UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 PDF (Code 801 BG) with Answer Key and Solutions PDF is available for download here. UP Board Class 10 exams were conducted between February 24th to March 12th 2025. The total marks for the theory paper were 70. Students reported the paper to be easy to moderate.

UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BG) with Solutions

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UP Board Class 10 Hindi Question Paper 2025 (Code 801 BG) with Solutions

Question 1:

शुक्ल-युग के प्रवर्तक हैं :

  • (A) कमलेश्वर
  • (B) विष्णु प्रभाकर
  • (C) पं. मदन मोहन मालवीय
  • (D) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
Correct Answer: (D) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी
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Step 1: Understanding शुक्ल-युग

शुक्ल-युग हिंदी साहित्य का एक महत्वपूर्ण युग है, जो आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसार और विकास में प्रमुख भूमिका निभाता है। इसे आधुनिकता की दिशा में एक अग्रणी कदम माना जाता है।


Step 2: Role of आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी

आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने शुक्ल-युग के प्रवर्तक के रूप में साहित्य में गहरे प्रभाव छोड़े। वे हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध विद्वान और आलोचक थे, जिन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी।


Step 3: Option Analysis

- (A) कमलेश्वर → प्रसिद्ध लेखक, लेकिन शुक्ल-युग के प्रवर्तक नहीं।

- (B) विष्णु प्रभाकर → हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक, लेकिन शुक्ल-युग के प्रवर्तक नहीं।

- (C) पं. मदन मोहन मालवीय → उनके योगदान भारतीय राजनीति और शिक्षा में अधिक है, न कि शुक्ल-युग में।

- (D) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी → सही उत्तर, शुक्ल-युग के प्रमुख प्रवर्तक।


So, the correct option is (D) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी। Quick Tip: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने हिंदी साहित्य में शुक्ल-युग के दौरान साहित्यिक यथार्थवाद और समृद्धि का समावेश किया।


Question 2:

‘निर्मला’ उपन्यास के रचनाकार हैं :

  • (A) मुंशी प्रेमचंद
  • (B) भागतीरथ वर्मा
  • (C) चंद्रधर शर्मा गुलेरी
  • (D) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
Correct Answer: (A) मुंशी प्रेमचंद
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Step 1: Understanding ‘निर्मला’

‘निर्मला’ हिंदी साहित्य का एक प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसे मुंशी प्रेमचंद ने लिखा है। यह उपन्यास भारतीय समाज की जटिलताओं, विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति पर आधारित है।


Step 2: About मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के महान लेखक थे और उन्हें भारतीय साहित्य में उपन्यासों की उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है। उनके उपन्यासों ने भारतीय समाज की समस्याओं को सशक्त रूप से चित्रित किया है।


Step 3: Option Analysis

- (A) मुंशी प्रेमचंद → सही उत्तर, ‘निर्मला’ के रचनाकार।

- (B) भागतीरथ वर्मा → यह उपन्यासकार नहीं हैं, वे कुछ अन्य कृतियों के लिए प्रसिद्ध हैं।

- (C) चंद्रधर शर्मा गुलेरी → प्रसिद्ध लेखक, लेकिन ‘निर्मला’ उनके द्वारा नहीं लिखा गया।

- (D) बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय → बांग्ला साहित्यकार हैं, हिंदी में ‘निर्मला’ का रचनाकार नहीं।


So, the correct option is (A) मुंशी प्रेमचंद। Quick Tip: ‘निर्मला’ उपन्यास समाज के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालता है, जिसमें महिलाओं की स्थिति और सामाजिक कुरीतियाँ प्रमुख हैं।


Question 3:

‘अपनी खबर’ रचना की विधा है :

  • (A) एकांकी
  • (B) समग्रण
  • (C) नाटक
  • (D) प्रबंधकाव्य
Correct Answer: (A) एकांकी
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Step 1: Understanding 'अपनी खबर'

‘अपनी खबर’ हिंदी के प्रसिद्ध लेखक और नाटककार श्री हंसराज रहबर की रचना है, जो एकांकी नाटक के रूप में लिखी गई है। एकांकी नाटक में एक ही पात्र और घटना के माध्यम से संवादों और विचारों का आदान-प्रदान होता है।


Step 2: Identifying the form of drama

‘अपनी खबर’ में यह विशेषता है कि यह एकांकी रूप में है, यानी इसका मंचन एक ही दृश्य में होता है और इसकी रचना संक्षिप्त तथा प्रभावशाली होती है।


Step 3: Eliminate other options

- (B) समग्रण → समग्रण का अर्थ समापन और संकलन से है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं है।

- (C) नाटक → नाटक एक विस्तृत रूप होता है जिसमें कई पात्र और दृश्य होते हैं, लेकिन यहाँ केवल एकांकी नाटक ही उचित है।

- (D) प्रबंधकाव्य → यह संस्कृत काव्य की एक विधा है, न कि नाटक।


Step 4: Conclusion

‘अपनी खबर’ एकांकी नाटक है। अतः सही उत्तर विकल्प (A) है।
Quick Tip: एकांकी नाटक एक अद्वितीय रूप होता है जिसमें संक्षिप्त संवाद होते हैं और एक ही दृश्य में पूरी कहानी व्यक्त होती है।


Question 4:

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना नहीं है :

  • (A) ‘अर्धनारीश्वर’
  • (B) ‘संस्कृति के चार अध्याय’
  • (C) ‘अजातशत्रु’
  • (D) ‘नीति के सूत्र’
Correct Answer: (D) ‘नीति के सूत्र’
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Step 1: Understanding रामधारी सिंह ‘दिनकर’

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी के प्रसिद्ध कवि और लेखक थे, जो अपनी वीरता, राष्ट्रीयता और समृद्ध काव्य रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘रश्मिरथी’, ‘उर्वशी’, ‘कुरुक्षेत्र’ आदि शामिल हैं।


Step 2: Identifying the works of दिनकर

- (A) ‘अर्धनारीश्वर’ → यह दिनकर की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक है, जो उनके काव्य की भव्यता और शैली को दर्शाता है।

- (B) ‘संस्कृति के चार अध्याय’ → यह भी दिनकर की एक प्रसिद्ध रचना है, जिसमें उन्होंने भारतीय संस्कृति और उसके उत्थान पर प्रकाश डाला है।

- (C) ‘अजातशत्रु’ → यह भी दिनकर की रचनाओं में से एक है।

- (D) ‘नीति के सूत्र’ → यह रचना दिनकर की नहीं है, बल्कि यह आचार्य चाणक्य द्वारा लिखी गई है।


Step 3: Conclusion

इसलिए ‘नीति के सूत्र’ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना नहीं है। अतः सही उत्तर (D) है।
Quick Tip: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचनाएँ वीरता, राष्ट्रवाद और भारतीय संस्कृति के प्रचार के लिए जानी जाती हैं।


Question 5:

‘गुनाहों का देवता’ के लेखक हैं :

  • (A) धर्मवीर भारती
  • (B) ‘अजय’
  • (C) यशपाल प्रसाद
  • (D) शरत कुमार
Correct Answer: (A) धर्मवीर भारती
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Step 1: Understanding the novel

‘गुनाहों का देवता’ धर्मवीर भारती का प्रसिद्ध उपन्यास है, जिसे हिंदी साहित्य में एक मील का पत्थर माना जाता है। यह उपन्यास एक युवा लड़के और लड़की के बीच के जटिल रिश्ते और उनकी भावनाओं को दर्शाता है।


Step 2: About धर्मवीर भारती

धर्मवीर भारती हिंदी के प्रसिद्ध उपन्यासकार, कवि और पत्रकार थे। उनके उपन्यासों में समाज की सच्चाइयाँ और मानवीय संवेदनाओं को बड़े प्रभावी तरीके से चित्रित किया गया है। ‘गुनाहों का देवता’ उनका सबसे प्रसिद्ध और सराहा गया उपन्यास है।


Step 3: Option Analysis

- (A) धर्मवीर भारती → सही उत्तर, ‘गुनाहों का देवता’ के रचनाकार।

- (B) ‘अजय’ → कोई प्रसिद्ध उपन्यास नहीं है।

- (C) यशपाल प्रसाद → लेखक रहे हैं, लेकिन यह उपन्यास उनके द्वारा नहीं लिखा गया।

- (D) शरत कुमार → यह उपन्यास उनके द्वारा नहीं लिखा गया।


So, the correct option is (A) धर्मवीर भारती। Quick Tip: ‘गुनाहों का देवता’ में धर्मवीर भारती ने प्रेम और सच्चाई के विषय में गहरे विचार प्रस्तुत किए हैं।


Question 6:

निर्मलीकृत कवियों में से किस कवि को ‘गृहकवि’ का सम्मान मिला है ?

  • (A) सुमित्रानंदन पंत को
  • (B) पंडितगंगाप्रसाद
  • (C) सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’ को
  • (D) महादेवी वर्मा को
Correct Answer: (C) सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’ को
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Step 1: Understanding the term ‘गृहकवि’

‘गृहकवि’ का सम्मान उन कवियों को दिया जाता है जिन्होंने पारिवारिक जीवन और घरेलू वातावरण में अपने काव्य का सृजन किया। यह विशेष सम्मान सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’ को मिला।


Step 2: About सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’

‘निराला’ हिंदी कविता के महान कवि रहे हैं, जिनके काव्य में भारतीय समाज, संस्कृति और मानसिकता का गहरा चित्रण किया गया। उनके काव्य में समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करने का प्रयास किया गया।


Step 3: Option Analysis

- (A) सुमित्रानंदन पंत → हिंदी साहित्य के प्रमुख कवि हैं, लेकिन उन्हें ‘गृहकवि’ का सम्मान नहीं मिला।

- (B) पंडितगंगाप्रसाद → इस प्रकार का सम्मान नहीं मिला।

- (C) सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’ → सही उत्तर, ‘गृहकवि’ का सम्मान उन्हें मिला।

- (D) महादेवी वर्मा → महादेवी वर्मा साहित्य की महान लेखिका थीं, लेकिन उन्हें ‘गृहकवि’ का सम्मान नहीं मिला।


So, the correct option is (C) सूर्योत्तम त्रिपाठी ‘निराला’ को। Quick Tip: ‘निराला’ ने हिंदी कविता को एक नई दिशा दी और उनके काव्य में भारतीय संस्कृति और मानवीय भावनाओं का गहरा प्रभाव था।


Question 7:

‘रामचन्द्रिका’ के स्वनाकार हैं :

  • (A) पदाकार
  • (B) देव
  • (C) मनीषी
  • (D) काव्यकार
Correct Answer: (A) पदाकार
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Step 1: Understanding 'रामचन्द्रिका'

रामचन्द्रिका संस्कृत साहित्य का एक महत्वपूर्ण काव्य है। यह राम के जीवन और उनके कार्यों पर आधारित है, और इसे पंडित जुगलकिशोर ने रचा था।


Step 2: Identify the swanakar

'स्वनाकार' शब्द से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जिसने रचना की हो। रामचन्द्रिका के रचनाकार पं. जुगलकिशोर थे, जिन्हें पदाकार के रूप में जाना जाता है।


Step 3: Analyze the options

- (A) पदाकार → यह सही है, क्योंकि रचनाकार को पदाकार कहा जाता है।

- (B) देव → देव एक सामान्य संज्ञा है, लेकिन यहाँ इसे रचनाकार के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

- (C) मनीषी → मनीषी भी एक उच्चस्तरीय व्यक्ति होते हैं, परंतु यहाँ उनका कोई संबंध नहीं है।

- (D) काव्यकार → काव्यकार एक सामान्य शब्द है, लेकिन यह रचनाकार के स्थान पर उपयुक्त नहीं है।


Step 4: Conclusion

रामचन्द्रिका के रचनाकार पं. जुगलकिशोर थे, जिन्हें पदाकार कहा जाता है। अतः सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: काव्य और साहित्य में रचनाकार को पदाकार कहा जाता है जो किसी काव्य रचना का सृजन करता है।


Question 8:

‘वनमाली’ किस काल के कवि हैं ?

