UP B.Ed JEE 2025 Question Paper with Solutions PDF is available for download here. The Uttar Pradesh Bachelor of Education Joint Entrance Examination for 2025 was conducted by Bundelkhand University, Jhansi on June 1, 2025 Shift 1 from 9 am to 12 pm and Shift 2 from 2 pm to 5 pm. UP B.Ed. JEE Question Paper 2025 consists of 200 MCQ-based questions divided into four sections, in total carrying 2 marks each to be attempted in the duration of 3 hours. No negative marking for incorrect answers.
UP B.Ed. JEE 2025 Question Paper with Solutions
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मनार की खाड़ी किन दो देशों के बीच है?
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मनार की खाड़ी, जो भारतीय उपमहाद्वीप के दक्षिणी हिस्से में स्थित है, भारत और श्रीलंका के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण जलक्षेत्र है। यह खाड़ी भारत के तमिलनाडु राज्य के दक्षिणी तट से लेकर श्रीलंका के उत्तरपूर्वी सिरे तक फैली हुई है। यह खाड़ी भारतीय महासागर का हिस्सा है और इसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है।
मनार की खाड़ी को एक महत्वपूर्ण जैविक क्षेत्र माना जाता है, क्योंकि यहाँ पर कई प्रकार के प्रवाल भित्तियाँ (coral reefs) और समुद्री जीवन की समृद्ध प्रजातियाँ पाई जाती हैं। यह क्षेत्र विशेष रूप से जलजीवों और पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण आवास स्थल है। साथ ही, यह खाड़ी मछली पालन और समुद्री संसाधनों के लिए भी अहम है।
इसके अलावा, मनार की खाड़ी का पर्यावरणीय महत्व भी है, क्योंकि यह क्षेत्र प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से प्रभावित हो रहा है। यहां की जलवायु और पारिस्थितिकी को बचाने के लिए कई पर्यावरणीय संरक्षण प्रयास किए जा रहे हैं।
मनार की खाड़ी का ऐतिहासिक महत्व भी है, क्योंकि यह प्राचीन काल में समुद्री मार्ग के रूप में उपयोग होती थी। व्यापार, संस्कृति और धर्म के प्रसार के लिए यह क्षेत्र महत्वपूर्ण था। Quick Tip: मनार की खाड़ी भारत और श्रीलंका के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण जलक्षेत्र है, जिसे जैविक विविधता, मछली पालन और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है।
फाह्यान किसके शासन काल में भारत आया?
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यह प्रश्न प्रसिद्ध चीनी यात्री फाह्यान (Fa-Hien) के बारे में है, जो चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल में भारत आए थे। फाह्यान का भारत यात्रा 5वीं शताब्दी में हुआ था, विशेष रूप से 400 ईस्वी के आस-पास। उनका मुख्य उद्देश्य बौद्ध धर्म के ग्रंथों को एकत्र करना और बौद्ध धर्म की प्रथाओं के बारे में अध्ययन करना था।
फाह्यान की यात्रा के कई महत्वपूर्ण कारण थे:
- ऐतिहासिक महत्व: फाह्यान के यात्रा-वृत्तांत से गुप्त काल में बौद्ध धर्म और भारतीय उपमहाद्वीप की स्थिति पर मूल्यवान जानकारी मिलती है। उनके अवलोकन भारत के बारे में एक विदेशी यात्री द्वारा किए गए सबसे पहले और सबसे विस्तृत विवरणों में से एक हैं।
- बौद्ध धर्म का प्रभाव: फाह्यान की यात्रा ने भारत में बौद्ध धर्म के विकास को उजागर किया, विशेष रूप से गुप्त शासकों के तहत, जो इस धर्म के प्रति अपनी सहायता के लिए प्रसिद्ध थे। गुप्त साम्राज्य, विशेष रूप से चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन में, भारतीय संस्कृति, कला और धर्म का स्वर्ण युग माना जाता है।
- फाह्यान के लेखन: उनके यात्रा-वृत्तांत, "A Record of Buddhistic Kingdoms", ने न केवल उनकी यात्रा का वर्णन किया, बल्कि 5वीं शताब्दी में भारत के समाज, अर्थव्यवस्था और धार्मिक प्रथाओं के बारे में भी मूल्यवान जानकारी प्रदान की। इसमें पाटलिपुत्र (आज का पटना) जैसे महत्वपूर्ण स्थानों का उल्लेख किया गया है, जहां उन्होंने बौद्ध समुदाय को फलते-फूलते देखा।
चंद्रगुप्त द्वितीय, गुप्त साम्राज्य के शासक, अपने सैन्य अभियानों, सांस्कृतिक उपलब्धियों और धार्मिक एवं शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रसिद्ध थे, जो फाह्यान की यात्रा के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करते थे। इस समृद्ध समय में फाह्यान की यात्रा ने उन्हें विभिन्न बौद्ध केंद्रों का अध्ययन करने का अवसर दिया, विशेष रूप से नालंदा, जो बाद में बौद्ध धर्म के अध्ययन के लिए प्रसिद्ध केंद्र बन गया।
Quick Tip: फाह्यान की यात्रा भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण घटना है क्योंकि यह गुप्त काल के धार्मिक और सांस्कृतिक विकास, विशेष रूप से \textbf{बौद्ध धर्म} में महत्वपूर्ण योगदान को उजागर करती है।
सेना दिवस कब मनाया जाता है?
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सेना दिवस, जिसे भारतीय सेना के योगदान और बलिदान को सम्मानित करने के रूप में मनाया जाता है, हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सेना की स्थापना के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
15 जनवरी 1949 को, भारतीय सेना के पहले प्रमुख, जनरल कुंवर कृष्ण सिंह ने भारतीय सेना की कमान संभाली थी। यही कारण है कि यह दिन भारतीय सेना के योगदान और समर्पण को याद करने के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
इस दिन, देशभर में विभिन्न आयोजनों के द्वारा भारतीय सेना के बलिदानों और कर्तव्यों को सलाम किया जाता है। इस दिन सैनिकों की वीरता और भारतीय सेना की परंपराओं को मनाने के लिए कई कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जैसे कि परेड, फ्लैग होस्टिंग, और शहीदों की याद में श्रद्धांजलि अर्पित करना। Quick Tip: सेना दिवस 15 जनवरी को मनाया जाता है, जो भारतीय सेना की स्थापना और उसकी वीरता को सम्मानित करने के लिए होता है।
2024 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार किसे दिया गया है?
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2024 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार मिथुन चक्रवर्ती को दिया गया है। मिथुन चक्रवर्ती भारतीय सिनेमा के एक प्रसिद्ध अभिनेता हैं, जिन्होंने कई दशकों तक फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता से दर्शकों का दिल जीता।
मिथुन चक्रवर्ती ने अपनी करियर की शुरुआत 1976 में की थी और उनकी प्रमुख फिल्में जैसे "डिस्को डांसर" और "कसमे वादे" ने उन्हें बहुत प्रसिद्धि दिलाई। उन्होंने बॉलीवुड और बंगाली सिनेमा दोनों में अपने अभिनय के जौहर दिखाए।
दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान के रूप में जाना जाता है, और यह उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने भारतीय फिल्म उद्योग में अपूर्व योगदान दिया हो। मिथुन चक्रवर्ती को यह सम्मान उनके जीवनभर के योगदान और फिल्मों में उनकी अप्रतिम कला के लिए दिया गया है। Quick Tip: दादा साहेब फाल्के पुरस्कार भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान के रूप में दिया जाता है, जो एक कलाकार के अद्वितीय योगदान को सम्मानित करता है।
भारतीय संविधान में किस अनुच्छेद द्वारा अस्पृश्यता को समाप्त किया गया है?
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भारतीय संविधान में अस्पृश्यता को समाप्त करने का प्रावधान अनुच्छेद 17 के तहत किया गया है। अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को एक अपराधिक कृत्य घोषित करता है और इसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की व्यवस्था करता है। यह भारतीय समाज में असमानता को समाप्त करने के लिए महत्वपूर्ण कदम था।
अनुच्छेद 17 के अनुसार, "अस्पृश्यता का प्रचलन पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है और इसका कोई भी रूप, जैसे कि छुआछूत, धर्म, जाति, रंग, लिंग, आदि के आधार पर भेदभाव, संविधान द्वारा निषिद्ध है।"
यह अनुच्छेद भारतीय समाज में सामाजिक और आर्थिक असमानताओं को दूर करने के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव था और इसने एक न्यायपूर्ण और समान समाज की दिशा में अहम कदम उठाया। इसने यह सुनिश्चित किया कि हर व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों, बिना किसी भेदभाव के। Quick Tip: अनुच्छेद 17 भारतीय संविधान का वह प्रावधान है जो अस्पृश्यता को समाप्त करता है और इसे एक अपराधिक कृत्य घोषित करता है।
फ्लेमिंगो त्यौहार (Felmingo Festival) किस राज्य से संबंधित है?
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फ्लेमिंगो त्यौहार (Felmingo Festival) आंध्र प्रदेश राज्य से संबंधित है। यह त्यौहार आंध्र प्रदेश के पेद्दमबलम और अन्य क्षेत्रों में मनाया जाता है, जहां फ्लेमिंगो पक्षियों का प्रजनन और प्रवास देखने को मिलता है।
यह त्यौहार विशेष रूप से पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरणीय महत्व को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया जाता है। आंध्र प्रदेश सरकार इस त्यौहार के माध्यम से फ्लेमिंगो जैसे पक्षियों के महत्व को जनता में फैलाने का प्रयास करती है।
फ्लेमिंगो पक्षी अपने लंबे सफर के दौरान आंध्र प्रदेश के किनारे पर आते हैं, और इस प्रकार यह त्यौहार इन पक्षियों के स्वागत के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान पर्यटक और पक्षी प्रेमी इस उत्सव में शामिल होते हैं, और यह क्षेत्र पर्यावरणीय पर्यटन का एक प्रमुख केंद्र बन जाता है। Quick Tip: फ्लेमिंगो त्यौहार आंध्र प्रदेश में पक्षियों के संरक्षण और पर्यावरणीय जागरूकता के लिए मनाया जाता है।
हाल ही में किस शहर ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेज़बानी की है?
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हाल ही में, भोपाल, मध्य प्रदेश ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स की मेज़बानी की है। यह खेलों का आयोजन भारतीय युवा खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और देश में खेलों के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से किया गया है।
खेलो इंडिया यूथ गेम्स भारत में एक महत्वपूर्ण खेल आयोजन है जो प्रत्येक वर्ष युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच प्रदान करता है। यह गेम्स विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करने के लिए विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिभागियों को आकर्षित करता है।
भोपाल के लिए यह गर्व की बात थी कि उसने इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन की मेज़बानी की और इसने मध्य प्रदेश को खेलों के क्षेत्र में एक नई पहचान दी है। इस आयोजन के द्वारा, राज्य और देश भर में खेलों के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ी है। Quick Tip: खेलो इंडिया यूथ गेम्स का आयोजन हर साल किया जाता है, जो भारतीय युवा खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण खेल मंच है।
भिलाई स्टील संयंत्र किसके सहयोग से बनी है?
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भिलाई स्टील संयंत्र, जो भारत के सबसे बड़े और प्रमुख इस्पात संयंत्रों में से एक है, सोवियत संघ के सहयोग से 1955 में स्थापित हुआ था। यह संयंत्र छत्तीसगढ़ राज्य के भिलाई शहर में स्थित है और भारतीय इस्पात निगम लिमिटेड (SAIL) के तहत कार्य करता है।
भिलाई संयंत्र की स्थापना के समय सोवियत संघ ने तकनीकी सहायता और उन्नत संयंत्र निर्माण के लिए भारत को सहयोग दिया। इस संयंत्र में स्थापित कच्चे इस्पात के उत्पादन और प्रसंस्करण की प्रक्रिया भारतीय उद्योग की आधारशिला बन गई। इसके बाद, इस संयंत्र ने भारतीय इस्पात उद्योग को न केवल प्रौद्योगिकी में प्रगति दी, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान किया।
इस संयंत्र ने भारत को इस्पात उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय औद्योगिक क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हुआ। Quick Tip: भिलाई स्टील संयंत्र सोवियत संघ के सहयोग से स्थापित हुआ था और भारतीय इस्पात उद्योग के विकास में यह एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
भूरी क्रांति किससे संबंधित है?
