल' सकारात्मक भावों (सुख) का संकेत करता है।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना।
कारण : जीवन में किसी भी कारण से पिछड़ा व्यक्ति हताश हो जाता है।
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Step 1: Understanding the Question:
हमें दिए गए कथन (Assertion) और कारण (Reason) का विश्लेषण करके यह निर्धारित करना है कि दोनों के बीच क्या संबंध है।
Step 2: Detailed Explanation:
कथन का मूल्यांकन: “जो पिछड़ता हो उसे नवशक्ति देना, साथ देना।” यह पंक्ति काव्यांश से ली गई है और कवि के मूल संदेश को व्यक्त करती है। अतः कथन सही है।
कारण का मूल्यांकन: “जीवन में किसी भी कारण से पिछड़ा व्यक्ति हताश हो जाता है।” यह एक सामान्य मनोवैज्ञानिक तथ्य है कि पीछे रह जाने पर व्यक्ति निराश या हतोत्साहित हो सकता है। इसलिए कारण भी सही है।
संबंध का मूल्यांकन: अब संबंध देखें — कथन कहता है कि पिछड़े व्यक्ति को शक्ति और सहयोग देना चाहिए। कारण बताता है कि ऐसा व्यक्ति हताश हो जाता है। अर्थात्, उसकी हताशा ही उसे सहारे और नई शक्ति की आवश्यकता बनाती है। इसलिए कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सत्य हैं, तथा कारण कथन की उचित व्याख्या करता है। अतः विकल्प (C) सही उत्तर है।
Quick Tip: कथन-कारण प्रश्नों में पहले दोनों की सत्यता अलग-अलग जाँचें, फिर देखें कि क्या कारण तार्किक रूप से कथन को समझाता है। यदि हाँ, तो कारण सही व्याख्या माना जाता है।
काव्यांश के अनुसार रूढ़ियों और क्रांति में मानव क्या परिवर्तन ला सकता है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में यह जानना है कि कविता के अनुसार मनुष्य रूढ़ियों और क्रांति के संदर्भ में किस प्रकार परिवर्तन ला सकता है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की निम्न पंक्तियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं:
"क्रांति का संदेश देकर राह युग की मोड़ देना।
फिर नया मानव बनाना, रूढ़ियों को तोड़ देना।"
इनसे स्पष्ट होता है कि:
क्रांति के माध्यम से बदलाव: मनुष्य क्रांतिकारी विचारों का प्रसार करके समय की दिशा बदल सकता है, अर्थात् समाज में व्यापक परिवर्तन ला सकता है।
रूढ़ियों का अंत: मनुष्य पुरानी और अव्यवहारिक रूढ़ियों को समाप्त कर एक नए, जागरूक और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकता है।
Step 3: Final Answer:
इस प्रकार, मनुष्य क्रांति के माध्यम से युग की दिशा बदल सकता है तथा रूढ़ियों को तोड़कर नए समाज की स्थापना कर सकता है।
Quick Tip: लघु उत्तरीय प्रश्नों में कविता की मुख्य पंक्तियों को पहचानें और उनका सार अपने शब्दों में लिखें। मुख्य शब्दों (जैसे 'क्रांति', 'रूढ़ि') पर विशेष ध्यान दें।
आदमी होने के नाते द्वेष करने वालों के प्रति क्या कर्त्तव्य होने चाहिए?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न यह जानना चाहता है कि कविता के अनुसार जो लोग हमसे द्वेष या घृणा रखते हैं, उनके प्रति एक मनुष्य का क्या व्यवहार होना चाहिए।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की अंतिम पंक्तियाँ इस प्रश्न का स्पष्ट उत्तर देती हैं:
"आदमी हो, द्वेष के तूफ़ान को हँसकर मिटाना।
कंठ-भर विषपान करना, किंतु सबको प्यार देना।"
इनका आशय है:
द्वेष का शांतिपूर्ण उत्तर: घृणा का प्रत्युत्तर घृणा से नहीं, बल्कि धैर्य और मधुरता से देना चाहिए। मुस्कान और सकारात्मक व्यवहार से द्वेष को समाप्त किया जा सकता है।
त्याग और सहनशीलता: ‘कंठ-भर विषपान करना’ का तात्पर्य है दूसरों की कटुता या कठोर व्यवहार को सह लेना। इसके बावजूद हमें सभी के प्रति प्रेमभाव बनाए रखना चाहिए।
Step 3: Final Answer:
इस प्रकार, मनुष्य का कर्तव्य है कि वह द्वेष का उत्तर प्रेम से दे और कष्ट सहकर भी सबके प्रति स्नेह बनाए रखे।
Quick Tip: कविता में प्रयुक्त प्रतीकों और लाक्षणिक शब्दों का भावार्थ समझना आवश्यक है। जैसे ‘विषपान’ यहाँ सहनशीलता और त्याग का प्रतीक है।
निम्नलिखित अपठित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर लिखिए।
20 अगस्त को राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2004 में इस दिवस को मनाने की शुरुआत की गई। इसका मुख्य उद्देश्य अक्षय ऊर्जा के प्रति आम आदमी में जागरूकता फैलाना है। आधुनिकता और भौतिकवाद की अंधी दौड़ में सबसे समझदार जीव कहे जाने वाले इंसानों ने ही प्रकृति को नज़रअंदाज़ करने का काम किया है। जीवाश्म ईंधन ने रही-सही कसर पूरी कर दी। आम आदमी यदि समझदारी दिखाए तो आधुनिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।
वास्तव में हमें अक्षय ऊर्जा का अर्थ समझना होगा। यह अक्षय इसलिए है, क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में स्रोत का क्षय नहीं होता, बल्कि उसका नवीनीकरण होता रहता है। यह ऊर्जा पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में प्रदूषण नहीं फैलता। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल-विद्युत ऊर्जा, ज्वार-भाटा से प्राप्त ऊर्जा, बायोगैस, जैव ईंधन आदि अक्षय ऊर्जा के ही कुछ उदाहरण हैं। हमारा देश प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है इसलिए अक्षय ऊर्जा के प्रति यदि गंभीरता से काम किया जाए तो हम इस ऊर्जा को पाने की दिशा में सबसे आगे रहेंगे। इसके लिए ज़रूरी है कि प्राकृतिक संपदाओं का अनियोजित दोहन रोका जाए। आम लोगों को इसके प्रयोग के लिए जागरूक और प्रोत्साहित किया जाए।
इसमें दो राय नहीं कि भारत में अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। हम अक्षय ऊर्जा पाने की ओर ठोस कदम बढ़ा रहे हैं। भारत गाँवों का देश है। अक्षय ऊर्जा के प्रयोग से गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। अक्षय ऊर्जा देश के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है। जल्द ही भारत अक्षय ऊर्जा के उत्पादन के मामले में दुनिया में सिरमौर देश सिद्ध होगा।
2(i).
अक्षय ऊर्जा दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में राष्ट्रीय अक्षय ऊर्जा दिवस मनाने के मुख्य उद्देश्य के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के प्रथम अनुच्छेद की तीसरी पंक्ति में स्पष्ट रूप से उल्लेख है:
"इसका मुख्य उद्देश्य अक्षय ऊर्जा के प्रति आम आदमी में जागरूकता फैलाना है।"
यह कथन सीधे विकल्प (B) से मेल खाता है। अन्य विकल्प गद्यांश में बताए गए मुख्य उद्देश्य को व्यक्त नहीं करते।
Step 3: Final Answer:
गद्यांश के अनुसार, अक्षय ऊर्जा दिवस मनाने का प्रमुख उद्देश्य लोगों में अक्षय ऊर्जा के प्रति जागरूकता फैलाना है। अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: अपठित गद्यांश में कई उत्तर सीधे पाठ में मिल जाते हैं। प्रश्न के मुख्य शब्दों (जैसे ‘मुख्य उद्देश्य’) को गद्यांश में खोजने की आदत डालें।
गद्यांश के अनुसार अक्षय ऊर्जा के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में अक्षय ऊर्जा से संबंधित दिए गए कथनों में से सही कथन का चयन करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
अब गद्यांश के आधार पर प्रत्येक विकल्प का परीक्षण करें:
(A) गद्यांश में संसाधनों के अनियोजित दोहन का उल्लेख अवश्य है, परंतु यह अक्षय ऊर्जा की मूल परिभाषा नहीं है।
(B) दूसरे अनुच्छेद की दूसरी पंक्ति में स्पष्ट लिखा है: "यह अक्षय इसलिए है, क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में स्रोत का क्षय नहीं होता, बल्कि उसका नवीनीकरण होता रहता है।" यह विकल्प (B) से पूर्णतः मेल खाता है।
(C) यह कथन अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (जैसे कोयला, पेट्रोलियम) के लिए उपयुक्त है, अक्षय ऊर्जा के लिए नहीं।
(D) गद्यांश में सौर ऊर्जा के साथ-साथ पवन, जल-विद्युत और बायोगैस जैसे कई स्रोत बताए गए हैं, इसलिए यह कथन असत्य है।
Step 3: Final Answer:
गद्यांश के अनुसार अक्षय ऊर्जा का स्रोत समाप्त नहीं होता और उसका निरंतर नवीनीकरण होता रहता है। अतः विकल्प (B) सही उत्तर है।
Quick Tip: अपठित गद्यांश में सही उत्तर पाने के लिए सभी विकल्पों की तुलना पाठ से करें और गलत विकल्पों को क्रमशः हटाते जाएँ।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : अक्षय ऊर्जा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती।
कारण : यह प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न होती है और प्रदूषण नहीं फैलाती।
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Step 1: Understanding the Question:
हमें दिए गए कथन (Assertion) और कारण (Reason) की सत्यता और उनके बीच के संबंध का विश्लेषण करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
कथन का मूल्यांकन: गद्यांश के दूसरे अनुच्छेद में कहा गया है, "यह ऊर्जा पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं डालती..."। अतः, कथन सही है।
कारण का मूल्यांकन: कारण बताता है कि यह प्राकृतिक स्रोतों से उत्पन्न होती है और प्रदूषण नहीं फैलाती। गद्यांश में भी लिखा है, "...क्योंकि इसे तैयार करने के क्रम में प्रदूषण नहीं फैलता।" और यह सौर, पवन जैसे प्राकृतिक स्रोतों से मिलती है। अतः, कारण भी सही है।
संबंध का मूल्यांकन: गद्यांश में कथन के तुरंत बाद 'क्योंकि' लगाकर कारण बताया गया है। अक्षय ऊर्जा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव इसलिए नहीं डालती 'क्योंकि' यह प्रदूषण नहीं फैलाती। अतः, कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सही हैं, और कारण कथन का सही स्पष्टीकरण है। इसलिए, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: गद्यांश में 'क्योंकि', 'इसलिए', 'अतः' जैसे शब्दों पर ध्यान दें। ये अक्सर कथन और कारण के बीच सीधा संबंध स्थापित करते हैं।
हमारे देश में अक्षय ऊर्जा के प्रयोग पर बल देने के प्रमुख कारण लिखिए।
1. हमारा देश सौर, पवन ऊर्जा जैसी प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है, जिनका उपयोग किया जा सकता है।
2. अक्षय ऊर्जा के प्रयोग से गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है और पर्यावरण को भी संरक्षित रखा जा सकता है।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में भारत में अक्षय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने के मुख्य कारण पूछे गए हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश से निम्नलिखित बिंदु मिलते हैं जो इसके कारण बताते हैं:
प्राकृतिक संपदा की उपलब्धता: गद्यांश में लिखा है, "हमारा देश प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न है इसलिए अक्षय ऊर्जा के प्रति यदि गंभीरता से काम किया जाए तो हम इस ऊर्जा को पाने की दिशा में सबसे आगे रहेंगे।"
ग्रामीण विकास: गद्यांश के अनुसार, "भारत गाँवों का देश है। अक्षय ऊर्जा के प्रयोग से गाँवों की ऊर्जा संबंधी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।"
पर्यावरण संरक्षण: गद्यांश में कहा गया है कि इससे "आधुनिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण को भी बचाया जा सकता है।"
ऊर्जा का विकल्प: यह "देश के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकता है।"
इनमें से कोई भी दो प्रमुख कारण उत्तर के रूप में लिखे जा सकते हैं।
Step 3: Final Answer:
देश में प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता और ग्रामीण ऊर्जा समस्याओं का समाधान, अक्षय ऊर्जा पर बल देने के प्रमुख कारण हैं।
Quick Tip: गद्यांश से मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने की आदत डालें। इससे लघु-उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर तेजी से खोजने में मदद मिलती है।
अक्षय ऊर्जा के उपयोग से भारत को भविष्य में क्या लाभ होगा?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में अक्षय ऊर्जा के उपयोग से भारत को होने वाले भविष्य के लाभ के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश के अंतिम वाक्य में इस प्रश्न का सीधा उत्तर दिया गया है:
"जल्द ही भारत अक्षय ऊर्जा के उत्पादन के मामले में दुनिया में सिरमौर देश सिद्ध होगा।"
'सिरमौर देश' का अर्थ है, एक अग्रणी या सर्वश्रेष्ठ देश। यह भविष्य में मिलने वाला एक बहुत बड़ा लाभ है। इसके अतिरिक्त, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ पर्यावरण जैसे लाभ भी निहित हैं।
Step 3: Final Answer:
गद्यांश के अनुसार, भविष्य में भारत अक्षय ऊर्जा के उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश बन जाएगा।
Quick Tip: गद्यांश के अंतिम भाग पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि लेखक अक्सर वहीं पर भविष्य की संभावनाओं या निष्कर्ष की चर्चा करता है।
निर्देशानुसार 'रचना के आधार पर वाक्य-भेद' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
3(i).