  • (A) आधुनिक काल के
  • (B) रीतिकाल के
  • (C) भक्तिकाल के
  • (D) आरंभिक काल के
Correct Answer: (B) रीतिकाल के
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Step 1: Understanding 'वनमाली'

‘वनमाली’ एक प्रमुख हिंदी कवि थे, जो रीतिकाव्य में अपनी रचनाओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उनका काव्य जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और उनके साहित्य में रीतिकाव्य की विशेषताएँ मिलती हैं।


Step 2: Identifying the time period

'वनमाली' रीतिकाव्य के कवि हैं, जिनकी रचनाएँ शृंगार और प्रेम से संबंधित होती थीं। वे शृंगारी काव्य के माध्यम से अपने समय की संवेदनाओं और सामाजिक परिस्थितियों को व्यक्त करते थे।


Step 3: Analyze the options

- (A) आधुनिक काल → यह गलत है, क्योंकि वे रीतिकाल के कवि थे।

- (B) रीतिकाल के → यह सही है, क्योंकि वनमाली रीतिकाव्य के कवि थे।

- (C) भक्तिकाल के → यह गलत है, क्योंकि उनका काव्य भक्तिकाव्य से संबंधित नहीं है।

- (D) आरंभिक काल के → यह भी गलत है, क्योंकि उनका समय रीतिकाव्य के अंतर्गत आता है।


Step 4: Conclusion

इसलिए, 'वनमाली' रीतिकाल के कवि हैं। अतः सही उत्तर (B) है।
Quick Tip: रीतिकाल के कवि शृंगारी काव्य के लिए प्रसिद्ध होते हैं, जिसमें प्रेम और श्रृंगार को प्रमुखता दी जाती है।


Question 9:

‘व्यायवादी काव्य’ की प्रमुख विशेषता है :

  • (A) प्रकृति का मानवीकरण
  • (B) यथार्थ चित्रण
  • (C) अंग्रेज़ी शिक्षा का विरोध
  • (D) कवियों के प्रति दुराग्रह
Correct Answer: (B) यथार्थ चित्रण
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Step 1: Understanding ‘व्यायवादी काव्य’

‘व्यायवादी काव्य’ का उद्देश्य समाज और जीवन के यथार्थ को चित्रित करना है। यह कविता में वास्तविकता, दिनचर्या और आम जीवन की समस्याओं को उभारता है।


Step 2: Major Characteristics

व्यायवादी काव्य का प्रमुख उद्देश्य समाज के वास्तविक चित्रण को प्रस्तुत करना होता है। इसके अंतर्गत कवि अपनी कविताओं में जीवन के कठिन पहलुओं और समाज के वास्तविक चित्रण पर ध्यान केंद्रित करते हैं।


Step 3: Option Analysis

- (A) प्रकृति का मानवीकरण → यह छायावादी काव्य की विशेषता है, न कि व्यायवादी काव्य की।

- (B) यथार्थ चित्रण → सही उत्तर; व्यायवादी काव्य में यथार्थ चित्रण प्रमुख होता है।

- (C) अंग्रेज़ी शिक्षा का विरोध → यह कुछ अन्य धाराओं की विशेषता है, व्यायवादी काव्य का मुख्य उद्देश्य नहीं है।

- (D) कवियों के प्रति दुराग्रह → यह व्यायवादी काव्य से संबंधित नहीं है।


So, the correct option is (B) यथार्थ चित्रण। Quick Tip: व्यायवादी काव्य ने समाज की वास्तविक स्थितियों और संघर्षों को अपने लेखन का मुख्य उद्देश्य बनाया।


Question 10:

‘तार समस्क’ के साथ कवियों को किसने ‘यहां के अवांछी’ कहा है ?

  • (A) नागार्जुन ने
  • (B) पवन प्रसाद मिश्र ने
  • (C) ‘अज्ञेय’ ने
  • (D) मैथिलीशरण गुप्त ने
Correct Answer: (C) ‘अज्ञेय’ ने
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Step 1: Understanding the term ‘तार समस्क’

‘तार समस्क’ का प्रयोग हिंदी साहित्य में एक विशेष काव्यधारा को संदर्भित करने के लिए किया गया है। इसमें वे कवि शामिल होते हैं जो नवाचारों और प्रयोगों के समर्थक होते हैं।


Step 2: Understanding ‘अज्ञेय’ का योगदान

‘अज्ञेय’ ने साहित्य में अपनी अलग पहचान बनाई थी और उनका दृष्टिकोण अक्सर युवा कवियों की नवीनता और स्वतंत्रता के प्रति था। उन्होंने ‘तार समस्क’ के कवियों को ‘यहां के अवांछी’ कहा था।


Step 3: Option Analysis

- (A) नागार्जुन ने → वे भी प्रगतिशील कवि रहे हैं, लेकिन यह कथन अज्ञेय का है।

- (B) पवन प्रसाद मिश्र ने → कोई उपयुक्त संदर्भ नहीं है।

- (C) ‘अज्ञेय’ ने → सही उत्तर, ‘अज्ञेय’ ने ‘तार समस्क’ के कवियों को ‘यहां के अवांछी’ कहा है।

- (D) मैथिलीशरण गुप्त ने → उनके काव्य में यह विषय नहीं आता।


So, the correct option is (C) ‘अज्ञेय’ ने। Quick Tip: ‘अज्ञेय’ का साहित्य में नवीनता और प्रयोगों के प्रति दृष्टिकोण बहुत प्रभावी था।


Question 11:

करुण रस का स्थायी भाव है :

  • (A) रति
  • (B) उत्साह
  • (C) शोक
  • (D) संतोष
Correct Answer: (C) शोक
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Step 1: Understanding 'करुण रस'

करुण रस वह रस होता है जिसमें किसी पात्र की दुख, पीड़ा, और उसके दुखों से संबंधित संवेदनाओं को प्रमुखता से व्यक्त किया जाता है। इस रस का स्थायी भाव शोक होता है, क्योंकि शोक से संबंधित भावनाएँ इस रस में प्रमुख होती हैं।


Step 2: Analyze the options

- (A) रति → रति शृंगार रस का स्थायी भाव है।

- (B) उत्साह → यह वीर रस का स्थायी भाव है।

- (C) शोक → यह करुण रस का स्थायी भाव है, क्योंकि यह पीड़ा, दुख और करुणा को दर्शाता है।

- (D) संतोष → यह शांत रस का स्थायी भाव है।


Step 3: Conclusion

इसलिए, करुण रस का स्थायी भाव शोक है। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: करुण रस में पात्र के दुख, पीड़ा और विकलता का चित्रण प्रमुख होता है, जो शोक के रूप में व्यक्त होता है।


Question 12:

‘सूने बालों की मीतन, फिर नहीं उसका घातपन,

उद्रुण हिंसाओं में प्रियतम अभिलाषा का खेल है :

  • (A) रति
  • (B) शांति
  • (C) उदासी
  • (D) अनुराग
Correct Answer: (D) अनुराग
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Step 1: Understanding the verse

इस पंक्ति में प्रियतम के प्रति इच्छाएँ और उनकी अभिलाषाएँ व्यक्त की गई हैं। यह भावनाएँ प्रेम और आकर्षण से जुड़ी हैं, जिनमें अनुनय और आग्रह की भावना है।


Step 2: Identifying the भाव

यह पंक्ति प्रेम, आकर्षण, और प्रियतम के प्रति गहरी भावना को व्यक्त करती है। इसे अनुराग कहा जाता है, जो कि प्रेम और संबंधों में गहरी इच्छा का प्रतीक है।


Step 3: Analyzing the options

- (A) रति → यह शृंगार रस से संबंधित है, लेकिन यहां भावना अनुराग की है।

- (B) शांति → यह शांत रस से संबंधित है, जो यहाँ लागू नहीं है।

- (C) उदासी → यह उदासी या विषाद की भावना को व्यक्त करता है, जो इस पंक्ति के भाव से मेल नहीं खाता।

- (D) अनुराग → यह सही उत्तर है क्योंकि यह प्रेम और इच्छा की गहरी भावना को व्यक्त करता है।


Step 4: Conclusion

इसलिए, सही उत्तर है अनुराग (D)।
Quick Tip: अनुराग प्रेम और आकर्षण की गहरी भावना को व्यक्त करता है, जो किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति उत्सुकता और खिंचाव को दिखाता है।


Question 13:

‘छन्द’ पढ़ते समय आने वाले विराम को क्या कहते हैं ?

  • (A) मात्रा
  • (B) गति
  • (C) लय
  • (D) यति
Correct Answer: (C) लय
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Step 1: Understanding ‘छन्द’

‘छन्द’ कविता की वह रचनात्मक शास्त्र है जिसमें निश्चित मात्रा, लय, और विराम की व्यवस्था होती है। इसके अंतर्गत कविता के प्रत्येक चरण और शब्दों में एक निश्चित गति और ताल होती है।


Step 2: The Concept of लय

जब कविता या छन्द में किसी स्थान पर समय का प्रवाह या गति व्यवस्थित रूप से रुकता है, तो उसे ‘लय’ कहा जाता है। यह कविता के संगीतात्मक प्रभाव को बढ़ाता है।


Step 3: Option Analysis

- (A) मात्रा → यह शब्दों के वर्णों का सामान्य योग है, जो लय से अलग है।

- (B) गति → गति किसी विशेष कविता की गति या प्रवाह को दर्शाती है, लेकिन वह ‘लय’ से संबंधित नहीं है।

- (C) लय → सही उत्तर, छन्द में समय आने वाले विराम को ‘लय’ कहते हैं।

- (D) यति → यह भी विराम का प्रतीक है, लेकिन ‘लय’ के समान नहीं।


So, the correct option is (C) लय। Quick Tip: लय कविता में संगीत जैसा ताल और प्रवाह उत्पन्न करता है जो सुनने में एक प्राकृतिक ध्वनि जैसा महसूस होता है।


Question 14:

‘अभ्यास’ शब्द में किस उपसर्ग का प्रयोग किया गया है ?

  • (A) अ
  • (B) अभि
  • (C) अभ
  • (D) अस
Correct Answer: (B) अभि
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Step 1: Understanding the word ‘अभ्यास’

‘अभ्यास’ शब्द संस्कृत से आया है, जिसमें ‘अभि’ उपसर्ग और ‘यास’ धातु का प्रयोग किया गया है। ‘अभि’ का अर्थ होता है ‘किसी कार्य को बार-बार करना’ या ‘लक्ष्य की ओर बढ़ना’।


Step 2: Meaning of ‘अभ्यास’

‘अभ्यास’ का अर्थ है निरंतर अभ्यास या किसी कार्य को नियमित रूप से दोहराना। यह शब्द उस प्रक्रिया को दर्शाता है जिससे किसी चीज को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास किया जाता है।


Step 3: Option Analysis

- (A) अ → यह उपसर्ग नहीं है, केवल ‘अ’ से कोई शब्द नहीं बनता।

- (B) अभि → सही उत्तर, यह उपसर्ग ‘अभ्यास’ शब्द में प्रयोग हुआ है।

- (C) अभ → यह केवल एक अंश है, सही उपसर्ग नहीं।

- (D) अस → यह उपसर्ग नहीं है।


So, the correct option is (B) अभि। Quick Tip: ‘अभि’ उपसर्ग का अर्थ है ‘प्रगति की ओर’ या ‘जोर देना’। यह कई शब्दों में प्रयुक्त होता है जैसे ‘अभ्यास’, ‘अभिमुख’, आदि।


Question 15:

‘पंचतंत्र’ में कौन-सा समास है ?

  • (A) कर्मधारय समास
  • (B) द्रव्य समास
  • (C) अव्ययीभाव समास
  • (D) द्वंद्व समास
Correct Answer: (A) कर्मधारय समास
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Step 1: Understanding 'पंचतंत्र'

'पंचतंत्र' संस्कृत में एक प्रसिद्ध काव्य है, जिसमें कई कहानी और शिक्षाएँ दी गई हैं। इस काव्य में पात्रों और घटनाओं का संयोजन किया गया है, जो दो पदों के मेल से बनता है।


Step 2: Identifying the समास

कर्मधारय समास वह समास होता है जिसमें एक शब्द विशेष्य (विशेषण) और दूसरा शब्द विशेष्य (कर्म) का कार्य करता है। 'पंचतंत्र' का उदाहरण इस समास से मिलता है।


Step 3: Analyzing other options

- (B) द्रव्य समास → यह समास सही नहीं है क्योंकि यह न तो ‘पंचतंत्र’ में पाया जाता है।

- (C) अव्ययीभाव समास → यह समास विशेषण और विशेष्य के बीच संबंध दर्शाता है, जो यहाँ उपयुक्त नहीं है।

- (D) द्वंद्व समास → यह दो समान शब्दों के जोड़ से बनता है, परंतु यहाँ नहीं है।


Step 4: Conclusion

इसलिए, सही उत्तर है कर्मधारय समास (A)।
Quick Tip: कर्मधारय समास में विशेष्य और कर्म का संयोजन होता है, जैसे 'पंचतंत्र' या 'सूर्यप्रकाश'।


Question 16:

दिनकर, दिवाकर, भास्कर किस शब्द के पर्याय हैं ?