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भूरी क्रांति का संबंध उर्वरक उत्पादन और बायो गैस से है। इसे "फर्टिलाइज़र क्रांति" भी कहा जाता है, और यह कृषि उत्पादन में वृद्धि, विशेष रूप से भारतीय कृषि में उर्वरकों के उपयोग से संबंधित एक महत्वपूर्ण आंदोलन था। भूरी क्रांति ने कृषि क्षेत्र में तकनीकी विकास और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अधिक प्रभावी और sustainable तरीके अपनाए।
उर्वरक उत्पादन:
भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए उर्वरकों का उपयोग बढ़ाया गया था। उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसलों की उपज में वृद्धि होती है। इस प्रक्रिया को भूरी क्रांति के रूप में जाना गया, क्योंकि उर्वरक उत्पादन ने भारतीय कृषि को अधिक आधुनिक और उन्नत बनाने में मदद की। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण था जहाँ पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ अब तक प्रभावी नहीं थीं।
बायो गैस:
इसके अलावा, भूरी क्रांति में बायो गैस उत्पादन का भी एक महत्वपूर्ण योगदान था। बायो गैस, जो कि जैविक अपशिष्टों से उत्पन्न होती है, ऊर्जा का एक पर्यावरणीय रूप है। इसका उपयोग घरेलू उर्जा स्रोत के रूप में और कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने के उपाय के रूप में किया गया। बायो गैस के उपयोग से परंपरागत ईंधन जैसे लकड़ी और कोयले की आवश्यकता कम हुई, जिससे पर्यावरण को कम नुकसान हुआ।
भूरी क्रांति ने उर्वरक उत्पादन में तेजी लाई और बायो गैस के उत्पादन को भी बढ़ावा दिया, जो भारतीय कृषि और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने में सहायक सिद्ध हुआ। Quick Tip: भूरी क्रांति का उद्देश्य उर्वरक और बायो गैस के उत्पादन को बढ़ावा देना था, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान हो सके।
किस स्थान पर अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ मिलकर गंगा नदी बनती है?
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देवप्रयाग वह स्थान है जहाँ अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ मिलकर गंगा नदी बनती हैं। यह स्थान उत्तराखंड राज्य में स्थित है और गंगा नदी के उद्गम के महत्वपूर्ण संगम स्थलों में से एक है।
देवप्रयाग का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी है, क्योंकि यहाँ पर कई हिन्दू तीर्थयात्रियों द्वारा पवित्र स्नान किया जाता है। देवप्रयाग को एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल माना जाता है क्योंकि यह हिंदू धर्म के अनुसार गंगा नदी के बहाव के प्रारंभ का स्थान है। इस स्थान पर दोनों नदियाँ मिलती हैं और यहाँ से गंगा नदी की धारा का प्रवाह शुरू होता है, जो आगे जाकर भारतीय उपमहाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में बहती है।
देवप्रयाग के पास स्थित अन्य प्रमुख संगम स्थलों में हरिद्वार, ऋषिकेश और कर्णप्रयाग शामिल हैं, जहाँ गंगा नदी का पानी और भी अधिक श्रद्धा के साथ बहता है। Quick Tip: देवप्रयाग में अलकनंदा और भागीरथी नदियाँ मिलकर गंगा नदी का निर्माण करती हैं, जो हिन्दू धर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत के मानक समय (IST) क्या है?
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भारत का मानक समय (Indian Standard Time - IST) GMT +5:30 घंटे है। इसका मतलब यह है कि भारत का समय ग्रीनविच मानक समय (GMT) से 5 घंटे 30 मिनट आगे होता है।
भारत में किसी भी स्थान पर समय एक जैसा होता है, क्योंकि भारत में एक ही समय क्षेत्र होता है। भले ही भारत में पूर्व और पश्चिम के बीच काफी दूरी हो, लेकिन पूरे देश में एक ही समय का पालन किया जाता है।
यह समय क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप के लिए निर्धारित किया गया है, और यह ब्रिटिश राज के दौरान निर्धारित किया गया था, जब भारत में GMT को आधार मानकर समय तय किया गया था। इसके बाद, भारत में एक ही समय का पालन करने के लिए इसे भारतीय मानक समय के रूप में स्वीकार किया गया। Quick Tip: भारत का मानक समय (IST) GMT से 5 घंटे 30 मिनट आगे है, और यह पूरे देश में एक समान रहता है।
हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश को कौन सी नदी अलग करती है?
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यमुना नदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश को अलग करती है। यमुना नदी भारतीय उपमहाद्वीप की एक प्रमुख नदी है, जो हिमालय पर्वत से निकलकर उत्तर भारत के कई राज्यों से बहती हुई गंगा नदी में मिल जाती है।
यमुना नदी का भारत में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी है, खासकर धार्मिक दृष्टि से। यह नदी उत्तर भारत में अनेक प्रमुख शहरों, जैसे दिल्ली और आगरा, से होकर बहती है। यमुना नदी को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है और इसे भगवान श्री कृष्ण के साथ जोड़ा जाता है, जो अपनी युवावस्था में यहीं पर खेलते थे।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बीच यमुना नदी बहती है, और यह नदी दोनों राज्यों की जलवायु और कृषि के लिए महत्वपूर्ण योगदान देती है। Quick Tip: यमुना नदी हरियाणा और उत्तर प्रदेश को अलग करती है और दोनों राज्यों के लिए जल आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है।
विश्व का सबसे बड़ा ग्लेशियर कहाँ स्थित है?
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विश्व का सबसे बड़ा ग्लेशियर लैम्बर्ट ग्लेशियर है, जो अंटार्कटिका में स्थित है। यह ग्लेशियर 400 किलोमीटर लंबा और 100 किलोमीटर चौड़ा है, और इसे दुनिया का सबसे बड़ा गतिशील ग्लेशियर माना जाता है।
लैम्बर्ट ग्लेशियर अंटार्कटिका के आंतरिक हिस्से में स्थित है और यह पिघलने वाले बर्फ और अन्य ग्लेशियर्स से लगातार प्रभावित होता है। यह ग्लेशियर अंटार्कटिका की बर्फ की चादर से जुड़ा हुआ है और उसका एक प्रमुख हिस्सा है।
इस ग्लेशियर का अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को जलवायु परिवर्तन, समुद्र स्तर में वृद्धि, और बर्फ की चादरों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। लैम्बर्ट ग्लेशियर अंटार्कटिका के पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसकी गति और संरचना को समझना, वैश्विक पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। Quick Tip: लैम्बर्ट ग्लेशियर अंटार्कटिका का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण ग्लेशियर है, जो पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन अध्ययन में अहम भूमिका निभाता है।
'A Passion for Dance' पुस्तक किसके द्वारा लिखी गई है?
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पुस्तक 'A Passion for Dance' भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रमुख हस्ती यामिनी कृष्णमूर्ति द्वारा लिखी गई है। यामिनी कृष्णमूर्ति भारत की प्रसिद्ध भरतनाट्यम और क classical नृत्य की प्रमुख कलाकार हैं। इस पुस्तक में नृत्य की कला, उनके जीवन के अनुभव, और भारतीय संस्कृति की गहरी समझ को दर्शाया गया है।
यामिनी कृष्णमूर्ति का नृत्य की दुनिया में एक लंबा और प्रतिष्ठित करियर है, और उन्होंने नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति को विश्वभर में प्रस्तुत किया है। उनकी इस पुस्तक में नृत्य के प्रति उनके अटूट प्रेम और उनके जीवन में नृत्य की भूमिका को बखूबी दर्शाया गया है। Quick Tip: 'ए पैशन फॉर डांस' पुस्तक यामिनी कृष्णमूर्ति द्वारा लिखी गई है, जो भारतीय शास्त्रीय नृत्य की प्रसिद्ध कलाकार हैं।
SEBI का पूरा नाम क्या है?
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SEBI का पूरा नाम Securities and Exchange Board of India है। यह भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संस्था है जिसका मुख्य उद्देश्य भारत के पूंजी बाजार को नियंत्रित करना और उसे संरक्षित रखना है। SEBI का गठन 1988 में हुआ था और इसे 1992 में एक कानूनी प्राधिकरण के रूप में स्थापित किया गया।
SEBI का कार्यभार बाजार में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना है ताकि निवेशक सुरक्षित रूप से निवेश कर सकें और बाजार में किसी प्रकार की धोखाधड़ी न हो। SEBI का एक प्रमुख कार्य है निवेशकों के हितों की रक्षा करना और वित्तीय संस्थाओं की निगरानी करना। यह संस्था भारत के शेयर बाजारों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य पूंजी बाजार उत्पादों के विकास, संचालन और विनियमन के लिए जिम्मेदार है।
SEBI का मुख्यालय मुंबई में स्थित है, और यह भारतीय पूंजी बाजार की सभी गतिविधियों की निगरानी करता है। Quick Tip: SEBI का गठन भारतीय पूंजी बाजार की निगरानी और निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए किया गया था।
पारुल परमार कौन से खेल से संबंधित है?
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पारुल परमार पैरा-बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। वे भारतीय पैरा-बैडमिंटन टीम की एक महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं। पैरा-बैडमिंटन में विशेष रूप से शारीरिक विकलांगता वाले खिलाड़ियों के लिए यह खेल विकसित किया गया है।
पारुल परमार ने अपने शानदार प्रदर्शन से भारत को गर्व महसूस कराया है और वे पैरा-बैडमिंटन में एक उदाहरण के रूप में उभरी हैं। उन्होंने विश्व चैंपियनशिप, एशियाई खेलों और अन्य प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और इन खेलों में अपनी मेधावी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।
उनकी कड़ी मेहनत और संघर्ष ने उन्हें पैरा-बैडमिंटन में सफलता दिलाई है और वे विकलांगता के बावजूद खेलों के प्रति अपनी जुनून और प्रतिबद्धता का उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। Quick Tip: पारुल परमार पैरा-बैडमिंटन के क्षेत्र में एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता प्राप्त की है।
रतापानी बाघ अभयारण्य कहाँ स्थित है?
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रतापानी बाघ अभयारण्य मध्य प्रदेश राज्य के रायसेन जिले में स्थित है। यह अभयारण्य राज्य के प्रमुख जंगलों में से एक है और बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है। रतापानी अभयारण्य में विभिन्न प्रकार की वन्य जीवों की प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जिनमें बाघ, तेंदुआ, भालू और अन्य वन्य जानवर शामिल हैं।
यह अभयारण्य पर्यावरणीय संरक्षण और बाघों के संरक्षण के संदर्भ में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। रतापानी अभयारण्य का मुख्य उद्देश्य बाघों और अन्य वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास की सुरक्षा करना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है। इसके साथ ही, यह स्थानीय लोगों को वन्य जीवन के संरक्षण के प्रति जागरूक करने का कार्य भी करता है। Quick Tip: रतापानी बाघ अभयारण्य मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है और यह बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है।
Chat GPT में GPT का पूरा रूप क्या है?
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Chat GPT में GPT का पूरा रूप Generative Pre-trained Transformer है। यह एक प्रकार का भाषा मॉडल है जिसे OpenAI द्वारा विकसित किया गया है। GPT का उद्देश्य प्राकृतिक भाषा को समझना और उसे उत्पन्न करना है। यह मॉडल पहले से प्रशिक्षित होता है और इसे जेनरेटिव तरीके से भाषा उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया गया है।
"Pre-trained" का मतलब है कि इसे बहुत बड़े डेटा सेट पर पहले से प्रशिक्षित किया गया है, और "Transformer" एक प्रकार का मॉडल आर्किटेक्चर है जो दी गई जानकारी से सीखने में सक्षम है। GPT का उपयोग प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (NLP) कार्यों में किया जाता है, जैसे कि सवालों का जवाब देना, टेक्स्ट जनरेट करना, और संवादात्मक एआई विकसित करना।
GPT मॉडल का उपयोग इस तरह के संवादात्मक एआई जैसे ChatGPT में किया जाता है, जो उपयोगकर्ताओं से संवाद करता है और उनके प्रश्नों का उत्तर देता है। Quick Tip: GPT का पूरा रूप "Generative Pre-trained Transformer" है, जो एक शक्तिशाली भाषा मॉडल है जिसे बड़े डेटा सेट पर प्रशिक्षित किया गया है।
राष्ट्रीय कला भवन संग्रहालय (भारत कला भवन) कहाँ स्थित है?
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राष्ट्रीय कला भवन संग्रहालय (जिसे भारत कला भवन भी कहा जाता है) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में स्थित है। यह संग्रहालय भारत की समृद्ध कला और सांस्कृतिक धरोहर का एक महत्वपूर्ण केंद्र है।
भारत कला भवन में भारतीय कला और संस्कृति की विरासत को दर्शाने वाली कृतियाँ रखी गई हैं, जिसमें प्राचीन मूर्तियाँ, चित्रकला, शिल्पकला और सांस्कृतिक धरोहर की अन्य सामग्री शामिल हैं। यहाँ भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति के प्रमुख उदाहरणों का संग्रह किया गया है।
यह संग्रहालय न केवल कला प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है, बल्कि यह शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी एक शिक्षा केंद्र के रूप में कार्य करता है। भारतीय कला और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थल है। Quick Tip: भारत कला भवन संग्रहालय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में स्थित है, जहाँ भारतीय कला और संस्कृति की अद्भुत कृतियाँ प्रदर्शित की जाती हैं।
बैजू बावरá किसके दरबार में रहते थे?