हम कटाओ के करीब आए और बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे। (सरल वाक्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए संयुक्त वाक्य को सरल वाक्य में बदलना है। संयुक्त वाक्य में दो या अधिक स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं जो 'और', 'परंतु', 'इसलिए' जैसे योजकों से जुड़े होते हैं। सरल वाक्य में एक ही मुख्य क्रिया (समापिका क्रिया) होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
मूल वाक्य का विश्लेषण: "हम कटाओ के करीब आए" और "बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे" - ये दो स्वतंत्र उपवाक्य हैं जो 'और' योजक से जुड़े हैं। यह एक संयुक्त वाक्य है।
सरल वाक्य में परिवर्तन: सरल वाक्य बनाने के लिए, हमें दो क्रियाओं में से एक को पूर्वकालिक क्रिया या क्रिया वाक्यांश में बदलना होगा।
हम पहली क्रिया 'आए' को 'आने पर' (क्रिया वाक्यांश) में बदल सकते हैं।
इससे वाक्य बनता है: "कटाओ के करीब आने पर हमें बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे।"
इस नए वाक्य में 'दिखने लगे' एकमात्र मुख्य क्रिया है, अतः यह एक सरल वाक्य है।
Step 3: Final Answer:
अतः, सही सरल वाक्य है: "कटाओ के करीब आने पर हमें बर्फ़ से ढके पहाड़ दिखने लगे।"
Quick Tip: संयुक्त या मिश्र वाक्य को सरल वाक्य में बदलते समय, एक क्रिया को 'कर', 'होने पर', 'के कारण' जैसे रूपों में बदलकर उसे मुख्य क्रिया से आश्रित कर दें।
भारतीय सैनिक संकट के बादलों के समक्ष निराश नहीं हुए। (संयुक्त वाक्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए सरल वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलना है। सरल वाक्य में एक ही उद्देश्य और एक ही विधेय होता है। संयुक्त वाक्य में दो स्वतंत्र उपवाक्य होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
मूल वाक्य का विश्लेषण: "भारतीय सैनिक संकट के बादलों के समक्ष निराश नहीं हुए।" - इस वाक्य में एक ही क्रिया 'हुए' है। यह एक सरल वाक्य है।
संयुक्त वाक्य में परिवर्तन: इसे दो स्वतंत्र उपवाक्यों में तोड़ना होगा और एक योजक (जैसे - और, परंतु, लेकिन) से जोड़ना होगा।
पहला उपवाक्य संकट की स्थिति को बताता है: "भारतीय सैनिकों के समक्ष संकट के बादल थे।"
दूसरा उपवाक्य उनकी प्रतिक्रिया को बताता है: "वे निराश नहीं हुए।"
इन दोनों को 'परंतु' या 'लेकिन' जैसे विरोधाभासी योजक से जोड़ना सबसे उपयुक्त है।
इससे वाक्य बनता है: "भारतीय सैनिकों के समक्ष संकट के बादल थे, परंतु वे निराश नहीं हुए।"
Step 3: Final Answer:
अतः, सही संयुक्त वाक्य है: "भारतीय सैनिकों के समक्ष संकट के बादल थे, परंतु वे निराश नहीं हुए।"
Quick Tip: सरल वाक्य को संयुक्त वाक्य में बदलने के लिए, वाक्य के भाव के अनुसार दो स्वतंत्र उपवाक्य बनाएँ और उन्हें उचित योजक (और, तथा, परंतु, लेकिन, इसलिए) से जोड़ दें।
बिस्मिल्ला खाँ काशी में होने वाले परिवर्तनों को देखकर दुखी थे। (मिश्र वाक्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए सरल वाक्य को मिश्र वाक्य में बदलना है। मिश्र वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं।
Step 2: Detailed Explanation:
मूल वाक्य का विश्लेषण: "बिस्मिल्ला खाँ काशी में होने वाले परिवर्तनों को देखकर दुखी थे।" - यह एक सरल वाक्य है।
मिश्र वाक्य में परिवर्तन: हमें इसे एक प्रधान और एक आश्रित उपवाक्य में विभाजित करना होगा। यहाँ 'दुखी होने' का कारण 'परिवर्तनों का होना' है।
प्रधान उपवाक्य: "बिस्मिल्ला खाँ दुखी थे।"
आश्रित उपवाक्य: इसे कारण बताने वाले क्रिया-विशेषण उपवाक्य के रूप में बनाया जा सकता है। "क्योंकि काशी में परिवर्तन हो रहे थे।"
इन्हें जोड़ने पर वाक्य बनता है: "बिस्मिल्ला खाँ इसलिए दुखी थे क्योंकि काशी में परिवर्तन हो रहे थे।"
एक और तरीका: "जब उन्होंने देखा कि काशी में परिवर्तन हो रहे हैं, तब वे दुखी हुए।"
Step 3: Final Answer:
अतः, सही मिश्र वाक्य है: "बिस्मिल्ला खाँ इसलिए दुखी थे क्योंकि काशी में परिवर्तन हो रहे थे।"
Quick Tip: मिश्र वाक्य बनाने के लिए 'कि', 'जो', 'क्योंकि', 'जब-तब', 'जैसा-वैसा' जैसे व्यधिकरण योजकों का प्रयोग करके एक उपवाक्य को दूसरे पर आश्रित करें।
यह वही मंच है जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ। (आश्रित उपवाक्य और उसका भेद भी लिखिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए मिश्र वाक्य में से आश्रित उपवाक्य को पहचानना है और उसका भेद बताना है।
Step 2: Detailed Explanation:
वाक्य का विश्लेषण: वाक्य है "यह वही मंच है जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ।"
प्रधान उपवाक्य: "यह वही मंच है।"
आश्रित उपवाक्य: "जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ।"
भेद की पहचान: आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताता है। यहाँ "जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ" उपवाक्य 'मंच' (संज्ञा) की विशेषता बता रहा है। यह 'कौन-सा मंच?' प्रश्न का उत्तर दे रहा है।
जो उपवाक्य संज्ञा या सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, वे विशेषण उपवाक्य कहलाते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, आश्रित उपवाक्य "जहाँ कल सम्मान समारोह हुआ" है और इसका भेद विशेषण उपवाक्य है।
Quick Tip: विशेषण उपवाक्य को पहचानने के लिए देखें कि क्या आश्रित उपवाक्य प्रधान उपवाक्य के किसी संज्ञा/सर्वनाम के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे रहा है। ये अक्सर 'जो', 'जिसने', 'जहाँ', 'जैसा' से शुरू होते हैं।
बोलचाल की भाषा में जो आसानी रहती है वही लिखित भाषा में भी होनी चाहिए। (रचना के आधार पर वाक्य का भेद लिखिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए वाक्य का रचना के आधार पर भेद (सरल, संयुक्त, या मिश्र) बताना है।
Step 2: Detailed Explanation:
वाक्य का विश्लेषण: "बोलचाल की भाषा में जो आसानी रहती है वही लिखित भाषा में भी होनी चाहिए।"
इस वाक्य में दो उपवाक्य हैं:
1. "जो आसानी रहती है" (आश्रित उपवाक्य)
2. "वही लिखित भाषा में भी होनी चाहिए" (प्रधान उपवाक्य)
यहाँ एक उपवाक्य (जो आसानी रहती है) दूसरे उपवाक्य (वही...होनी चाहिए) पर आश्रित है।
जिस वाक्य में एक प्रधान उपवाक्य और एक या अधिक आश्रित उपवाक्य होते हैं, उसे मिश्र वाक्य कहते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, यह वाक्य रचना की दृष्टि से एक मिश्र वाक्य है।
Quick Tip: यदि वाक्य में 'जो-वह', 'जैसा-वैसा', 'जब-तब', 'यदि-तो' जैसे जोड़े वाले योजक शब्द हों, तो वह प्रायः मिश्र वाक्य होता है।
निर्देशानुसार 'वाच्य' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
4(i).