  • (A) सूर्य के
  • (B) आकाश के
  • (C) राजा के
  • (D) बादल के
Correct Answer: (A) सूर्य के
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Step 1: Understanding 'दिनकर', 'दिवाकर', 'भास्कर'

'दिनकर', 'दिवाकर', और 'भास्कर' ये सभी शब्द सूर्य के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन शब्दों में से प्रत्येक शब्द सूर्य की ऊर्जा, प्रकाश या प्रभाव को दर्शाता है।


Step 2: Identifying the right synonym

सभी विकल्पों में से सूर्य ही वह वस्तु है जिसके लिए ये तीनों शब्द पर्याय हैं।


Step 3: Analyze the options

- (A) सूर्य के → यह सही उत्तर है क्योंकि ये सभी सूर्य के पर्याय हैं।

- (B) आकाश के → यह शब्द आकाश से संबंधित नहीं है।

- (C) राजा के → यह शब्द राजा के लिए प्रयुक्त नहीं होता है।

- (D) बादल के → यह शब्द बादल से संबंधित नहीं है।


Step 4: Conclusion

‘दिनकर’, ‘दिवाकर’, और ‘भास्कर’ सभी सूर्य के पर्याय हैं, इसलिए सही उत्तर (A) है।
Quick Tip: 'दिनकर', 'दिवाकर' और 'भास्कर' सभी सूर्य के पर्याय हैं, जो सूर्य की विशेषताओं को व्यक्त करते हैं।


Question 17:

‘युवाम’ शब्द में कौन सी विभक्ति एवं वचन है ?

  • (A) तृतीया विभक्ति, एकवचन
  • (B) प्रथम विभक्ति, द्विवचन
  • (C) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन
  • (D) पंचमी विभक्ति, एकवचन
Correct Answer: (A) तृतीया विभक्ति, एकवचन
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Step 1: Understanding ‘युवाम’

‘युवाम’ शब्द संस्कृत का शब्द है, जो ‘युव’ का रूप है। इसे तृतीया विभक्ति में प्रयोग किया जाता है, और यह एकवचन रूप में होता है।


Step 2: ‘युवाम’ का विभक्ति और वचन

‘युवाम’ शब्द तृतीया विभक्ति (कर्मवाचक) में है और इसका वचन एकवचन है। यह किसी एक व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है।


Step 3: Option Analysis

- (A) तृतीया विभक्ति, एकवचन → सही उत्तर; यह ‘युवाम’ का विभक्ति और वचन है।

- (B) प्रथम विभक्ति, द्विवचन → गलत; ‘युवाम’ प्रथम विभक्ति में नहीं है।

- (C) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन → गलत; यह ‘युवाम’ के रूप में नहीं है।

- (D) पंचमी विभक्ति, एकवचन → गलत; पंचमी विभक्ति का उपयोग किसी अन्य प्रकार के अर्थ में होता है।


So, the correct option is (A) तृतीया विभक्ति, एकवचन। Quick Tip: तृतीया विभक्ति का प्रयोग कर्मवाचक रूप में होता है, जैसे 'तृतीयं वह', 'युवाम' आदि।


Question 18:

‘मोहन द्वारा चित्र बनाया गया।’ – इस वाक्य में वाच्य है :

  • (A) कर्मवाच्य
  • (B) कृतिवाच्य
  • (C) भाववाच्य
  • (D) इनमें से कोई नहीं
Correct Answer: (A) कर्मवाच्य
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Step 1: Understanding वाच्य

वाच्य वह रूप है जिससे हम यह निर्धारित करते हैं कि वाक्य में कर्ता, कर्म या क्रिया का प्रमुख स्थान क्या है। हिंदी में तीन प्रकार के वाच्य होते हैं: कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य, और भाववाच्य।


Step 2: Understanding कर्मवाच्य

जब वाक्य में क्रिया (कर्म) प्रमुख रूप से व्यक्त होती है, तो उसे कर्मवाच्य कहा जाता है। ‘मोहन द्वारा चित्र बनाया गया’ वाक्य में चित्र (कर्म) प्रमुख है, इसलिए यह कर्मवाच्य है।


Step 3: Option Analysis

- (A) कर्मवाच्य → सही उत्तर, क्योंकि वाक्य में कर्म प्रमुख है।

- (B) कृतिवाच्य → यह वाच्य रूप अन्य प्रकार का है, जो यहां लागू नहीं होता।

- (C) भाववाच्य → यह वाक्य क्रिया प्रधान नहीं है।

- (D) इनमें से कोई नहीं → गलत, क्योंकि (A) सही उत्तर है।


So, the correct option is (A) कर्मवाच्य। Quick Tip: कर्मवाच्य वाक्य में मुख्य रूप से कर्म की प्रधानता होती है, जैसे – ‘चित्र बना लिया गया’।


Question 19:

‘सूरज निकला और चारों और प्रकाश फैल गया’

उपयुक्त वाक्य किस प्रकार का है ?

  • (A) सरल
  • (B) संयुक्त
  • (C) मिश्रित
  • (D) प्रश्नवाचक
Correct Answer: (C) मिश्रित
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Step 1: Understanding the structure of the sentence

‘सूरज निकला और चारों और प्रकाश फैल गया’ यह वाक्य दो सरल वाक्यांशों का संयोजन है, जिसमें दो मुख्य विचार हैं – सूरज का निकलना और प्रकाश का फैलना।


Step 2: Identifying the type of sentence

यह वाक्य एक मिश्रित वाक्य है, क्योंकि इसमें दो मुख्य वाक्यांशों का संयोजन है। एक वाक्यांश ने दूसरे वाक्यांश को जोड़कर पूरे विचार को व्यक्त किया है।


Step 3: Analyze the options

- (A) सरल → यह एक ही विचार व्यक्त करने वाला वाक्य होता है, जो यहाँ नहीं है।

- (B) संयुक्त → यह वाक्यांशों का संयोजन नहीं है, बल्कि यह एक मिश्रित वाक्य है।

- (C) मिश्रित → सही उत्तर क्योंकि यह दो विचारों का संयोजन है।

- (D) प्रश्नवाचक → यह वाक्य किसी सवाल का रूप नहीं है।


Step 4: Conclusion

इसलिए यह वाक्य एक मिश्रित वाक्य है। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: मिश्रित वाक्य वह होते हैं जिनमें दो या दो से अधिक विचार होते हैं जो आपस में जुड़े होते हैं।


Question 20:

कौन-सा शब्द ‘सर्वनाम’ है ?

  • (A) मोहन
  • (B) बगीचा
  • (C) तुम
  • (D) सच्चा
Correct Answer: (C) तुम
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Step 1: Understanding ‘सर्वनाम’

सर्वनाम वह शब्द होता है जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होता है। इसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, वस्तु या स्थान का उल्लेख करना होता है, न कि उसका नाम। जैसे, ‘मैं’, ‘तुम’, ‘वह’ आदि।


Step 2: Identifying the correct word

‘तुम’ एक सर्वनाम है, जो किसी व्यक्ति या समूह के लिए प्रयोग किया जाता है। यह किसी विशेष संज्ञा की जगह पर प्रयोग होता है।


Step 3: Analyze the options

- (A) मोहन → यह एक नाम है, संज्ञा है, न कि सर्वनाम।

- (B) बगीचा → यह भी संज्ञा है, सर्वनाम नहीं।

- (C) तुम → यह एक सर्वनाम है।

- (D) सच्चा → यह विशेषण है, संज्ञा या सर्वनाम नहीं।


Step 4: Conclusion

इसलिए, ‘तुम’ शब्द सर्वनाम है। सही उत्तर (C) है।
Quick Tip: सर्वनाम वह शब्द होते हैं जो संज्ञा के स्थान पर प्रयोग होते हैं, जैसे ‘मैं’, ‘तुम’, ‘वह’ आदि।


Question 21:

उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ:
यह गद्यांश उस विषय पर आधारित है, जिसमें लेखक समाज के कुछ ऐसे लोगों की ओर संकेत कर रहे हैं जो बिना किसी विरोध के हमारी हर बात को मान लेते हैं। लेखक उनके दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए इसे एक गलत आदत बताते हैं। इस गद्यांश में यह कहा गया है कि ऐसे लोग हमारी हर बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं, जो हमारे लिए सही नहीं होता। लेखक ने इसे एक दोषपूर्ण आदत के रूप में प्रस्तुत किया है और यह बताया है कि समाज में ऐसे लोगों से बचना चाहिए, जो बिना अपनी समझ से किसी बात को स्वीकार कर लेते हैं।

इस संदर्भ में लेखक यह भी कहते हैं कि ऐसे लोग न तो अपने जीवन में कोई सकारात्मक बदलाव लाते हैं, न ही समाज को किसी दिशा में प्रेरित करते हैं। इस गद्यांश में उन लोगों की मानसिकता और उनके प्रभाव को उजागर किया गया है, जो हमेशा हमें अपनी बात मानने के लिए बाध्य करते हैं। Quick Tip: संदर्भ लिखते समय गद्यांश के विषय और लेखक के दृष्टिकोण को साफ़ तौर पर पहचानें और उसे अपने शब्दों में सही तरीके से व्यक्त करें।


Question 22:

किन लोगों की संगत करना हमारे लिए बुरा है?

Correct Answer:
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लोगों की संगत:
लेखक के अनुसार, वे लोग जिनकी संगत हमें बुरी लगती है, वे वे लोग हैं जो हमारी हर बात को बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं। ऐसे लोग कभी भी विरोध करने या अपनी समझ से किसी बात पर आपत्ति जताने का साहस नहीं करते। लेखक ने ऐसे लोगों के बारे में यह कहा है कि उनका व्यवहार और दृष्टिकोण समाज में केवल नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

इसके अलावा, लेखक का यह भी मानना है कि जिन लोगों का अपने विचारों पर कोई स्थिर नियंत्रण नहीं होता, वे समाज में कोई सकारात्मक बदलाव लाने में सक्षम नहीं होते। वे हमेशा दूसरों की बातों को बिना किसी विवेक के स्वीकार करते हैं, जिससे उन्हें अपने विचारों और आदर्शों में कमी आ सकती है। ऐसे लोग न तो अपने जीवन में कोई सुधार कर सकते हैं, न ही वे समाज को किसी दिशा में प्रेरित करने के योग्य होते हैं। Quick Tip: संगत के प्रभाव को समझते समय यह महत्वपूर्ण है कि हम यह देखें कि जो लोग हमारे आस-पास हैं, वे हमें कैसे प्रभावित करते हैं।


Question 23:

लेखक ने जिस बात का भय व्यक्त किया है, उसका पात्र युवा पुरुषों को लाभ क्यों होता है?

Correct Answer:
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भय और लाभ:
लेखक ने यह भय व्यक्त किया है कि जब हम अपनी बातों को बिना विरोध के मानने वाले लोगों के साथ रहते हैं, तो यह स्थिति हमारे लिए न केवल मानसिक दबाव का कारण बनती है, बल्कि इससे हम अपने विचारों और दृष्टिकोण को भी खो देते हैं। इस स्थिति का मुख्य कारण यह है कि ऐसे लोग कभी भी हमें अपने विचारों को व्यक्त करने का अवसर नहीं देते। वे हमेशा हमारी बातों को बिना किसी आपत्ति के स्वीकार कर लेते हैं, जिससे हम अपने विचारों को सही रूप से व्यक्त करने में असमर्थ हो जाते हैं।

हालांकि, लेखक यह भी कहते हैं कि इस स्थिति का एक लाभ युवा पुरुषों को होता है, क्योंकि उन्हें बिना किसी संघर्ष के अपने कार्यों को करने का अवसर मिलता है। वे अपने कार्यों में कोई विरोध नहीं झेलते, और इस प्रकार वे आत्मविश्वास से भरे होते हैं। इस स्थिति से उन्हें यह लाभ होता है कि वे जल्दी से अपने लक्ष्यों को प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन यह लाभ तब तक स्थिर रहता है जब तक वे सही मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं। Quick Tip: भय को समझते समय यह विचार करें कि कभी-कभी बिना संघर्ष के कोई परिणाम स्थायी नहीं होता। जीवन में विरोध और आलोचना से हम अपना मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।


Question 24:

गांधीजी के पाठ और लेखक का नाम लिखिए।

Correct Answer:
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पाठ और लेखक:
गांधीजी के प्रसिद्ध पाठों में से ‘सत्याग्रह’ और ‘अहिंसा’ का उल्लेख किया जा सकता है। उनके विचारों ने भारतीय समाज में बड़ा बदलाव लाया और उनकी लेखनी ने पूरी दुनिया को अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

लेखक: महात्मा गांधी ने स्वयं अपने विचारों को ‘हिन्द स्वराज’ और ‘सत्याग्रह’ जैसे ग्रंथों में व्यक्त किया। Quick Tip: महात्मा गांधी के विचार सत्य, अहिंसा और आत्मनिर्भरता पर आधारित थे, जिनका आज भी वैश्विक स्तर पर प्रभाव है।


Question 25:

अजन्ता किस काल का और लिए अदिति के स्थान को लेकर विचार करें?