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बैजू बावरá प्रसिद्ध भारतीय संगीतज्ञ और एक महान शास्त्रीय गायक थे, जो ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर के दरबार में रहते थे। बैजू बावरá का जीवन संगीत और कला के प्रति समर्पित था, और उन्होंने अपनी गायकी से राजा मानसिंह के दरबार में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया था।
बैजू बावरá की गायकी की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी, और उन्हें राजा मानसिंह तोमर के दरबार में सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त थी। उनका संगीत भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान था और वे आज भी संगीत प्रेमियों के बीच एक प्रेरणा के रूप में देखे जाते हैं।
बैजू बावरá की गायकी का उल्लेख कई प्राचीन काव्य और ग्रंथों में किया गया है, और उनका योगदान भारतीय संगीत के इतिहास में अनमोल माना जाता है। Quick Tip: बैजू बावरá ग्वालियर के राजा मानसिंह तोमर के दरबार में रहते थे और उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में महान योगदान दिया।
WTO की स्थापना कब हुई?
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WTO (World Trade Organization) की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई थी, और इसका मुख्यालय जिनेवा, स्विट्ज़रलैंड में स्थित है। WTO का उद्देश्य वैश्विक व्यापार को बढ़ावा देना, देशों के बीच व्यापार विवादों को सुलझाना और व्यापार के लिए एक मानकीकरण प्रक्रिया तैयार करना है।
WTO का गठन GATT (General Agreement on Tariffs and Trade) के स्थान पर किया गया था, जो पहले अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के नियमों को नियंत्रित करता था। WTO की स्थापना के बाद से, यह संगठन वैश्विक व्यापार संबंधों को समन्वित करने और वैश्विक आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
WTO का मुख्य कार्य व्यापारिक संबंधों को सुव्यवस्थित करना, सदस्य देशों के बीच विवादों का समाधान करना और विभिन्न व्यापार नियमों का पालन कराना है। इस संगठन के सदस्य देशों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और यह दुनिया के अधिकांश देशों के बीच व्यापार संबंधों का प्रबंधन करता है। Quick Tip: WTO की स्थापना 1 जनवरी 1995 को हुई थी और इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति स्थापना हेतु कौन सा संधि बनाया गया?
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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वैश्विक शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र संगठन (UNO) की स्थापना की गई। यह संधि 24 अक्टूबर 1945 को की गई और इसका मुख्यालय न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित है।
UNO का उद्देश्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना, संघर्षों को शांतिपूर्ण तरीकों से हल करना, और वैश्विक विकास, मानवाधिकारों की रक्षा और सामाजिक कल्याण को सुनिश्चित करना है। UNO का गठन एक ऐसे संगठन के रूप में किया गया जो न केवल युद्ध की पुनरावृत्ति को रोक सके, बल्कि दुनिया भर में शांति और समृद्धि सुनिश्चित कर सके।
संयुक्त राष्ट्र संगठन के प्रमुख अंगों में सुरक्षा परिषद, महासभा, अंतरराष्ट्रीय न्यायालय, और आर्थिक और सामाजिक परिषद शामिल हैं। यह संगठन अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को सुलझाने, आतंकवाद का मुकाबला करने, पर्यावरण संरक्षण, और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। Quick Tip: UNO का उद्देश्य विश्व में शांति, सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है और यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की गई सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संधि है।
सुद्र दमन का जुनागढ़ अभिलेख कहाँ प्राप्त हुआ?
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सुद्र दमन का जुनागढ़ अभिलेख गुजरात के जुनागढ़ शहर के पास स्थित गिरनार पहाड़ियों में प्राप्त हुआ था। यह अभिलेख महान सम्राट अशोक द्वारा खुदवाया गया था, और यह 3rd शताब्दी ईसा पूर्व का है। इस अभिलेख में सम्राट अशोक के द्वारा अपने शासनकाल के दौरान किए गए कुछ महत्वपूर्ण कार्यों का वर्णन किया गया है, जिसमें वह अपने राज्य के नागरिकों के प्रति अपने धर्म, नीति और विचारों को स्पष्ट करते हैं।
गिरनार पहाड़ियों में स्थित यह अभिलेख शाही प्रशासन की नीतियों और समाज की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्रदान करता है। यह अभिलेख प्राचीन भारत के इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक माना जाता है, जो यह दर्शाता है कि अशोक ने अपनी नीति के तहत सामाजिक सुधार और धर्म को फैलाने की कोशिश की थी। Quick Tip: सुद्र दमन का जुनागढ़ अभिलेख गुजरात के गिरनार पहाड़ियों में प्राप्त हुआ, और यह सम्राट अशोक के शासनकाल का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रमाण है।
संविधान कब अंगीकृत किया गया?
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भारतीय संविधान को 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया गया था। 26 नवम्बर 1949 का दिन भारतीय लोकतंत्र और कानून के लिए ऐतिहासिक था क्योंकि इस दिन भारतीय संविधान को संविधान सभा द्वारा अनुमोदित किया गया था।
भारतीय संविधान को लागू करने की प्रक्रिया 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ शुरू हुई थी, लेकिन इसे पूरा होने में दो साल से अधिक समय लगा। भारतीय संविधान का मुख्य उद्देश्य देश में एक मजबूत और न्यायपूर्ण शासन स्थापित करना था, जिसमें समानता, स्वतंत्रता और न्याय की अवधारणा को महत्वपूर्ण माना गया।
26 नवम्बर 1949 को संविधान सभा के सदस्योंने संविधान के सभी अनुच्छेदों और प्रस्तावों को स्वीकृति दी, और इसी दिन भारत के संविधान को भारतीय गणराज्य के लिए अंगीकृत किया गया। बाद में 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान पूरी तरह से लागू हुआ, और उसी दिन से भारत ने एक लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपना कार्य प्रारंभ किया। Quick Tip: भारतीय संविधान 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया गया था, और यह 26 जनवरी 1950 को प्रभावी हुआ।
टेंडन किस भाग को जोड़ के रहता है?
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टेंडन (Tendon) एक प्रकार का संयोजी ऊतक (connective tissue) होता है जो मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ता है। टेंडन मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़कर शरीर को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह कठोर, लचीला और मजबूत संरचना होती है जो मांसपेशियों के संकुचन को हड्डी तक पहुंचाती है, जिससे हड्डियों का मूवमेंट संभव होता है।
यह शरीर के जोड़ों में गति के निर्माण और संतुलन को बनाए रखने में सहायक होता है। टेंडन का प्रमुख कार्य मांसपेशियों से उत्पन्न बल को हड्डियों में स्थानांतरित करना है, जिससे किसी भी प्रकार की गति (जैसे चलना, दौड़ना, पकड़ना) संभव होती है। Quick Tip: टेंडन मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने का कार्य करता है और यह शरीर के गतिशील कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नर्मदा नदी किस दिशा में बहती है?
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नर्मदा नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और यह पश्चिम दिशा में बहती है, अंततः अरब सागर में गिरती है। यह नदी मध्य प्रदेश और गुजरात राज्यों से होकर बहती है।
नर्मदा नदी का विशेष महत्व है क्योंकि यह भारत की एकमात्र ऐसी नदी है जो पूरी तरह से पश्चिम दिशा में बहती है। इसके प्रवाह का मार्ग ऐतिहासिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण रहा है, क्योंकि यह दोनों राज्यों के बीच जल आपूर्ति, कृषि, और जन जीवन में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
नर्मदा नदी के किनारे कई धार्मिक स्थल भी स्थित हैं, और यह नदी भारतीय संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं में गहरी जड़ें रखती है। Quick Tip: नर्मदा नदी पश्चिम दिशा में बहती है और यह अरब सागर में मिलती है।
भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार कौन सा है?
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भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार है। यह पुरस्कार भारत सरकार द्वारा हर साल खेलों के क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त करने वाले खिलाड़ी को दिया जाता है। यह पुरस्कार भारतीय खेलों के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इसे भारतीय खेलों में सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
यह पुरस्कार भारतीय हॉकी के महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के सम्मान में 2002 में शुरू किया गया था। मेजर ध्यानचंद को भारतीय खेलों में उनकी असाधारण योगदान और सफलता के लिए याद किया जाता है, और उनके नाम पर यह पुरस्कार खिलाड़ियों की उपलब्धियों को मान्यता देने के लिए दिया जाता है।
खिलाड़ी को यह पुरस्कार उनकी खेल क्षमता, प्रदर्शन और खेलों के प्रति योगदान के आधार पर दिया जाता है। यह पुरस्कार खिलाड़ी को एक पदक, प्रमाण पत्र और एक वित्तीय पुरस्कार के रूप में दिया जाता है। Quick Tip: मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार भारत का सर्वोच्च खेल पुरस्कार है, जो हर साल एक खिलाड़ी को उनके उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन के लिए दिया जाता है।
एक सिंग का गैंडा किस राष्ट्रीय उद्यान में पाए जाते हैं?
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एक सिंग वाला गैंडा (Indian One-Horned Rhinoceros) मुख्य रूप से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है। यह राष्ट्रीय उद्यान असम राज्य में स्थित है और यह विश्व धरोहर स्थल के रूप में UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त है। काजीरंगा उद्यान भारत का सबसे प्रसिद्ध वन्यजीव अभयारण्य है, जहाँ भारतीय एक सिंग वाले गैंडे की सबसे बड़ी संख्या पाई जाती है।
काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में सिर्फ एक सिंग वाला गैंडा नहीं, बल्कि यह बाघ, हाथी, मगरमच्छ और कई अन्य वन्यजीवों का घर भी है। यह क्षेत्र जलवायु और पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, और यहां की जैव विविधता को संरक्षण देने के लिए कड़ी मेहनत की जा रही है।
यह उद्यान पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख स्थल है, जो यहाँ आकर वन्य जीवन का आनंद लेते हैं और गैंडे को उनके प्राकृतिक आवास में देख सकते हैं। Quick Tip: भारत में एक सिंग वाला गैंडा मुख्य रूप से काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है, जो असम राज्य में स्थित है।
अध्यक्षण किसकी मंत्री परिषद है?
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अध्यक्षण या "सुप्रीम कमांडर" शब्द, विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल के संदर्भ में, उनके द्वारा बनाई गई मंत्रिपरिषद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। शिवाजी महाराज ने भारतीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा, जहां उन्होंने अपने राज्य के प्रशासन को मजबूत करने और सैन्य रणनीतियों को सही दिशा में मार्गदर्शन करने के लिए एक सक्षम मंत्रिपरिषद बनाई।
उनकी मंत्रिपरिषद में विभिन्न मंत्रियों और अधिकारियों को महत्वपूर्ण कर्तव्यों का पालन सौंपा गया था। यह मंत्रिपरिषद उनके सैन्य, प्रशासनिक और आंतरिक मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार थी। इसके अलावा, छत्रपति शिवाजी महाराज ने शासन की पारदर्शिता और न्याय व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। Quick Tip: छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने प्रशासन में मंत्रिपरिषद के सदस्य को महत्वपूर्ण भूमिका दी थी और वे अपने राज्य के अध्यक्षण के रूप में माने जाते हैं।
नागानंद, रतावली एवं प्रियदर्शिका किनकी रचनाएँ हैं?
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नागानंद, रतावली, और प्रियदर्शिका ये तीनों काव्य रचनाएँ प्रसिद्ध संस्कृत कवि हर्वधन की हैं। हर्वधन एक महान काव्यकार और नाटककार थे, जिनका योगदान भारतीय साहित्य में महत्वपूर्ण है।
इनकी रचनाओं में धार्मिक और दार्शनिक विषयों को बहुत सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। नागानंद में भगवान शिव की भक्ति और उनके अद्भुत रूप का वर्णन किया गया है। रतावली और प्रियदर्शिका में प्रेम और नैतिकता के गुणों को सुंदर रूप में दिखाया गया है। हर्वधन के काव्य साहित्य में भावनाओं, नीति, और दार्शनिक विचारों का सुंदर सम्मिलन देखने को मिलता है।
इनकी रचनाओं ने संस्कृत साहित्य को समृद्ध किया और आज भी उनकी काव्यशास्त्र पर रचनाएँ अध्ययन और शोध का विषय हैं। Quick Tip: नागानंद, रतावली, और प्रियदर्शिका हर्वधन की प्रमुख रचनाएँ हैं, जो संस्कृत साहित्य में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
कौन सा संगठन अध्यापकों की शिक्षा प्रदान करती है?
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NCTE (राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा स्थापित एक संगठन है, जो अध्यापकों की शिक्षा, प्रशिक्षण और गुणवत्ता सुनिश्चित करने का कार्य करता है। NCTE का मुख्य उद्देश्य भारत में शिक्षक शिक्षा के उच्च मानकों को सुनिश्चित करना और इसे बेहतर बनाना है।
NCTE, शिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विभिन्न शिक्षा योग्यताओं का मूल्यांकन और प्रमाणन करता है। यह संगठन देशभर में शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है और इससे अध्यापक शिक्षा की प्रगति और विकास में मदद मिलती है।
NCTE के माध्यम से ही राज्य और केंद्रीय शिक्षक शिक्षा संस्थानों को मान्यता प्राप्त होती है। इसके अलावा, यह संगठन देश में शिक्षक शिक्षा से संबंधित शोध, नीति निर्माण और शिक्षा संबंधी अन्य मुद्दों पर भी काम करता है। Quick Tip: NCTE भारत में अध्यापकों की शिक्षा और प्रशिक्षण से संबंधित नीति निर्धारण और गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करने वाला संगठन है।
मधुमेह के रोगी को किस चीज़ का सेवन कम करना चाहिए?