नेताजी ने भाषण दिया था। (कर्मवाच्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए कर्तृवाच्य वाक्य को कर्मवाच्य में बदलना है। कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है, जबकि कर्मवाच्य में कर्म प्रधान होता है।
Step 2: Detailed Explanation:
कर्तृवाच्य वाक्य: "नेताजी ने भाषण दिया था।" (कर्ता: नेताजी, कर्म: भाषण, क्रिया: दिया था)
कर्मवाच्य में बदलने के नियम:
1. कर्ता के साथ 'द्वारा' या 'से' विभक्ति लगाएँ। (नेताजी द्वारा)
2. कर्म को विभक्ति रहित करें। (भाषण)
3. क्रिया को कर्म के लिंग और वचन के अनुसार बदलें और 'जा' धातु का रूप जोड़ें। 'भाषण' (पुल्लिंग, एकवचन) के अनुसार क्रिया होगी 'दिया गया था'।
परिणाम: "नेताजी द्वारा भाषण दिया गया था।"
Step 3: Final Answer:
अतः, सही कर्मवाच्य रूप है: "नेताजी द्वारा भाषण दिया गया था।"
Quick Tip: कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य में बदलते समय, कर्ता के बाद 'द्वारा' लगाएँ और क्रिया को 'गया/गई/गए' के रूप में बदलें जो कर्म के अनुसार हो।
बीमार व्यक्ति चल नहीं सकता। (भाववाच्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए कर्तृवाच्य वाक्य को भाववाच्य में बदलना है। भाववाच्य में क्रिया का भाव प्रधान होता है और यह प्रायः अकर्मक क्रिया के साथ और असमर्थता दर्शाने के लिए प्रयोग होता है।
Step 2: Detailed Explanation:
कर्तृवाच्य वाक्य: "बीमार व्यक्ति चल नहीं सकता।" (कर्ता: बीमार व्यक्ति, क्रिया: चल नहीं सकता)
भाववाच्य में बदलने के नियम:
1. कर्ता के साथ 'से' विभक्ति लगाएँ। (बीमार व्यक्ति से)
2. क्रिया को सामान्य भूतकाल में बदलकर उसके साथ 'जा' धातु का रूप (कर्ता और कर्म से स्वतंत्र, हमेशा पुल्लिंग, एकवचन) लगाएँ। 'चलना' क्रिया का रूप होगा 'चला जाता'।
3. नकारात्मक वाक्यों में यह 'चला नहीं जाता' हो जाएगा।
परिणाम: "बीमार व्यक्ति से चला नहीं जाता।"
Step 3: Final Answer:
अतः, सही भाववाच्य रूप है: "बीमार व्यक्ति से चला नहीं जाता।"
Quick Tip: कर्तृवाच्य से भाववाच्य में बदलने के लिए, कर्ता के बाद 'से' लगाएँ और क्रिया को '...आ नहीं जाता' या '...आ जाता है' के रूप में बदल दें। क्रिया हमेशा पुल्लिंग एकवचन में रहती है।
मुझसे लड़ा नहीं जा सकता। (कर्तृवाच्य में बदलिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए भाववाच्य वाक्य को कर्तृवाच्य में बदलना है। भाववाच्य में क्रिया प्रधान होती है, जबकि कर्तृवाच्य में कर्ता प्रधान होता है और क्रिया कर्ता के अनुसार होती है।
Step 2: Detailed Explanation:
भाववाच्य वाक्य: "मुझसे लड़ा नहीं जा सकता।"
कर्तृवाच्य में बदलने के नियम:
1. कर्ता से 'से' या 'द्वारा' विभक्ति हटा दें। 'मुझसे' का कर्ता रूप 'मैं' है।
2. क्रिया को कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार बदलें। 'जा' धातु का रूप हटा दें।
3. 'लड़ा नहीं जा सकता' का कर्तृवाच्य रूप कर्ता 'मैं' के अनुसार 'लड़ नहीं सकता' होगा।
परिणाम: "मैं लड़ नहीं सकता।"
Step 3: Final Answer:
अतः, सही कर्तृवाच्य रूप है: "मैं लड़ नहीं सकता।"
Quick Tip: कर्मवाच्य/भाववाच्य से कर्तृवाच्य में आते समय, 'द्वारा/से' हटा दें और क्रिया को वापस कर्ता के नियंत्रण में ले आएँ, ताकि क्रिया कर्ता के अनुसार चले।
अधिकारी द्वारा मामले की जाँच-पड़ताल की गई। (वाच्य को पहचानकर उसका भेद लिखिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए वाक्य में वाच्य की पहचान करनी है।
Step 2: Detailed Explanation:
वाक्य का विश्लेषण: "अधिकारी द्वारा मामले की जाँच-पड़ताल की गई।"
कर्ता: 'अधिकारी' के साथ 'द्वारा' विभक्ति लगी है, जो कर्मवाच्य या भाववाच्य का संकेत है।
कर्म: 'जाँच-पड़ताल' (स्त्रीलिंग) इस वाक्य में कर्म है।
क्रिया: क्रिया 'की गई' कर्म 'जाँच-पड़ताल' के लिंग (स्त्रीलिंग) और वचन (एकवचन) के अनुसार है।
चूँकि वाक्य में कर्म मौजूद है और क्रिया कर्म के अनुसार है, यह कर्मवाच्य है।
Step 3: Final Answer:
अतः, इस वाक्य में कर्मवाच्य है।
Quick Tip: वाच्य पहचानने के लिए देखें: (1) कर्ता के साथ 'ने' है या कोई विभक्ति नहीं है तो कर्तृवाच्य। (2) कर्ता के साथ 'द्वारा/से' है और कर्म मौजूद है तो कर्मवाच्य। (3) कर्ता के साथ 'से' है और कर्म नहीं है (अकर्मक क्रिया) तो भाववाच्य।
उन्होंने किसान जीवन को अपनी रचनाओं का केन्द्र बनाया। (वाच्य को पहचानकर उसका भेद लिखिए)
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए वाक्य में वाच्य की पहचान करनी है।
Step 2: Detailed Explanation:
वाक्य का विश्लेषण: "उन्होंने किसान जीवन को अपनी रचनाओं का केन्द्र बनाया।"
कर्ता: 'उन्होंने' (कर्ता कारक)।
क्रिया: 'बनाया'। क्रिया का सीधा संबंध कर्ता से है। कर्ता 'उन्होंने' के अनुसार क्रिया का प्रयोग हुआ है।
वाक्य में कर्ता की प्रधानता है। कर्ता के बदलने पर क्रिया बदल जाएगी (जैसे- 'मैंने...केन्द्र बनाया', 'हमने...केन्द्र बनाया')।
चूँकि क्रिया कर्ता के अनुसार है और कर्ता प्रधान है, यह कर्तृवाच्य है।
Step 3: Final Answer:
अतः, इस वाक्य में कर्तृवाच्य है।
Quick Tip: यदि कर्ता के साथ 'ने' विभक्ति लगी हो या कर्ता विभक्ति रहित हो और क्रिया कर्ता के अनुसार हो, तो वह कर्तृवाच्य होता है।
निर्देशानुसार 'पद-परिचय' पर आधारित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के रेखांकित पदों का पद-परिचय लिखिए :
5(i).
मुझे अपने आस-पास की प्रकृति को सँभालना अच्छा लगता है। (रेखांकित पद: मुझे)
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Step 1: पद का विश्लेषण: रेखांकित पद 'मुझे' है।
भेद: 'मुझे' 'मैं' का रूप है, इसलिए यह पुरुषवाचक सर्वनाम है।
उपभेद: यह वक्ता के लिए प्रयुक्त हुआ है, इसलिए उत्तम पुरुष है।
लिंग: सर्वनाम का लिंग क्रिया से पता चलता है, पर यहाँ क्रिया ('लगता है') कर्ता ('सँभालना') के अनुसार है। अतः लिंग पुल्लिंग/स्त्रीलिंग दोनों हो सकता है।
वचन: 'मुझे' एक व्यक्ति के लिए है, अतः एकवचन है।
कारक: 'अच्छा लगना' क्रिया में अनुभव करने वाला कर्ता होता है। यहाँ 'मुझे' को अच्छा लग रहा है, अतः यह कर्ता कारक है।
क्रिया से संबंध: 'लगता है' क्रिया का कर्ता। Quick Tip: सर्वनाम का पद-परिचय देते समय उसके भेद (पुरुषवाचक, निश्चयवाचक आदि), पुरुष (उत्तम, मध्यम, अन्य), लिंग, वचन, कारक और क्रिया के साथ संबंध का उल्लेख करें।
परिश्रम के बिना सफलता प्राप्त नहीं होती। (रेखांकित पद: बिना)
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Step 1: पद का विश्लेषण: रेखांकित पद 'बिना' है।
भेद: 'बिना' एक अविकारी शब्द (अव्यय) है। यह संज्ञा ('परिश्रम') के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों से बता रहा है। इसलिए यह संबंधबोधक अव्यय है।
संबंध: यह 'परिश्रम' संज्ञा का संबंध 'सफलता प्राप्त नहीं होती' से जोड़ता है। Quick Tip: 'के बिना', 'के साथ', 'के ऊपर', 'से पहले' जैसे पद जो संज्ञा/सर्वनाम के बाद आकर संबंध बताते हैं, संबंधबोधक अव्यय होते हैं।
मुझे थोड़ी चाय और दो। (रेखांकित पद: थोड़ी)
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Step 1: पद का विश्लेषण: रेखांकित पद 'थोड़ी' है।
भेद: यह 'चाय' की मात्रा बता रहा है, जिसे गिना नहीं जा सकता, केवल मापा/तौला जा सकता है। इसलिए यह परिमाणवाचक विशेषण है।
उपभेद: मात्रा निश्चित नहीं है ('कितनी?' का सटीक उत्तर नहीं), इसलिए यह अनिश्चित परिमाणवाचक है।
लिंग: विशेष्य 'चाय' (स्त्रीलिंग) के अनुसार, इसका लिंग स्त्रीलिंग है।
वचन: विशेष्य 'चाय' (एकवचन) के अनुसार, इसका वचन एकवचन है।
विशेष्य: यह 'चाय' संज्ञा की विशेषता बता रहा है। Quick Tip: विशेषण का पद-परिचय देते समय उसके भेद, लिंग, वचन और विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है) का उल्लेख अवश्य करें।
वे दूसरे लेखकों की रचनाएँ पढ़ते हैं। (रेखांकित पद: लेखकों)
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Step 1: पद का विश्लेषण: रेखांकित पद 'लेखकों' है।
भेद: 'लेखक' एक पूरी जाति का बोध कराता है, किसी विशेष व्यक्ति का नहीं। इसलिए यह जातिवाचक संज्ञा है।
लिंग: 'लेखक' शब्द पुल्लिंग है।
वचन: 'लेखकों' लेखक का बहुवचन रूप है, अतः बहुवचन है।
कारक: इसके बाद 'की' विभक्ति है, जो संबंध दर्शा रही है। अतः यह संबंध कारक है ('रचनाएँ' से संबंध)। Quick Tip: संज्ञा का पद-परिचय देते समय उसके भेद (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक), लिंग, वचन, कारक और वाक्य के अन्य शब्दों से उसका संबंध बताएँ।
तुम्हारा कमरा बेहद सुंदर है। (रेखांकित पद: सुंदर)
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Step 1: पद का विश्लेषण: रेखांकित पद 'सुंदर' है।
भेद: यह 'कमरा' का गुण बता रहा है, इसलिए यह गुणवाचक विशेषण है।
लिंग: विशेष्य 'कमरा' (पुल्लिंग) के अनुसार, इसका लिंग पुल्लिंग है।
वचन: विशेष्य 'कमरा' (एकवचन) के अनुसार, इसका वचन एकवचन है।
विशेष्य: यह 'कमरा' संज्ञा की विशेषता बता रहा है।
अवस्था: यह मूलावस्था में है।
स्थान: यह विशेष्य के बाद और क्रिया से पहले आया है, इसलिए यह विधेय विशेषण है। Quick Tip: यदि विशेषण संज्ञा से पहले आए तो वह 'उद्देश्य विशेषण' और यदि संज्ञा के बाद (विधेय के अंग के रूप में) आए तो वह 'विधेय विशेषण' कहलाता है।
निर्देशानुसार 'अलंकार' पर आधारित निम्नलिखित पाँच प्रश्नों में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
6(i).