Correct Answer:
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अजन्ता काल:
अजन्ता की गुफाएँ प्राचीन भारतीय कला और संस्कृति का अद्भुत उदाहरण हैं। ये गुफाएँ गुप्तकाल के मध्य में बनी थीं और यहाँ चित्रकला का महत्वपूर्ण योगदान था। अजन्ता की चित्रकला ने भारतीय समाज के सांस्कृतिक दृष्टिकोण को नई दिशा दी।

अजन्ता में चित्रित दृश्य धार्मिक और सामाजिक जीवन के प्रमुख पहलुओं का प्रतीक थे। इन चित्रों में हम भारतीय देवी-देवताओं, उनके जीवन, और संघर्षों को देख सकते हैं। Quick Tip: अजन्ता की चित्रकला गुप्तकाल की विशेषता मानी जाती है, क्योंकि यह संस्कृति और कला के सर्वोत्तम उदाहरणों में से एक है।


Question 26:

‘रक्षात्मक अंग’ की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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रक्षात्मक अंग की व्याख्या:
‘रक्षात्मक अंग’ शब्द का अर्थ होता है वह अंग या तंत्र जो शरीर या किसी अन्य संरचना को बाहरी आक्रमण से बचाने का कार्य करता है। यह अंग किसी भी जीवित प्राणी की सुरक्षा प्रणाली का हिस्सा होता है, जो उसकी रक्षा करने के लिए कार्य करता है।

विभिन्न प्राणियों में रक्षात्मक अंग की भूमिका और संरचना अलग-अलग होती है। उदाहरण के रूप में, मनुष्यों में त्वचा एक प्रमुख रक्षात्मक अंग है। यह शरीर की सुरक्षा करता है और बाहरी हानिकारक तत्वों से बचाता है। इसी तरह, विभिन्न प्राणियों में शारीरिक संरचनाएँ जैसे कंकाल, खोल, शंकु, और बर्फ की परत रक्षात्मक अंग के रूप में कार्य करती हैं।

प्राकृतिक दुनिया में, रक्षात्मक अंगों का विकास जीवों के जीवन और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हुआ है। जैसे पक्षियों में पंख, जो उन्हें उड़ने और बाहरी आक्रमण से बचने की क्षमता प्रदान करते हैं। इसी तरह, रक्षात्मक अंगों का उद्देश्य जीवों की सुरक्षा और अस्तित्व सुनिश्चित करना होता है। Quick Tip: रक्षात्मक अंग पर व्याख्या करते समय, यह ध्यान रखें कि प्रत्येक जीव में इसका रूप और कार्य अलग हो सकता है।


Question 27:

उपर्युक्त गद्यांश का संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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संदर्भ:
यह गद्यांश एक दृश्यात्मक चित्रण है, जिसमें चित्रित किया गया है कि कैसे एक व्यक्ति प्राकृतिक दृश्य का आनंद ले रहा है। गद्यांश में नायक का परिचय कराया गया है जो जीवन की सरलता और प्राकृतिक सौंदर्य में खुशियाँ खोजता है। वह नंदन के आंगन में बिछी धान की बाली को देखकर संतुष्ट होता है और उसकी तुलना जीवन की सरलता और शांति से करता है। लेखक यहाँ पर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि कैसे हम अपनी सोच को बदलकर अपने आसपास के सौंदर्य का आनंद ले सकते हैं।

गद्यांश में विशेष रूप से नायक की भावनाएँ और उनकी मानसिक स्थिति को चित्रित किया गया है, जहाँ वह जीवन की सामान्य बातों को महत्व देता है। इस संदर्भ में लेखक हमें यह सिखाते हैं कि प्राकृतिक सौंदर्य को समझने और उससे संतुष्ट रहने का अनुभव जीवन में सबसे महत्वपूर्ण होता है। Quick Tip: संदर्भ लिखते समय यह सुनिश्चित करें कि आप गद्यांश के मुख्य विषय और लेखक के दृष्टिकोण को पूरी तरह से व्यक्त करें।


Question 28:

लेखक ने जिस आनंद और शांति का चित्रण किया है, वह किन तत्वों से जुड़ा है?

Correct Answer:
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आनंद और शांति के तत्व:
लेखक ने आनंद और शांति का चित्रण प्राकृतिक सौंदर्य से जुड़ा हुआ बताया है। वह कहते हैं कि हम यदि अपने आस-पास की साधारण चीजों को ध्यान से देखें, तो हमें जीवन की वास्तविक खुशी और शांति मिल सकती है। गद्यांश में नायक धान की बाली को देखकर संतुष्ट हो रहा है और इसे एक जीवन्त चित्र के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

इसके अलावा, लेखक ने यह भी बताया है कि हमें जीवन के छोटे-छोटे सुखों में भी आनंद मिल सकता है। किसी भी स्थिति को समझदारी से देखना और उसमें से अच्छाइयों को निकालना हमें शांति और संतोष का अनुभव कराता है। यह गद्यांश हमें यह सिखाता है कि जीवन की वास्तविक शांति बाहरी वस्तुओं से नहीं, बल्कि हमारे मानसिक दृष्टिकोण और आंतरिक संतुष्टि से प्राप्त होती है। Quick Tip: आनंद और शांति के तत्वों को समझने के लिए गद्यांश में व्यक्त भावनाओं और विचारों पर ध्यान दें, और देखें कि लेखक ने किस प्रकार जीवन को सरल और शांति से जुड़ा है।


Question 29:

‘कृष्णकान्त कृत नृत्यकाव्य’ शीर्षक में ‘कृष्णकान्त’ शब्द का अर्थ और संदर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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‘कृष्णकान्त’ शब्द का अर्थ और संदर्भ:
‘कृष्णकान्त’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों — ‘कृष्ण’ और ‘कान्त’ से मिलकर बना है। ‘कृष्ण’ का अर्थ है भगवान श्री कृष्ण और ‘कान्त’ का अर्थ है प्रिय या सुंदर। यह शब्द विशेष रूप से उन व्यक्तियों या वस्तुओं के लिए उपयोग किया जाता है जो भगवान कृष्ण के प्रिय हैं या जो कृष्ण से संबंधित हैं।

यहाँ पर ‘कृष्णकान्त’ शब्द का संदर्भ नृत्यकाव्य के संदर्भ में दिया गया है, जहाँ यह कृष्ण के प्रति प्रेम, भक्ति और उनके आकर्षण को व्यक्त करता है। काव्य में नृत्य की मुद्राओं और भावनाओं के माध्यम से कृष्ण के प्रति भक्तों की श्रद्धा और भक्ति का चित्रण किया जाता है। यह काव्य भगवान कृष्ण के प्रेम और उनकी पूजा की भावना को उजागर करता है, साथ ही इसमें भगवान कृष्ण के नृत्य और रासलीला का संदर्भ भी होता है। Quick Tip: ‘कृष्णकान्त’ जैसे शब्दों का विश्लेषण करते समय उनके संस्कृत अर्थ, संदर्भ और उपयोग को समझना आवश्यक है।


Question 30:

उपर्युक्त पंक्तियों का सन्दर्भ लिखिए।

Correct Answer:
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सन्दर्भ:
यह कविता भारत के स्वतंत्रता संग्राम के महान नेताओं और उनके संघर्षों को समर्पित है। यह विशेष रूप से महात्मा गांधी के नेतृत्व में किए गए संघर्ष को उजागर करती है, जो भारत की स्वतंत्रता की ओर एक महान कदम था। कवि ने इसका उल्लेख करते हुए उन महान क्षणों की सटीकता और ऐतिहासिक महत्व को व्यक्त किया है, जब भारतीय स्वतंत्रता संग्राम ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया।

कविता में यह भी कहा गया है कि वह पल इतिहास में अमर रहेगा और उसकी छाप आने वाली पीढ़ियों पर पड़ेगी। Quick Tip: सन्दर्भ लिखते समय कविता के मुख्य संदेश और ऐतिहासिक घटनाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानना आवश्यक है।


Question 31:

‘चंद्रलोक में प्रथम बार’ मानव के उठने से क्या प्रभाव पड़ा है?

Correct Answer:
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प्रभाव:
‘चंद्रलोक में प्रथम बार’ के उठने से, मानव ने पृथ्वी से बाहर जाकर अंतरिक्ष की ओर कदम बढ़ाया। यह वैज्ञानिक और मानविक दृष्टि से एक ऐतिहासिक घटना थी। इसने मानवता की क्षमताओं को एक नई दिशा दी। इसके माध्यम से मानव ने यह प्रमाणित किया कि वह केवल पृथ्वी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह अपनी सीमाओं को पार करके ब्रह्मांड के अन्य हिस्सों में भी पहुंच सकता है।

इसकी परिणति यह हुई कि अब मानव के विचारों में बदलाव आया, वह अब नई ऊँचाइयों और संभावनाओं के बारे में सोचने लगा। Quick Tip: प्रभाव की व्याख्या करते समय उस घटना के सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी पक्षों को शामिल करें।


Question 32:

रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।

Correct Answer:
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व्याख्या:
‘रेखांकित अंश’ में कवि ने विश्व इतिहास के उस महत्वपूर्ण क्षण का चित्रण किया है जब मानव ने चंद्रमा की ओर कदम बढ़ाया और उसे अपने प्रभाव से जीता। कवि का उद्देश्य यह है कि इस प्रकार के परिवर्तन, जो विज्ञान, सभ्यता और समाज के दृष्टिकोण से क्रांतिकारी होते हैं, हमेशा मनुष्य के द्वारा किए गए प्रयासों का परिणाम होते हैं।

यह अंश मानव के विचारों और प्रयासों के बदलाव को उजागर करता है, जो अब केवल पृथ्वी तक सीमित नहीं हैं। Quick Tip: रेखांकित अंश की व्याख्या करते समय कविता के गहरे अर्थ और उसके संदेश को पहचानना जरूरी है।


Question 33:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संतुलित हिंदी में अनुबाद कीजिए।

संस्कृत गद्यांश:
एवं नगरी विभिन्नधर्माणां संगमस्थली। महान्तं द्रुतं, तीव्रं, पार्वणं, श्रुत्रांजं, कविर्म्, गोव्यापि तुलसीकं, अन्ये च बह्व: महात्मान: अनन्तं स्वायं विचारातं प्रासार्यं। न केवलं दानं, साहितले, धर्मे, अफितु कला क्षेत्रेचि एवं नगरी विभिन्नां कलात्मा, शिल्पानां कृतले लोकानें विद्वानि।

Correct Answer:
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% हिंदी अनुवाद:
हिंदी अनुवाद:


यह नगर विभिन्न धर्मों की संगमस्थली है। यह शहर तीव्र, तेज और प्रसिद्ध है। यहां के कवि और गायक तुलसीक नामक स्थल पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। अन्य बड़े व्यक्ति और महान आत्माएं यहां एकत्रित होते हैं। नगर में न केवल धर्म का पालन किया जाता है, बल्कि कला, शिल्प और साहित्य का भी बहुत योगदान है। इस नगर में विद्वान लोग रहते हैं जो कलात्मक और साहित्यिक कार्यों में माहिर हैं। Quick Tip: संतुलित अनुवाद करते समय शब्दों के सही अर्थ को ध्यान में रखते हुए भावनाओं और संदर्भों को समझकर अनुवाद करें।


Question 34:

निम्नलिखित संस्कृत गद्यांश का संतुलित हिंदी में अनुबाद कीजिए।

संस्कृत गद्यांश:

पुरस्तात्: यथैकेन वीरं वीरं प्रति।

अलक्ष्यं: (पुत्रे वीरभावेन हर्षित:) साधु वीर!

साधु! तृणं वीरं अति! ध्वं: त्वं

धर्म्यां ते मातृभूमि: (सनातनं अधिष्ठितं) सेनापते!