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मधुमेह (Diabetes) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है या उसका उपयोग ठीक से नहीं कर पाता। इसका मुख्य प्रभाव शरीर में ग्लूकोज (चीनी) के स्तर पर होता है। इसलिए मधुमेह के रोगियों को अपनी आहार योजना पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates) का सेवन मधुमेह के रोगियों के लिए महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि यह रक्त में ग्लूकोज के स्तर को प्रभावित करता है। अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन रक्त में शर्करा (ग्लूकोज) के स्तर को बढ़ा सकता है, जो मधुमेह के मरीजों के लिए हानिकारक हो सकता है।
मधुमेह के रोगियों को ताजे फल, हरी सब्जियाँ, और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना चाहिए और मीठे खाद्य पदार्थों, शक्कर और उच्च कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए। यह रक्त शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करता है और मधुमेह से संबंधित अन्य जटिलताओं को रोकने में सहायक होता है। Quick Tip: मधुमेह के रोगी को अधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने से बचना चाहिए और संतुलित आहार पर ध्यान देना चाहिए।
जब उनके राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति मौजूद नहीं होंगे तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
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भारतीय संविधान के अनुसार, यदि राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति दोनों ही किसी कारणवश उपस्थित नहीं होते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश या वरिष्ठ न्यायधीश को उनका कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है। यह प्रावधान भारत के संविधान में संकट की स्थिति में सही नेतृत्व सुनिश्चित करने के लिए है।
राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के अनुपस्थित रहने पर, यह प्रावधान यह सुनिश्चित करता है कि सरकार की कार्यप्रणाली जारी रहे और कोई भी संवैधानिक संकट उत्पन्न न हो। इसका उद्देश्य यह है कि प्रशासन और सरकार के कार्यों में कोई विघ्न न आए और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश इसके प्रबंधन में सक्षम हों। Quick Tip: जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति अनुपस्थित होते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश या वरिष्ठ न्यायधीश को उनका कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है।
आठवीं अनुसूची में कितनी भाषाएँ सम्मिलित हैं?
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आठवीं अनुसूची भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण अनुसूची है, जो भारत की आधिकारिक भाषाओं को सूचीबद्ध करती है। भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं। इन भाषाओं को आधिकारिक रूप से मान्यता प्राप्त है और इन्हें भारत सरकार द्वारा विभिन्न कार्यों के लिए उपयोग किया जाता है, जैसे कि प्रशासन, न्यायिक कार्य, और अन्य सरकारी कार्य।
आठवीं अनुसूची में सम्मिलित भाषाओं में प्रमुख भारतीय भाषाएँ जैसे हिंदी, बंगाली, गुजराती, पंजाबी, मराठी, तमिल, तेलुगु, उर्दू, और अन्य शामिल हैं। इन भाषाओं को राज्य और केंद्रीय स्तर पर शिक्षा, प्रशासन और अन्य सरकारी कामकाजी भाषाओं के रूप में प्रयोग किया जाता है।
इस अनुसूची का उद्देश्य भारत की सांस्कृतिक विविधता और भाषायी धरोहर को संरक्षित करना है, साथ ही यह भाषाओं के बीच समानता और सम्मान सुनिश्चित करता है। Quick Tip: आठवीं अनुसूची में कुल 22 भाषाएँ सम्मिलित हैं, जो भारत की आधिकारिक भाषाओं के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शैक्षिक ढांचा की संरचना?
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नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारत में शिक्षा का ढांचा 5+3+3+4 रूप में निर्धारित किया गया है। यह संरचना शिक्षा के विभिन्न स्तरों को निर्धारित करती है।
यह संरचना इस प्रकार है:
- **5 वर्ष**: प्रारंभिक शिक्षा (प्रारंभिक कक्षाएं 1 से 5 तक)
- **3 वर्ष**: प्राथमिक शिक्षा (कक्षाएँ 6 से 8 तक)
- **3 वर्ष**: माध्यमिक शिक्षा (कक्षाएँ 9 से 11 तक)
- **4 वर्ष**: उच्च माध्यमिक शिक्षा (कक्षा 12 से 15 तक)
इस ढांचे के माध्यम से NEP 2020 शिक्षा के विभिन्न स्तरों पर बच्चों को हर पहलू में समग्र विकास प्रदान करने का लक्ष्य रखती है। यह संरचना न केवल शैक्षिक स्तरों को व्यवस्थित करती है, बल्कि बच्चों के मानसिक, शारीरिक और सामाजिक विकास पर भी ध्यान केंद्रित करती है।
इस नए ढांचे में बच्चों के प्रारंभिक शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है और प्रत्येक कक्षा में शिक्षण के स्तर को बढ़ाया गया है ताकि बच्चों को बुनियादी शिक्षा के साथ-साथ उन्हें जीवन कौशल भी सिखाए जा सकें। Quick Tip: नई NEP 2020 के तहत शैक्षिक ढांचा 5+3+3+4 संरचना को अपनाया गया है, जो बच्चों के विकास के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
खो-खो चैंपियनशिप 2024 की मेज़बानी किस देश ने की?
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खो-खो चैंपियनशिप 2024 की मेज़बानी भारत ने की। खो-खो, एक पारंपरिक भारतीय खेल है, जो टीमों के बीच खेला जाता है और इस खेल में गति, रणनीति और टीमवर्क की आवश्यकता होती है। यह खेल भारत में बहुत लोकप्रिय है और इसका इतिहास बहुत पुराना है।
भारत ने 2024 में इस चैंपियनशिप की मेज़बानी की और इसे एक प्रमुख खेल प्रतियोगिता के रूप में आयोजित किया। यह आयोजन खो-खो खेल को प्रमोट करने और खिलाड़ियों को एक मंच देने के लिए महत्वपूर्ण था। भारत ने इस खेल के आयोजन को सफलतापूर्वक संचालित किया और विश्वभर से खिलाड़ियों ने इसमें भाग लिया। Quick Tip: भारत ने खो-खो चैंपियनशिप 2024 की मेज़बानी की, जो इस खेल की लोकप्रियता और प्रचार के लिए महत्वपूर्ण कदम था।
पंडित शिवकुमार शर्मा कौन से वाद्य यंत्र से संबंधित है?
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पंडित शिवकुमार शर्मा भारतीय संतूर वादक के रूप में प्रसिद्ध हैं। संतूर एक भारतीय शास्त्रीय संगीत का वाद्य यंत्र है, जो विशेष रूप से कश्मीर क्षेत्र में प्रचलित है। पंडित शिवकुमार शर्मा ने संतूर को शास्त्रीय संगीत में लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
शिवकुमार शर्मा का योगदान भारतीय संगीत के क्षेत्र में अतुलनीय है। उन्होंने संतूर को एक शास्त्रीय वाद्य यंत्र के रूप में प्रतिष्ठित किया और इसके सुरों को भारतीय संगीत के पारंपरिक धारा में समाहित किया। उनका संगीत का योगदान संगीतप्रेमियों के बीच अनमोल रहेगा और भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनका नाम हमेशा सम्मान से लिया जाएगा। Quick Tip: पंडित शिवकुमार शर्मा संतूर वाद्य यंत्र के महान उस्ताद हैं और उन्होंने इसे भारतीय शास्त्रीय संगीत में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया।
किस नदी को अफ्रीका का जनक कहा जाता है?
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नील नदी को अफ्रीका का जनक कहा जाता है क्योंकि यह अफ्रीका महाद्वीप की सबसे लंबी और सबसे महत्वपूर्ण नदी है। नील नदी की लंबाई लगभग 6,650 किलोमीटर (4,130 मील) है, और यह लगभग 11 देशों से होकर बहती है। नील नदी का जल परिवहन, कृषि और जल आपूर्ति के लिए अत्यधिक महत्व है।
नील नदी की दो शाखाएँ हैं: "ब्लू नील" और "व्हाइट नील", जो इथियोपिया और युगांडा से निकलती हैं और फिर एक साथ मिलकर मिस्र और सूडान के रास्ते बहती हैं, जहां यह सागर में गिरती है।
इस नदी ने प्राचीन मिस्र सभ्यता के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह सभ्यता की संस्कृति और अर्थव्यवस्था का अभिन्न हिस्सा थी। Quick Tip: नील नदी को अफ्रीका की जीवनदायिनी माना जाता है, क्योंकि यह अफ्रीका के कई देशों को जल प्रदान करती है और ऐतिहासिक रूप से मिस्र की सभ्यता के लिए महत्वपूर्ण रही है।
विश्व में सबसे पुराना धर्म ग्रंथ क्या है?
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ऋग्वेद (Rigveda) विश्व का सबसे पुराना धर्म ग्रंथ माना जाता है। यह वेदों में सबसे पहले और महत्वपूर्ण वेद है और इसे संस्कृत में लिखा गया है। ऋग्वेद में भगवान, आस्था, पूजा और विभिन्न धार्मिक विषयों पर गहन विचार विमर्श किया गया है।
ऋग्वेद के 10 मंडल होते हैं और इसमें कुल 1,028 सूक्त होते हैं। यह ग्रंथ प्राचीन भारतीय संस्कृति और सभ्यता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है और यह हिंदू धर्म का आधार है। यह ग्रंथ विश्वभर में धार्मिक साहित्य के सबसे प्राचीन उदाहरणों में से एक माना जाता है।
ऋग्वेद का धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण भारतीय इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसके साथ ही, यह भारतीय संस्कृति, संगीत, और संस्कृत भाषा के विकास में भी योगदान करता है। Quick Tip: ऋग्वेद हिंदू धर्म का सबसे प्राचीन और महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे लगभग 3,500 साल पहले लिखा गया था।
विश्व का सबसे बड़ा रेल मार्ग कौन सा है?
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ट्रांस-साइबेरियाई रेलमार्ग (Trans-Siberian Railway) दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे लंबा रेल मार्ग है। यह रेल मार्ग रूस में स्थित है और यह मास्को से व्लादिवोस्तोक तक फैलता है, जो लगभग 9,289 किलोमीटर (5,772 मील) लंबा है।
यह रेलमार्ग रूस के पूरे साइबेरियाई क्षेत्र से होकर गुजरता है और एशिया और यूरोप को जोड़ता है। ट्रांस-साइबेरियाई रेलमार्ग न केवल यात्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह माल परिवहन के लिए भी एक प्रमुख मार्ग है।
यह रेलमार्ग वैश्विक व्यापार और यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है और इसने रूस के विभिन्न हिस्सों को जोड़कर परिवहन, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा दिया है। Quick Tip: ट्रांस-साइबेरियाई रेलमार्ग दुनिया का सबसे लंबा रेलमार्ग है और यह रूस के विभिन्न हिस्सों को जोड़ता है।
अनुच्छेद 21 (A) किससे संबंधित है?
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भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 (A) में "शिक्षा का अधिकार" (Right to Education) की बात की गई है। यह अनुच्छेद भारतीय नागरिकों को 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है। यह अधिकार 2002 में 86वें संविधान संशोधन के द्वारा जोड़ा गया था और यह भारतीय राज्य द्वारा बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी सुनिश्चित करता है।
अनुच्छेद 21 (A) भारतीय संविधान में एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार सुनिश्चित करता है, जिससे उन्हें बेहतर भविष्य के लिए समान अवसर प्राप्त हो सकें। इसके तहत, राज्य को यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि सभी बच्चों को उनकी शिक्षा का अधिकार मिले, और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारें स्कूलों का निर्माण और उचित व्यवस्था करती हैं। Quick Tip: अनुच्छेद 21 (A) शिक्षा का अधिकार बच्चों को 6 से 14 वर्ष की आयु के बीच मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करता है।
तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लेने वाला व्यक्ति कौन है?
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डॉ. भीमराव आंबेडकर तीनों गोलमेज सम्मेलनों (1930, 1931, और 1932) में भाग लेने वाले एकमात्र भारतीय नेता थे। ये सम्मेलन ब्रिटिश साम्राज्य के तहत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और संवैधानिक सुधारों के बारे में चर्चा करने के लिए आयोजित किए गए थे।
डॉ. आंबेडकर का नाम विशेष रूप से सामाजिक न्याय और अस्पृश्यता निवारण के लिए प्रसिद्ध है। वह भारतीय संविधान के प्रमुख निर्माता थे और उन्होंने भारतीय समाज में समानता और सामाजिक सुधारों को बढ़ावा दिया। उनके विचार और कार्य भारतीय समाज के लिए क्रांतिकारी थे।
डॉ. आंबेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया और भारतीय समाज के दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उनका संघर्ष और नेतृत्व भारतीय राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में याद किया जाता है। Quick Tip: डॉ. बी. आर. आंबेडकर ने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भाग लिया और भारतीय समाज के दबे-कुचले वर्गों के अधिकारों के लिए लड़ा।
बंगाल का विभाजन के समय भारत के वायसराय कौन थे?