अति कटु बचन कहति कैकेई
मानहुँ लोन जरे पर देई - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
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Step 1: पंक्ति का अर्थ: कैकेयी बहुत कड़वे वचन कह रही हैं, मानो जले पर नमक छिड़क रही हों।
Step 2: अलंकार की पहचान: इस पंक्ति में 'मानहुँ' शब्द का प्रयोग हुआ है। 'मानो', 'मनु', 'मानहुँ', 'जानो', 'जनु', 'जानहुँ' आदि वाचक शब्द उत्प्रेक्षा अलंकार में प्रयोग होते हैं। यहाँ कटु वचन कहने (उपमेय) में जले पर नमक छिड़कने (उपमान) की संभावना व्यक्त की गई है।
Step 3: Final Answer: अतः, 'मानहुँ' वाचक शब्द के कारण यहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार है।
Quick Tip: यदि काव्य पंक्ति में मानो, मनु, जानो, जनु, ज्यों जैसे संभावना सूचक शब्द दिखें, तो वहाँ प्रायः उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
'खड़-खड़ खड़ताल बजा रही विसुध हवा' - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
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Step 1: पंक्ति का अर्थ: बेसुध हवा खड़-खड़ की आवाज करती हुई खड़ताल बजा रही है।
Step 2: अलंकार की पहचान: यहाँ 'हवा' जो कि एक निर्जीव प्राकृतिक तत्व है, पर 'खड़ताल बजाने' जैसी मानवीय क्रिया का आरोप किया गया है। जब जड़ या प्राकृतिक वस्तुओं पर मानवीय क्रियाओं या भावनाओं का आरोप किया जाता है, तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
Step 3: Final Answer: अतः, हवा का मानवीकरण करने के कारण यहाँ मानवीकरण अलंकार है।
Quick Tip: जब किसी निर्जीव वस्तु या प्रकृति को मनुष्य की तरह व्यवहार करते हुए दर्शाया जाए (जैसे - हँसना, रोना, गाना), तो वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
हृदय-गगन में रूप-चंद्रिका बनकर उतरो मेरे - काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
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Step 1: पंक्ति का अर्थ: मेरे हृदय रूपी आकाश में तुम सौंदर्य रूपी चाँदनी बनकर उतरो।
Step 2: अलंकार की पहचान: इस पंक्ति में 'हृदय' (उपमेय) पर 'गगन' (उपमान) का और 'रूप' (उपमेय) पर 'चंद्रिका' (उपमान) का अभेद आरोप है। यहाँ 'हृदय जैसा गगन' न कहकर 'हृदय-गगन' (हृदय रूपी गगन) कहा गया है। उपमेय और उपमान में कोई अंतर नहीं दर्शाया गया है।
Step 3: Final Answer: अतः, उपमेय पर उपमान का अभेद आरोप होने के कारण यहाँ रूपक अलंकार है।
Quick Tip: रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच योजक चिह्न (-) का प्रयोग हो सकता है और 'सा', 'जैसा' जैसे वाचक शब्द नहीं होते। (जैसे - चरण-कमल)।
उपमा अलंकार का एक उदाहरण लिखिए।
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Step 1: उपमा अलंकार की परिभाषा: जब किसी व्यक्ति या वस्तु की तुलना किसी दूसरे प्रसिद्ध व्यक्ति या वस्तु से उसके रूप, गुण, या धर्म के आधार पर की जाए, तो वहाँ उपमा अलंकार होता है। इसके चार अंग होते हैं - उपमेय, उपमान, वाचक शब्द, और साधारण धर्म।
Step 2: उदाहरण का विश्लेषण: "पीपर पात सरिस मन डोला।"
उपमेय (जिसकी तुलना हो): मन
उपमान (जिससे तुलना हो): पीपर पात (पीपल का पत्ता)
वाचक शब्द (तुलना बताने वाला शब्द): सरिस (समान)
साधारण धर्म (समान गुण): डोला (हिलना, चंचल होना)
चूँकि यहाँ तुलना के चारों अंग मौजूद हैं, यह उपमा अलंकार का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
Quick Tip: उपमा अलंकार का उदाहरण देते समय ऐसा वाक्य चुनें जिसमें 'सा', 'सी', 'से', 'सम', 'सरिस', 'जैसा' जैसे वाचक शब्द स्पष्ट रूप से मौजूद हों।
अतिशयोक्ति अलंकार का एक उदाहरण लिखिए।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग॥
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Step 1: अतिशयोक्ति अलंकार की परिभाषा: जब किसी बात का वर्णन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए, जो लोक सीमा से परे हो, तो वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
Step 2: उदाहरण का विश्लेषण: "हनुमान की पूँछ में, लगन न पाई आग। लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग॥"
इस पंक्ति में यह कहा गया है कि अभी हनुमान जी की पूँछ में आग लग भी नहीं पाई थी कि उससे पहले ही सारी लंका जल गई और राक्षस भाग गए। यह बात बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कही गई है, क्योंकि कारण (आग लगना) के होने से पहले ही कार्य (लंका का जलना) का होना दिखाया गया है, जो कि असंभव है।
Step 3: Final Answer: अतः, बात को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर कहने के कारण यह अतिशयोक्ति अलंकार का उदाहरण है।
Quick Tip: अतिशयोक्ति का अर्थ है 'अतिशय + उक्ति' अर्थात् 'बढ़ा-चढ़ाकर कहना'। ऐसा उदाहरण चुनें जिसमें कोई बात अविश्वसनीय या असंभव लगे।
निम्नलिखित पठित गद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
गाड़ी छूट रही थी। सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझकर, जरा दौड़कर उसमें चढ़ गए। अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था। एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफ़ेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे। सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे। डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखाई दिया। सोचा, हो सकता है, यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों।
नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया। हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।
ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है। नवाब साहब की असुविधा और संकोच के कारण का अनुमान करने लगे। संभव है, नवाब साहब ने बिलकुल अकेले यात्रा कर सकने के अनुमान में किफ़ायत के विचार से सेकंड क्लास का टिकट खरीद लिया हो और अब गवारा न हो कि शहर का कोई सफ़ेदपोश उन्हें मँझले दर्जे में सफ़र करता देखे।
7(i).
लेखक के अनुसार नवाब साहब की आँखों में असंतोष का भाव क्यों दिखाई दे रहा था? इस प्रश्न के उत्तर के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. एकांत चिंतन में विघ्न पड़ने के कारण
II. कहानी के लिए उपयुक्त कथानक नहीं मिलने के कारण
III. खीरे जैसी साधारण वस्तु के साथ देखे जाने के कारण
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में लेखक के अनुसार नवाब साहब के असंतोष के संभावित कारणों के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश की पहली अनुच्छेद की अंतिम पंक्तियों में लेखक नवाब साहब के असंतोष के दो संभावित कारण सोचते हैं:
पहला कारण: लेखक के आने से उनके "एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष" हुआ। यह कथन I से मेल खाता है।
दूसरा कारण: लेखक सोचते हैं कि शायद नवाब साहब "खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों"। यह कथन III से मेल खाता है।
कथन II (कहानी के लिए कथानक न मिलना) का उल्लेख लेखक ने अपने संदर्भ में किया है, नवाब साहब के लिए नहीं।
इस प्रकार, कथन I और III दोनों सही हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, विकल्प (D) सही है क्योंकि यह कथन I और III दोनों को सही बताता है।
Quick Tip: गद्यांश आधारित प्रश्नों में, लेखक के अनुमान और वास्तविक घटना के बीच का अंतर समझें। यहाँ प्रश्न लेखक के अनुमान के बारे में है।
नवाब साहब के व्यवहार से उनकी किस प्रवृत्ति का परिचय मिलता है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में नवाब साहब के व्यवहार से प्रकट होने वाली उनकी चारित्रिक विशेषता के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश में नवाब साहब का व्यवहार इस प्रकार वर्णित है:
वे लेखक के आने से असंतुष्ट दिखे और संगति के लिए कोई उत्साह नहीं दिखाया।
लेखक यह भी अनुमान लगाते हैं कि शायद वे एक साधारण वस्तु (खीरा) खाने में संकोच कर रहे हों।
यह व्यवहार उनकी नवाबी शान दिखाने और अपनी असलियत छिपाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है, जो 'दिखावा और संकोच' का मिश्रण है। सादगी, मित्रता या संदेह उनके व्यवहार से सीधे प्रकट नहीं होते।
Step 3: Final Answer:
नवाब साहब का व्यवहार उनके दिखावटीपन और संकोची स्वभाव को दर्शाता है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: पात्रों के व्यवहार का विश्लेषण करते समय उनके कार्यों और संवादों के पीछे छिपे इरादों को समझने का प्रयास करें।
प्रस्तुत गद्यांश में लेखक के व्यक्तित्व की कौन-सी विशेषताएँ दिखाई देती हैं?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में गद्यांश के आधार पर लेखक के व्यक्तित्व की विशेषताओं का पता लगाने के लिए कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
गद्यांश से लेखक के बारे में पता चलता है:
कल्पनाशील: लेखक कहते हैं, "ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।" वे नवाब साहब के व्यवहार के बारे में कई कल्पनाएँ (अनुमान) करते हैं।
आलोचनात्मक: लेखक नवाब साहब के व्यवहार का सूक्ष्म विश्लेषण करते हैं और उनके दिखावटीपन पर एक मौन टिप्पणी करते हैं, जो उनकी आलोचनात्मक दृष्टि को दर्शाता है।
वे आक्रामक, उदासीन या निराश नहीं हैं, बल्कि स्थिति में सक्रिय रूप से शामिल होकर उसका विश्लेषण कर रहे हैं।
Step 3: Final Answer:
लेखक का व्यक्तित्व कल्पनाशील और आलोचनात्मक है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: किसी कहानी में कथावाचक (लेखक) के विचारों और टिप्पणियों पर ध्यान दें, इनसे उनके व्यक्तित्व का पता चलता है।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : लेखक ने नवाब साहब से अपनी नज़रें चुरा लीं और दूसरी ओर देखने लगा।
कारण : नवाब साहब के व्यवहार के कारण अपने आत्मसम्मान को निबाहने के लिए उसने ऐसा किया।
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Step 1: Understanding the Question:
हमें दिए गए कथन और कारण का मूल्यांकन करना है और उनके बीच के संबंध को निर्धारित करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
कथन का मूल्यांकन: गद्यांश में लिखा है, "हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठकर आत्मसम्मान में आँखें चुरा लीं।" 'आँखें चुरा लेना' और 'नज़रें चुरा लेना' एक ही बात है। अतः, कथन सही है।
कारण का मूल्यांकन: गद्यांश में स्पष्ट है कि नवाब साहब ने "संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया"। किसी के द्वारा उपेक्षा किए जाने पर अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उससे नज़रें हटा लेना एक स्वाभाविक मानवीय प्रतिक्रिया है। गद्यांश में 'आत्मसम्मान में' शब्द इस कारण की सीधे पुष्टि करता है। अतः, कारण भी सही है।
संबंध का मूल्यांकन: लेखक ने नज़रें क्यों चुराईं? क्योंकि वे अपने आत्मसम्मान को बचाना चाहते थे, जो नवाब साहब के रूखे व्यवहार के कारण आहत हो सकता था। इसलिए, कारण कथन की सही व्याख्या करता है।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों सही हैं और कारण कथन की सही व्याख्या करता है। अतः, विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: कथन और कारण वाले प्रश्नों में, कारण वाले वाक्य से पहले 'क्योंकि' लगाकर देखें। यदि "कथन, क्योंकि कारण" एक तार्किक वाक्य बनता है, तो कारण सही व्याख्या करता है।
'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' से क्या अभिप्राय है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में 'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' वाक्यांश का सही अर्थ पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
'आत्मसम्मान में आँखें चुराना' का अर्थ है अपने स्वाभिमान (Self-respect) की रक्षा के लिए किसी से नज़रें हटा लेना। जब कोई व्यक्ति आपकी उपेक्षा करता है या आपको महत्व नहीं देता, तो आप उससे आँखें मिलाकर अपने आपको और अपमानित महसूस नहीं कराना चाहते। इसलिए आप अपनी नज़रें फेर लेते हैं। यह स्वाभिमान के निर्वाह का एक तरीका है। विकल्प (A) इस भाव को सबसे सटीक रूप से व्यक्त करता है।
Step 3: Final Answer:
इस वाक्यांश का सही अभिप्राय स्वाभिमान का निर्वाह करने के लिए नज़रें हटा लेना है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: मुहावरों और वाक्यांशों का अर्थ उनके संदर्भ के अनुसार समझें। यहाँ 'आत्मसम्मान' शब्द ही सही उत्तर की ओर संकेत कर रहा है।
निर्धारित गद्य पाठों के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए :
8(i).
'नेताजी का चश्मा' पाठ में हालदार साहब को क्या देखकर 'दुर्दमनीय कौतूहल' हुआ और उन्होंने उसके लिए क्या किया?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न के दो भाग हैं: (1) हालदार साहब के तीव्र कौतूहल (जिज्ञासा) का कारण क्या था? (2) उन्होंने अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए क्या कदम उठाया?