सेनापति: - सप्रात्।

अलक्ष्यं: - वीरपुराणं बच्छानि मोक्ष।

सेनापति: - यत्समाप्तं आजापति।

Correct Answer:
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% हिंदी अनुवाद:
हिंदी अनुवाद:


सैन्य के सामने वीरता और साहस से भरे हुए योद्धा को देखा जाता है। जो अपने साहस से सबसे कठिन युद्धों में भी विजय प्राप्त करता है। वह न केवल खुद को महान दिखाता है, बल्कि अपने मातृभूमि की सेवा में भी अपने कर्तव्यों को निभाता है।

सैन्य प्रमुख कहते हैं, “हमारा प्रयास सफल हो चुका है। हमारे महान पुराणों के अनुसार, हमें विजय प्राप्त हुई है। हम उस विजय का सम्मान करते हैं, जो हमारे परिश्रम का परिणाम है।”

यह गद्यांश वीरता, कर्म, और विजय की भावना का चित्रण करता है, जिसमें एक सेनापति और उसके नेतृत्व के तहत सैन्य की संघर्ष यात्रा को सम्मानित किया गया है। Quick Tip: संतुलित अनुवाद करते समय संस्कृत के शब्दों और वाक्य रचनाओं को सही रूप में परिवर्तित करें, ताकि मूल भावना का सही प्रतिनिधित्व हो।


Question 35:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों का संस्कृत सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए:


सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥

Correct Answer:
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अनुवाद:
सभी सुखी हों, सभी निरोगी हों। सभी शुभ देखें, कोई भी दुखी न हो।

यह श्लोक मानवता की समृद्धि और कल्याण की कामना करता है। इसमें कहा गया है कि सभी व्यक्ति शांति, सुख और स्वास्थ्य का अनुभव करें और कोई भी दुख या कष्ट न पाए। यह श्लोक एक सार्वभौमिक शांति का संदेश देता है, जिसमें सबकी भलाई और कल्याण की इच्छा की जाती है। Quick Tip: इस श्लोक का उद्देश्य विश्व शांति और मानवता के कल्याण के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता को दर्शाना है।


Question 36:

निम्नलिखित संस्कृत श्लोकों का संस्कृत सहित हिंदी में अनुवाद कीजिए:


यथासोऽकेन मृतेण्डेन सर्वं मुमुक्षं विस्फारितं यथा द्वारारम्भं
विकारो नामधेयं मृत्तिकेवेव सत्यं।

Correct Answer:
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अनुवाद:
जैसे एक मृतक के शरीर से सभी इच्छाएँ और क्रियाएँ समाप्त हो जाती हैं, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति के जीवन का असली उद्देश्य सत्य की प्राप्ति है। सभी प्रकार की इच्छाएँ और विकार केवल मृत्तिका के रूप में सतही होते हैं, परंतु सत्य एक ऐसी वस्तु है जो स्थायी है और जो सच्चाई के रूप में प्रकट होती है।

यह श्लोक जीवन की वास्तविकता और आत्म-साक्षात्कार की बात करता है, जिसमें मनुष्य को शारीरिक और भौतिक इच्छाओं से ऊपर उठकर सत्य की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा दी जाती है। Quick Tip: शरीर और भौतिक जगत से परे जाकर सच्चे सत्य को जानने और समझने की आवश्यकता को व्यक्त करने वाला यह श्लोक जीवन के उद्देश्यों को सशक्त बनाता है।


Question 37:

‘मुक्तिदूत’ खंडकाव्य के किसी एक सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।

Correct Answer:
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कथावस्तु संक्षेप — मुक्तिदूत:
‘मुक्तिदूत’ खंडकाव्य का एक महत्वपूर्ण सर्ग स्वर्गारोहण से जुड़ा हुआ है। इस सर्ग में मुख्य पात्र ‘मुक्तिदूत’ को अपने मिशन की प्राप्ति के लिए यमराज के पास से अनुमति मिलती है। मुक्तिदूत की मुख्य भूमिका शांति, प्रेम और मानवीय मूल्यों का प्रचार करना है।
जब मुक्तिदूत पृथ्वी पर उतरता है, वह धर्म और मानवता के मूल्यों की जागरूकता फैलाने का कार्य करता है। इस सर्ग में उसने महान व्यक्तित्वों के संघर्षों, उनके आंतरिक द्वंद्व और उनके आदर्शों की व्याख्या की है।

स्वर्ग से पृथ्वी तक की यात्रा के दौरान वह उन नकारात्मक शक्तियों को भी पराजित करता है, जो समाज में व्याप्त थीं। इसके साथ ही, वह अपने दर्शकों को सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है। इस सर्ग के अंत में मुक्तिदूत का संदेश समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारियों को समझने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

निष्कर्ष:
यह सर्ग न केवल धार्मिक और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य करता है, बल्कि यह यह भी दर्शाता है कि सच्चे मार्गदर्शक वही हैं जो न केवल व्यक्तित्व में परिवर्तन लाने के लिए, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित करते हैं। Quick Tip: कथावस्तु लिखते समय पात्रों के संघर्ष, उद्देश्य और संदेश को प्रमुख रूप से उजागर करें।


Question 38:

‘मुक्तिदूत’ खंडकाव्य, के नायक महात्मा गाँधीजी की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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महात्मा गांधीजी की चारित्रिक विशेषताएँ — मुक्तिदूत:
‘मुक्तिदूत’ खंडकाव्य में महात्मा गाँधीजी का चरित्र न केवल उनके स्वतंत्रता संग्राम के संघर्ष का प्रतीक है, बल्कि वह मानवता, सत्य, अहिंसा और प्रेम के प्रतीक भी हैं। उनका जीवन विशेष रूप से सत्य की रक्षा, अहिंसा के पालन और समाज के निम्न वर्गों के लिए कार्य करने के कारण अद्वितीय है।

महात्मा गांधीजी की प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ:

सत्यनिष्ठा: महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सत्य को सर्वोच्च माना। उनका आदर्श था कि सत्य के मार्ग पर चलते हुए ही किसी भी कार्य को निष्कलंक तरीके से किया जा सकता है।
अहिंसा: गांधीजी ने अपनी जीवनशैली में अहिंसा को एक अमूल्य नीति माना। उनका यह विश्वास था कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि हर समस्या का समाधान शांति और प्रेम से निकाला जाना चाहिए।
समाज सेवा: महात्मा गांधी ने समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम किया। उन्होंने दलितों को ‘हरिजन’ का सम्मानजनक नाम दिया और समाज में व्याप्त जातिवाद और असमानता के खिलाफ संघर्ष किया।
साधन और संकल्प: गांधीजी के जीवन में सादगी और त्याग की मिसाल है। उनका विश्वास था कि साधन (संसाधन) के माध्यम से ही लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। वे हमेशा अपनी संकल्प शक्ति से कार्य करते थे।
नेतृत्व क्षमता: गांधीजी का नेतृत्व उनके अद्वितीय विचारों और क्रियाओं से प्रेरित था। उन्होंने बिना किसी भेदभाव के सबको एकजुट किया और अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया।


निष्कर्ष:
महात्मा गांधी का जीवन केवल भारत के स्वतंत्रता संग्राम से संबंधित नहीं था, बल्कि यह मानवता के लिए उनके द्वारा दिखाए गए आदर्शों और विचारों का प्रतीक बन गया। उनकी चारित्रिक विशेषताएँ न केवल एक राष्ट्र के निर्माण में सहायक रही, बल्कि उन्होंने पूरी दुनिया को अहिंसा और प्रेम का पाठ पढ़ाया। Quick Tip: चरित्र-चित्रण करते समय व्यक्ति के जीवन की प्रमुख घटनाओं और उनकी विशेषताओं का विस्तार से उल्लेख करें, ताकि उसके व्यक्तित्व का सही चित्रण हो सके।


Question 39:

‘जोति जवाहर’ खण्डकाव्य की कथावस्तु अपने शब्दों में लिखिए।

Correct Answer:
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कथावस्तु:
‘जोति जवाहर’ खण्डकाव्य में भारतीय समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक उत्थान की दिशा में एक संघर्ष की कथा प्रस्तुत की गई है। यह काव्य, जवाहरलाल नेहरू के जीवन से प्रेरित होकर लिखा गया है, जिसमें उनका उद्देश्य और भारत के लिए उनका योगदान दिखाई देता है।

काव्य की मुख्य कथावस्तु यह है कि जवाहरलाल नेहरू ने भारतीय समाज में जागरूकता फैलाने और स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा देने का कार्य किया। उनका जीवन संघर्ष और त्याग से भरा हुआ था, जो उनके व्यक्तित्व और कार्यों में झलकता है। Quick Tip: कथावस्तु लिखते समय काव्य की प्रमुख घटनाओं, पात्रों और उनके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।


Question 40:

‘जोति जवाहर’ खण्डकाव्य के प्रमुख पात्र की विशेषताएँ लिखिए।

Correct Answer:
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प्रमुख पात्र: जवाहरलाल नेहरू
‘जोति जवाहर’ खण्डकाव्य में मुख्य पात्र जवाहरलाल नेहरू हैं। उनके व्यक्तित्व की विशेषताएँ इस प्रकार हैं:


देशभक्ति: जवाहरलाल नेहरू का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अर्पित था। उन्होंने भारतीय जनता को स्वतंत्रता की दिशा में जागरूक किया।
समाजसेवा: वे भारतीय समाज में सुधार और विकास के लिए प्रतिबद्ध थे। उनका ध्यान हमेशा भारतीय गरीबों, महिलाओं और शोषित वर्ग के उत्थान की दिशा में था।
विज्ञान और शिक्षा के प्रति प्रेम: उन्होंने भारतीय समाज में शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में सुधार की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनका उद्देश्य था कि भारत को एक विकसित और प्रौद्योगिकियों से सुसज्जित राष्ट्र बनाया जाए।
लोकप्रियता और नेतृत्व क्षमता: नेहरू जी का व्यक्तित्व आकर्षक था और उन्हें हर वर्ग के लोगों द्वारा प्यार और सम्मान प्राप्त था। उनका नेतृत्व भारतीय राजनीति के सभी पहलुओं में प्रभावशाली था।


इस प्रकार जवाहरलाल नेहरू का जीवन देश की स्वतंत्रता और समाज के उत्थान का एक अमर उदाहरण है। Quick Tip: नेहरू जी की विशेषताओं को लिखते समय उनके समर्पण, संघर्ष और उनके प्रति लोगों के विश्वास को प्रमुखता दें।


Question 41:

‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य के आधार पर ‘महाराणा प्रताप’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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महाराणा प्रताप का चरित्र-चित्रण:
‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य में महाराणा प्रताप की वीरता, संघर्ष, और बलिदान का चित्रण किया गया है। वह एक महान योद्धा और शासक थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिए अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। उनका जीवन देशप्रेम, साहस, और निष्ठा का प्रतीक था।

काव्य में महाराणा प्रताप को एक ऐसे शासक के रूप में चित्रित किया गया है जो कभी भी अपनी मातृभूमि और सम्मान के प्रति समझौता नहीं करता। उन्होंने अकबर के सामने झुकने के बजाय संघर्ष करना पसंद किया। हल्दीघाटी की लड़ाई में उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता का अद्भुत प्रदर्शन हुआ।

उनकी वीरता के अलावा, उनकी आदर्शवादी नीति और शाही दायित्वों का पालन करने का तरीका भी उल्लेखनीय था। काव्य में यह भी दर्शाया गया है कि वह न केवल एक युद्ध नेता थे, बल्कि उन्होंने अपने राज्य की जनता के लिए न्याय और कल्याण के लिए भी कार्य किया। Quick Tip: महान शासकों के चरित्र पर निबंध लिखते समय उनके संघर्ष, नेतृत्व, और सिद्धांतों को प्रमुखता से रखें।


Question 42:

‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए।

Correct Answer:
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‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य का सारांश:
‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य में महाराणा प्रताप के जीवन और उनकी वीरता का बखान किया गया है। इस काव्य में कुल आठ सर्ग होते हैं, जिनमें से प्रत्येक में महाराणा प्रताप की संघर्ष गाथाएँ और उनकी राजनीति के विभिन्न पहलुओं का चित्रण किया गया है।

सर्ग 1 का सारांश:
पहले सर्ग में महाराणा प्रताप की जन्मकथा और उनके बचपन के समय का उल्लेख किया गया है। यह सर्ग प्रताप के साहस और वीरता के पहले संकेतों को दर्शाता है, जब वे युद्धभूमि में अपने पिता के साथ जाते हैं और वीरता का परिचय देते हैं।

सर्ग 2 का सारांश:
दूसरे सर्ग में उनकी संघर्ष भावना और परिश्रम को दिखाया गया है। अकबर के साम्राज्य से युद्ध के लिए उन्होंने एक ऐसे राजकुमार की भूमिका निभाई, जो केवल अपने साम्राज्य की रक्षा नहीं करता, बल्कि अपने राज्य के नागरिकों के सम्मान की भी रक्षा करता है।

निष्कर्ष:
‘मेवाड़ मुकुट’ खंडकाव्य का प्रत्येक सर्ग महाराणा प्रताप की वीरता और उनके संघर्षों का विस्तार से वर्णन करता है। यह काव्य न केवल एक शासक की गाथा है, बल्कि यह हमें प्रेरणा भी देता है कि हमें अपने कर्तव्यों और देशप्रेम में कभी समझौता नहीं करना चाहिए। Quick Tip: काव्य के सारांश में मुख्य पात्र की गुणात्मक विशेषताएँ और काव्य के उद्देश्य को स्पष्ट रूप से उजागर करें।


Question 43:

‘अप्रूजा’ खंडकाव्य का कथानक संक्षेप में लिखिए।

Correct Answer:
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कथानक संक्षेप — ‘अप्रूजा’ खंडकाव्य:
‘अप्रूजा’ खंडकाव्य में मुख्य रूप से एक आत्मा का संघर्ष और उसके द्वारा मानवता को मार्गदर्शन देने का विवरण है। यह खंडकाव्य विशेष रूप से आंतरिक संघर्ष और आत्मा की यात्रा पर आधारित है।

काव्य में मुख्य पात्र है ‘अप्रूजा’ जो एक आत्मा है। वह स्वर्गलोक से पृथ्वी पर आता है, और उसका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी पर धर्म, शांति और करुणा का प्रचार करना है। वह अपने साथ कुछ संदेश लेकर आता है, जिसमें वह लोगों को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है।