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लॉर्ड कर्जन (Lord Curzon) भारत के वायसराय थे जब बंगाल का विभाजन 1905 में हुआ था। लॉर्ड कर्जन ने ब्रिटिश साम्राज्य के तहत भारत में प्रशासनिक सुधारों के नाम पर बंगाल का विभाजन किया। इस विभाजन का उद्देश्य बंगाल में प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाना बताया गया था, लेकिन असल में यह विभाजन धार्मिक और जातीय आधार पर समाज में विभाजन को और बढ़ाने के लिए था।
बंगाल का विभाजन हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच एक खाई बनाने के उद्देश्य से किया गया था, जिससे ब्रिटिश साम्राज्य को अपनी सत्ता को मजबूत करने में मदद मिल सके। इस विभाजन के परिणामस्वरूप एक बड़ा आंदोलन शुरू हुआ, जिसे बंगाल विभाजन विरोधी आंदोलन कहा जाता है।
लॉर्ड कर्जन की यह नीति भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है, क्योंकि इसके बाद भारत में राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर संघर्ष हुआ। Quick Tip: बंगाल का विभाजन 1905 में लॉर्ड कर्जन के द्वारा किया गया था, जिसे बाद में 1911 में रद्द कर दिया गया।
किस प्रदेश की सीमा म्यांमार से नहीं मिलती?
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भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में म्यांमार के साथ सीमाएं साझा करने वाले कई राज्य हैं, जैसे कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, और मिजोरम। लेकिन सिक्किम वह राज्य है जिसकी सीमा म्यांमार से नहीं मिलती है।
सिक्किम की सीमाएं पश्चिम में नेपाल, उत्तर में तिब्बत (चीन) और दक्षिण में पश्चिम बंगाल से मिलती हैं। म्यांमार के साथ इसकी सीमा नहीं है, क्योंकि म्यांमार भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन सिक्किम का स्थान अन्य राज्यों से अलग है।
इस प्रकार, सिक्किम वह एकमात्र राज्य है जिसकी सीमा म्यांमार से नहीं मिलती है। Quick Tip: सिक्किम म्यांमार से सीमा साझा नहीं करता है, बल्कि इसकी सीमाएं नेपाल, तिब्बत और पश्चिम बंगाल से मिलती हैं।
BOD (Biochemical Oxygen Demand) किस से संबंधित है?
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BOD (Biochemical Oxygen Demand) एक पर्यावरणीय संकेतक है, जिसका उपयोग पानी की गुणवत्ता को मापने के लिए किया जाता है। यह मापता है कि किसी जल में मौजूद सूक्ष्मजीवों को जैविक पदार्थों को अपघटित करने के लिए कितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।
जब जैविक पदार्थ पानी में घुलते हैं, तो सूक्ष्मजीव उन्हें तोड़ने के लिए ऑक्सीजन का उपयोग करते हैं। इसलिए, BOD यह बताता है कि किसी विशेष पानी के नमूने में जैविक अपघटन के लिए कितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता है। उच्च BOD का मतलब है कि जल में अधिक जैविक अपघटन हो रहा है और इसका पानी में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है, जो जल जीवन के लिए हानिकारक हो सकता है।
BOD का माप सूक्ष्मजीवों (microorganisms) और जैविक पदार्थों (organic materials) के अपघटन से जुड़ा है, इसलिए यह उन दोनों से संबंधित होता है। Quick Tip: BOD जल में जैविक पदार्थों के अपघटन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा को मापता है, जो सूक्ष्मजीवों द्वारा किया जाता है।
संविधान संशोधन से संबंधित अनुच्छेद?
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भारतीय संविधान में संशोधन की प्रक्रिया अनुच्छेद 368 (भाग-20) द्वारा निर्धारित की गई है। यह अनुच्छेद संविधान में संशोधन के लिए संसद के पास आवश्यक शक्तियों को प्रदान करता है।
अनुच्छेद 368 यह स्पष्ट करता है कि संविधान के किसी भी हिस्से को संशोधित करने के लिए संसद द्वारा एक विधेयक पारित करना आवश्यक है, और इसके बाद इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त करनी होती है। यह अनुच्छेद यह भी बताता है कि कुछ मामलों में, विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जैसे कि केंद्रीय विषयों पर, जबकि कुछ मामलों में साधारण बहुमत भी पर्याप्त होता है।
यह अनुच्छेद संविधान में संशोधन की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित और सुसंगत बनाता है, ताकि देश की जरूरतों के अनुसार संविधान में सुधार किए जा सकें। Quick Tip: संविधान संशोधन की प्रक्रिया के लिए अनुच्छेद 368 (भाग-20) का उल्लेख किया गया है, जो संसद को यह अधिकार प्रदान करता है।
मौलिक कर्तव्य किस भाग में हैं?
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भारतीय संविधान में मौलिक कर्तव्य भाग 4 (A) में निर्धारित किए गए हैं। इन कर्तव्यों को भारतीय नागरिकों को अपनी जिम्मेदारियों को समझने और उनका पालन करने के लिए निर्धारित किया गया है।
मूल अधिकारों के साथ-साथ, संविधान में मौलिक कर्तव्यों का भी समावेश किया गया है, ताकि नागरिकों को अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा मिले। इन कर्तव्यों में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, और देश के प्रतीकों के प्रति सम्मान, और पर्यावरण की रक्षा, सच्चाई बोलना और संविधान की मर्यादा बनाए रखना शामिल हैं।
भाग 4 (A) में इन्हें स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है ताकि नागरिकों के आचरण में सुधार हो और वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझें और निभाएं। Quick Tip: भारतीय संविधान के भाग 4 (A) में नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख किया गया है।
रबर की तुलना में स्टील की प्रत्यास्थता (Elasticity) कितनी होती है?
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रबर और स्टील दोनों की प्रत्यास्थता में अंतर है। प्रत्यास्थता किसी पदार्थ के वापस अपने मूल रूप में लौटने की क्षमता को कहते हैं। जब एक पदार्थ पर बल लगाया जाता है, तो वह अपने आकार में परिवर्तन करता है, और बल हटने पर वह अपनी मूल स्थिति में वापस लौटता है।
स्टील एक कठोर पदार्थ है, और इसकी प्रत्यास्थता रबर से अधिक होती है। इसका कारण यह है कि स्टील में अणुओं के बीच अधिक मजबूत बल होते हैं, जो उसे अधिक प्रत्यास्थ बनाते हैं। इसके मुकाबले रबर अधिक लचीला होता है, लेकिन उसकी प्रत्यास्थता स्टील से कम होती है। Quick Tip: स्टील की प्रत्यास्थता रबर से अधिक होती है, क्योंकि स्टील के अणु मजबूत होते हैं।
मुद्रास्फीति का प्रभाव क्या होता है?
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मुद्रास्फीति एक ऐसी स्थिति है, जब किसी देश में सामान्य वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें लगातार बढ़ने लगती हैं। जब मुद्रास्फीति होती है, तो इसका प्रभाव वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों पर पड़ता है। इसका मतलब है कि हम जो कुछ भी खरीदते हैं, उसकी कीमत बढ़ जाती है, और इससे लोगों की क्रय शक्ति पर असर पड़ता है।
मुद्रास्फीति का परिणाम आमतौर पर निम्नलिखित होता है:
- वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होती है।
- पैसे की वास्तविक मूल्य में गिरावट आती है, जिसका मतलब है कि एक ही राशि से कम सामान खरीदा जा सकता है।
- यह आमतौर पर विकासशील देशों में देखा जाता है, जहां अधिक उत्पादन और आपूर्ति की कमी होती है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं।
Quick Tip: मुद्रास्फीति से वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में वृद्धि होती है, जिससे जीवन यापन महंगा हो जाता है।
Low (Range) Frequency Data Transfer
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Bluetooth एक वायरलेस तकनीक है जो छोटे दूरी पर डेटा ट्रांसफर करने के लिए उपयोग की जाती है। यह डेटा ट्रांसफर के लिए कम-रेंज फ्रिक्वेंसी का उपयोग करती है। Bluetooth का उपयोग अक्सर दो डिवाइसेस के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए किया जाता है, जैसे कि स्मार्टफोन, लैपटॉप, और हेडफोन आदि।
Bluetooth के निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:
- यह 2.4 GHz के आसपास की आवृत्तियों का उपयोग करता है।
- इसका रेंज आमतौर पर 10 मीटर तक होता है, लेकिन कुछ उपकरणों में यह रेंज 100 मीटर तक बढ़ सकता है।
- इसका उपयोग डेटा, ऑडियो, और अन्य प्रकार के संचार के लिए किया जा सकता है।
Quick Tip: Bluetooth कम दूरी पर डेटा ट्रांसफर करने के लिए एक लोकप्रिय तकनीक है। इसका रेंज सीमित होता है, लेकिन यह बहुत किफायती और उपयोग में आसान होता है।
अपना उल्लू सीधा करना मुहावरे का अर्थ है
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"अपना उल्लू सीधा करना" एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी व्यक्ति द्वारा केवल अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए काम करना। यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब कोई व्यक्ति अपनी भलाई के लिए किसी अन्य के नुकसान की परवाह नहीं करता है।
इस मुहावरे में उल्लू को इस प्रकार दर्शाया गया है कि यह एक पक्षी है जो रात में सक्रिय रहता है और दिन में आराम करता है, जैसे कोई व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी परिस्थिति में काम करता है। इस मुहावरे का प्रयोग इस प्रकार की स्थिति में किया जाता है, जहां कोई व्यक्ति अपनी व्यक्तिगत लाभ के लिए किसी और के हित की उपेक्षा करता है। Quick Tip: इस मुहावरे का अर्थ केवल अपनी आवश्यकता को प्राथमिकता देना होता है, चाहे इसके लिए दूसरे का नुकसान हो।
उन्नति का विपरीत क्या है?
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"उन्नति" का अर्थ है किसी व्यक्ति, समाज या देश का विकास और प्रगति। जब कोई व्यक्ति या स्थिति लगातार सुधार और बेहतरी की दिशा में बढ़ता है, तो उसे उन्नति कहते हैं। यह एक सकारात्मक प्रक्रिया है, जहां किसी चीज़ की गुणवत्ता और स्थिति बेहतर होती है। उदाहरण के तौर पर, जब किसी छात्र की पढ़ाई में सुधार होता है, तो उसे उन्नति के रूप में देखा जाता है।
वहीं, "अवनति" का अर्थ है गिरावट या कम होना। यह तब होता है जब कोई व्यक्ति या समाज अपनी स्थिति में गिरावट महसूस करता है, और उसमें सुधार की बजाय हानि और गिरावट होती है। उदाहरण के लिए, किसी समाज में सामाजिक या आर्थिक असमानता बढ़ने को अवनति कहा जा सकता है।
अर्थात, उन्नति और अवनति विपरीत अवधारणाएं हैं। जहां उन्नति बेहतर भविष्य की ओर संकेत करती है, वहीं अवनति एक नकारात्मक दिशा में बदलाव को दर्शाती है। Quick Tip: "अवनति" और "उन्नति" दोनों के बीच अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि एक स्थिति में सुधार हो रहा है या गिरावट।
'सीने पर पत्थर रख लेना' मुहावरे का अर्थ है
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"सीने पर पत्थर रख लेना" एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी कठिन परिस्थिति को सहन करना और धैर्य रखना। यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब कोई व्यक्ति किसी कठिन या दुखद स्थिति को सहन करता है और बिना किसी शिकायत के उसे झेलता है।
इस मुहावरे का उपयोग उस समय किया जाता है जब कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में होता है जिसमें वह शारीरिक या मानसिक रूप से अत्यधिक कष्ट झेल रहा होता है, लेकिन फिर भी वह अपनी स्थिति के बारे में कोई शिकायत नहीं करता। यह मुहावरा उस समय का प्रतिनिधित्व करता है जब व्यक्ति को अपनी भावनाओं को दबाकर, अपने भीतर दर्द या कष्ट को छुपा कर, मजबूती के साथ किसी कठिन परिस्थिति का सामना करना पड़ता है।
कई बार यह मुहावरा तब भी प्रयोग में आता है जब कोई व्यक्ति बाहरी दबावों या किसी अन्य की बातों को सहन कर रहा होता है। इसे सहनशीलता और धैर्य के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, जहाँ व्यक्ति के अंदर के दुख या परेशानी को व्यक्त किए बिना, वह अपनी मुश्किलों को झेलता है और स्थिति का सामना करता है।
यह मुहावरा इस अर्थ में भी प्रयोग किया जाता है जब कोई किसी कठिन कार्य या चुनौती का सामना करने के लिए मानसिक रूप से तैयार होता है, भले ही कार्य कठिन हो। उदाहरण के लिए, जब कोई व्यक्ति किसी अनिच्छित कार्य को करने के लिए तैयार होता है, उसे मानना पड़ता है कि इस कार्य को "सीने पर पत्थर रख कर" करना होगा, क्योंकि यह उसके लिए कठिन हो सकता है।
इस मुहावरे का मूल संदेश यह है कि जीवन में कभी-कभी हमें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, और हमें बिना किसी शिकायत के उन्हें सहन करना चाहिए। यह जीवन की जटिलताओं और संघर्षों से निपटने के लिए एक धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण प्रदान करता है। Quick Tip: इस मुहावरे का अर्थ है कठिन परिस्थितियों का धैर्य और साहस के साथ सामना करना, जब कोई बाहरी या मानसिक कष्ट झेलने के बावजूद शिकायत नहीं करता।
'कान भरना' मुहावरे का अर्थ है
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"कान भरना" एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ है किसी के बारे में बुरी बातें करना, किसी के मन में किसी के प्रति नफरत या द्वेष भरना। यह मुहावरा उस समय उपयोग किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के खिलाफ भड़काने वाली बातें करता है, ताकि वह किसी अन्य व्यक्ति से नफरत करने लगे या उसका विरोध करने लगे।
इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति किसी के कान में बुरी बातें या अपमानजनक बातें डालता है, जिससे वह व्यक्ति किसी दूसरे के प्रति नकारात्मक सोच विकसित करता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई किसी के कान में बुरी बातें भरता है तो वह उस व्यक्ति को गलतफहमी में डालकर, उसे किसी अन्य के खिलाफ भड़काने की कोशिश करता है।
यह मुहावरा उन परिस्थितियों में भी उपयोगी है जब कोई जानबूझकर दूसरों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास करता है, ताकि लोग आपस में लड़ने या एक-दूसरे से नफरत करने लगें। Quick Tip: इस मुहावरे का अर्थ है किसी के खिलाफ बुरी बातें करना ताकि वह व्यक्ति दूसरे के प्रति नफरत या द्वेष विकसित करे।
तत्सम-तद्भव का सही युग्म है?