Step 2: Detailed Explanation:
'नेताजी का चश्मा' पाठ के अनुसार, हालदार साहब जब भी कस्बे से गुजरते थे, तो वे देखते थे कि संगमरमर की मूर्ति पर चश्मा असली होता था और वह हर बार बदला हुआ होता था। पत्थर की मूर्ति पर असली और बदलते चश्मे को देखकर उनका कौतूहल बढ़ गया। वे इसे रोक नहीं पाए, इसलिए उन्होंने पान की दुकान पर रुककर पानवाले से इस रहस्य का कारण पूछा।
Step 3: Final Answer:
नेताजी की मूर्ति पर बार-बार बदलते असली चश्मे को देखकर हालदार साहब का कौतूहल बढ़ा और उन्होंने इस बारे में पानवाले से पूछताछ की।
Quick Tip: 'दुर्दमनीय कौतूहल' का अर्थ है ऐसी जिज्ञासा जिसे दबाया न जा सके। उत्तर में इस भाव को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है।
'एक कहानी यह भी' पाठ से उद्धृत कथन 'पिताजी को इस बात का बिलकुल भी अहसास नहीं था कि इन दोनों का तो रास्ता ही टकराहट का है' - में किन 'दो रास्तों' के बीच टकराहट की बात की जा रही है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि लेखिका और उनके पिता के बीच किन 'दो रास्तों' को लेकर टकराहट थी।
Step 2: Detailed Explanation:
'एक कहानी यह भी' पाठ में मन्नू भंडारी बताती हैं कि उनके पिता आधुनिक सोच के थे और चाहते थे कि लेखिका राजनीतिक बहसों में भाग ले, लेकिन घर की चारदीवारी के अंदर। यह पहला रास्ता था। इसके विपरीत, लेखिका देश की आज़ादी के आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए लड़कों के साथ सड़कों पर जुलूस और नारेबाज़ी करने लगीं। यह दूसरा रास्ता था। इन दो अलग-अलग दृष्टिकोणों और कार्यक्षेत्रों में सीधा टकराव था।
Step 3: Final Answer:
यहाँ 'दो रास्ते' का मतलब है - घर में रहकर सीमित राजनीतिक सक्रियता और सड़कों पर उतरकर प्रत्यक्ष क्रांतिकारी भागीदारी, जिनके बीच टकराहट थी।
Quick Tip: प्रतीकात्मक भाषा को समझें। 'दो रास्ते' यहाँ दो अलग-अलग विचारधाराओं और जीवन-शैलियों का प्रतीक हैं।
'नौबतखाने में इबादत' पाठ के आधार पर लिखिए कि एक सच्चे कलाकार को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए और किन पर नहीं?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में बिस्मिल्ला खाँ के जीवन के आधार पर एक सच्चे कलाकार के लिए अनुकरणीय और त्याज्य बातों के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
'नौबतखाने में इबादत' पाठ बिस्मिल्ला खाँ के जीवन को प्रस्तुत करता है। उनके अनुसार, एक सच्चे कलाकार को:
ध्यान देना चाहिए:
कला के प्रति पूर्ण समर्पण और रियाज़ (अभ्यास)।
खुदा से सच्चा सुर पाने की प्रार्थना (इबादत)।
अपनी संस्कृति और परंपरा का सम्मान।
सभी धर्मों के प्रति समभाव।
ध्यान नहीं देना चाहिए:
भौतिक सफलता, धन और पुरस्कारों पर।
दिखावा और बनावटीपन।
धार्मिक कट्टरता और भेदभाव।
Step 3: Final Answer:
एक सच्चे कलाकार को कला-साधना और विनम्रता पर ध्यान देना चाहिए, तथा भौतिक लाभ और भेदभाव से दूर रहना चाहिए।
Quick Tip: इस तरह के प्रश्नों में, पाठ के मुख्य पात्र के चरित्र की सकारात्मक और नकारात्मक (या जिन चीजों से वे बचते थे) विशेषताओं को सूचीबद्ध करना उत्तर लिखने में मदद करता है।
'बालगोबिन भगत' पाठ के आधार पर बालगोबिन भगत के स्वरूप पर टिप्पणी लिखिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में बालगोबिन भगत के बाह्य स्वरूप यानी उनके शारीरिक रूप-रंग और वेश-भूषा का वर्णन करने के लिए कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
पाठ के आरम्भ में लेखक ने बालगोबिन भगत का एक शब्द-चित्र प्रस्तुत किया है:
कद और रंग: मँझोला कद, गोरा रंग।
आयु और बाल: 60 वर्ष से ऊपर, पके हुए बाल।
दाढ़ी: लंबी जटाजूट या दाढ़ी नहीं रखते थे।
वस्त्र: नाममात्र के कपड़े, कमर पर लंगोटी।
सिर: कबीरपंथियों की तरह कनफटी टोपी।
अन्य: सर्दियों में एक काली कमली ओढ़ लेते थे और माथे पर रामानंदी चंदन का टीका लगाते थे।
इन बिंदुओं को मिलाकर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखी जा सकती है।
Step 3: Final Answer:
बालगोबिन भगत साठ वर्षीय, मँझोले कद के गोरे व्यक्ति थे, जिनके बाल सफेद थे। वे न्यूनतम वस्त्र, एक लंगोटी और एक कबीरपंथी टोपी धारण करते थे।
Quick Tip: 'स्वरूप पर टिप्पणी' या 'शब्द-चित्र प्रस्तुत करें' जैसे प्रश्नों में व्यक्ति के शारीरिक बनावट, वेश-भूषा और अन्य बाहरी विशेषताओं का वर्णन करना होता है।
निम्नलिखित पठित काव्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प चुनकर लिखिए :
नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥
आयेसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥
सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥
सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥
सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥
सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥
बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥
येहि धनु पर ममता केहि हेतू। सुनि रिसाइ कह भृगुकुलकेतू॥
9(i).
राम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को क्या कहा है?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि श्री राम ने परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए धनुष तोड़ने वाले को क्या बताया।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पहली पंक्ति देखें:
"नाथ संभुधनु भंजनिहारा, होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥"
यहाँ श्री राम परशुराम से कह रहे हैं, "हे नाथ! शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई एक दास होगा।" इस प्रकार, राम धनुष तोड़ने वाले को परशुराम का दास बताते हैं।
Step 3: Final Answer:
अतः, राम ने शिव धनुष तोड़ने वाले को परशुराम का दास कहा। विकल्प (C) सही है।
Quick Tip: काव्यांश की पहली कुछ पंक्तियों में अक्सर संवाद की शुरुआत होती है। प्रश्नों के उत्तर के लिए इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़ें।
परशुराम के अनुसार शिव धनुष तोड़ने वाला उनके लिए किसके समान है? इस कथन के लिए उचित विकल्प का चयन कीजिए :
I. शत्रु के समान
II. सहस्रबाहु के समान
III. सेवक के समान
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि परशुराम की दृष्टि में शिव धनुष तोड़ने वाला व्यक्ति किसके समान है।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पंक्तियों का विश्लेषण करें:
"सेवकु सो जो करै सेवकाई। अरिकरनी करि करिअ लराई॥" - यहाँ परशुराम कहते हैं कि सेवक सेवा करता है, शत्रुता का काम (अरि करनी) करने वाले से तो लड़ाई ही की जाती है। इसका अर्थ है कि वह व्यक्ति शत्रु के समान है। (कथन I सही है)
"सुनहु राम जेहि सिवधनु तोरा। सहसबाहु सम सो रिपु मोरा॥" - यहाँ वे स्पष्ट रूप से कहते हैं कि जिसने शिव धनुष तोड़ा है, वह सहस्रबाहु के समान मेरा शत्रु (रिपु) है। (कथन II सही है)
परशुराम राम द्वारा दी गई 'सेवक' की परिभाषा को अस्वीकार करते हैं। (कथन III गलत है)
अतः, कथन I और II दोनों सही हैं।
Step 3: Final Answer:
परशुराम के अनुसार, धनुष तोड़ने वाला शत्रु और सहस्रबाहु के समान है। अतः, विकल्प (A) सही है।
Quick Tip: काव्यांश में पात्रों द्वारा दी गई उपमाओं और तुलनाओं पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वे उनकी भावनाओं और विचारों को प्रकट करती हैं।
निम्नलिखित कथन और कारण को ध्यानपूर्वक पढ़कर दिए गए विकल्पों से सही उत्तर चुनकर लिखिए :
कथन : परशुराम के अहंकारपूर्ण वचनों को सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराने लगे।
कारण : उन्होंने बचपन से ही बहुत से धनुष तोड़े हैं।
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Step 1: Understanding the Question:
हमें लक्ष्मण के मुस्कुराने (कथन) और उनके द्वारा बचपन में धनुष तोड़ने (कारण) के बीच संबंध का मूल्यांकन करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
कथन का मूल्यांकन: काव्यांश में स्पष्ट लिखा है, "सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने।" (मुनि के वचन सुनकर लक्ष्मण मुस्कुराए)। अतः, कथन सही है।
कारण का मूल्यांकन: लक्ष्मण आगे कहते हैं, "बहु धनुही तोरी लरिकाईं।" (बचपन में बहुत सी धनुहियाँ तोड़ी हैं)। अतः, कारण भी एक सत्य कथन है जो लक्ष्मण ने कहा।
संबंध का मूल्यांकन: लक्ष्मण परशुराम के अहंकारपूर्ण वचनों और एक साधारण धनुष के टूटने पर उनके अत्यधिक क्रोध पर व्यंग्य करते हुए मुस्कुराए। उन्होंने बचपन में धनुष तोड़ने वाली बात अपने व्यंग्य को और तीखा करने के लिए बाद में कही। उनके मुस्कुराने का तात्कालिक कारण परशुराम का बड़बोलापन था, न कि यह याद आना कि उन्होंने बचपन में धनुष तोड़े थे। इसलिए, कारण कथन की सीधी और उचित व्याख्या नहीं करता।
Step 3: Final Answer:
कथन और कारण दोनों अपनी-अपनी जगह सही हैं, लेकिन कारण, कथन का सही स्पष्टीकरण नहीं है। अतः, विकल्प (D) सही है।
Quick Tip: सही व्याख्या वाले प्रश्नों में, 'तात्कालिक कारण' और 'सहायक तर्क' के बीच अंतर को पहचानना महत्वपूर्ण है। लक्ष्मण के मुस्कुराने का तात्कालिक कारण परशुराम का क्रोध था।
इस काव्यांश के आधार पर लक्ष्मण की वाणी किस प्रकार की थी?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में परशुराम से बात करते समय लक्ष्मण की वाणी की विशेषता पूछी गई है।
Step 2: Detailed Explanation:
लक्ष्मण के संवादों का विश्लेषण करें:
"सुनि मुनिबचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अवमाने॥" - वे परशुराम का अपमान करते हुए बोले।
"बहु धनुही तोरी लरिकाईं। कबहुँ न असि रिस कीन्हि गोसाईं॥" - वे कहते हैं कि बचपन में हमने ऐसी बहुत सी धनुहियाँ तोड़ीं, तब तो आपने ऐसा क्रोध नहीं किया। यह सीधे तौर पर परशुराम के क्रोध का उपहास है।
"येहि धनु पर ममता केहि हेतू।" - इस धनुष पर इतनी ममता क्यों? यह भी एक चुभता हुआ प्रश्न है।
यह सब दिखाता है कि उनकी वाणी सीधी-सीधी कटु या केवल विनोदप्रिय नहीं, बल्कि व्यंग्य से भरी हुई थी, जिसका उद्देश्य उपहास करना और चुभने वाली बात कहना था।
Step 3: Final Answer:
लक्ष्मण की वाणी व्यंग्यपूर्ण थी। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: व्यंग्य का अर्थ है ऐसी बात जो कहने में साधारण लगे पर उसका छिपा हुआ अर्थ ताना मारने वाला या उपहासपूर्ण हो।
परशुराम सभा में मौजूद राजाओं से क्या कह रहे हैं?
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि परशुराम ने सभा में उपस्थित राजाओं को क्या चेतावनी दी।
Step 2: Detailed Explanation:
काव्यांश की पंक्ति देखें:
"सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा॥"
इसका अर्थ है: "वह (धनुष तोड़ने वाला) इस राज-समाज से अलग होकर खड़ा हो जाए, नहीं तो (निर्दोष) सभी राजा मारे जाएँगे।"
यहाँ परशुराम स्पष्ट रूप से दोषी व्यक्ति को स्वयं सभा से अलग होने के लिए कह रहे हैं, ताकि बाकी निर्दोष राजाओं को दंड न मिले।
Step 3: Final Answer:
परशुराम राजाओं से कह रहे हैं कि दोषी व्यक्ति स्वयं सभा से अलग हो जाए। अतः, विकल्प (B) सही है।
Quick Tip: काव्यांश में दी गई चेतावनियों या आदेशों को ध्यान से पढ़ें। 'बिलगाउ' का अर्थ है 'अलग होना', जो सीधे उत्तर की ओर संकेत करता है।
निर्धारित कविताओं के आधार पर निम्नलिखित चार प्रश्नों में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए :
10(i).