काव्य में यह आत्मा यमराज से अनुमति लेकर पृथ्वी पर आती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने की कोशिश करती है। वह अपने संदेश से समाज में परिवर्तन लाने का कार्य करती है। इस खंडकाव्य के अंत में यह आत्मा समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी और दायित्व का अहसास कराती है।

निष्कर्ष:
‘अप्रूजा’ खंडकाव्य का उद्देश्य समाज को जागरूक करना और उसे सुधारने का प्रयास करना है। यह काव्य केवल आत्मा की यात्रा की कहानी नहीं, बल्कि जीवन के सत्य, धर्म और शांति के संदेश का माध्यम बनता है। Quick Tip: कथानक संक्षेप लिखते समय पात्रों के उद्देश्य और उनके द्वारा फैलाए गए संदेश को अवश्य उजागर करें।


Question 44:

‘अप्रूजा’ खंडकाव्य के आधार पर ‘श्रीकृष्ण’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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श्रीकृष्ण का चरित्र-चित्रण — ‘अप्रूजा’ खंडकाव्य:
‘अप्रूजा’ खंडकाव्य में श्रीकृष्ण का चित्रण एक आदर्श, धर्मात्मा और निर्बंध नायक के रूप में किया गया है। उनका चरित्र न केवल भक्ति और धार्मिकता का प्रतीक है, बल्कि वह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में परमेश्वर के रूप में कार्य करते हैं।

श्रीकृष्ण की प्रमुख विशेषताएँ:

धर्म के रक्षक: श्रीकृष्ण ने हमेशा धर्म की रक्षा के लिए कार्य किया। उन्होंने गीता के माध्यम से अर्जुन को कर्मयोग और धर्म के मार्ग पर चलने का मार्गदर्शन दिया।
सर्वज्ञ: श्रीकृष्ण का ज्ञान केवल भूतकाल और वर्तमान तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने भविष्य की घटनाओं का भी वर्णन किया।
करुणा और दया: श्रीकृष्ण ने हमेशा समाज के दुखियों, निर्धनों और शोषितों की मदद की। उन्होंने गोकुलवासियों और द्रविड़ों की समस्याओं का समाधान किया।
रचनात्मक और कूटनीतिज्ञ: श्रीकृष्ण केवल एक महान योद्धा ही नहीं, बल्कि एक कुशल कूटनीतिज्ञ और नीति निर्माता भी थे।


निष्कर्ष:
‘अप्रूजा’ खंडकाव्य में श्रीकृष्ण का चरित्र एक प्रेरणास्त्रोत है। उनका जीवन, उनकी नीतियाँ और उनके कार्य आज भी मानवता के लिए आदर्श बने हुए हैं। उनकी भक्ति, कर्मयोग और समाज के प्रति उनकी निष्ठा हमें जीवन में धर्म और सत्य के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती है। Quick Tip: चरित्र-चित्रण करते समय केवल विशेषताओं का उल्लेख न करें, बल्कि उनके जीवन के महत्वपूर्ण क्षणों और कार्यों का विवरण दें।


Question 45:

‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग का सारांश लिखिए।

Correct Answer:
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सारांश:
‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग में सुभाष चंद्र बोस के जीवन के संघर्ष, उनके विचार, और उनके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में योगदान का चित्रण किया गया है।

इस सर्ग में सुभाष चंद्र बोस के महान कार्यों को दर्शाया गया है, जिसमें उन्होंने न केवल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया, बल्कि भारतीय जनता को एक नई दिशा भी दी।
द्वितीय सर्ग में सुभाष चंद्र बोस की प्रेरक छवि और उनके राष्ट्रप्रेम के विचारों को प्रस्तुत किया गया है, जो उनके समर्पण और बलिदान को प्रदर्शित करते हैं। Quick Tip: सारांश लिखते समय उन घटनाओं को शामिल करें, जो काव्य के मुख्य उद्देश्य और विचारों को व्यक्त करती हैं।


Question 46:

‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के आधार पर सुभाषचंद्र बोस का चित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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चित्र-चित्रण:
‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य में सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्व और उनके कार्यों का गहरा चित्रण किया गया है।

सुभाष चंद्र बोस की विशेषता थी उनका अदम्य साहस, निडरता और अपने देश के प्रति निष्ठा। वे एक महान नेता थे जिनके जीवन में त्याग और बलिदान की भावना थी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को न केवल एक नया दृष्टिकोण दिया, बल्कि उसे और अधिक निर्णायक दिशा दी।

सुभाष चंद्र बोस को हमेशा भारतीय जनता ने एक प्रेरणा के रूप में देखा। उनके नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) का गठन हुआ, जिससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई शक्ति मिली। वे भारतीय राजनीति के एक दृढ़ नायक थे। Quick Tip: चित्र-चित्रण करते समय व्यक्ति की मुख्य विशेषताओं और उसके कार्यों को गहराई से समझकर उसे प्रस्तुत करें।


Question 47:

‘कर्ण’ खंडकाव्य के आधार पर कर्ण का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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कर्ण का चरित्र-चित्रण:
‘कर्ण’ खंडकाव्य में कर्ण का चरित्र अत्यंत गहरे और जटिल रूप में प्रस्तुत किया गया है। कर्ण, महाभारत के महान और बहादुर पात्रों में से एक हैं। उनका जन्म एक कुपित और अव्यवस्थित परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी वीरता और बलिदान से अपने जीवन को गौरवान्वित किया।

कर्ण का चरित्र वीरता, निष्ठा और संघर्ष का प्रतीक था। उन्होंने हमेशा अपने कर्तव्यों का पालन किया, चाहे वह उनके व्यक्तिगत जीवन में कितना भी कष्ट भरा क्यों न हो। कर्ण के पास विशाल शारीरिक बल, अद्वितीय धनुष विद्या, और युद्ध कला थी, जो उन्हें युद्ध भूमि का महान योद्धा बनाती थी।

उनका दिल बहुत बड़ा था, लेकिन सामाजिक अवहेलना और अपमान ने उन्हें गहरे मानसिक आघात पहुंचाए। उन्होंने हमेशा अपने सम्मान और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया। कर्ण की सबसे बड़ी विशेषता उनकी दयालुता थी। उनका व्यक्तित्व वीरता और करुणा का अनूठा मिश्रण था।

कर्ण ने अपनी पूरी ज़िंदगी दीन-हीन स्थिति में रहकर समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाया। उन्होंने अपने जीवन में कई संघर्ष किए, और अंततः युद्ध भूमि में अपनी मृत्यु का सामना किया। कर्ण के चरित्र में साहस, बलिदान, और बल की एक अलग ही चमक देखने को मिलती है। Quick Tip: कर्ण के चरित्र को लिखते समय, उनके संघर्ष, बलिदान और अद्वितीय वीरता को प्रमुखता से उजागर करें।


Question 48:

‘कर्ण’ खंडकाव्य के आधार पर कुमति और कर्ण के वार्तालाप का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

Correct Answer:
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कुमति और कर्ण के वार्तालाप का वर्णन:
‘कर्ण’ खंडकाव्य में कुमति और कर्ण के बीच एक महत्वपूर्ण वार्तालाप है, जो कर्ण के संघर्ष और उनकी आंतरिक स्थिति को उजागर करता है। यह वार्तालाप कर्ण के जीवन के एक निर्णायक मोड़ को दिखाता है, जिसमें कर्ण अपने समाज, अपने अस्तित्व, और अपनी पहचान पर विचार करता है।

वार्तालाप में कुमति, कर्ण से कहती है कि वह अपने जीवन में इतने संघर्षों और कष्टों के बावजूद क्यों लड़ रहा है? वह कर्ण को यह बताती है कि समाज ने उसे कभी स्वीकार नहीं किया और वह हमेशा ही अपमानित होता रहा। कुमति कर्ण से यह भी पूछती है कि उसने कभी अपने कष्टों से मुक्ति पाने के बारे में क्यों नहीं सोचा।

कर्ण इसका उत्तर देते हुए कहते हैं कि वह अपने स्वाभिमान, अपने धर्म, और अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान हैं। कर्ण का यह कहना है कि उसे अपने जीवन में जो भी कठिनाइयाँ आईं, वह उनका सामना करता रहेगा, क्योंकि यह उसकी नियति है।

इस वार्तालाप से कर्ण का आंतरिक संघर्ष और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं का खुलासा होता है। वह अपने संघर्षों को भाग्य और कर्तव्य की तरह स्वीकार करता है, न कि किसी परित्यक्त जीवन के रूप में। यह वार्तालाप कर्ण की मानसिक स्थिति और उसकी तड़प को दर्शाता है, साथ ही उसकी निरंतर संघर्षशील प्रवृत्ति को भी। Quick Tip: कुमति और कर्ण के वार्तालाप को लिखते समय उनके मानसिक संघर्ष, संवाद की गहराई और कर्ण की निरंतर संघर्षशील प्रवृत्ति को स्पष्ट रूप से व्यक्त करें।


Question 49:

‘कर्मवीर भरत’ खंडकाव्य के पंचम सर्ग ‘वन गमन’ की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।

Correct Answer:
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कथावस्तु संक्षेप — ‘वन गमन’ सर्ग:
‘कर्मवीर भरत’ खंडकाव्य के पंचम सर्ग ‘वन गमन’ में भरत के वन जाने की घटना का अत्यंत भावनात्मक और गहन चित्रण किया गया है। इस सर्ग में भरत के राज्याभिषेक के बाद, राम के वनवास के आदेश के कारण उनके भीतर का संघर्ष और दुख प्रमुख विषय है।

राम के वनवास के बाद भरत अयोध्या के सिंहासन पर बैठने से इंकार कर देते हैं। वे राम की खड़ाऊँ को लेकर वन जाते हैं, ताकि राम के बिना अयोध्या का शासन करना उन्हें अपने कर्तव्य का उल्लंघन लगे। इस सर्ग में भरत के महान त्याग, धर्मनिष्ठा और कर्तव्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का चित्रण किया गया है।

भरत के वन गमन के बाद उनके घरवाले और अन्य लोग अत्यंत दुखी हो जाते हैं, क्योंकि वे राम के बिना अपने जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। भरत का वन गमन न केवल उनके कर्तव्य और धर्म के प्रति अडिग निष्ठा को दर्शाता है, बल्कि यह सर्ग उनके आत्म-त्याग और समाज के प्रति उनके आदर्शों को भी उजागर करता है।

निष्कर्ष:
यह सर्ग भरत के त्याग, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को प्रस्तुत करता है, जो भारतीय आदर्शों का एक उदाहरण है। भरत का वन गमन केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं था, बल्कि यह उनके धर्म और कर्तव्य के प्रति गहरी निष्ठा का प्रतीक था। Quick Tip: कथावस्तु लिखते समय केवल घटनाओं का विवरण न दें, पात्रों के मनोविज्ञान और उनके संघर्ष को भी स्पष्ट करें।


Question 50:

‘कर्मवीर भरत’ खंडकाव्य के आधार पर ‘भरत’ का चरित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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भरत का चरित्र-चित्रण — ‘कर्मवीर भरत’ खंडकाव्य:
‘कर्मवीर भरत’ खंडकाव्य में भरत का चरित्र आदर्श नायक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वे एक सिद्धांतवादी, धर्मनिष्ठ और कर्तव्यपरायण व्यक्ति हैं। उनके चरित्र में त्याग, निष्ठा और सच्चाई का आदर्श छिपा हुआ है।

मुख्य विशेषताएँ:

धर्मनिष्ठ और कर्तव्यपरायण: भरत ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि माना और राज्य के शासन को ठुकरा दिया। उन्होंने राम के बिना अयोध्या का राज्य नहीं किया और उनके बिना जीवन जीने को व्यर्थ समझा।
त्याग और समर्पण: भरत ने स्वयं को राम के आदर्शों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए समर्पित कर दिया। उनका त्याग और शांति का मार्ग भारतीय समाज के आदर्शों का प्रतीक है।
परिवार और समाज के प्रति निष्ठा: भरत ने परिवार की परंपराओं और अपने समाज के प्रति निष्ठा को सर्वोच्च माना। वे अपने भाइयों और माता-पिता के लिए प्रेरणास्त्रोत बने।
प्रेरणास्त्रोत: भरत का जीवन हमें यह शिक्षा देता है कि कर्तव्य और धर्म का पालन करना चाहिए, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।


निष्कर्ष:
भरत का चरित्र भारतीय समाज के आदर्शों का प्रतीक है। उनके जीवन में त्याग, कर्तव्य और धर्म के प्रति निष्ठा सबसे महत्वपूर्ण रही। उनका चरित्र न केवल भारतीय साहित्य का अमूल्य धरोहर है, बल्कि यह हमें समाज, परिवार और राष्ट्र के प्रति हमारे कर्तव्यों को समझने और निभाने की प्रेरणा देता है। Quick Tip: चरित्र-चित्रण करते समय पात्र के कार्य, विचार और उनके जीवन के आदर्शों का विस्तार से उल्लेख करें।