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"तत्सम-तद्भव" शब्दों का प्रयोग संस्कृत के शब्दों की उत्पत्ति और उनके विकास को समझने के लिए किया जाता है। "तत्सम" शब्दों का अर्थ होता है वे शब्द जो संस्कृत के मूल रूप से सीधे लिए गए हों, अर्थात वे शब्द जो अपनी मूल स्थिति में रहते हैं। वहीं "तद्भव" शब्दों का अर्थ होता है वे शब्द जो संस्कृत के तत्सम शब्दों से विकसित हुए हों, लेकिन उनमें कुछ ध्वनि परिवर्तन होते हैं।
यह प्रश्न इन दोनों प्रकार के शब्दों के सही युग्म को पूछता है। "तत्सम" और "तद्भव" के युग्म को सही ढंग से जोड़ने के लिए, हमें उस शब्द का चयन करना होता है जो संस्कृत से एकदम समान हो और उसे आधुनिक भाषा में सही रूप से प्रयोग किया गया हो। उदाहरण के लिए, "एकत्र" (तत्सम) और "इकट्ठा" (तद्भव) का युग्म इस प्रश्न का सही उत्तर है, क्योंकि इन दोनों शब्दों का अर्थ एक ही है और वे एक दूसरे के पर्यायवाची हैं। Quick Tip: तत्सम शब्द वह होता है जो संस्कृत से बिना किसी बदलाव के लिया गया हो, जबकि तद्भव शब्द संस्कृत से लिया गया लेकिन उसमें ध्वनि परिवर्तन हुआ होता है।
अशुद्ध में उपसर्ग?
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यह प्रश्न उपसर्गों के बारे में है। "अशुद्ध" शब्द में 'अभि' उपसर्ग का प्रयोग किया गया है। 'अभि' एक संस्कृत का उपसर्ग है, जिसका अर्थ होता है "के पास", "की ओर", या "के साथ"। जब 'अभि' उपसर्ग को 'उदय' शब्द के साथ जोड़ा जाता है, तो यह नया शब्द "अशुद्ध" बनता है, जिसका अर्थ होता है "अशुद्धता", "गलत होना" या "असत्य होना"।
यह उदाहरण इस बात को दर्शाता है कि कैसे उपसर्गों का प्रयोग शब्दों के अर्थ को प्रभावित करता है। उपसर्ग शब्द के मूल अर्थ को बदलने या उसे विस्तार देने का कार्य करते हैं। इस तरह से 'अभि' उपसर्ग के जोड़ने से 'उदय' का अर्थ बदलकर 'अशुद्ध' हो जाता है, जिससे एक नया अर्थ उत्पन्न होता है। Quick Tip: उपसर्ग किसी शब्द के अर्थ में बदलाव लाने या उसे विस्तार देने का कार्य करते हैं।
बिनु पद चले सुने बिनु काना में अलंकार कौन सा है?
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"बिनु पद चले सुने बिनु काना" यह एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है बिना किसी कार्य का होना या बिना किसी चीज के काम करना। यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब कोई काम बिना किसी संसाधन या आधार के किया जाता है।
यह मुहावरा "भावना अलंकार" का उदाहरण है। भावना अलंकार का प्रयोग तब होता है जब किसी शब्द या वाक्य में कोई गहरी भावना या अभिव्यक्ति छुपी होती है, जैसे किसी व्यक्ति या वस्तु की स्थिति या स्थिति को व्यक्त करना। इस मुहावरे में, काना या बिना सुनने की स्थिति, प्रतीक रूप में एक व्यक्ति की स्थिति को व्यक्त करने का कार्य करता है, जो बिना किसी मदद या संसाधन के कार्य करता है।
भावना अलंकार का मुख्य उद्देश्य किसी वाक्य या शेर में गहरी भावना को व्यक्त करना है। इस मुहावरे में "बिनु काना" की स्थिति से एक मानसिक या भावना की स्थिति का चित्रण होता है, जो बिना किसी मदद या सहायता के काम कर रहा होता है। Quick Tip: भावना अलंकार का प्रयोग किसी व्यक्ति की मानसिक या भावनात्मक स्थिति को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
भय का स्थायी भाव है?
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"भय का स्थायी भाव" से तात्पर्य है वह मानसिक स्थिति या भावना जो किसी व्यक्ति में लंबे समय तक बनी रहती है और जो उस व्यक्ति की स्थिति या व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा बन जाती है।
भय का स्थायी भाव "भयाणक रस" कहलाता है। रस कविता, नाटक या अन्य साहित्यिक कृतियों में किसी विशेष भावना का प्रकट रूप होता है। "भयाणक रस" वह रस है, जो भय या डर की भावना को व्यक्त करता है। इसे देखकर पाठक या दर्शक में भय की भावना उत्पन्न होती है, जैसे नाटक या कविता में खौफनाक घटनाओं का चित्रण।
भयाणक रस में व्यक्ति के भीतर डर या भय की भावना का विकास होता है, जो उसे किसी खतरे या भयावह स्थिति से संबंधित करता है। यह रस न केवल शारीरिक रूप से डराता है, बल्कि मानसिक रूप से भी व्यक्ति को डरा देता है। साहित्य में इसे स्थायी भाव के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, ताकि पाठक या दर्शक उसमें खुद को देख सके और उस भय को महसूस कर सके। Quick Tip: भयाणक रस का प्रयोग साहित्य में भय की भावना को स्थायी रूप में व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
मन रे तन कागद का पुतला, लागे बूँद बिना जय छीने में रस
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यह प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा शान्त रस के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शान्त रस वह रस है जिसमें किसी व्यक्ति या पात्र की मानसिक स्थिति में शांति और संतुलन होता है। इस रस में व्यक्ति का मन शांत होता है, वह तनाव और चिंता से मुक्त होता है। यह रस जीवन में संतुलन और आत्म-निर्विवाद की स्थिति को दर्शाता है।
"मन रे तन कागद का पुतला" और "लागे बूँद बिना जय छीने में रस" इन दोनों पंक्तियों का अर्थ है कि व्यक्ति का मन बिल्कुल शांत और आत्म-नियंत्रित रहता है, और उसके भीतर कोई अशांति या असंतुलन नहीं होता। इस शान्ति की अवस्था में व्यक्ति हर परिस्थिति को सहर्ष स्वीकार करता है, और वह हर कष्ट और परिस्थिति का सामना शांति से करता है।
शान्त रस को प्रकट करने के लिए साहित्य और कला में ऐसी स्थिति का चित्रण किया जाता है, जिसमें पात्र या व्यक्ति न केवल अपनी भावनाओं को नियंत्रित करता है, बल्कि मानसिक रूप से पूरी तरह से शांत और संतुलित रहता है। Quick Tip: शान्त रस का उद्देश्य जीवन में शांति और संतुलन की स्थिति को दर्शाना है, जिसमें व्यक्ति मानसिक रूप से शांत और नियंत्रित रहता है।
शुद्ध रूप
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"शुद्ध रूप" का मतलब है किसी चीज़ का असली या शुद्ध रूप, जिसमें कोई मिलावट या विकृति न हो। यह शब्द विशेष रूप से भाषाई संदर्भ में उपयोग होता है, जब किसी शब्द या वाक्य का सही रूप समझाया जाता है।
"संगठित" शब्द शुद्ध रूप में प्रयोग किया जाता है, जब किसी तत्व या विचार को व्यवस्थित और सुचारू रूप में रखा जाता है। यह एक ऐसा रूप है, जिसमें हर चीज़ एक निश्चित क्रम में और सुगम तरीके से संगठित होती है। यह अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, और अन्य क्षेत्रों में भी उपयोग होता है, जब किसी समूह, संगठन या कार्य को शुद्ध रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
यह शब्द शुद्धता, अनुशासन और सही व्यवस्था का प्रतीक है। इसे साहित्यिक संदर्भ में भी प्रयोग किया जाता है, जब किसी विचार या कार्य को साफ, संगठित और शुद्ध रूप में व्यक्त किया जाता है। Quick Tip: शुद्ध रूप का मतलब है वह रूप जो बिना किसी विकृति के और पूरी तरह से सही हो।
("......") चिन्ह कौन सा है?
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"(" और ")" ये चिन्ह उदाहरण को दर्शाने के लिए प्रयोग में आते हैं। इन्हें "उदाहरण चिन्ह" कहा जाता है। जब किसी वाक्य या विचार में उदाहरण दिया जाता है, तो उस उदाहरण को कोष्ठक में रखा जाता है ताकि वह विचार या जानकारी स्पष्ट रूप से सामने आ सके। उदाहरण चिन्ह का उपयोग विशेष रूप से तब किया जाता है जब किसी विशेष मामले का या स्थिति का उदाहरण प्रस्तुत करना हो।
इस चिन्ह का उपयोग साहित्य, गणित, विज्ञान, और अन्य सभी क्षेत्रों में किया जाता है, जहाँ किसी विचार या बिंदु को समझाने के लिए एक विशेष उदाहरण दिया जाता है। उदाहरण चिन्ह का उद्देश्य पाठक को उस विचार या तथ्य को समझाने में मदद करना है। Quick Tip: उदाहरण चिन्ह का प्रयोग किसी विचार को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है, जिसमें उदाहरण या स्पष्टता का योगदान होता है।
भारत-भारतीय के रचयिता
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"भारत-भारतीय" का अर्थ है भारत और भारतीयता के संदर्भ में लिखने वाले लेखक। मैथिलीशरण गुप्त भारतीय साहित्य के महान कवि और लेखक थे, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक धरोहर, समाजिक जीवन और राष्ट्रीयता पर गहरी छाप छोड़ी। उन्हें "राष्ट्रकवि" के रूप में भी जाना जाता है।
उनकी काव्य रचनाएँ भारतीय समाज की परंपराओं, संस्कृति और राष्ट्रीय जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करती हैं। "भारत-भारती" के रचनाकार के रूप में मैथिलीशरण गुप्त का नाम लिया जाता है, क्योंकि उन्होंने अपनी कविताओं में भारतीयता की शक्ति और गौरव को उकेरा। उनकी कविताओं का उद्देश्य भारतीय समाज की समस्याओं को उजागर करना और उस समय के भारतीय संघर्षों को दर्शाना था।
उनकी प्रसिद्ध रचनाओं में "भारत-भारती", "रामवदली", और "यशोधरा" जैसी काव्य रचनाएँ शामिल हैं, जो भारतीय संस्कृति और समाज के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। Quick Tip: मैथिलीशरण गुप्त को भारतीय साहित्य में उनके योगदान के कारण "राष्ट्रकवि" की उपाधि दी गई है।
उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद हैं?