योग-संदेश पाकर गोपियों की क्या मनोदशा हुई? उनकी भावनाओं को दो बिंदुओं में लिखिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में उद्धव द्वारा दिए गए योग-संदेश पर गोपियों की प्रतिक्रिया और उनकी मानसिक स्थिति के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
सूरदास के पदों के अनुसार, जब उद्धव गोपियों को ज्ञान और योग का संदेश देते हैं, तो:
उनकी विरहाग्नि और तीव्र हो जाती है। वे कहती हैं कि यह संदेश उनकी विरह की आग में घी का काम कर रहा है।
वे उद्धव से कहती हैं कि उनकी कृष्ण के आगमन की आशा ही उनके जीवन का आधार थी, लेकिन इस संदेश ने उस आशा को भी नष्ट कर दिया है।
वे योग-संदेश की तुलना 'कड़वी ककड़ी' से करती हैं जिसे वे अपना नहीं सकतीं। वे इसे एक ऐसी 'व्याधि' (बीमारी) बताती हैं जिसे उन्होंने पहले कभी नहीं देखा-सुना।
Step 3: Final Answer:
योग-संदेश सुनकर गोपियों की विरह-व्यथा बढ़ गई और वे निराश हो गईं। उन्होंने इस संदेश को अपने लिए अनुपयुक्त और कष्टकारी बताया।
Quick Tip: गोपियों की मनोदशा को व्यक्त करने के लिए कविता में प्रयुक्त उपमाओं और रूपकों (जैसे 'कड़वी ककड़ी', 'विरह की आग') का उल्लेख करना उत्तर को प्रभावी बनाता है।
बच्चे की मुस्कान और छवियों को कवि ने किन-किन बिंबों में व्यक्त किया है? किन्हीं दो बिंबों का वर्णन कीजिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में 'यह दंतुरित मुसकान' कविता में बच्चे की मुस्कान के लिए प्रयुक्त बिंबों (images) के बारे में पूछा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
कवि नागार्जुन ने बच्चे की मुस्कान के प्रभाव को दर्शाने के लिए कई सुंदर बिंबों का प्रयोग किया है:
मृतक में भी डाल देगी जान: यह एक दृश्य बिंब है जो मुस्कान के जीवनदायी प्रभाव को दर्शाता है।
धूलि-धूसर गात, झोंपड़ी में खिल रहे जलजात: यहाँ बच्चे के धूल सने शरीर को देखकर कवि को लगता है कि मानो उनकी झोंपड़ी में कमल खिल गया हो। यह एक सुंदर दृश्य बिंब है।
पिघलकर जल बन गया होगा कठिन पाषाण: यह एक स्पर्श और दृश्य बिंब है, जिसमें मुस्कान के प्रभाव से पत्थर जैसी कठोर वस्तु के पिघलने की कल्पना है।
Step 3: Final Answer:
कवि ने बच्चे की मुस्कान को मृतक में जान डालने वाली और झोंपड़ी में कमल खिलाने वाली शक्ति के रूप में चित्रित किया है।
Quick Tip: 'बिंब' का अर्थ है शब्दों के माध्यम से एक चित्र या छवि बनाना। उत्तर देते समय कविता की उन पंक्तियों को याद करें जो आपके मन में एक तस्वीर बनाती हैं।
'संगतकार' कविता के संदर्भ में लिखिए कि संगतकार जैसे व्यक्तियों के व्यक्तित्व से युवाओं को क्या प्रेरणा मिलती है। किन्हीं दो का वर्णन कीजिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि संगतकार के चरित्र से युवा पीढ़ी क्या सीख सकती है।
Step 2: Detailed Explanation:
'संगतकार' कविता में संगतकार मुख्य गायक की सफलता के पीछे का एक मौन और महत्वपूर्ण आधार है। उसके व्यक्तित्व से युवा यह सीख सकते हैं:
समर्पण और सहयोग की भावना: संगतकार अपनी प्रतिभा को मुख्य गायक की सफलता के लिए समर्पित कर देता है। यह टीम वर्क और सहयोग की सच्ची भावना सिखाता है।
श्रेय की इच्छा से मुक्ति: वह पर्दे के पीछे रहकर काम करता है और कभी मुख्य कलाकार से आगे निकलने की कोशिश नहीं करता। यह हमें सिखाता है कि महान कार्य बिना श्रेय की इच्छा के भी किए जा सकते हैं।
दूसरों को संबल देना: वह मुख्य गायक का स्वर बिखरने पर उसे सहारा देता है। इससे हमें दूसरों को उनके कठिन समय में सहारा देने की प्रेरणा मिलती है।
Step 3: Final Answer:
संगतकार के व्यक्तित्व से युवा निःस्वार्थ सहयोग, विनम्रता और दूसरों को सहारा देने की मानवीय प्रेरणा प्राप्त कर सकते हैं।
Quick Tip: 'प्रेरणा' या 'सीख' से संबंधित प्रश्नों में, पात्र के गुणों को पहचानें और बताएं कि वे गुण हमारे जीवन में कैसे उपयोगी हो सकते हैं।
फागुन की मनोहारिता मनुष्य के मन पर क्या प्रभाव डालती है? 'अट नहीं रही है' कविता के आधार पर लिखिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि फागुन के महीने की सुंदरता का मनुष्य के मन पर क्या असर होता है।
Step 2: Detailed Explanation:
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की कविता 'अट नहीं रही है' में फागुन के सौंदर्य का वर्णन है। इस सौंदर्य का मानव मन पर गहरा प्रभाव पड़ता है:
उल्लास और मस्ती: फागुन की सुंदरता मन में खुशी और उल्लास भर देती है। प्रकृति का कण-कण सौंदर्य से भरा होता है, जिसे देखकर मन भी प्रफुल्लित हो जाता है।
कल्पना की उड़ान: कविता की पंक्ति "तुम पर-पर कर देते हो, आँख हटाता हूँ तो हट नहीं रही है" दर्शाती है कि फागुन का सौंदर्य मन को कल्पना के पंख लगाकर उड़ने के लिए प्रेरित करता है।
एकाकार होने का भाव: मनुष्य का मन प्रकृति के सौंदर्य से इतना प्रभावित होता है कि वह उससे अपनी आँखें नहीं हटा पाता और उसके साथ एकाकार हो जाना चाहता है।
Step 3: Final Answer:
फागुन की सुंदरता मनुष्य के मन को आनंदित कर उसे कल्पनाशील बना देती है और वह प्रकृति के साथ उड़ान भरने को व्याकुल हो उठता है।
Quick Tip: प्रकृति पर आधारित कविताओं में, कवि अक्सर प्रकृति के प्रभावों को मानवीय भावनाओं के माध्यम से व्यक्त करते हैं। इन संबंधों को पहचानना उत्तर लिखने में सहायक होता है।
पूरक पाठ्य-पुस्तक के निर्धारित पाठों पर आधारित निम्नलिखित तीन प्रश्नों में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर लगभग 50-60 शब्दों में लिखिए :
11(i).
'माता का अँचल' पाठ से बच्चों के किन्हीं दो खेलों और उनके परिवेश का अंतःसंबंध स्पष्ट करते हुए टिप्पणी लिखिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में 'माता का अँचल' पाठ के आधार पर बच्चों के खेलों और उनके आस-पास के माहौल (परिवेश) के बीच के गहरे संबंध को स्पष्ट करने के लिए कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
पाठ में वर्णित बच्चों के खेल पूरी तरह से उनके ग्रामीण परिवेश पर आधारित थे। वे आधुनिक खिलौनों से नहीं, बल्कि प्रकृति और घर में मौजूद साधारण वस्तुओं से खेलते थे।
उदाहरण 1 (घरौंदा बनाना): बच्चे घर के चबूतरे पर धूल-मिट्टी, तिनकों, पत्तों और दीयों जैसी चीजों का उपयोग करके घर बनाने, भोज का आयोजन करने और बारात निकालने का खेल खेलते थे। यह उनके सामाजिक परिवेश का प्रतिबिंब था।
उदाहरण 2 (खेती का खेल): वे खेतों में जाकर खेती करने का अभिनय करते थे, जिससे पता चलता है कि उनका खेल उनके आस-पास होने वाली कृषि गतिविधियों से प्रभावित था।
इन खेलों से यह स्पष्ट होता है कि बच्चों की कल्पनाशीलता और रचनात्मकता उनके परिवेश से ही पोषित होती थी और उनके खेल उनके जीवन से अलग नहीं थे।
Step 3: Final Answer:
पाठ के बच्चों के खेल, जैसे धूल की मिठाई बनाना या खेत में चिड़ियाँ पकड़ना, उनके ग्रामीण परिवेश से ही उत्पन्न होते थे। वे अपने आस-पास की वस्तुओं और गतिविधियों को ही अपने खेल का आधार बनाते थे, जो उनके और परिवेश के बीच गहरे अंतःसंबंध को दर्शाता है।
Quick Tip: 'अंतःसंबंध' वाले प्रश्नों में, दो चीजों के बीच के आपसी प्रभाव और निर्भरता को उदाहरण सहित स्पष्ट करना चाहिए।
'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति की विराटता का दर्शन है।' - पाठ के दृश्यों के आधार पर इसे स्पष्ट करते हुए लिखिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न में पूछा गया है कि 'साना-साना हाथ जोड़ि...' पाठ में प्रकृति का विशाल और भव्य रूप कैसे दिखाया गया है। इसे पाठ के दृश्यों के माध्यम से स्पष्ट करना है।
Step 2: Detailed Explanation:
पाठ में प्रकृति की विराटता के दर्शन कई दृश्यों में होते हैं:
हिमालय का विशाल रूप: जैसे-जैसे लेखिका की जीप ऊपर चढ़ती है, पहाड़ और विशाल होते जाते हैं और घाटियाँ गहरी होती जाती हैं। यह विस्तार प्रकृति की विराटता को दर्शाता है।
झरनों का संगीत: 'सेवन सिस्टर्स वॉटरफॉल' जैसे झरने अपने पूरे वेग से बहते हैं, उनका संगीत लेखिका को जीवन की शक्ति का एहसास कराता है।
हिमपात का दृश्य: 'कटाओ' में बर्फ से ढके पहाड़ों को देखकर लेखिका को लगता है कि जैसे वे किसी परी-कथा की दुनिया में आ गई हों। चारों ओर बिखरी असीम शांति और सफेदी प्रकृति की भव्यता और दिव्यता का प्रतीक है।
इन दृश्यों को देखकर लेखिका को अपने अस्तित्व की लघुता का एहसास होता है और वे प्रकृति के सामने नतमस्तक हो जाती हैं।
Step 3: Final Answer:
पाठ में हिमालय के विशाल पर्वत, गहरी घाटियाँ, शक्तिशाली झरने और कटाओ का बर्फीला सौंदर्य प्रकृति की विराटता को दर्शाते हैं। इन दृश्यों को देखकर लेखिका को अपनी क्षुद्रता का एहसास होता है और वे प्रकृति की महानता के आगे श्रद्धावनत हो जाती हैं।
Quick Tip: 'विराटता' का अर्थ केवल बड़ा आकार नहीं, बल्कि भव्यता, दिव्यता और शक्ति भी है। उत्तर में इन सभी पहलुओं को शामिल करने का प्रयास करें।
'मैं क्यों लिखता हूँ?' पाठ के आधार पर प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति को स्पष्ट करते हुए लेखक पर पड़ने वाले इनके प्रभाव को लिखिए। आप दोनों में से किसे महत्त्व देते हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।
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Step 1: Understanding the Question:
प्रश्न के तीन भाग हैं: (1) प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति में अंतर स्पष्ट करना। (2) लेखक पर इनके प्रभाव को बताना। (3) दोनों में से किसे अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं, यह तर्क सहित बताना।
Step 2: Detailed Explanation:
प्रत्यक्ष अनुभव और अनुभूति में अंतर: लेखक के अनुसार, प्रत्यक्ष अनुभव केवल घटना को अपनी आँखों से देखना या उसके बारे में जानकारी प्राप्त करना है। यह बाहरी यथार्थ है। इसके विपरीत, अनुभूति उस अनुभव का भीतरीकरण है, जब वह अनुभव हमारी संवेदनाओं का हिस्सा बन जाता है और हमें भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है।
लेखक पर प्रभाव: लेखक ने हिरोशिमा के बारे में पढ़ा और वहाँ के दृश्य देखे (प्रत्यक्ष अनुभव), लेकिन उन्हें लिखने की प्रेरणा तब मिली जब उन्होंने जले हुए पत्थर पर मानव की छाया देखी। उस छाया ने उनके भीतर एक तीव्र वेदना (अनुभूति) जगाई, जिसने उन्हें कविता लिखने के लिए विवश कर दिया।
किसका महत्त्व अधिक है: लेखक के अनुसार, अनुभूति का महत्त्व अधिक है। केवल अनुभव लेखन के लिए पर्याप्त नहीं है। जब तक अनुभव अनुभूति के स्तर तक नहीं पहुँचता, वह रचना का रूप नहीं ले पाता। अनुभूति ही वह आंतरिक दबाव पैदा करती है जो एक लेखक को लिखने के लिए बाध्य करता है। इसलिए, मैं भी अनुभूति को अधिक महत्त्वपूर्ण मानता हूँ क्योंकि यही रचनात्मकता का मूल स्रोत है।
Step 3: Final Answer:
प्रत्यक्ष अनुभव घटना को जानना है, जबकि अनुभूति उस अनुभव को गहराई से महसूस करना है। लेखक पर अनुभूति का ही गहरा प्रभाव पड़ा, जिसने उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया। मैं अनुभूति को अधिक महत्व देता हूँ, क्योंकि यह अनुभव को संवेदना से जोड़कर उसे एक कलाकृति में बदलने की शक्ति रखती है।
Quick Tip: इस प्रकार के प्रश्नों में, पाठ से उदाहरण देकर अपनी बात को प्रमाणित करना आवश्यक है। हिरोशिमा के पत्थर पर बनी मनुष्य की छाया का उदाहरण अनुभूति को समझाने के लिए सबसे सशक्त है।
निम्नलिखित दो प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर लिखिए।
12(i).