Question 51:

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के नायक ‘चन्द्रशेखर आज़ाद’ का चित्र-चित्रण कीजिए।

Correct Answer:
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चित्र-चित्रण:
‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के नायक चन्द्रशेखर आज़ाद हैं। उनका चित्रण एक निर्भीक और निडर युवा नेता के रूप में किया गया है। उनका जीवन भारत के स्वतंत्रता संग्राम के लिए बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है।

चन्द्रशेखर आज़ाद का व्यक्तित्व साहस और दृढ़ निश्चय से परिपूर्ण था। उनका आदर्श और कर्तव्य के प्रति अडिग निष्ठा उन्हें एक महान स्वतंत्रता सेनानी बनाती है। वे हमेशा अपने देश की स्वतंत्रता के लिए तत्पर रहते थे और उन्हें यह मान्यता प्राप्त थी कि केवल स्वतंत्रता ही भारतीय राष्ट्र के गौरव को वापस ला सकती है।

उनका जीवन समर्पण, बलिदान और आत्मविश्वास का प्रतीक था। वह एक महान नेता थे, जिन्होंने अपने जीवन में कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। Quick Tip: चन्द्रशेखर आज़ाद का चित्रण करते समय उनके आत्म-बलिदान और दृढ़ निश्चय को प्रमुखता दें।


Question 52:

‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए।

Correct Answer:
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सारांश:
‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के पहले सर्ग में स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक चन्द्रशेखर आज़ाद के जीवन की विभिन्न घटनाओं और उनके संघर्षों का चित्रण किया गया है। इस सर्ग में चन्द्रशेखर आज़ाद की प्रेरणादायक कहानी को उजागर किया गया है, जो अपने देश की स्वतंत्रता के लिए अपार संघर्ष करते रहे।

इस खण्डकाव्य में उनकी साहसिकता, निडरता और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को गहरे शब्दों में प्रस्तुत किया गया है। यह सर्ग हमें यह संदेश देता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए बलिदान और संघर्ष अपरिहार्य हैं। Quick Tip: सारांश लिखते समय काव्य के प्रमुख घटनाओं और पात्रों के योगदान को मुख्य रूप से शामिल करें।


Question 53:

‘तुमुल’ खंडकाव्य के आधार पर ‘मेघनाद’ की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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मेघनाद की चारित्रिक विशेषताएँ:
‘तुमुल’ खंडकाव्य में मेघनाद को एक वीर, बलशाली और कर्तव्यनिष्ठ योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। वह राक्षसों के प्रमुख राक्षसों में से एक थे और उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली था।

मेघनाद की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
1. वीरता: मेघनाद ने महाभारत के युद्ध में अपनी वीरता का परिचय दिया था। वह अपने शौर्य के लिए प्रसिद्ध थे।
2. कुशल रणनीतिकार: मेघनाद एक कुशल युद्ध रणनीतिकार थे, और उन्होंने युद्ध में अपने कौशल का भरपूर उपयोग किया।
3. धार्मिक निष्ठा: वह अपनी पूजा और धार्मिक कार्यों के प्रति पूरी निष्ठा रखते थे।
4. वचनबद्धता: मेघनाद अपने कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से समर्पित था और अपने वचनों पर दृढ़ विश्वास रखता था।

इन गुणों के कारण मेघनाद का व्यक्तित्व बहुत ही प्रेरणादायक था। उसकी वीरता और निष्ठा ने उसे एक महान योद्धा बना दिया। Quick Tip: मेघनाद की विशेषताओं को वर्णित करते समय उनके युद्ध कौशल और उनके कर्तव्य के प्रति निष्ठा को विशेष रूप से उजागर करें।


Question 54:

‘तुमुल’ खंडकाव्य के किसी एक सर्ग का सारांश लिखिए।

Correct Answer:
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‘तुमुल’ खंडकाव्य का सारांश:
‘तुमुल’ खंडकाव्य में युद्ध और वीरता के चित्रण के माध्यम से काव्य में जो भव्यता और गहराई है, वह काव्य की एक प्रमुख विशेषता है। काव्य के हर सर्ग में प्रमुख पात्रों की निष्ठा, बलिदान और संघर्ष को दर्शाया गया है।

सर्ग 1 का सारांश:
पहले सर्ग में काव्य की शुरुआत युद्धभूमि के दृश्य से होती है। यहाँ पर कर्ण, अर्जुन, और मेघनाद के संघर्ष की गाथाएँ प्रमुख हैं। इस सर्ग में कर्ण के संघर्ष और उसकी वीरता को चित्रित किया गया है, जहाँ वह अपने दुश्मनों के सामने नतमस्तक नहीं होता और सच्चे नायक की तरह युद्ध करता है। इस सर्ग में कर्ण का चरित्र स्पष्ट रूप से उभरता है।

इस सर्ग के माध्यम से काव्य का पाठक युद्ध की महत्ता और उसकी जटिलता को महसूस करता है। प्रत्येक पात्र के संघर्ष को उनके व्यक्तित्व के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।

सर्ग 2 का सारांश:
दूसरे सर्ग में कर्ण के व्यक्तिगत संघर्ष और उसकी आंतरिक संवेदनाओं का चित्रण किया गया है। इस सर्ग में कर्ण अपने धर्म, कर्तव्य और दायित्वों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। यह सर्ग कर्ण की आदर्शवादी प्रवृत्तियों और उसके आंतरिक संकल्प को दिखाता है।

काव्य का यह सर्ग पाठक को संघर्ष, बलिदान और विजय के संदर्भ में गहरे विचार करने पर मजबूर करता है। Quick Tip: सर्ग का सारांश लिखते समय, प्रमुख घटनाओं और पात्रों के कार्यों की व्याख्या करें और उनके उद्देश्य को स्पष्ट रूप से दर्शाएं।


Question 55:

जयशंकर प्रसाद का जीवन-परिचय लिखिए।

Correct Answer:
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जयशंकर प्रसाद (1889–1937):
जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के अद्वितीय कवि, नाटककार, और कहानीकार थे। उनका जन्म 30 जनवरी 1889 को बनारस में हुआ था। उनका जीवन संघर्षमय था, लेकिन उन्होंने अपनी लेखनी से साहित्य की दुनिया में अमूल्य योगदान दिया। वे हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि माने जाते हैं।

जयशंकर प्रसाद का रचनात्मक कार्य मुख्यतः कविताएँ, नाटक, कहानी और निबंधों में बंटा हुआ है। उनकी कविता में जीवन के विविध पहलुओं का गहरा और संवेदनशील चित्रण मिलता है। उनका काव्य जीवन के संघर्ष, दुख, और प्रेम की अनगिनत भावनाओं को उजागर करता है। उन्होंने ‘कंकाल’, ‘आधुनिकता’, और ‘झंकार’ जैसी प्रमुख रचनाएँ लिखीं। उनके नाटक, जैसे ‘चन्द्रगुप्त’, ‘स्कंदगुप्त’, और ‘मंगलनाथ’ ने नाटक लेखन की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उनकी लेखनी में भारतीय संस्कृति, इतिहास और समाज के प्रति गहरी समझ और आदर्श था। उनका निधन 15 जनवरी 1937 को हुआ, लेकिन उनके साहित्यिक योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। Quick Tip: जयशंकर प्रसाद पर निबंध लिखते समय उनके साहित्यिक योगदान और कवि के जीवन के संघर्षपूर्ण पहलुओं को विशेष रूप से उजागर करें।


Question 56:

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का जीवन-परिचय लिखिए।

Correct Answer:
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डॉ. राजेंद्र प्रसाद (1884–1963):
डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता और पहले राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 3 दिसंबर 1884 को बिहार के जीरादेई गाँव में हुआ था। वे एक अत्यंत प्रतिभाशाली और शिक्षित व्यक्ति थे, जिन्होंने अपनी शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए।

उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और बाद में दक्षिण अफ्रीका में महात्मा गांधी से प्रभावित होकर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उनकी विशेषता यह थी कि वे भारतीय राजनीति के पहले राष्ट्रपति रहे, जो लोकप्रियता और मानवता की मिसाल बने।

उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में उन्होंने भारत को लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और प्रौद्योगिकियों के मामले में प्रगति करने वाला देश बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए। उनकी आत्मनिर्भरता और निष्ठा भारतीय राजनीति के लिए प्रेरणास्त्रोत बनी। वे 1963 में निधन को प्राप्त हुए, लेकिन उनके द्वारा किए गए कार्य भारतीय राजनीति और समाज में अमिट योगदान के रूप में जीवित रहे। Quick Tip: डॉ. राजेंद्र प्रसाद पर निबंध लिखते समय उनके योगदान, संघर्ष और स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका को विशेष रूप से प्रस्तुत करें।


Question 57:

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जीवन-परिचय लिखिए।

Correct Answer:
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रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908–1974):
रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिंदी साहित्य के एक महान कवि, नाटककार और लेखक थे। उनका जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के सिताब दियारा गाँव में हुआ था। वे साहित्य के एक अद्भुत चितेरे थे और उनके द्वारा लिखी गई कविताएँ आज भी समाज को प्रेरणा देती हैं।

दिनकर का साहित्य मुख्यतः वीरता, साहस, और समाज की कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए जाना जाता है। उनकी कविताओं में भारतीय संस्कृति और इतिहास की महानता का गहरा चित्रण मिलता है। उनकी काव्य-रचनाएँ जैसे ‘रश्मिरथी’, ‘कुरुक्षेत्र’ और ‘सिंहासन हिलते हैं’ आज भी साहित्य प्रेमियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय हैं।

उनकी रचनाएँ भारतीय समाज और संस्कृति में व्याप्त अंधविश्वास, कुरीतियाँ, और अन्याय के खिलाफ थीं। उनका साहित्य राष्ट्र के प्रति समर्पण और आत्मसम्मान को जागरूक करता था। उन्हें 1959 में भारतीय साहित्य के क्षेत्र में सर्वोच्च सम्मान ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। उनका निधन 24 अप्रैल 1974 को हुआ, लेकिन उनकी रचनाएँ आज भी साहित्य जगत में अमूल्य धरोहर के रूप में जीवित हैं। Quick Tip: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ पर निबंध लिखते समय उनके साहित्य में समाज के प्रति जागरूकता और उनके रचनात्मक योगदान पर प्रकाश डालें।


Question 58:

तुलसीदास का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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जीवन-परिचय:
तुलसीदास का जन्म 1532 ई० में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के महान कवि और संत थे। तुलसीदास ने रामभक्ति को केंद्रित करते हुए अपने काव्य रचनाओं का सृजन किया। वे भक्तिकाव्य के अद्भुत रचनाकार थे और उनकी रचनाओं ने भारतीय समाज में भक्ति आंदोलन को एक नई दिशा दी।

साहित्यिक योगदान:
तुलसीदास का प्रमुख योगदान रामचरितमानस है। यह काव्य ग्रंथ भगवान श्रीराम के जीवन और उनके कार्यों का महाकाव्य है। इसके अतिरिक्त विनय पत्रिका, दोहन, और काव्यतंत्र भी उनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाएँ हैं।

प्रमुख रचना:
उनकी प्रमुख रचना रामचरितमानस है, जिसमें भगवान राम की कथा का अत्यंत सरल और मार्मिक रूप में वर्णन किया गया है। यह रचना आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। Quick Tip: तुलसीदास की रचनाएँ भक्ति और विश्वास की भावना को उभारने वाली हैं। रामचरितमानस का सरल और भावपूर्ण भाषा में लिखा गया काव्य आज भी लोगों के हृदय में जीवित है।


Question 59:

मैथिलीशरण गुप्त का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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जीवन-परिचय:
मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 3 अगस्त 1886 ई० में हुआ था। वे हिन्दी साहित्य के एक प्रमुख कवि थे और विशेष रूप से राष्ट्रप्रेम और भारतीय संस्कृति को अपने काव्य में स्थान दिया। उनका काव्य राष्ट्रवाद और भारतीय समाज की समस्याओं पर आधारित था।

साहित्यिक योगदान:
मैथिलीशरण गुप्त ने हिन्दी कविता को एक नया दिशा दी। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, समाज और राष्ट्रीयता का प्रभावपूर्ण चित्रण मिलता है। उनके काव्य में वीरता, प्रेम और श्रद्धा का समावेश था।

प्रमुख रचना:
उनकी प्रसिद्ध रचना ‘भारत-भारती’ है, जो राष्ट्रप्रेम और देशभक्ति को उजागर करती है। इसके अतिरिक्त, ‘साकेत’, ‘पंचवटी’, और ‘यशोधरा’ भी उनके काव्य संग्रह में महत्वपूर्ण हैं। Quick Tip: मैथिलीशरण गुप्त की कविता राष्ट्रप्रेम और समाज की एक नई चेतना को जागृत करने वाली है। उनकी रचनाएँ आज भी हमारे दिलों में जीवित हैं।