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"उत्पत्ति के आधार पर शब्द के भेद" से तात्पर्य है कि किसी शब्द की उत्पत्ति किस प्रकार से हुई है और यह किस वर्ग में आता है। शब्दों की उत्पत्ति के आधार पर चार मुख्य भेद होते हैं -
1. **तत्सम** - ऐसे शब्द जो संस्कृत के शुद्ध रूप से लिए गए होते हैं और जिनमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ होता। उदाहरण: "ज्ञान", "देव"।
2. **तद्भव** - ऐसे शब्द जो संस्कृत के तत्सम शब्दों से उत्पन्न हुए हैं, लेकिन उनमें ध्वन्यात्मक परिवर्तन हुआ होता है। उदाहरण: "घर" (संस्कृत "गृह")।
3. **देशज** - ऐसे शब्द जो किसी विशेष क्षेत्र या स्थान के द्वारा उत्पन्न होते हैं और वह क्षेत्र विशेष का हिस्सा होते हैं। उदाहरण: "गंगा", "नदी"।
4. **विदेशज** - ऐसे शब्द जो विदेशी भाषाओं से आए होते हैं और हिंदी में उपयोग किए जाते हैं। उदाहरण: "टेलीविजन", "संग्राम"।
इन भेदों से हम शब्दों की उत्पत्ति, उनके रूप और उनके स्थानिक प्रभाव को समझ सकते हैं। Quick Tip: शब्दों की उत्पत्ति को समझने के लिए उनके आधार को जानना आवश्यक है, जैसे कि वे संस्कृत से हैं, क्षेत्रीय शब्द हैं या विदेशी शब्द हैं।
जिसकी चीज़ है, उसी से पूछो में सर्वनाम कौन सा है?
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"संबधवाचक सर्वनाम" वह सर्वनाम होता है जो किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु के साथ संबंध को व्यक्त करता है। यह सर्वनाम किसी विशेष व्यक्ति, वस्तु या स्थान को पहचानने के लिए प्रयोग किया जाता है, जो वाक्य में किसी अन्य शब्द के साथ जुड़ा होता है।
इस प्रश्न में "जिसकी चीज़ है, उसी से पूछो" वाक्य में "जिसकी" शब्द एक संबधवाचक सर्वनाम है। यह सर्वनाम उस व्यक्ति या वस्तु के साथ संबंध को प्रकट करता है, जिसके पास चीज़ है।
उदाहरण के लिए:
1. "जिसके पास किताब है, वही उसे लाकर देगा।"
यहां "जिसके" शब्द उस व्यक्ति के बारे में बात कर रहा है, जिसके पास किताब है, यानी यह शब्द संबधवाचक सर्वनाम का उदाहरण है। Quick Tip: संबधवाचक सर्वनाम वह होता है, जो किसी व्यक्ति, स्थान या वस्तु के बीच संबंध को व्यक्त करता है।
अनिवार्य का विपरीत शब्द क्या है?
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"अनिवार्य" का अर्थ होता है जो आवश्यक या जरूरी हो, जिसे किया जाना या अपनाया जाना अनिवार्य हो। उदाहरण के लिए, कोई नियम या शर्त जिसे पालन करना जरूरी हो।
"वैकल्पिक" इसका विपरीत शब्द होता है, जिसका अर्थ है कोई विकल्प होना, यानी किसी चीज़ को न करने का भी विकल्प मौजूद हो। जब किसी कार्य या चीज़ को करने के बजाय कुछ और करना भी संभव हो, तो उसे वैकल्पिक कहा जाता है।
इस प्रकार, "अनिवार्य" और "वैकल्पिक" एक दूसरे के विपरीत शब्द हैं। "अनिवार्य" में विकल्प नहीं होता, जबकि "वैकल्पिक" में विकल्प का अस्तित्व होता है। Quick Tip: वैकल्पिक का अर्थ है कोई विकल्प होना, जबकि अनिवार्य का अर्थ है किसी कार्य या चीज़ का होना जरूरी और बिना विकल्प के।
आँखों के सामने वाक्यांश के लिए एक शब्द?
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"आँखों के सामने वाक्यांश" का अर्थ है किसी घटना या स्थिति को सीधे अपनी आँखों से देखना, अर्थात जिसे देखा गया हो। इस स्थिति को व्यक्त करने के लिए "प्रत्यक्ष" शब्द का प्रयोग किया जाता है।
"प्रत्यक्ष" का अर्थ होता है जिसे देखा जा सके, जो सामने हो। इसे हम किसी वस्तु, घटना या सत्य के बारे में बात करते समय इस्तेमाल करते हैं, जिसे कोई व्यक्ति स्वयं देख सके या अनुभव कर सके।
यह शब्द उन चीजों को दर्शाने के लिए प्रयोग किया जाता है जो दृष्टिगोचर हों या सीधे सामने हों, जैसे "प्रत्यक्ष प्रमाण" या "प्रत्यक्ष अनुभव"। Quick Tip: "प्रत्यक्ष" शब्द का अर्थ है, जो वस्तु या घटना सामने हो और जिसे देखा या अनुभव किया जा सके।
गुरु के समीप रहकर अध्ययन करने वाला का लिए एक शब्द
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"गुरु के समीप रहकर अध्ययन करने वाला" का अर्थ है वह व्यक्ति जो गुरु के पास रहकर ज्ञान प्राप्त करता है। इस प्रकार के व्यक्ति को "अन्तेवासी" कहा जाता है।
अन्तेवासी वह शिष्य होते थे जो प्राचीन समय में गुरु के आश्रम में रहकर शिक्षा प्राप्त करते थे। यह शब्द संस्कृत के "अन्ते" (अर्थात अंतर्गत, अंदर) और "वास" (अर्थात रहने) से लिया गया है।
यह शब्द उस समय के शिक्षा पद्धति को दर्शाता है, जब छात्र गुरु के पास निवास करके पूरी तरह से उस से ज्ञान प्राप्त करते थे और उनके जीवन के हर पहलु को सीखते थे। "अन्तेवासी" शब्द का प्रयोग इस प्रकार के शिष्यों के लिए किया जाता है, जो गुरु के साथ निवास करते हुए शिक्षा ग्रहण करते थे। Quick Tip: अन्तेवासी वह शिष्य होता है जो गुरु के पास रहकर शिक्षा प्राप्त करता है।
किसी वस्तु को आधुनिक रूप देने की क्रिया
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"आधुनिककरण" शब्द का अर्थ है किसी वस्तु या प्रक्रिया को आधुनिक रूप में बदलना या सुधारना। जब किसी वस्तु, तकनीक या प्रक्रिया को पुराने रूप से बदलकर नए और अधिक विकसित रूप में परिवर्तित किया जाता है, तो इसे "आधुनिककरण" कहा जाता है।
यह शब्द विशेष रूप से तब उपयोग में आता है जब कोई पुरानी या पारंपरिक वस्तु या तकनीक नई, उन्नत और अधिक प्रभावी विधियों के साथ बदल दी जाती है। उदाहरण के लिए, यदि कोई पुराने औजारों को नए तकनीकी उपकरणों में बदलता है या किसी पुराने ढंग से काम करने की प्रक्रिया को नए, उन्नत तरीके से कार्यान्वित करता है, तो इसे आधुनिककरण कहा जाएगा।
आधुनिककरण का उद्देश्य वस्तुओं और प्रक्रियाओं की कार्यक्षमता को बेहतर बनाना, समय और संसाधनों की बचत करना, और समाज की समग्र प्रगति को गति देना होता है। Quick Tip: आधुनिककरण का अर्थ है किसी चीज़ को नई, उन्नत और अधिक प्रभावी रूप में बदलना।
जमीन का हिसाब-किताब रखने वाले का लिए शब्द?
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"पटवारी" या "लेखपाल" वह व्यक्ति होता है जो ज़मीन के रिकॉर्ड और हिसाब-किताब को रखता है। वह ज़मीन से संबंधित सभी दस्तावेजों, रिकार्ड्स और लेन-देन की जानकारी रखता है और उसे अद्यतन करता है।
पटवारी या लेखपाल का मुख्य कार्य भूमि के रिकॉर्ड की निगरानी करना, ज़मीन से संबंधित समस्याओं का समाधान करना और भूमि के मालिकों के बीच लेन-देन का हिसाब रखना होता है। यह अधिकारी प्रशासनिक कामकाजी प्रक्रिया के भाग के रूप में काम करता है।
इसका कार्य आम तौर पर ग्राम पंचायत, तहसील या जिले के स्तर पर होता है, और यह भूमि संबंधित सभी मामलों के लिए उत्तरदायी होता है। Quick Tip: पटवारी या लेखपाल का कार्य भूमि रिकार्डों का रखरखाव और प्रशासन से संबंधित भूमि मामलों का समाधान करना है।
अपनी प्रशंसा करने वाला के लिए शब्द?
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"आत्मश्रद्धि" का अर्थ है अपनी ही प्रशंसा करना, यानी व्यक्ति द्वारा अपनी अच्छाई और गुणों की खुद ही सराहना करना। इस शब्द का प्रयोग तब किया जाता है जब कोई व्यक्ति अपनी विशेषताओं और उपलब्धियों के बारे में खुद ही बड़ाई करता है, जबकि वह खुद ही अपने कार्यों या गुणों को सराहने की प्रवृत्ति दिखाता है।
आत्मश्रद्धि एक प्रकार का आत्म-संवर्धन है, जिसमें व्यक्ति अपनी पहचान, योग्यताओं और मेहनत की प्रशंसा करता है। यह शब्द उन लोगों के लिए उपयोग में लाया जाता है, जो बिना किसी अन्य से सराहना प्राप्त किए, अपनी ही प्रशंसा करते हैं।
इसका सकारात्मक और नकारात्मक दोनों रूप हो सकते हैं। जब किसी व्यक्ति को अपनी क्षमता पर विश्वास होता है, तो यह सकारात्मक रूप में हो सकता है, लेकिन जब यह अत्यधिक और अत्यधिक आत्म-प्रशंसा में बदल जाता है, तो यह नकारात्मक रूप में भी देखी जा सकती है। Quick Tip: आत्मश्रद्धि का अर्थ है अपनी प्रशंसा करना, लेकिन यदि यह अधिक हो, तो यह अहंकार या आत्ममुग्धता में बदल सकता है।
बुरी तरह पछताना का अर्थ किस मुहावरे का है?
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"आठ-आठ आँसू रोना" एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है किसी काम को करने के बाद पूरी तरह से पछताना और उसके बारे में दुखी होना। यह मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है जब कोई व्यक्ति अपनी गलती को महसूस करता है और उसे सुधारने के लिए बहुत पछताता है।
इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी व्यक्ति को अपने किए गए कार्य का पश्चाताप बहुत गहरी पीड़ा और दुःख के रूप में होता है। यह व्यक्ति के मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाता है, जहां वह अपने किए गए कार्य के बारे में सोचकर बहुत रोता है और खुद को दोषी महसूस करता है।
यह मुहावरा उस प्रकार की स्थिति को चित्रित करता है, जहां पछतावे की गहरी भावना व्यक्त होती है और यह किसी बड़े नुकसान या गलती के बाद होता है। Quick Tip: "आठ-आठ आँसू रोना" मुहावरा तब प्रयोग में आता है, जब कोई व्यक्ति अपने किए गए कार्य के लिए बहुत पछताता है और उस पर गहरी अफसोस महसूस करता है।
संरक्षक का सीलिंग क्या होगा?
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"संरक्षक" का अर्थ है वह व्यक्ति जो किसी वस्तु, स्थान या जीव की रक्षा करता है। यह शब्द विशेष रूप से किसी क्षेत्र या प्राधिकरण के संरक्षण का कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए उपयोग में आता है।
"संरक्षिका" महिला लिंग का रूप होता है, जब यह कार्य किसी महिला द्वारा किया जाता है। जब संरक्षक का कार्य किसी महिला द्वारा किया जाता है, तो उसे "संरक्षिका" कहा जाता है।
इस प्रकार, "संरक्षक" का सीलिंग "संरक्षिका" होगा, जब यह शब्द महिला के संदर्भ में उपयोग किया जाता है। Quick Tip: "संरक्षिका" महिला लिंग के रूप में होता है, जब किसी महिला द्वारा संरक्षक का कार्य किया जाता है।
‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ लोकistic का क्या अर्थ है?
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"खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे" यह एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका अर्थ होता है जब कोई व्यक्ति अपनी गलती या लज्जा को छिपाने के लिए कुछ ऐसा करता है, जो उसे नहीं करना चाहिए। यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब कोई व्यक्ति अपनी असफलता या लज्जा को छिपाने के लिए क्रोधित होता है या गलत काम करता है।
इस मुहावरे में "खिसियानी बिल्ली" को प्रतीक रूप में दर्शाया गया है, जो अपनी लज्जा या शर्मिंदगी को छिपाने के लिए अनावश्यक रूप से कुछ तोड़ने या नुकसान करने का प्रयास करती है। इसी तरह, मनुष्य भी जब किसी स्थिति में लज्जित होता है, तो वह क्रोध में आकर कुछ ऐसा करता है, जिसे वह सामान्यत: नहीं करता।
यह मुहावरा उन स्थितियों के लिए प्रयोग किया जाता है, जब किसी व्यक्ति का क्रोध उसकी लज्जा या असफलता को छिपाने का तरीका बन जाता है। Quick Tip: यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है, जब कोई व्यक्ति अपनी असफलता या लज्जा को छिपाने के लिए अनावश्यक रूप से क्रोधित होता है।
आँखें बदलना मुहावरे का अर्थ?