'अंगदान है महादान' – विषय पर एक जनहितकारी आकर्षक विज्ञापन लोगों को प्रोत्साहित करने हेतु लगभग 40 शब्दों में तैयार कीजिए।
एक फैसला जो बचा सकता है कई ज़िंदगियाँ!}
जाते-जाते दुनिया को जीवन का उपहार दें।
आपके बाद भी आपकी आँखें दुनिया देखें, आपका दिल धड़के।
आज ही अंगदान करने का संकल्प लें!}
अधिक जानकारी के लिए नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में 'अंगदान' जैसे गंभीर विषय पर लोगों को जागरूक और प्रोत्साहित करने के लिए एक आकर्षक विज्ञापन बनाने को कहा गया है, जिसकी शब्द सीमा लगभग 40 शब्द है।
Step 2: Detailed Explanation:
एक प्रभावी विज्ञापन बनाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
आकर्षक शीर्षक: विज्ञापन का शीर्षक ऐसा होना चाहिए जो तुरंत ध्यान खींचे, जैसे 'अंगदान - महादान'।
प्रेरणादायक संदेश: विज्ञापन की भाषा भावनात्मक और प्रेरणा देने वाली होनी चाहिए, जैसे "जाते-जाते दुनिया को जीवन का उपहार दें।"
स्पष्ट उद्देश्य: विज्ञापन का उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए, जो यहाँ अंगदान के लिए संकल्प लेने का आग्रह करना है।
आवश्यक जानकारी (वैकल्पिक): अंत में एक संक्षिप्त जानकारी दी जा सकती है, जैसे किससे संपर्क करना है।
प्रस्तुतिकरण: विज्ञापन को बॉक्स में बनाना उसे और आकर्षक बनाता है।
ऊपर दिया गया उत्तर इन सभी मानदंडों को पूरा करता है।
Quick Tip: विज्ञापन लेखन में कम शब्दों में अधिक बात कहने का प्रयास करें। आकर्षक नारों, चित्रों (यदि संभव हो) और एक स्पष्ट संदेश का उपयोग करें। विज्ञापन को हमेशा एक बॉक्स में प्रस्तुत करें।
आपकी माताजी अपने कार्यालय में 'वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी' चुनी गई हैं। उन्हें लगभग 40 शब्दों में एक बधाई संदेश लिखिए।
प्रिय माँ,
आपको कार्यालय में 'वर्ष की सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी' चुने जाने पर हार्दिक बधाई! आपकी मेहनत और लगन ने हमेशा हमें प्रेरित किया है। हमें आप पर बहुत गर्व है। आपके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ।
आपका प्रिय पुत्र/पुत्री,
क.ख.ग.
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में माताजी को उनकी व्यावसायिक उपलब्धि ('सर्वश्रेष्ठ कर्मचारी' चुने जाने) पर लगभग 40 शब्दों में एक औपचारिक और स्नेहपूर्ण बधाई संदेश लिखने को कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
एक अच्छे बधाई संदेश की संरचना इस प्रकार होनी चाहिए:
आरंभ: संदेश का आरंभ अभिवादन (जैसे 'प्रिय माँ') से करें।
बधाई का कारण: स्पष्ट रूप से उस उपलब्धि का उल्लेख करें जिसके लिए बधाई दी जा रही है।
भावनाओं की अभिव्यक्ति: अपनी खुशी और गर्व की भावना को व्यक्त करें।
शुभकामनाएँ: भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दें।
समापन: अंत में अपना संबंध और नाम लिखें।
प्रस्तुत उत्तर संदेश लेखन के इन सभी आवश्यक तत्वों को संक्षिप्त और प्रभावी ढंग से शामिल करता है।
Quick Tip: बधाई संदेश लिखते समय भाषा सरल, स्नेहपूर्ण और सम्मानजनक होनी चाहिए। संदेश संक्षिप्त और सारगर्भित हो। संदेश को बॉक्स में लिखना एक अच्छा प्रस्तुतिकरण माना जाता है।
निम्नलिखित दो प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर लिखिए।
13(i).
आपका नाम राधिका/राघव है और आप जिस क्षेत्र में रहते हैं वहाँ आपराधिक घटनाएँ बढ़ रही हैं। अपने क्षेत्र के थानाध्यक्ष को लगभग 80 शब्दों में ई-मेल लिखकर समस्याओं से अवगत कराते हुए सहायता का अनुरोध कीजिए।
प्रेषक (From):} radhika/raghav@email.com
प्रेषिती (To):} sho.xyzarea@police.in
विषय (Subject):} क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं के संबंध में।
महोदय, सविनय निवेदन है कि मैं, राधिका/राघव, आदर्श नगर क्षेत्र का निवासी हूँ। पिछले कुछ महीनों से हमारे क्षेत्र में चोरी, लूटपाट और छीना-झपटी जैसी आपराधिक घटनाएँ बहुत बढ़ गई हैं, जिससे निवासियों में भय का माहौल है। शाम के बाद महिलाओं और बुजुर्गों का घर से निकलना असुरक्षित हो गया है। अतः आपसे अनुरोध है कि कृपया इस समस्या पर तत्काल ध्यान दें और क्षेत्र में पुलिस गश्त बढ़ाने की कृपा करें। सधन्यवाद। भवदीया/भवदीय,
राधिका/राघव
निवासी, आदर्श नगर।
View Solution
Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में अपने क्षेत्र में बढ़ती आपराधिक घटनाओं की सूचना देते हुए और सहायता का अनुरोध करते हुए थानाध्यक्ष (S.H.O.) को लगभग 80 शब्दों में एक औपचारिक ई-मेल लिखने के लिए कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
एक औपचारिक ई-मेल का प्रारूप इस प्रकार है:
प्रेषक, प्रेषिती और विषय: ई-मेल की शुरुआत में प्रेषक (From), प्रेषिती (To) और एक स्पष्ट विषय (Subject) लिखना अनिवार्य है।
संबोधन: औपचारिक संबोधन (जैसे 'महोदय') का प्रयोग करें।
विषय-वस्तु: पहले अनुच्छेद में अपना परिचय और समस्या का संक्षिप्त वर्णन करें। दूसरे अनुच्छेद में समस्या के प्रभाव और उससे उत्पन्न भय का उल्लेख करें।
अनुरोध और समापन: अंत में स्पष्ट रूप से अनुरोध करें (जैसे पुलिस गश्त बढ़ाना) और धन्यवाद के साथ औपचारिक समापन (भवदीया/भवदीय) करें।
प्रस्तुत उत्तर ई-मेल के सही प्रारूप और औपचारिक भाषा का पालन करता है।
Quick Tip: ई-मेल लेखन में विषय (Subject) बहुत महत्वपूर्ण होता है। इसे संक्षिप्त और स्पष्ट रखें ताकि प्राप्तकर्ता को ई-मेल का उद्देश्य तुरंत समझ में आ जाए। भाषा औपचारिक और विनम्र होनी चाहिए।
आपका नाम समीर/समायरा है। अ.ब.स. विश्वविद्यालय से आपने जर्मनी भाषा में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। क.ख.ग. शिक्षण संस्थान में जर्मन-शिक्षक पद के लिए आवेदन करने हेतु लगभग 80 शब्दों में अपना एक स्ववृत्त तैयार कीजिए।
स्ववृत्त} पद का नाम:} जर्मन-शिक्षक
आवेदक का नाम:} समीर/समायरा
पिता का नाम:} श्री रमेश कुमार
जन्म तिथि:} 15/04/1998
वर्तमान पता:} 123, गांधी नगर, नई दिल्ली
ई-मेल:} samir/samayra@email.com
मोबाइल नंबर:} 9876543210
शैक्षणिक योग्यताएँ:} \begin{tabular}{|l|l|l|l|} \hline परीक्षा} & बोर्ड/विश्वविद्यालय} & वर्ष} & अंक (%)}
\hline बी.ए. (जर्मन) & अ.ब.स. विश्वविद्यालय & 2020 & 75%
बारहवीं & सी.बी.एस.ई. & 2017 & 85%
\hline \end{tabular} अन्य योग्यताएँ:} कंप्यूटर का अच्छा ज्ञान, शिक्षण में एक वर्ष का अनुभव।
घोषणा:} मैं प्रमाणित करता/करती हूँ कि उपरोक्त सभी सूचनाएँ सत्य हैं।
दिनांक:} 20/10/2023 \hfill हस्ताक्षर:} समीर/समायरा
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Step 1: Understanding the Question:
इस प्रश्न में एक जर्मन-शिक्षक के पद के लिए आवेदन करने हेतु लगभग 80 शब्दों में एक संक्षिप्त स्ववृत्त (Bio-data) तैयार करने को कहा गया है।
Step 2: Detailed Explanation:
एक प्रभावी स्ववृत्त में निम्नलिखित खंड होने चाहिए:
व्यक्तिगत जानकारी: नाम, पिता का नाम, जन्म तिथि, पता और संपर्क विवरण।
शैक्षणिक योग्यता: इसे एक तालिका (Table) में प्रस्तुत करना सबसे अच्छा तरीका है, जिसमें परीक्षा, बोर्ड/विश्वविद्यालय, उत्तीर्ण होने का वर्ष और प्राप्त अंक शामिल हों।
अन्य योग्यताएँ/अनुभव: पद से संबंधित कोई अन्य कौशल या अनुभव, जैसे यहाँ शिक्षण अनुभव का उल्लेख किया गया है।
घोषणा, दिनांक और हस्ताक्षर: अंत में एक घोषणा होती है कि दी गई जानकारी सही है, साथ ही दिनांक और हस्ताक्षर के लिए स्थान होता है।
यह उत्तर एक संक्षिप्त और सुव्यवस्थित स्ववृत्त का उचित उदाहरण है।
Quick Tip: स्ववृत्त (Bio-data) में जानकारी को बिंदुओं और तालिकाओं में प्रस्तुत करना चाहिए। इससे यह पढ़ने में आसान और व्यवस्थित लगता है। केवल वही जानकारी दें जो पद के लिए प्रासंगिक हो।
आप गगनदीप सिंह/गगनदीप कौर हैं। आपकी माँ कार्यालय के काम से कुछ दिनों के लिए दूसरे शहर गई हैं और उनकी अनुपस्थिति में आपको घर की व्यवस्था सँभालनी पड़ रही है। अपने अनुभव और कठिनाइयों को व्यक्त करते हुए उन्हें 100 शब्दों में पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक: 20 अक्टूबर, 2023
आदरणीय माताजी,
सादर चरण स्पर्श। आशा है आप वहाँ स्वस्थ होंगी। मैं भी यहाँ ठीक हूँ। आपके जाने के बाद घर की पूरी ज़िम्मेदारी मुझ पर आ गई है। सुबह उठकर नाश्ता बनाने से लेकर रात के खाने तक, सारे काम करते हुए आपकी बहुत याद आती है। अब मुझे एहसास हो रहा है कि आप अकेले कितना काम करती हैं और कभी शिकायत भी नहीं करतीं। घर संभालना सचमुच बहुत कठिन है। हालांकि, इस अनुभव से मैं अधिक ज़िम्मेदार बन गया/गई हूँ। आप अपना काम खत्म करके जल्दी लौट आइएगा। आपकी प्रिय पुत्री/आपका प्रिय पुत्र,
गगनदीप कौर/गगनदीप सिंह
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Step 1: Understanding the Question:
यह एक अनौपचारिक पत्र है। इसमें अपनी माँ को उनकी अनुपस्थिति में घर सँभालने के अपने अनुभवों और कठिनाइयों के बारे में बताना है। शब्द सीमा 100 शब्द है।
Step 2: Detailed Explanation:
अनौपचारिक पत्र की संरचना:
पता और दिनांक: सबसे ऊपर प्रेषक का पता और दिनांक लिखा जाता है।
संबोधन: स्नेहपूर्ण और आदरसूचक संबोधन (जैसे 'आदरणीय माताजी') का प्रयोग करें।
विषय-वस्तु: पत्र की शुरुआत में उनका हाल-चाल पूछें। फिर अपने अनुभव का वर्णन करें - क्या-क्या काम करने पड़ रहे हैं, क्या कठिनाइयाँ आ रही हैं। अपनी भावनाओं (जैसे माँ की याद आना, उनके काम की सराहना) को व्यक्त करें। इस अनुभव से मिली सीख का भी उल्लेख कर सकते हैं।
समापन: अंत में स्नेहपूर्ण समापन (जैसे 'आपकी प्रिय पुत्री') और अपना नाम लिखें।
यह उत्तर पत्र के सही प्रारूप का पालन करता है और भावनाओं को सरलता से व्यक्त करता है।
Quick Tip: अनौपचारिक पत्रों में भाषा आत्मीय और सरल होनी चाहिए। अपनी भावनाओं को सहजता से व्यक्त करें। पत्र के प्रारूप (पता, दिनांक, संबोधन, समापन) का सही से पालन करें।