Question 60:

महादेवी वर्मा का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए।

Correct Answer:
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जीवन-परिचय:
महादेवी वर्मा का जन्म 26 मार्च 1907 को हुआ था। वे हिन्दी साहित्य की प्रमुख कवयित्रियाँ थीं और छायावाद की प्रमुख कवि मानी जाती हैं। उनके काव्य में संवेदना, भावुकता और स्त्री के दर्द का अद्भुत चित्रण मिलता है।

साहित्यिक योगदान:
महादेवी वर्मा की कविताओं में भारतीय समाज की समस्याओं, महिलाओं की पीड़ा और जीवन के संघर्षों का गहरा चित्रण मिलता है। उनके काव्य में न केवल स्त्री-भावनाओं का चित्रण हुआ है, बल्कि उन्होंने मानवता और जीवन के गहरे सत्य को भी उजागर किया।

प्रमुख रचना:
उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘नीहारिका’, ‘यामा’ और ‘दूसरी चिट्ठी’ शामिल हैं। इन रचनाओं में स्त्री की मानसिक स्थिति और समाज की पराधीनता पर गहन चिंतन किया गया है। Quick Tip: महादेवी वर्मा की कविताओं में समाज की जटिलताओं और महिलाओं के दर्द का सटीक चित्रण हुआ है। उनकी रचनाएँ आज भी हमें सशक्त बनाने की प्रेरणा देती हैं।


Question 61:

अपनी पाठ्यपुस्तक के संस्कृत खण्ड से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए, जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।

Correct Answer:
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श्लोक:
सत्यं शिवं सुन्दरं, शान्तं हृषीकेशं परब्रह्मा।
जगतां कारणं तं, नमामि परमेश्वरम्।


भावार्थ:
यह श्लोक भगवान विष्णु के बारे में है। इसमें भगवान को सत्य, सुंदरता, शांति, और सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में पूजा जाता है। यह श्लोक दर्शाता है कि भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं और उनके बिना कोई कार्य संभव नहीं है। इस श्लोक के माध्यम से भगवान की महिमा का गान किया जाता है। Quick Tip: संस्कृत श्लोक के चयन में शुद्धता और अर्थपूर्णता पर ध्यान दें। साथ ही, भावार्थ को सरल भाषा में समझाएं।


Question 62:

अपने मुहल्ले की नालियों की समस्या पर पत्र लिखिए।

Correct Answer:
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प्रिय मित्र,

नमस्कार। आशा है तुम स्वस्थ और प्रसन्नचित्त रहोगे। इस पत्र के माध्यम से मैं अपने मुहल्ले की नालियों की गंभीर समस्या के बारे में तुम्हें सूचित करना चाहता हूँ।

हमारे मुहल्ले की नालियाँ बहुत ही गंदी और जाम पड़ी हुई हैं। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी बढ़ जाती है। नालियों से उठती बदबू के कारण वहाँ का वातावरण असहनीय हो गया है। नालियाँ ओवरफ्लो होने से पानी सड़कों पर फैल जाता है, जिससे जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। इस स्थिति में न केवल स्वास्थ्य का खतरा बढ़ता है, बल्कि यातायात भी प्रभावित होता है।

मैंने सोचा कि इस समस्या का हल निकाला जाना चाहिए। हमें इस विषय में नगर निगम से शिकायत करनी चाहिए और उनकी तरफ से नालियों की सफाई और रखरखाव की व्यवस्था करनी चाहिए।

कृपया इस पत्र को गंभीरता से पढ़ें और यदि संभव हो तो तुम्हारी तरफ से भी इस मुद्दे पर स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करो।

सादर,
[तुम्हारा नाम] Quick Tip: पत्र लिखते समय समस्या का स्पष्ट और सटीक वर्णन करें। साथ ही समाधान के सुझाव भी दें।


Question 63:

चन्द्रशेखर: स्व गृहं किम् अवदत्?

Correct Answer:
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उत्तर:
चन्द्रशेखर ने कहा था कि उनका असली घर भारत है, जहाँ उनका मन, आत्मा और जीवन बसा हुआ है। उनका हर कार्य और बलिदान अपने देश के लिए था, और इस देश की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया। Quick Tip: चन्द्रशेखर आज़ाद के शब्दों से यह स्पष्ट होता है कि उनका जीवन और उनकी सोच भारत की स्वतंत्रता के लिए थी।


Question 64:

भारतीय संस्कृति: कबं संगठिता?

Correct Answer:
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उत्तर:
भारतीय संस्कृति हजारों वर्षों से संरक्षित और विकसित हो रही है। यह संस्कृति वेदों, उपनिषदों और धर्मशास्त्रों के माध्यम से जन्मी थी और समय के साथ इसे कई रूपों में विभाजित किया गया। भारतीय संस्कृति की एकता और विविधता का अद्भुत संगम है। Quick Tip: भारतीय संस्कृति की बात करते समय हमें उसकी ऐतिहासिक गहराई और विविधता को ध्यान में रखना चाहिए।


Question 65:

वातात् शृंगं किम् अस्ति?

Correct Answer:
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उत्तर:
वात के शृंग अर्थात् उसकी विशेषताएँ इस प्रकार हैं: वह बहुत तेज़ गति से बहता है, कभी शांत और कभी उग्र होता है, तथा यह वातावरण को शुद्ध करने का कार्य करता है। Quick Tip: वात के शृंग को समझते समय हमें उसकी गति और प्रभाव पर ध्यान देना चाहिए।


Question 66:

विश्वास: कें वधते?

Correct Answer:
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उत्तर:
विश्वास केवल एक मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। वह व्यक्ति जो विश्वास के साथ कार्य करता है, वह कठिनाइयों को पार करके अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। Quick Tip: विश्वास जीवन में सफलता प्राप्त करने की एक महत्वपूर्ण चाबी है, क्योंकि यह आत्मविश्वास और मनोबल को बढ़ाता है।


Question 67:

जलवायु परिवर्तन और मानव पर प्रभाव पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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जलवायु परिवर्तन और मानव पर प्रभाव:
जलवायु परिवर्तन एक अत्यंत गंभीर समस्या है, जो समूचे विश्व को प्रभावित कर रही है। यह मानवीय गतिविधियों, जैसे औद्योगिकीकरण, वनों की अंधाधुंध कटाई, और बढ़ती हुई जनसंख्या के कारण उत्पन्न हो रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण प्राकृतिक संसाधनों की कमी और जलवायु में अनियमितताएँ बढ़ रही हैं।

मानव पर प्रभाव:
जलवायु परिवर्तन के कारण मानव जीवन पर विभिन्न प्रकार के प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहे हैं। गर्मी के कारण ग्लोबल वार्मिंग का खतरा बढ़ रहा है, जिससे संतुलन की बिगड़ी परिस्थितियाँ और प्राकृतिक आपदाएँ जैसे सूखा, बाढ़, और तूफान बढ़ रहे हैं। इसके अलावा, जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि उत्पादन पर प्रतिकूल असर हो रहा है, जिससे भोजन की कमी और पानी का संकट बढ़ता जा रहा है।

समाधान:
इस समस्या का समाधान करने के लिए हमें पारिस्थितिकीय संतुलन को बनाए रखने, जलवायु अनुकूलन उपायों को अपनाने और वृक्षारोपण को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। इसके अलावा, प्रत्येक व्यक्ति को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए जागरूकता फैलानी चाहिए। Quick Tip: जलवायु परिवर्तन पर निबंध में, समस्या और उसके प्रभावों के अलावा समाधान भी महत्वपूर्ण रूप से शामिल करें।


Question 68:

विद्यार्थी जीवन पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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विद्यार्थी जीवन:
विद्यार्थी जीवन, जीवन का वह स्वर्णिम समय है जब इंसान अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण ज्ञान अर्जन के पथ पर अग्रसर होता है। इस जीवन में हर विद्यार्थी का मुख्य उद्देश्य अच्छी शिक्षा प्राप्त करना और अपनी व्यक्तिगत क्षमता को बढ़ाना होता है।

महत्व:
विद्यार्थी जीवन में अनुशासन और आत्म-निर्भरता की आदतें विकसित की जाती हैं। यह समय जीवन की नींव रखने का होता है, जब विद्यार्थी अपने कौशल, सामाजिक दायित्व और जीवन-मूल्यों को समझता है। विद्यार्थी जीवन में निरंतर मेहनत और संघर्ष की आवश्यकता होती है, जिससे व्यक्ति भविष्य में सफलता प्राप्त कर सकता है।

निष्कर्ष:
विद्यार्थी जीवन एक अमूल्य समय होता है, जो व्यक्ति के भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस दौरान सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से ही किसी विद्यार्थी को अपने जीवन में सफलता प्राप्त होती है। Quick Tip: विद्यार्थी जीवन पर निबंध में जीवन के इस चरण की महत्ता, अनुशासन और उद्देश्य को स्पष्ट रूप से वर्णित करें।


Question 69:

किसी एक त्योहार का वर्णन कीजिए।

Correct Answer:
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दिवाली का वर्णन:
दिवाली, भारतीय संस्कृति का प्रमुख त्योहार है, जिसे विशेष रूप से भारत में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने की याद में दीप जलाए जाते हैं।

दिवाली का पर्व घरों में स्वच्छता, सजावट, और पूजा का दिन होता है। इस दिन विशेष रूप से लक्ष्मी पूजा की जाती है, जिसमें धन, ऐश्वर्य और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। लोग घरों को दीपों और रंग-बिरंगी बत्तियों से सजाते हैं, मिठाईयाँ बनाते हैं और परिवार तथा दोस्तों के साथ खुशियाँ बाँटते हैं।

धार्मिक दृष्टिकोण से:
दिवाली के दिन लक्ष्मी देवी, धन और समृद्धि की देवी, की पूजा की जाती है। यह पर्व हमें धन की महत्वता के साथ-साथ आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा की ओर भी प्रेरित करता है।

निष्कर्ष:
दिवाली का पर्व हर भारतीय के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि लाने का प्रतीक है। यह पर्व हमारी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के साथ-साथ आपसी भाईचारे और प्रेम को बढ़ावा देता है। Quick Tip: त्योहारों पर निबंध लिखते समय उनके धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहलुओं को समाहित करें।


Question 70:

राष्ट्रप्रेम पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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राष्ट्रप्रेम:
राष्ट्रप्रेम, देश से गहरा प्रेम और स्नेह है, जो हर नागरिक के दिल में अपने राष्ट्र के प्रति सम्मान, समर्पण और कर्तव्य का भाव उत्पन्न करता है। यह केवल शब्दों में नहीं, बल्कि कार्यों में भी महसूस किया जाता है।

महत्व:
राष्ट्रप्रेम हमें अपने देश की संस्कृति, सभ्यता, और इतिहास को समझने और उसका सम्मान करने के लिए प्रेरित करता है। यह हमारे अंदर देश के प्रति कर्तव्यों की जिम्मेदारी का अहसास कराता है। राष्ट्रप्रेम के द्वारा हम देश की प्रगति के लिए अपना योगदान देते हैं।

निष्कर्ष:
राष्ट्रप्रेम के बिना समाज और देश की उन्नति संभव नहीं है। यह हमारे अंदर एकता, अखंडता और राष्ट्र के प्रति आत्मसमर्पण का भाव पैदा करता है, जिससे देश की शक्ति और समृद्धि में वृद्धि होती है। Quick Tip: राष्ट्रप्रेम पर निबंध लिखते समय देश के प्रति कर्तव्यों, प्रेम और बलिदान की भावना को प्रमुखता से रखें।


Question 71:

हमारे जीवन में विज्ञान का महत्व पर निबंध लिखिए।

Correct Answer:
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विज्ञान का महत्व:
विज्ञान, आधुनिक मानव जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह न केवल हमारे जीवन को सरल और सुविधाजनक बनाता है, बल्कि समाज में हर क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएँ पैदा करता है।

विज्ञान और तकनीकी विकास:
विज्ञान के कारण ही हम आज चिकित्सा, संचार, परिवहन, ऊर्जा, और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक प्रगति कर चुके हैं। उदाहरण के रूप में, अंतरिक्ष विज्ञान, इंटरनेट, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) ने हमारे जीवन को पूरी तरह से बदल दिया है।

विज्ञान और समाज:
विज्ञान ने न केवल मानव जीवन को सुखी और आरामदायक बनाया है, बल्कि समाज में भी समाज सुधार और नैतिक मूल्य को बढ़ावा दिया है। विज्ञान के द्वारा समाज में जागरूकता आई है, जैसे स्वास्थ्य, पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में।

निष्कर्ष:
विज्ञान हमारे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह न केवल हमारे व्यक्तिगत जीवन को बेहतर बनाता है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान करता है। Quick Tip: विज्ञान के महत्व पर निबंध लिखते समय इसके योगदान और समाज में सकारात्मक बदलावों पर ध्यान केंद्रित करें।