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"आँखें बदलना" एक प्रसिद्ध मुहावरा है, जिसका अर्थ है अपनी स्थिति या दृष्टिकोण को अपनी स्वार्थ के अनुसार बदलना। यह मुहावरा तब प्रयोग में आता है जब कोई व्यक्ति अपनी भलाई या स्वार्थ के लिए अपनी सोच या व्यवहार में बदलाव करता है।
इसका अर्थ है किसी चीज़ या स्थिति में परिवर्तन लाना केवल अपनी व्यक्तिगत लाभ के लिए, जो अन्यथा सही या उचित नहीं हो सकता। जब कोई व्यक्ति अपने स्वार्थ के अनुसार अपनी विचारधारा या दृष्टिकोण बदलता है, तो इसे "आँखें बदलना" कहा जाता है।
यह मुहावरा उन व्यक्तियों के लिए उपयोग किया जाता है, जो सिर्फ अपनी सुविधाओं और फायदे के लिए अपनी विचारधारा या पक्ष बदलते हैं, और यह कार्य उनके नैतिकता या सिद्धांतों के खिलाफ होता है। Quick Tip: "आँखें बदलना" का अर्थ है अपनी स्वार्थ के लिए अपने दृष्टिकोण या व्यवहार में बदलाव लाना।
किस शब्द में उपसर्ग- प्रत्यय दोनों हैं?
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"आध्यात्मिक" शब्द में उपसर्ग और प्रत्यय दोनों होते हैं।
1. उपसर्ग: "आधि" शब्द एक उपसर्ग है, जो किसी चीज़ के मूल या आधार को दर्शाता है।
2. **प्रत्यय**: "आत्मिक" प्रत्यय है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु के स्वभाव या गुण को व्यक्त करता है।
इस प्रकार, "आध्यात्मिक" शब्द में "आधि" उपसर्ग और "आत्मिक" प्रत्यय दोनों सम्मिलित होते हैं। यह शब्द विशेष रूप से व्यक्ति की आत्मा या आंतरिक जीवन से संबंधित है।
उपसर्ग "आधि" और प्रत्यय "आत्मिक" मिलकर इस शब्द को अर्थ प्रदान करते हैं, जो किसी व्यक्ति या स्थिति को आध्यात्मिक रूप से जोड़ता है। Quick Tip: "आध्यात्मिक" शब्द में उपसर्ग "आधि" और प्रत्यय "आत्मिक" दोनों होते हैं, जो इस शब्द को आत्मा या आंतरिक जीवन से जोड़ते हैं।
राम लजाता है में क्रिया?
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"अकर्मक क्रिया" वह क्रिया होती है, जिसमें किसी क्रिया का उद्देश्य या कर्म नहीं होता है, अर्थात जिस क्रिया में कोई विशेष कर्म या उद्देश्य का उल्लेख नहीं होता, उसे अकर्मक क्रिया कहा जाता है।
"राम लजाता है" वाक्य में "लजाना" एक अकर्मक क्रिया है। इसमें "लजाना" क्रिया का कोई प्रत्यक्ष कर्म नहीं होता, क्योंकि किसी वस्तु या व्यक्ति पर असर नहीं डाला जाता। यह केवल व्यक्ति की स्थिति या भावनाओं को व्यक्त करता है।
अकर्मक क्रियाओं में अक्सर व्यक्ति की मानसिक स्थिति, भावनाओं या व्यक्तित्व का संकेत होता है, न कि कोई बाहरी क्रिया जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव होता है। Quick Tip: अकर्मक क्रिया में कोई प्रत्यक्ष कर्म या उद्देश्य नहीं होता है, बल्कि यह भावनाओं या मानसिक स्थिति को व्यक्त करती है।
(O) चिन्ह कौन सा है?
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"(O)" चिन्ह को "लाघव" कहते हैं। यह चिन्ह सामान्यतः किसी वस्तु या संख्या के आकार को प्रदर्शित करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
लाघव का अर्थ होता है सरलता, न्यूनता या घटित होना। यह शब्द तब प्रयोग में आता है जब किसी चीज़ को छोटा, हल्का या सरल दिखाया जाता है।
अतः "(O)" चिन्ह "लाघव" के रूप में कार्य करता है, जहां इसका अर्थ कम या हलका होना व्यक्त किया जाता है। Quick Tip: "(O)" चिन्ह का प्रयोग लाघव को दर्शाने के लिए किया जाता है, जो किसी वस्तु को सरल और छोटा व्यक्त करता है।
शुद्ध वर्तनी है?
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"सम्मान-सम्पत्त" शब्द की वर्तनी शुद्ध है। यह शब्द सम्मान और सम्पत्ति दोनों को मिलाकर बना है। सम्मान का अर्थ होता है आदर, प्रतिष्ठा और सम्मान। वहीं सम्पत्ति का अर्थ होता है किसी व्यक्ति के पास मौजूदा संपत्ति या वैभव।
यह शब्द भारतीय संस्कृति और समाज में बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सम्मान और सम्पत्ति दोनों को महत्वपूर्ण माना जाता है। इन्हें एक साथ जोड़कर व्यक्त किया जाता है कि व्यक्ति को सम्मान के साथ संपत्ति का भी मिलना चाहिए।
इस प्रकार "सम्मान-सम्पत्त" शब्द की वर्तनी शुद्ध है और इसे समाज में आदर के साथ स्थान प्राप्त होता है। Quick Tip: "सम्मान-सम्पत्त" शब्द को एक साथ प्रयोग करने से यह दर्शाता है कि सम्मान और संपत्ति दोनों एक साथ महत्वपूर्ण होते हैं।
शुद्ध वाक्य है?
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"गीता हमारी धर्म पुस्तक है" यह वाक्य शुद्ध है। यह एक सरल और सही वाक्य है, जिसमें कोई व्याकरणिक या भाषा संबंधित गलती नहीं है। यह वाक्य सीधे तौर पर गीता को एक धर्म पुस्तक के रूप में प्रस्तुत करता है और इसमें वाक्य संरचना पूरी तरह से सही है।
इस वाक्य में "गीता" और "धर्म पुस्तक" के बीच का संबंध स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है। "हमारी" शब्द ने इसे और स्पष्ट किया है, कि गीता हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है।
यह वाक्य शुद्ध वाक्य के रूप में सही है क्योंकि इसका कोई भ्रम नहीं है और यह स्पष्ट रूप से अपने उद्देश्य को व्यक्त करता है। Quick Tip: शुद्ध वाक्य वह होता है, जिसमें व्याकरणिक रूप से सही और स्पष्ट अर्थ होता है।
शुद्ध वाक्य है?
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"बैर अपने से अच्छा नहीं" यह वाक्य शुद्ध वाक्य है। इस वाक्य में कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है और इसका अर्थ भी स्पष्ट है। वाक्य में "बैर" का अर्थ होता है शत्रु या विरोधी, और "अपने से अच्छा नहीं" का अर्थ है कि अपने ही से संबंधित व्यक्ति या परिस्थिति बेहतर होती है।
यह वाक्य दर्शाता है कि कभी भी अपने विरोधियों की तुलना अपने से न करें, क्योंकि अपनी स्थिति या परिस्थितियाँ हमेशा बेहतर होती हैं।
इस वाक्य की संरचना सही है और यह साफ तौर पर अपने संदेश को व्यक्त करता है। Quick Tip: शुद्ध वाक्य वह होता है जिसमें कोई व्याकरणिक गलती नहीं होती और वह स्पष्ट अर्थ प्रदान करता है।
शुद्ध वाक्य है?
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"उसने इस बात पर आपत्ति की" यह वाक्य शुद्ध है। यह एक सामान्य और सही वाक्य है जिसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं है। वाक्य में "आपत्ति करना" का अर्थ है किसी बात या घटना से असहमत होना या विरोध करना।
यह वाक्य सही ढंग से व्यक्त करता है कि किसी ने किसी विशिष्ट बात पर आपत्ति जताई है। यह स्पष्ट रूप से एक विरोध या असहमति को दर्शाता है।
इस वाक्य में कोई व्याकरणिक या अर्थ संबंधित त्रुटि नहीं है, और यह शुद्ध वाक्य के रूप में सही है। Quick Tip: शुद्ध वाक्य वह होता है जिसमें कोई व्याकरणिक त्रुटि नहीं होती और इसका अर्थ स्पष्ट होता है।
गौरव का विपरीत शब्द क्या होगा?
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"गौरव" का अर्थ होता है किसी व्यक्ति या वस्तु का सम्मान या प्रतिष्ठा। यह शब्द किसी की बड़ी इज्जत, मान या सम्मान को व्यक्त करता है।
"लाघव" इसका विपरीत शब्द होता है, जिसका अर्थ है किसी चीज़ का हल्का होना या घटित होना। यह शब्द किसी की उपेक्षा, कमी या नीचता को व्यक्त करता है।
"लाघव" और "गौरव" एक दूसरे के विपरीत होते हैं। जहाँ "गौरव" सम्मान, प्रतिष्ठा या उच्चता को दर्शाता है, वहीं "लाघव" तुच्छता, कमी या अपमान को व्यक्त करता है। Quick Tip: "लाघव" का अर्थ है हल्का या घटित होना, जबकि "गौरव" का अर्थ है उच्च सम्मान या प्रतिष्ठा।
मनोरथ का पर्यायवाची
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"मनोरथ" का अर्थ होता है किसी वस्तु या उद्देश्य की प्राप्ति के लिए किसी व्यक्ति की इच्छाएँ या इच्छाशक्ति। यह शब्द किसी खास इच्छा या लक्ष्य को व्यक्त करता है।
"मनोरथ" के पर्यायवाची शब्दों में निम्नलिखित शब्द आते हैं:
- अभिलाषा: किसी चीज़ की प्राप्ति के लिए दृढ़ इच्छा।
- इच्छा: किसी चीज़ की प्राप्ति की चाहत।
- कामना: किसी खास उद्देश्य की ओर झुकाव।
- वांछा: किसी वस्तु या स्थिति को पाने की इच्छा।
- ईषा: किसी वस्तु या व्यक्ति की ओर आकर्षण।
- स्पृहा: किसी चीज़ को पाने की तीव्र इच्छा।
- लिप्सा: किसी विशेष वस्तु या लक्ष्य की प्राप्ति की लालसा।
- आकांक्षा: किसी उद्देश्य की प्राप्ति की उम्मीद या इच्छा।
- चाह: किसी वस्तु या लक्ष्य की इच्छा।
- अभिलाष: किसी विशेष उद्देश्य या वस्तु के प्रति आस्था और इच्छा।
- ईहा: किसी का समर्थन और इच्छा।
- लालसा: किसी वस्तु या व्यक्ति को पाने की तीव्र इच्छा। Quick Tip: "मनोरथ" के पर्यायवाची शब्द वे होते हैं जो किसी व्यक्ति की इच्छाओं, आकांक्षाओं और लालसाओं को व्यक्त करते हैं।
जिस व्यक्ति का विवाह उससे निम्न वर्ग की स्त्री से हुआ हो?
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"अनुलोम विवाह" वह विवाह होता है जिसमें पुरुष का विवाह स्त्री के वर्ग से निम्न होता है। उदाहरण के तौर पर यदि एक उच्च वर्ग का व्यक्ति किसी निम्न वर्ग की स्त्री से विवाह करता है, तो इसे "अनुलोम विवाह" कहा जाता है।
इसमें पुरुष का समाजिक या जातीय स्तर स्त्री से उच्च होता है। यह विवाह समाजिक दृष्टि से स्वीकार्य होते हैं, लेकिन पारंपरिक जातिवाद के कारण कभी-कभी विरोध का सामना भी करना पड़ता है।
इस प्रकार, जब पुरुष और स्त्री के बीच का विवाह समाजिक और जातीय स्तर के भेद के बावजूद होता है, तो इसे "अनुलोम विवाह" कहते हैं। Quick Tip: अनुलोम विवाह में पुरुष का वर्ग स्त्री से उच्च होता है, और यह समाजिक और जातीय भेदों के बावजूद होता है।
महापर्व का संधि विच्छेद क्या होगा?
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"महापर्व" शब्द का संधि विच्छेद "महा" + "पर्व" होगा।
1. महा: यह एक उपसर्ग है, जिसका अर्थ होता है "बड़ा" या "महान"।
2. पर्व: यह एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है "त्योहार" या "विशेष दिन"।
"महापर्व" का अर्थ है एक बड़ा या महत्वपूर्ण पर्व, जैसे कि दीवाली, होली, या किसी अन्य प्रमुख धार्मिक त्योहार को महापर्व कहा जा सकता है।
इस प्रकार, संधि विच्छेद में "महापर्व" को "महा" और "पर्व" के रूप में विभाजित किया जा सकता है। Quick Tip: "महापर्व" शब्द का संधि विच्छेद "महा" + "पर्व" होता है, जिसका अर्थ होता है एक महान या बड़ा पर्व।





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