आप गगनदीप सिंह/गगनदीप कौर हैं। सार्वजनिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन देते हुए तथा इसके उपयोग के पक्ष में पर्याप्त तर्क देते हुए 'दैनिक हिंदी' अख़बार के संपादक को लगभग 100 शब्दों में पत्र लिखिए।
परीक्षा भवन,
नई दिल्ली।
दिनांक: 20 अक्टूबर, 2023
सेवा में,
संपादक महोदय,
दैनिक हिंदी,
नई दिल्ली।
विषय: सार्वजनिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहन देने हेतु। महोदय, मैं आपके प्रतिष्ठित समाचार-पत्र के माध्यम से लोगों का ध्यान सार्वजनिक वाहनों के उपयोग की आवश्यकता की ओर आकर्षित करना चाहता/चाहती हूँ। आजकल निजी वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण सड़कों पर ट्रैफिक जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाएँ बढ़ गई हैं। यदि हम बस, मेट्रो जैसे सार्वजनिक वाहनों का अधिक उपयोग करें, तो इन समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे न केवल ईंधन और धन की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण भी स्वच्छ रहेगा। अतः मेरा आपसे अनुरोध है कि आप इस विषय पर एक लेख प्रकाशित कर लोगों को जागरूक करने की कृपा करें। सधन्यवाद। भवदीय/भवदीया,
गगनदीप सिंह/गगनदीप कौर
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Step 1: Understanding the Question:
यह एक औपचारिक पत्र (संपादक को पत्र) है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा देना और इसके पक्ष में तर्क प्रस्तुत करना है। शब्द सीमा 100 शब्द है।
Step 2: Detailed Explanation:
संपादकीय पत्र की संरचना:
प्रेषक का पता और दिनांक: सबसे ऊपर।
प्राप्तकर्ता का पता: 'सेवा में,' के बाद संपादक का पद और समाचार-पत्र का नाम-पता।
विषय: पत्र का उद्देश्य स्पष्ट करने वाला संक्षिप्त विषय।
संबोधन: 'महोदय' जैसा औपचारिक संबोधन।
विषय-वस्तु: पहले अनुच्छेद में समाचार-पत्र का उल्लेख करते हुए समस्या या विषय का परिचय दें। दूसरे अनुच्छेद में विषय के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करें (जैसे प्रदूषण में कमी, ट्रैफिक में कमी, धन की बचत)।
अनुरोध और समापन: अंत में संपादक से लेख प्रकाशित करने का अनुरोध करें और धन्यवाद सहित औपचारिक समापन (भवदीय/भवदीया) करें।
यह उत्तर एक आदर्श संपादकीय पत्र के प्रारूप और विषय-वस्तु का पालन करता है।
Quick Tip: संपादक को पत्र लिखते समय, समस्या बताने के साथ-साथ उसके समाधान के लिए रचनात्मक सुझाव देना भी महत्वपूर्ण होता है। भाषा संक्षिप्त, विनम्र और सारगर्भित होनी चाहिए।
निम्नलिखित तीन विषयों में से किसी एक विषय पर दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखिए :
(i).
प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा
संकेत-बिंदु: • प्रकृति और मनुष्य का संबंध • प्रकृति के साथ खिलवाड़ के उदाहरण • प्रकृति की रक्षा के उपाय
प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा} प्रकृति और मनुष्य का संबंध अटूट है। मनुष्य के जीवन का आधार प्रकृति ही है; हमें भोजन, जल, वायु सब कुछ प्रकृति से ही मिलता है। प्रकृति माँ के समान हमारा पालन-पोषण करती है, परंतु मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए उसी माँ का विनाश कर रहा है। औद्योगिकीकरण और विकास की अंधी दौड़ में हम प्रकृति के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। वनों की अंधाधुंध कटाई, नदियों का प्रदूषण, और वायुमंडल में जहरीली गैसों का उत्सर्जन इसके ज्वलंत उदाहरण हैं। इस खिलवाड़ का दुष्परिणाम हमें बाढ़, सूखा, जलवायु परिवर्तन और नई-नई बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। यदि हम अपनी सुरक्षा चाहते हैं, तो हमें प्रकृति की रक्षा करनी ही होगी। इसके लिए हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए, जल स्रोतों को स्वच्छ रखना चाहिए और प्रदूषण फैलाने वाले साधनों का उपयोग कम करना चाहिए। प्रकृति को बचाकर ही हम अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकते हैं।
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए संकेत-बिंदुओं का उपयोग करते हुए 'प्रकृति की रक्षा : अपनी सुरक्षा' विषय पर 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखना है।
Step 2: Detailed Explanation:
अनुच्छेद की संरचना:
आरंभ (प्रकृति और मनुष्य का संबंध): अनुच्छेद की शुरुआत मनुष्य और प्रकृति के बीच के गहरे और जीवनदायी संबंध को बताकर की गई है।
मध्य भाग (प्रकृति के साथ खिलवाड़): इसमें संकेत-बिंदु के अनुसार वनों की कटाई और प्रदूषण जैसे उदाहरणों से यह बताया गया है कि मनुष्य कैसे प्रकृति को नुकसान पहुँचा रहा है।
समापन (प्रकृति की रक्षा के उपाय): अंत में, प्रकृति की रक्षा के लिए व्यावहारिक उपाय (जैसे पेड़ लगाना, प्रदूषण कम करना) सुझाए गए हैं और यह निष्कर्ष दिया गया है कि प्रकृति की रक्षा में ही हमारी सुरक्षा निहित है।
यह अनुच्छेद सभी संकेत-बिंदुओं को समाहित करते हुए एक तार्किक प्रवाह में लिखा गया है।
Quick Tip: अनुच्छेद लेखन में दिए गए सभी संकेत-बिंदुओं को शामिल करना अनिवार्य है। अपने विचारों को एक क्रम में प्रस्तुत करें और वाक्यों को आपस में जोड़कर एक सुसंगत पैराग्राफ बनाएँ।
हमारे बुजुर्ग : हमारा सम्मान
संकेत-बिंदु: • समाज में बुजुर्गों की वर्तमान स्थिति • अनुभवों का खजाना • बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य
हमारे बुजुर्ग : हमारा सम्मान} हमारे बुजुर्ग परिवार और समाज की नींव होते हैं, परंतु आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई है। एकल परिवारों के चलन और युवा पीढ़ी की व्यस्तता के कारण वे अक्सर अकेलापन और उपेक्षा महसूस करते हैं। यह दुखद है, क्योंकि हमारे बुजुर्ग अनुभवों का चलता-फिरता खजाना हैं। उन्होंने जीवन के जो उतार-चढ़ाव देखे हैं, उनका ज्ञान किसी भी किताब में नहीं मिल सकता। उनकी सलाह और अनुभव हमारे जीवन-पथ को सुगम बना सकते हैं। बुजुर्गों के प्रति हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम उन्हें सम्मान और प्रेम दें। हमें उनके साथ समय बिताना चाहिए, उनकी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए और उनकी स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का ख्याल रखना चाहिए। उन्हें यह महसूस कराना हमारी ज़िम्मेदारी है कि वे हम पर बोझ नहीं, बल्कि हमारा संबल और अभिमान हैं। इसी में एक स्वस्थ समाज का निर्माण निहित है।
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए संकेत-बिंदुओं के आधार पर 'हमारे बुजुर्ग : हमारा सम्मान' विषय पर लगभग 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखना है।
Step 2: Detailed Explanation:
अनुच्छेद की संरचना:
आरंभ (समाज में बुजुर्गों की वर्तमान स्थिति): अनुच्छेद की शुरुआत समाज में बुजुर्गों की मौजूदा स्थिति और उनके अकेलेपन की समस्या को रेखांकित करते हुए की गई है।
मध्य भाग (अनुभवों का खजाना): इसमें बताया गया है कि बुजुर्ग ज्ञान और अनुभव के भंडार होते हैं और उनका अनुभव हमारे लिए कितना मूल्यवान है।
समापन (बुजुर्गों के प्रति कर्तव्य): अंत में, युवा पीढ़ी के कर्तव्यों (सम्मान, देखभाल, साथ देना) पर प्रकाश डाला गया है और यह बताया गया है कि उनका सम्मान करना क्यों आवश्यक है।
यह अनुच्छेद दिए गए सभी संकेत-बिंदुओं को क्रमबद्ध तरीके से विकसित करता है।
Quick Tip: अनुच्छेद की शुरुआत विषय से संबंधित एक प्रभावशाली पंक्ति से करें। प्रत्येक संकेत-बिंदु पर दो-तीन वाक्य लिखें ताकि अनुच्छेद संतुलित और पूर्ण लगे।
बढ़ते साइबर अपराध
संकेत-बिंदु: • अर्थ और प्रकार • कारण • रोकथाम के उपाय
बढ़ते साइबर अपराध} इंटरनेट और कंप्यूटर की मदद से किए जाने वाले अपराधों को साइबर अपराध कहा जाता है। आज के डिजिटल युग में यह एक गंभीर समस्या बन चुका है। इसके कई प्रकार हैं, जैसे ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी, फिशिंग, हैकिंग, और सोशल मीडिया पर किसी को बदनाम करना। साइबर अपराध बढ़ने के कई कारण हैं। इंटरनेट पर अपनी पहचान छिपाने की सुविधा, धन का लालच, और लोगों में तकनीकी जागरूकता की कमी अपराधियों को अपराध करने के लिए प्रोत्साहित करती है। इस बढ़ते खतरे से बचने के लिए हमें रोकथाम के उपाय अपनाने चाहिए। हमें अपने पासवर्ड मजबूत बनाने चाहिए और किसी से साझा नहीं करने चाहिए। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचना चाहिए और अपने कंप्यूटर में एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर का उपयोग करना चाहिए। इसके अलावा, सरकार को भी कठोर कानून बनाने और साइबर पुलिस को और अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता है ताकि अपराधियों को पकड़ा जा सके और लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
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Step 1: Understanding the Question:
दिए गए संकेत-बिंदुओं का उपयोग करते हुए 'बढ़ते साइबर अपराध' विषय पर 120 शब्दों में एक अनुच्छेद लिखना है।
Step 2: Detailed Explanation:
अनुच्छेद की संरचना:
आरंभ (अर्थ और प्रकार): अनुच्छेद की शुरुआत साइबर अपराध को परिभाषित करते हुए और उसके कुछ मुख्य प्रकारों (जैसे हैकिंग, फिशिंग) का उल्लेख करते हुए की गई है।
मध्य भाग (कारण): इसमें साइबर अपराध के बढ़ने के पीछे के कारणों, जैसे जागरूकता की कमी और लालच, पर प्रकाश डाला गया है।
समापन (रोकथाम के उपाय): अंत में, व्यक्तिगत स्तर (मजबूत पासवर्ड) और सरकारी स्तर (कठोर कानून) पर रोकथाम के उपायों का सुझाव दिया गया है।
यह अनुच्छेद विषय के सभी पहलुओं को तार्किक रूप से प्रस्तुत करता है।
Quick Tip: किसी समस्या पर अनुच्छेद लिखते समय, संरचना का पालन करें: समस्या क्या है (परिभाषा), समस्या क्यों है (कारण), और समस्या का समाधान क्या है (उपाय)। इससे आपका लेखन व्यवस्थित रहेगा।







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